मेहरानगढ़
| मेहरानगढ़ | |
|---|---|
| जोधपुर, राजस्थान भारत | |
किले का दिन का दृश्य | |
किले का रात्रि दृश्य | |
| सूचना | |
| प्रकार | किला |
| नियंत्रक | Mehrangarh Museum Trust |
| जनप्रवेश | हाँ |
| Condition | अच्छी तरह से संरक्षित |
| अवस्थिति | |
| Coordinates | 26°17′53″N 73°01′08″E / 26.29806°N 73.01889°E |
| इतिहास | |
| निर्मित | 1459 |
| निर्माता | जोधपुर रियासत के राठौड़ राजवंश |
| सामग्री | लाल बलुआ पत्थर |
मेहरानगढ़ एक ऐतिहासिक किला है जो जोधपुर, राजस्थान, भारत में स्थित है। यह एक पहाड़ी की चोटी पर बना हुआ है, जो आसपास के मैदानों से लगभग 122 मीटर (400 फीट) ऊपर उठता है, और इसका परिसर लगभग 1,200 एकड़ (486 हेक्टेयर) में फैला हुआ है।[1] इसकी स्थापना लगभग 1459 में राठौड़ वंश के शासक राव जोधा द्वारा की गई थी,[2] हालांकि इसका अधिकांश वर्तमान स्वरूप 17वीं शताब्दी में उनके उत्तराधिकारियों द्वारा बनाया गया था। मेहरानगढ़ किला विशाल दीवारों द्वारा संरक्षित है। इस किले का प्रवेश द्वार एक पहाड़ी के ऊपर है जो बेहद शाही है। किले में सात द्वार हैं जिनमें विक्ट्री गेट, फतेह गेट, भैरों गेट, डेढ़ कामग्रा गेट, फतेह गेट, मार्टी गेट और लोहा गेट के नाम शामिल है।
मेहरानगढ़ किले का इतिहास
मेहरानगढ़ किले का इतिहास काफी दिलचस्प है जो हमें उस समय में वापस ले जाता है जब 15 वीं शताब्दी के दौरान राठौर शासक राव जोधा ने 1459 में जोधपुर की स्थापना की थी। राजा राम मल के पुत्र राव जोधा ने शहर को मंडोर से शासित किया लेकिन फिर उसने अपनी राजधानी को जोधपुर स्थानांतरित कर दिया था। इसके बाद उन्होंने भाऊचेरिया पहाड़ी पर किले की नीव रखी जिसकी दूरी मंडोर से सिर्फ 9 किमी थी। ‘मेहरान’ का अर्थ सूर्य है इसलिए राठोरों ने अपने मुख्य देवता सूर्य के नाम से इस किले को मेहरानगढ़ किले के रूप में नामित किया। इस किले के मुख्य निर्माण के बाद जोधपुर के अन्य शासकों मालदेव महाराजा, अजीत सिंह महाराजा, तखत सिंह और महाराजा हनवंत सिंह द्वारा इस किले में अन्य निर्माण किए, मेहरानगढ़ दुर्ग के निर्माण के समय एक व्यक्ति की स्वैच्छिक बलि चाहिए थी जिसके लिए राजाराम मेघवाल ने स्वैच्छिक बलि दी थी ।

मेहरानगढ़ किले की वास्तुकला
500 साल की अवधि में मेहरानगढ़ किले और महलों को बनाया गया था। किले की वास्तुकला में आप 20 वीं शताब्दी की वास्तुकला की विशेषताओं के साथ 5 वीं शताब्दी की बुनियादी वास्तुकला शैली को भी देख सकते हैं। किले में 68 फीट चौड़ी और 117 फीट लंबी दीवारें है। मेहरानगढ़ किले में सात द्वार हैं जिनमें से जयपोली सबसे ज्यादा लोकप्रिय है। किले की वास्तुकला 500 वर्षों की अवधि के विकास से गुजरी है। महाराजा अजीत सिंह के शासन के समय इस किले की कई इमारतों का निर्माण मुगल डिजाइन में किया गया है। इस किले में पर्यटकों को आकर्षित कर देने वाले सात द्वारों के अलावा मोती महल (पर्ल पैलेस), फूल महल (फूल महल), दौलत खाना, शीश महल (दर्पण पैलेस) और सुरेश खान जैसे कई शानदार शैली में बने कमरें हैं। मोती महल का निर्माण राजा सूर सिंह द्वारा बनवाया गया था। शीश महल, या हॉल ऑफ मिरर्स बेहद आकर्षक है जो अपनी दर्पण के टुकड़ों पर जटिल डिजाइन की वजह से पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र है। फूल महल का निर्माण महाराजा अभय सिंह ने करवाया था।
मेहरानगढ़ फोर्ट की विशेषता
मेहरानगढ़ किला राजस्थान के सबसे बड़े, संरक्षित और सबसे प्रभावशाली स्मारकों में से एक है।
यह किला एक लंबवत चट्टान पर बना हुआ है और यह लगभग चार सौ फीट की ऊंचाई पर स्थित है।
किले के निर्माण के लिए राव जोधा को एक ऋषि चीरिया नाथजी को जबरदस्ती इस जगह से हटाया था जिसके बाद उस ऋषि ने राजा को शाप दिया था कि इस किले को पानी की कमी का सामना करना पड़ेगा। लेकिन बाद में राव जोधा ने उनके लिए एक मंदिर और एक घर बनवाकर उन्हें प्रसन्न किया।
जब आप इस किले को देखने के लिए जायेंगे तो इसके मुख्य द्वार के सामने आपको कुछ लोग लोक नृत्य करते नजर आयेंगे।
