टोंक जिला

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टोंक ज़िला
Tonk district
मानचित्र जिसमें टोंक ज़िला Tonk district हाइलाइटेड है
सूचना
राजधानी : टोंक
क्षेत्रफल : 7,194 किमी²
जनसंख्या(2011):
 • घनत्व :
14,21,326
 198/किमी²
उपविभागों के नाम: तहसील
उपविभागों की संख्या: 8 (नई तहसील-दूनी)
मुख्य भाषा(एँ): हिन्दी, राजस्थानी


टोंक ज़िले का एक दृश्य
ज़िले का एक चरवाहा

टोंक ज़िला भारत के राजस्थान राज्य का एक ज़िला है। ज़िले का मुख्यालय टोंक है।राजस्थान सरकार के उपमुख्यमंत्री माननीय श्री सचिनपायलट जी यहां के विधायक है | जिन्होंने 2018 के विधानसभा चुनाव मे वसुंधरा सरकार के नंबर 2 के मंत्री श्री यूनुस खान सहाब को भारी मतों से हराया था | [1][2]

तथ्य[संपादित करें]

सन् 2011 में ज़िले की जनसंख्या 14.21 लाख थी, जिसमें से 7.28 लाख पुरुष और 6.93 लाख महिलाएँ थीं, यानि लिंगानुपात 952 था। पूरी आबादी में से ग्रामीण निवासी 11.038 लाख और नगरीय निवासी 3,17,843 थे। ज़िले का साक्षरता दर 62.46% था। यहाँ का दूरभाष कोड 01432, पिनकोड 304001 और वाहन रेजिस्ट्रेशन कोड RJ-26 है।

भूगोल[संपादित करें]

ज़िले की औसत ऊँचाई समुद्रतल से लगभग 264.32 मीटर है। ज़िला 25°41" से 26°34" उत्तरी अक्षांश तथा 75°70" से 76°19" पूर्वी रेखांश के बीच विस्तारित है। यहाँ वार्षिक औसत वर्षा 61.36 मिमी होती है।

इतिहास[संपादित करें]

यह रियासत काल में राजस्थान की एक मात्र मुस्लिम रियासत थी।

दर्शनीय स्थल[संपादित करें]

  • डिग्गी कल्याण मन्दिर, डिग्गी (मालपुरा) - यहाँ पर भाद्रपद सुक्ल एकादशी को विशाल मेला लगता है।
  • अरबी फारसी शोध संस्थान (टोंक) - इसकी स्थपना 4 दिसंबर 1978 को हुई और यहाँ पर विश्व की सबसे बड़ी कुरान बनाई गई है।
  • सुनहरी कोठी (टोंक) - यह टोंक में बड़े कुए के पास नज़रबाग में रतन, कांच व सोने की झाल देकर बनवाई गई। पहले इसे "शीशमहल" के नाम से जाना जाता था।
  • कल्पवृक्ष बालुन्दा (नगर दुर्ग के पास)
  • माण्डव ऋषि की तपोभूमि - इसे लघु-पुष्कर भी कहा जाता है। यह नगरदुर्ग के पास स्थित है। यहाँ पर 15 दिवसीय विशाल पशु मेला कार्तिक पूर्णिमा से लगता है।
  • श्री चामुण्डा देवी का मन्दिर नगर (मालपुरा)
  • श्री देव नारायण देव धाम जोधपुरिया निवाई बनस्थली
  • बीसलपुर बांध - यह राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा बांध है, जो टोंक जिले की टोड़ारायसिंह तहसील के राजमहल में तीन नदियों - बनास, खारी, डाई - के संगम पर बना हुआ है। यह राजस्थान का एकमात्र कंक्रीट से बना हुआ बांध है तथा यह राजस्थान की सबसे बड़ी जल पेयजल परियजना है।
  • टोरडी सागर बांध - इस बांध के सभी गेट खोलने पर एक बूंद भी जल नहीं बचता है।
  • ककोड़ का किला - यह टोंक से 20 कि.मी. दूर NH 116 पर ककोड़ में एक उची पहाड़ी पर बना हुआ है।
  • हाथीभाटा - यह ककोड़ के पास 5 कि.मी. दूर गुमानपुरा गाव में विशाल पहाड़ी को काटकर बनाया गया हाथी है,जो पाषाण कालीन निर्मित बताया गया है।
  • चोराशी - यह टोंक जिले के पश्चिमी भाग जयपुर के दक्षिणी पश्चिमी भाग में बोली जाती है।
  • केंद्रीय भेड़ व उन अनुसंधान केंद्र - यह टोंक कि मालपुरा तहसील के अविकाकनगर में 4000 एकड़ ज़मीन पर बना हुआ है।
  • रेड - यह जगह टोंक में निवाई के पास स्थित है, इसे "प्राचीन भारत का टाटानगर" के नाम से जाना जाता है, यहां पे से आज तक का एशिया का सबसे बड़ा पंचमार्क सिक्को का भंडार मिला।
  • खातोली - इस जगह पे सरसो के बचे वेस्ट भाग से विद्युत बनाई जाती है। जिसका नाम "कल्पतरु पावर प्लांट (खातोली)"है,
  • संत पिपा कि गुफाएं (टोड़ारायसिंह)
  • हाड़ी रानी का कुंड(टोड़ारायसिंह)
  • रानीपुरा - काले हिरणों के लिए प्रसिद्ध।
  • मंदिर व गुरूद्वारा धन्ना भगत (धुआँ कला)
  • मोती सागर बांध, धुआँ कला

मंदिर[संपादित करें]

श्री डिग्गी कल्याण जी का मंदिर

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Lonely Planet Rajasthan, Delhi & Agra," Michael Benanav, Abigail Blasi, Lindsay Brown, Lonely Planet, 2017, ISBN 9781787012332
  2. "Berlitz Pocket Guide Rajasthan," Insight Guides, Apa Publications (UK) Limited, 2019, ISBN 9781785731990