सूरतगढ़

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सूरतगढ़ ताप विद्युत संयंत्र

सूरतगढ़ बीकानेर से ११३ मील उत्तर में कुछ पूर्व की तरफ बसा है। यह श्रीगंगानगर जिले में है।

यहां एक किला भी है। ई०१८०५ में महाराजा सूरत सिंह ने यहां नया किला बनवाया और इसका नाम 'सूरतगढ़' रखा। पूरा किला ईंटों का बना है जिसमें कुछ महत्व की वस्तुएं अब बीकानेर के किले में सुरक्षित है। इनमें हड़जोरा की पत्तियां, गरुड़, हाथी, राक्षस आदि की आकृतियां बनी है।

इसी स्थान से शिव पार्वती, कृष्ण की गोवर्धन लीला तथा एक पुरुष एंव स्री की पकी हुई मिट्टी की बनी हुई मूर्तियां मिली हैं जो अब बीकानेर संग्रहालय में है। सूरतगढ़ क़स्बा एक और रेगिस्तान से घिरा तथा दूसरी और घग्घर नदी से सिंचित अत्यंत उपजाऊ जमीन से सराबोर है जहां एक और राजस्थान का पहला ताप विद्युत संयत्र है वहीं दूसरी और इंदिरा गांधी नहर से सिंचित उपजाऊ क्षेत्र है लहलहाती फसल इस कसबे के चारों और हरित आभा बिखेरती है

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

सूरतगढ़ का प्राचिन नाम सोढल गढ़ था। जो सरस्वत्ती नदी के किनारे बसा हूआ है। यह एशिया का सबसे बडा कृषि र्फाम है। यहाँ लधेर में गुसाँई जी महाराज का मेला लगता है। माह की द्वितीय (दुज) को।