बिहार का इतिहास

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बिहार के इतिहास को तीन काल-खण्डों में बांटकर देखा जा सकता है।

प्राचीन इतिहास[संपादित करें]

बिहार भारत के उत्तर भाग में स्थित एक विशेष राज्य है, जो की ऐतिहसिक दृष्टिकोण से भारत का सबसे बड़ा केंद्र है, या फिर ऐसा कहना गलत नहीं होगा, की बिहार के बिना भारत अधुरा है. बौध धर्म के लोगो द्वारा यहाँ विहार करने के कारण इस राज्य का नाम बिहार पड़ा. यही पर भगवान् बुध का जन्म हुआ, और इसी पावन भूमि पर महाबोधि मंदिर स्तिथ है. बिहार की पावन भूमि पर अनेकानेक संतो का जन्म हुआ, इसी पावन भूमि पर आचार्य चाणक्य और आर्यभट जैसे विदवान और वैज्ञानिक हुए. जब दुनिया के बहुत से हिस्सों में लोग पढना लिखना भी नहीं जानते थे, उस समय शिक्षा का सबसे बड़ा केंद्र नालंदा विश्वविध्यालय बिहार की राजधानी पाटलिपुत्र वर्तमान में पटना में स्तिथ था. नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति खुद आर्यभट्ट थे, आर्यभट एक गणितग्य और खगोल वैज्ञानिक थे. बिहार की ही पावन भूमि पर अशोक, अजातशत्रु, बिम्बिसार और अन्य बहुत राजाओ का जन्म हुआ. आज़ाद भारत के प्रथम राष्टपति डॉक्टर राजेंद्र प्रशाद का जन्म भी बिहार में ही हुआ है, सिखो के दशवे गुरु गोविद सिंह का जन्म भी बिहार के राजधानी पटना में हुआ, आज भी भारत के सबसे ज्यादा आईएस बिहार से ही निकलते है, लेकिन लागातार विदेशीयों के आक्रमण और घटिया राजनीती के कारण बिहार भारत के सबसे गरीब और पिछड़े राज्यों में से एक हो गया है. विश्व में शिक्षा के केंद्र का गौरव प्राप्त करने वाले इस राज्य में साक्षरता दर अन्य राज्यों से कम हो गई है, और रोजगार न मिलने के कारण पलायन एक बहुत बड़ी समस्या बन चुका है.

मध्यकालीन इतिहास[संपादित करें]

आधुनिक इतिहास[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]