लोहागढ़ दुर्ग

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लोहागढ़ दुर्ग

लोहागढ़ दुर्ग एक दुर्ग अथवा एक किला है जो भारत के राज्य राजस्थान के भरतपुर जिले में स्थित है। [1] दुर्ग का निर्माण भरतपुर के जाट वंश के (जाटो का प्लेटो अथार्त जाटों का अफलातून) कुंवर महाराजा सूरजमल ने 19 फरवरी 1733 ई. में करवाया था, जो सेवर के निकट निर्मित हैं। यह भारत का एकमात्र अजेय (जिसको कोई न जीत पाया हो) दुर्ग हैं। अतः इसको अजयगढ़ दुर्ग भी कहते हैं। इसके चारों ओर मिट्टी की दोहरी प्राचीर बनी हैं। अतः इसको मिट्टी का दुर्ग भी कहते हैं। किले के चारों ओर एक गहरी खाई हैं, जिसमें मोती झील से सुजानगंगा नहर द्वारा पानी लाया गया हैं। इस किले में दो दरवाजे हैं। इनमें उत्तरी द्वार अष्टधातु का बना है, जिसे जवाहर सिंह जाट 1765 ई॰ में दिल्ली विजय के दौरान लाल किले से उतारकर लाएँ थे। दीवाने खास के रूप में प्रयुक्त कचहरी कला का उदाहरण हैं। भरतपुर राज्य के जाट राजवंश के राजाओ का राज्यभिषेक जवाहर बुर्ज में होता था। इस किले पर कई आक्रमण हुए हैं, लेकिन इसे कोई भी नहीं जीत पाया।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. AjabGabaj.com. "Lohagarh Fort ,Bhartpur". मूल से 5 दिसंबर 2015 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 19 मई 2016.