जैसलमेर जिला

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जैसलमेर का क्षेत्रफल  38401 किलोमीटर  है जो छेत्रफल की दृष्टि से राजस्थान का सबसे बड़ा जिला है यह है अंतरराष्ट्रीय सीमा के साथ भी सर्वाधिक लंबी सीमा बनाता है यह अंतरराष्ट्रीय सीमा भारत-पाकिस्तान की सीमा रेखा रेडक्लिफ के नाम से जानी जाती है जैसलमेर जिले में 4 तहसील है।  जैसलमेर जिले में पालीवाल ब्राह्मणों द्वारा जल स्रोत की खडीन पद्धति प्रसिद्ध है।                     संपादक करता लोकेश कुमार यादव शाहपुरा जयपुर

तथ्य[संपादित करें]

ज़िले का पिनकोड 345001, दूरभाष कोड 02992 और वाहन कोड RJ 15 है। सन् 2001 में साक्षरता दर 57.2% था।

विवरण[संपादित करें]

जैसलमेर राजस्थान के सुदूर पश्चिम में स्थित है और क्षेत्रफल की दृष्टि से राजस्थान का सबसे बड़ा जिला है। स्वतंत्रता से पुर्व यहां पर भाटी राजपुतों का राज्य था | इसकी स्थापना भाटी राजा जैसल ने 1178 ई. में की थी। जैसलमेर को "राजस्थान का अण्डमान" भी कहा जाता है। इस जिले में सबसे कम जनसंख्या निवास करती है। साथ ही साथ यहां का जनसंख्या घनत्व भी सबसे कम है। यहां प्रति वर्ग किमी में औसतन केवल 17 व्यक्ति ही निवास करते हैं। जैसलमेर को 'स्वर्ण नगरी' के नाम से भी जाना जाता है। जैसलमेर का सोनार का किला अपने स्थापत्य कला के कारण विश्व प्रसिद्ध है। इस किले के निर्माण में पीले पत्थरों का प्रयोग किया गया है। जब सुर्य की किरणें किले पर पड़ती है तो वह सोने के समान चमकता है , इसीलिये इसे सोनार के किले के नाम से जाता है। यहां भारत का सबसे बड़ा मरूस्‍थल थार का मरूस्‍थल स्थित है। यहां गर्मियों में गर्मी अधिक व सर्दी में ठंडी अधिक पड़ती है।

भाडली गाँव[संपादित करें]

भाडली जिला मुख्यालय से 110 किलोमीटर व बाड़मेर ज़िले की सीमा पर बसा गांव है। यहां पर प्रसिद्ध श्री करनी माता का मंदिर है, जहां हर साल मेला भरता है। यहां पर चमत्कारी बाबा श्री मोतीगिरी का मठ है, सांप डसने पर, जीवन दान के सम्बंध में श्री मोति गिरी के मठ में पूजन किया जाता है, यहां हर साल मेला भरता है, आस पास के गांवो से हर साल हजारो लोग आते है। गांव में माता रानी भटियाणी का मंदिर, नागणेच्या माताजी का मंदिर,संत जसा रामजी का मंदिर, खेतरपाल का मंदिर, हनुमान मंदिर ठाकुर जी का मंदिर, चमजी एवम रावतिंग डाडा का मंदिर है। भाडली गांव में मुख्यतः भाटी, राठौड़, चौहान, जैन , दर्जी, सुथार, पुष्करणा ब्राह्मण, मेगवाल, गर्ग, जिजनियाली, भाडली, देवड़ा, कुंडा, सिहडार और बईया है।

सिंचाई व कृषि[संपादित करें]

इंदिरा गांधी नहर परियोजना का अंतिम छोर भी यहां मोहनगढ़ उपतहसील में है। इस नहर से जैसलमेर में बड़े क्षैत्र में खेती की जाती है।नहरी क्षेत्र में नाचना, मोहनगढ़,सुथार मंत्री, २पी की एम चौराहा, रामगढ़ आदि कृषि क्षेत्र है। इन क्षैत्रों में अधिकांश किसान गंगानगर, हनुमान गढ , बीकानेर, नागौर,चूरु व बाड़मेर के हैं। कुछ स्थानीय किसान भी खेती-बाड़ी करते हैं, सत्य यह भी माना जाता है कि नहरी कृषि करने कै तौर तरीके स्थानीय किसानों को अन्य जिलों से आए हुए किसानों की देन है। यहां की खेती में ग्वार,मूंग,मोठ,तिल, मूंगफली, सरसों, बाजरा, चना, जीरा, ईसबगोल प्रमुखता से बोया जाता है। हालांकि नहर के अलावा कुछ स्थानों पर ट्यूबवेल से भी खेती की जाती है, लेकिन कम की जाती है, इसके दो कारण हैं। एक तो यहां की भूमि में प्रचूर मात्रा में पानी नहीं है दूसरा अधिकांश जगह लवणीय पानी है। साथ में बारिश यहां औसत से भी कम होती है।अगर समय पर अच्छी बारिश हो तो यहां बारानी खेती भी की जाती है। यहां पर बरसाती पानी को संजो कर अपने खेत में रखा जाता है पानी सोखने पर वहां खेती की जाती है उसे स्थानीय भाषा में खड़ीन कहा जाता है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]