झारखंड के पर्यटन स्थल

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झारखंड में पर्यटन[संपादित करें]

झारखंड को प्रकृति ने अप्रतिम सौंदर्य और असीमित पर्यटन स्थलों से नवाजा है। एक ओर सदियों के प्राकृतिक परिवर्तनों ने इन नयनाभिराम दृश्यों और स्थलों की रचना की है, जिनमें ख़ूबसूरत झरने, नदी, पहाड़, पठार और वन्य प्रदेश शामिल हैं। वहीँ दूसरी ओर कई मानवनिर्मित भी हैं जैसे उद्यान, मंदिर और प्राचीन कला स्थल। झारखंड क्षेत्र विभिन्न भाषाओं, संस्कृतियों एवं धर्मों का संगम क्षेत्र है। आदिवासिओं का अनूठा जीवन और उनके विविधतापरक रीतिरिवाज भी पर्यटकों का बरबस मन मोह लेते हैं।

प्रकृति के अनुपम उपहार[संपादित करें]

हज़ारीबाग़ की पाषाणकालीन गुफाएं : हजारीबाग के बड़कागांव प्रखंड में अवस्थित इन पाषाणकालीन गुफाओं में प्राचीन चित्रकारी के नमूने अब भी लोगों को चकित कर देते हैं।

हुंडरू जलप्रपाप्त, रांची : रांची-मुरी मार्ग में स्वर्णरेखा नदी पर स्थित यह झरना प्रकृति का अनुपम उपहार है। हुंडरू जलप्रपात झारखंड में सर्वाधिक ऊँचाई से गिरने वाला प्रपात है।

जोन्हा जलप्रपात, रांची : यह रांची-मुरी रोड पर है, जिसकी सुंदरता देखते बनती है।

दशम जलप्रपात : रांची-जमशेदपुर रोड पर स्थित बुंडू कस्बे में यह मनोहारी झरना है।

पंचघाघ जलप्रपात : छोटा नागपुर पठार के प्रदेश का यह जलप्रपात रांची-चाईबासा के बीच खूंटी-चकरधरपुर इलाके में पड़ता है।

प्रमुख पार्क और उद्यान[संपादित करें]

बेतला अभयारण्य : पलामू का बेतला राष्ट्रीय उद्यान देश की प्रमुख बाघ और हाथी परियोज़ना के रूप में भी मशहूर है। इस परियोज़ना ने एक और जहाँ वन्य प्राणियों को आश्रय प्रदान किया है, वहीँ आसपास के इलाकों जैसे नेतरहाट आदि को प्रसिद्ध कर दिया है। बेतला का पार्क हाथियों के सरंक्षण के अलावा सैलानियों के आकर्षण का भी केंद्र है।

नेतरहाट का पहाड़ और सनसेट प्वाइंट : गर्मियों में भी नेतरहाट का मौसम बेहद सुकून भरा रहता है, यहां मंगोलिया पॉइन्ट, पाइन फारेस्ट, नेतरहाट स्कूल दर्शनीय स्थल हैं।

दलमा अभयारण्य: रांची-जमशेदपुर मार्ग पर अवस्थित यह दलमा अभयारण्य सैकड़ों वन्य प्राणियों का प्राकृतिक आश्रय स्थल है।

बिरसा जैविक उद्यान, ओरमांझी: रांची-हज़ारीबाग़ रोड पर स्थित यह उद्यान सैलानियों के आकर्षण का केंद्र है।

संजय गांधी जैविक उद्यान, हज़ारीबाग़ : कभी हजारीबाग को हज़ार बागों का शहर कहा जाता था, यह जैविक उद्यान उसी कड़ी का एक हिस्सा है।

प्रमुख धार्मिक स्थल[संपादित करें]

