सामग्री पर जाएँ

माधो सिंह प्रथम

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
माधो सिंह प्रथम
आमेर के राजा
शासनावधि12 दिसंबर 1750
5 मार्च 1768
पूर्ववर्तीईश्वरी सिंह
उत्तरवर्तीपृथ्वी सिंह द्वितीय
जन्म20 जून 1728
जयपुर
निधन5 मार्च 1768
जयपुर
संतान
राजवंशकछवाहा
पिताजय सिंह द्वितीय
माताराणावतजी चंद्र कंवरजी महाराणा अमर सिंह II की पुत्री. उदयपुर-मेवाड़

सरामद-ए-राजा-ए हिंदुस्तान राज-राजेश्वर राज-राजेंद्र महाराजधिराज महाराजा सवाई माधोसिँह जी प्रथम जयपुर के प्रमुख महाराजाओं में से एक थे। राजस्थान के सवाई माधोपुर शहर की स्थापना जयपुर के पूर्व महाराजा सवाई माधोसिंह जी प्रथम ने ही 1763 ईस्वी के लगभग की थी। सवाई माधोसिंह जी प्रथम की वजह से सवाई माधोपुर शहर 17वीं व 18वीं शताब्दी के आसपास एक ख्याति प्राप्त शहर माना जाने लगा था। [1] राजस्थान सरकार ने 15 मई 1949 में सवाई माधोपुर शहर को सवाई माधोसिंहजी के नाम पर जिला बनाकर उनके द्वारा स्थापित शहर का सम्मान बढ़ा दिया। तब से लेकर आज तक जिले का नाम सवाई माधोपुर के रूप में भारत स्तर पर जाना जाता है।

राज्याभिषेक 29/12/1750

[संपादित करें]

महाराजा सवाई माधो सिंहजी की माता मेवाड़-उदयपुर के महाराणा अमर सिंहजी द्वितीय की पुत्री चँद्र कँवरजी थी।इसके अतिरिक्त बाईजी लाल विचित्र कँवरजी और किशन कँवरजी भी चँद्र कँवर से उत्पन्न हुई थी।

माधोसिँह जी की सात रानियाँ और पुत्र पाँच हुए थे जिनमे से उनके उत्तराधिकारी महाराजा सवाई पृथ्वी सिँहजी और उनके बाद बने महाराजा सवाई प्रताप सिँहजी की माता रानी चुंडावतजी कुंदन कँवरजी पुत्री रावत जसवंत सिंहजी देवगढ़ की थीं इसके अलावा अन्य रानियों में से रानी सिसोदीनीजी रतन कँवरजी पुत्री राजा सूरतान सिंहजी और दूसरी उनके पुत्र राजा सरदार सिंहजी बनेड़ा की पुत्री रानी ब्रज कँवरजी थीं। इनकी एक रानी राठौड़जी अर्जुन कँवरजी पुत्री महाराजा राय सिंहजी ईडर की और पौत्री महाराजा अजीत सिंहजी जोधपुर-मारवाड़ की थीं। अन्य पुत्र कुंवर मान सिँहजी,कुंवर भवानी सिँहजी और कुंवर रघुबीर सिँहजी भी हुए थे परंतु तीनों बाल्यकाल में ही समाप्त हो गए।

सफदरगंज समझोता, 1758

[संपादित करें]

यह समझोता माधोसिंह प्रथम और मुगल बादशाह अहमदशाह और नवाब सफदरगंज(अवध) के मध्य 1758 को हुआ. इस समझौते के पश्चात मुगल बादशाह अहमदशाह ने माधोसिंह प्रथम को जनवरी 1759 को रणथंभौर का किला भेंट किया।

भरवाड़ा युद्ध 1761

[संपादित करें]

कोटा शासक शत्रुसाल, माधोसिंह को रणथंभौर किला दिए जाने के कारण अप्रसन हुए और बारां में यहयुद्ध हुआ. इस युद्ध में शत्रुसाल के सेनापति झालाजालिम सिंह ने माधोसिंह को पराजित कर दिया. इसयुद्धके पश्चात शत्रुसाल ने रणथंभौर पर अधिकार कर लिया

1767 में माधोसिंह ने मावंडायुद्ध मे भरतपुर शासक जवाहरसिंह को पराजित किया गया

1763 मे मोतीडूंगरी महलों का निर्माण करवाया।

अपने भाई ईश्वरीसिंह से उतराधिकार को लेकर संघर्ष

झिलाई/जमोली संधि 1745

[संपादित करें]

यह संधि माधोसिंह प्रथम व ईश्वरीसिंहके मध्य जयपुर के दीवान राजमलखत्री करवाता हैं। इस संधि के तहत माधोसिंह को रामपुर व टोंक परगना देना तय हुआ। जो 5 लाख रुपए वार्षिक आय का परगना था l

राजमहल का युद्ध 1 मार्च 1747 (टोंक में)

[संपादित करें]

ईश्वरीसिंह का साथ मुगलसेना ने दिया और माधोसिंहका साथ मेवाड़ महाराणा जगतसिंह2 और कोटा शासक दुर्जनसाल और मराठाओ ने दिया । लेकिन इस युद्ध में विजय ईश्वरीसिंह हुआ

बगरू का युद्ध

[संपादित करें]

[2] ईश्वरीसिंह का साथ मुगलसेना ने दिया और माधोसिंहका साथ मेवाड़ महाराणा जगतसिंह2 और कोटा शासक दुर्जनसाल और मराठाओ ने दिया । लेकिन इस युद्ध में विजय माधोसिंह की हुई. माधोसिंह के युद्ध जितने के पश्चात ईश्वरीसिंह से माल, निवाई, टोडा परगने मांगे जिसे ईश्वरी सिंह ने स्वीकार कर लिए। और मराठाओं को हर्जाना दिलवाया। ईश्वरी सिंहकी मृत्यु के बाद माधोसिंहप्रथम जयपुर का शासक बना। 5 मार्च 1768 गई। By rajasthan history books

  1. ↑ "आमेर के ईश्वरीसिंह, माधोसिंह और सवाई प्रतापसिंह". Notes-Mind. 1970-01-01. अभिगमन तिथि: 2026-10-17.
  2. ↑ Rajasthan history books.