लोहागढ़ दुर्ग

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लोहागढ़ दुर्ग एक दुर्ग अथवा एक किला है जो भारतीय राज्य राजस्थान के भरतपुर जिले में स्थित है। [1] दुर्ग का निर्माण भरतपुर के जाट वंश के महाराजा सूरजमल ने 1733 ई. में करवाया था। यह भारत का एकमात्र अजेय दुर्ग हैं। अतः इसको अजय गढ़ का दुर्ग भी कहते हैं। इसके चारों ओर मिट्टी की दोहरी प्राचीर बनी हैं। अतः इसको मिट्टी का दुर्ग भी कहते हैं। किले के चारों ओर एक गहरी खाई हैं, जिसमें मोती झील से सुजानगंगा नहर द्वारा पानी लाया गया हैं। इस किले में दो दरवाजे हैं। इनमें उत्तरी द्वार अष्टधातु का बना है, जिसे जवाहर सिंह जाट 1765 ई. में दिल्ली विजय के दोहरान लाल किले से उतरकर लाएँ थे। दीवाने खास के रूप में प्रयुक्त कचहरी कला का उदाहरण हैं। भरतपुर राज्य के जाट राजवंस के राजओ का राज्याभिषेक जवाहर बुर्ज में होता था। इस किले पर कई आक्रमण हुए हैं, लेकिन इसे कोई भी नहीं जीत पाया। इस पर कई पड़ोसी राज्यों, मुस्लिम आक्रमणकारीयो तथा अंग्रेजो ने आक्रमण किया, लेकिन सभी असफल रहे। 1803 ई. में लार्ड लेक ने बारूद भरकर इसे उड़ाने का असफल प्रयास किया था। यहां पर फतेह बुर्ज का निर्माण ब्रिटिश सेना पर विजय को चिरस्थायी बनाने के लिए करवाया गया था।

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