बाबा टाँगीनाथ धाम: डुमरी गुमला झारखंड के प्राकृतिक सौंदर्य के बीच बाबा टांगीनाथ धाम पहाड़ी पर स्थित है बाबा टांगीनाथ धाम सेव स्थल होने के साथ-साथ शक्ति तथा सूर्य एवं वैष्णव धर्म समूह के प्राचीन मूर्तियां देखने को मिलती है इनके साथ यहां का विशेष आकर्षण अद्भुत अद्वितीय अक्षय त्रिशूल जो कि खुले आकाश के नीचे लगभग चौथी से छठी शताब्दी के आसपास से यहां पर बिना जंग के खुले आसमान के नीचे अपना सीना तान खड़ी है यहां महाशिवरात्रि तथा श्रावण मास कार्तिक पूर्णिमा में हजारों लाखों श्रद्धालु एवं भक्त पूजा के लिए आते हैं। वैद्यनाथ धाम, देवघर : देवघर में हर साल सावन के महिने में और महाशिवरात्रि में लाखों श्रद्धालु भगवान शिव लिंग को जल अर्पित करने कई राज्यों से आते हैं। बैद्यनाथ ज्‍योतिर्लिंग स्थित होने के कारण इस स्‍थान को देवघर नाम मिला है।

वासुकीनाथ मंदिर, दुमका : देवघर के शिवालय के अलावा हिन्दू श्रद्धालु इसके दर्शन के लिए भी आते हैं। वैद्यनाथ मन्दिर की यात्रा तब तक अधूरी मानी जाती है जब तक दुमका जिला के वासुकीनाथ मंदिर में दर्शन नहीं किये जाते।

रजरप्पा का छिन्मस्तिका मंदिर : इसे देश का प्रमुख शक्तिपीठ माना जाता है।

जगन्नाथ मंदिर और मेला, रांची : उड़ीसा के पुरी जगन्नाथ रथ की तरह यहां भी रथ मेला लगता है और मंदिर भी पुरी धाम की अनुकृति है।

इटखोरी का बौद्ध अवशेष और काली काली मंदिर : इस जगह पर बुद्ध परंपरा के प्राचीन अवशेष हैं और पास में ही भद्रकाली का भव्य मंदिर है।

पहाड़ी मंदिर, रांची : शहर के मध्य में स्थित शिव का यह मंदिर बेहद लोकप्रिय है।

सूर्य मंदिर, बुंडू : भगवान सूर्य की आराधना के लिए समर्पित यह मंदिर बेहद मनोहारी है।

दिउड़ी मंदिर, तमाड़ : यहां देवी दुर्गा की प्राचीन प्रतिमा है, जो बहुत से लोगों को आकर्षित करती है।

पारसनाथ स्थल : श्री समेद शिखरजी तीर्थस्थल जैनियों का पवित्र स्थल है।

जीइएल चर्च, रांची : गोस्सनर एवंजलिकल चर्च रांची के सबसे पुराने गिरिजाघर में से एक है।

संत मारिया रोमन कैथोलिक चर्च : रांची में स्थित यह रोमन कैथोलिक चर्च कामिल बुल्के पथ पर मौजूद है, जो सबसे प्रमुख मसीही संस्थान है।

प्रमुख दर्शनीय स्थल[संपादित करें]

मैक्लुस्कीगंज, रांची : एंग्लो-इंडियन समुदाय के एकमात्र गांव को एक इंग्लिश अफसर मैक्लुस्की ने देश भर के एंग्लो-इंडियन को बुलाकर बसाया था हालाँकि पहले वाली बात नहीं रही और ना उस संख्या में एंग्लो इंडियन समुदाय, पर अब भी कई कॉटेज, हवेली यहां मौजूद हैं, जिसे देखने लोग आते हैं।

टैगोर हिल, रांची : कवीन्द्र रविन्द्र नाथ टैगोर फुर्सत के पलों में अपने रांची प्रवास के दौरान यहां आया करते थे। मोरहाबादी इलाके की इस पहाड़ी का नामकरण उनकी याद में किया गया है।

झारखण्ड वार मेमोरियल, रांची : यह सैनिकों की अदम्य वीरता की याद कायम करने के लिए दीपाटोली में स्थापित किया गया है।

नक्षत्र वन. रांची : राजभवन यानि गवर्नर हाउस में इसे अौषधीय पौंधों और फूलों के बगीचे के साथ इसे बनाया गया है।

रातू का किला : छोटानागपुर महाराजा का इस्टेट और महल रांची से कुछ ही दूरी पर है, जो कई समारोह का केंद्र बनता है।

जुबली पार्क, जमशेदपुर : टाटा कंपनी के सौजन्य से यह पार्क जमशेदपुर में बनाया गया है, जो शहर की शान है।

सन्दर्भ[संपादित करें]

http://www.jharkhandtourism.in/default.asp

http://www.jharkhand.gov.in/tour-and-travels