कई हॉलीवुड और बॉलीवुड फिल्मों को किले में शूट किया गया है जिसमें फिल्म द डार्क नाइट राइजेस, द लायन किंग,और ठग्स ऑफ हिंदोस्तान के नाम शामिल हैं।
मेहरानगढ़ किले का दौरा करने का सबसे अच्छा समय
यहां जाने का सबसे अच्छा समय सर्दियों के मौसम का है। अक्टूबर से मार्च के के महीनों के बीच यहां का मौसम काफी ठंडा और सुखद रहता है। इस मौसम में आप पूरे किले को एक्सप्लोर कर सकते हैं। किला घूमने के लिए आप सर्दियों के मौसम में सुबह के समय जाएँ।
मेहरानगढ़ किला जोधपुर समय
| दिन | समय |
|---|---|
| सोमवार | सुबह Archived 2024-03-04 at the वेबैक मशीन 9:00 बजे - शाम 5:00 बजे तक |
| मंगलवार | सुबह 9:00 बजे - शाम 5:00 बजे तक |
| बुधवार | सुबह 9:00 बजे - शाम 5:00 बजे तक |
| गुरुवार | सुबह 9:00 बजे - शाम 5:00 बजे तक |
| शुक्रवार | सुबह 9:00 बजे - शाम 5:00 बजे तक |
| शनिवार | सुबह 9:00 बजे - शाम 5:00 बजे तक |
| रविवार | सुबह 9:00 बजे - शाम 5:00 बजे तक |
मेहरानगढ़ किला जोधपुर प्रवेश टिकट
| टिकट | राशि (रु.) |
|---|---|
| अंतर्राष्ट्रीय अतिथि (ऑडियो शामिल है) | 600 |
| अंतर्राष्ट्रीय अतिथि (छात्र) | 400 |
| घरेलू मेहमान | 100 |
| घरेलू मेहमान (वरिष्ठ नागरिक, छात्र, अर्धसैनिक कर्मी) | 50 |
| फोटोग्राफी परमिट: फिर भी | 100 |
| फोटोग्राफी परमिट: वीडियो | 200 |
| लिफ्ट (एकतरफ़ा) | 50 |
| टूर एस्कॉर्ट शुल्क | 120 |
| ऑडियो गाइड | 180 |
| ऑडियो गाइड (रियायत) | 120 |
जोधपुर में स्थानीय भोजन और रेस्तरां
जोधपुर एक ऐसा शहर है जहां के व्यंजन मिर्च मसाले से भरपूर होते हैं। यहां पर पर्याप्त मात्रा में स्ट्रीट फूड और मिठाइयां उपलब्ध हैं। यहां आप मिर्ची बड़ा, मावा कचोरी और प्याज़ कचोरी जैसे कुछ स्वादिष्ट स्ट्रीट फूड का स्वाद भी ले सकते हैं इसके अलावा यहां के मखानिया लस्सी भी काफी लोकप्रिय है। अगर आप इस शहर में कुछ मीठा खाना चाहते हैं तो यहां मिलने वाले भोग बेसन की चक्की, मावे की कचौरी, मोतीचूर के लड्डू और मखान वडे का मजा भी ले सकते हैं।
मेहरानगढ़ किले के आसपास पर्यटन स्थल
1. राव जोधा डेजर्ट रॉक पार्क
राव जोधा डेजर्ट रॉक पार्क किले के पास स्थित है जो प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग के सामान है। यह पार्क 72 हेक्टेयर के क्षेत्र में फैला हुआ है जहां रेगिस्तान और शुष्क वनस्पति पाई जाती है। इस पार्क में पर्यटक गाइड के साथ 880 से 1100 मीटर लंबे रोमांचक रास्ते जा सकते हैं जहां पर कुछ अनोखे पौधों को देखा जा सकता है।
2.चोकेलो गार्डन
चोकेलो गार्डन मेहरानगढ़ किले के ठीक नीचे स्थित है जिसे आपको अपनी किले की यात्रा में जरुर शामिल करना चाहिए। यह गार्डन 18 वीं शताब्दी का है जिसके बाद इसका जीर्णोद्धार किया गया है। इस गार्डन में एक रेस्टोरेंट भी है जहां से आप मनोरम दृश्य का आनंद लिया जा सकता है।
3. नागणेचजी मंदिर
नागणेचजी मंदिर किले के बिलकुल दाईं ओर स्थित है जिसका निर्माण 14 वीं शताब्दी में किया गया था, जब राव धुहड़ ने मूर्ति को मारवाड़ में लाया था जिसको बाद में किले में स्थापित कर दिया गया था।
4. चामुंडा माताजी मंदिर
जब राव जोधा अपनी अपनी राजधानी को मंडोर से जोधपुर स्थानांतरित किया था तब वह अपने साथ दुर्गा माता की मूर्ति को भी ले गए थे। इस मूर्ति को मेहरानगढ़ किले में स्थापित किया गया था जिसे आज चामुंडा माता मंदिर के नाम से जाना जाता है।


सन्दर्भ
- ↑ KUMAR, ANUJ (2020-04-19). MERE DESH KE PRASIDDHA KILE: Mere Desh Ke Prasiddha Kile: India's Celebrated Forts - Exploring the Rich History of India's Renowned Fortresses. Prabhat Prakashan.
- ↑ Gupta, Dr Mohanlal (2024-10-01). "मेहरानगढ़ दुर्ग". राजस्थान - शूरवीरों, संतों एवं सुरों की धरती (अमेरिकी अंग्रेज़ी भाषा में). अभिगमन तिथि: 2025-07-17.
- ↑ "मेहरानगढ़ किले का इतिहास और घूमने की जानकारी - Information About The History Of Mehrangarh Fort In Hindi". Holidayrider.Com (अमेरिकी अंग्रेज़ी भाषा में). 2019-03-31. अभिगमन तिथि: 2022-09-12.