ओसियां

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ओसिया जोधपुर से 65 किमी की दूरी पर स्थित है । ओसिया 30000 हजार की आबादी वाला कस्बा है। यह देशी विदेशी पर्यटकों को मन्दिरों एवं स्मारको की स्थापत्य कला के कारण सहज ही आकर्षित करता है। ओसिया में एक तरफ मन्दिरों का समूह तथा दुसरी तरफ रेगिस्तान स्थित है। इस प्राचीन नगर-क्षैत्र की यात्रा के दौरान बीच-बीच में पड़ते हुए रेगिस्तानी विस्तार व छोटे-छोटे गांव अतीत के लहराते हुए भू-भागों में ले जाते हैं।

ओसियां में विश्व प्रसिद्ध माँ सच्चियाय का भव्य मंदिर बना हुआ है , जैन मंदिर , सूर्य मंदिर के साथ सैकड़ो अन्य मन्दिर बने हुए है । मंदिरों की नगरी और धार्मिक नगरी के नाम से विख्यात ओसियां को उसकी मन्दिर शैली के कारण "राजस्थान का भुवनेश्वर" भी कहा जाता है ।

औसियां का प्राचीन नाम उपकेसपुर , पाटननगरी और उपकेस पाटन भी थे । ओसवालों की उदगम स्थल होने की वजह से इसका नाम ओसियां रखा गया ।

मंदिर[संपादित करें]

ओसिया को मन्दिरो की नगरी कहा जाता है। एक समय में ओसिया मे 108 मन्दिर थे ।समय के साथ यह संख्या अनेक कारणों से कम होती गई। ओसिया के सभी स्मारक एवं मन्दिर आठवी से बाहरवी शताब्दी के मध्य बनाये गये है । यह पूर्व मध्य कालीन समय के स्मारक कहे जाते है। ओसिया के मन्दिर स्थापत्य कला की दृष्टि से बहुत सम्पन्न है। इन मन्दिरों को उङीसा के सूर्य मन्दिर एवं खजुराहो के मन्दिरों के समकक्ष माना जाता है। यहा के ये स्मारक नागर शैली मे बने हुए है। मन्दिरों को दो भागो मे स्थापत्य कला की दृष्टि से विभक्त किया गया है। पचायतन प्रकार के मन्दिर एवं एकायतन प्रकार के मन्दिर । वर्तमान में ओसियां में 18 स्मारक एवं दो बावङी स्थित है। मन्दिरों में एक महावीर का जैन व शेष हिन्दू मंदिर है। सभी मन्दिर असाधारण स्थापत्य कला के नायब नमूने हैं। इनमें सूर्य मंदिर,हरिहर के तीन मन्दिर,विष्णु के तीन मन्दिर,पीपला माता का मन्दिर,शिव मन्दिर,एक भग्न मंदिर,भगवान महावीर का जैन मंदिर तथा सबसे विशाल सच्चियाय माताजी मन्दिर का मन्दिर है। इन स्मारकों में सच्चियाय माताजी मन्दिर एवं जैन मन्दिर को छोङकर सभी मन्दिर व स्मारक राजस्थान सरकार के पुरातत्व विभाग के अधीन है।जैन मन्दिर की व्यवस्था जैन ट्रस्ट द्वारा तथा श्री सच्चियाय माताजी मन्दिर की व्यवस्था एक सर्वजातीय सार्वजनिक ट्रस्ट द्वारा की जाती है। जिसकी स्थापना सन् 1976 मे पुजारी जुगराज जी शर्मा ने की थी। सच्चियाय माताजी महिषासुर मर्दिनी का ही स्वरूप है। सत्य वचन एवं मनोकामना पूर्ण करने वाली होने के कारण सच्चिका कही जाती है। सच्चियाय माताजी की मूर्ति काले प्रस्तर की चार हाथ वाली मूर्ति है। मूर्ति के हाथो मे तलवार ढाल ध्वजा एवं त्रिशूल धारण किये हुए है। सच्चियाय माताजी का मन्दिर एक हिन्दू मन्दिर है, जिसकी पुजा प्रार्थना एवं अनुष्ठान हिन्दू रीति रिवाज के अनुसार होते है। यहा पर वर्ष में दो मेले चैत्र नवरात्रि एवं आसोज नवरात्रि मे लगते है। जैन धर्म के एक समुदाय की उत्पत्ति ओसियां से होने के कारण ओसवाल सच्चियाय माताजी को कुल देवी के रूप में मानते है।श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान का मंदिर भी है। गुरु जम्भेश्वर भगवान का मंदिर ओसियां रेलवे स्टेशन के पास हैं।

सन्दर्भ[संपादित करें]