महाराजा जवाहर सिंह

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भरतपुर राज्य के महाराजा।

राजा जवाहर सिंह #जाट महाराजा #सूरजमल के ज्येष्ठ पुत्र थे। जवाहर सिंह #डीग के राजमहल में एक दिन अपनी माता को प्रणाम करने पहुंचे तो उस समय उन्होंने पगड़ी पहनी हुई थी। तब उनकी माता ने उपालम्भ दिया कि बेटा तेरे पिता की पगड़ी तो दिल्ली में पड़ी हुई मुगलों की ठोकर खा रही है और तू यह शानदार पगड़ी बांधे हुए हैं। इसकी शान तो तब रहेगीजब तू अपने पिता की मृत्यु का बदला दिल्ली के शासकों से ले लेगा। सन् 1763 ई0 में जवाहर सिंह ने विशाल सेना लेकर दिल्ली की ओर कूच किया जिसमें सेना के साथ साथ आमजनता भी भागीदारी कर रही थीऔर दिल्ली की चारों ओर से नाकेबंदी कर दी। लाल किले को हाथियों की टक्कर से तोड़ा गया जिसमें महाराज जवाहर सिंह के महान योद्धा पाखरिया खुटेला काम आए।दिल्ली सल्तनत को जीतकर वहाँ से भरपूर धन दौलत व चित्तौड़गढ़ किले वाले दरवाजे लालकिले से उखाड़कर साथ लेकर भरतपुर में रहना ही पसंद किया।आज भी भरतपुर के किले पर चित्तौड़ वाला किवाड़ मौजूद है।हिन्दुस्तान में पहले वीर शासक थे जिन्होंने मुगल बादशाहत को चुनौती दी और जीतकर अपनी शर्तों पर विवश किया।सच्चे अर्थों में जवाहर सिंह महान योद्धा थे जाट महाराजा ने अहमद शाह अब्दाली के विरुद्ध मराठाओं का साथ दिया। इनके समय भरतपुर के जाट साम्राज्य की सीमा बृजक्षेत्र उत्तर प्रदेश और हरियाणा तक फैली हुई थी और हिन्दू समाज अत्यधिक मजबूत स्थिति में था।इनके पिता महाराजा सूरजमल ने हिन्दू धर्म को मुगलों के सामने सिर उठाकर रहना सिखाया था

गोकुला, ? - 1670 राजाराम (भरतपुर), 1670 - 1688 चूडामन, 1695 - 1721 बदन सिंह, 1722 - 1756 महाराजा सूरज मल, 1756 - 1767 महाराजा जवाहर सिंह, 1767 - 1768 महाराजा रतन सिंह, 1768 - 1769 महाराजा केहरी सिंह, 1769 - 1771 महाराजा नवल सिंह, 1771 - 1776 महाराजा रंजीत सिंह, 1776 - 1805 महाराजा रणधीर सिंह, 1805 - 1823 महाराजा बलदेव सिंह, 1823 - 1825 महाराजा बलवन्त सिंह, 1825 - 1853 महाराजा जशवन्त सिंह, 1853 - 1893 महाराजा राम सिंह, 1893 - 1900 (Exiled) महारानी गिरिराज कौर, regent 1900-1918 महाराजा किशन सिंह, 1900 - 1929 महाराजा ब्रजेन्द्र सिंह, 1929-1947 (Joined the Indian Union)