बिहार का भूगोल

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बिहार 21°58'10" ~ 27°31'15" उत्तरी अक्षांश तथा 82°19'50" ~ 88°17'40" पूर्वी देशांतर के बीच स्थित भारतीय राज्य है। मुख्यतः यह एक हिंदी भाषी राज्य है लेकिन उर्दू, मैथिली, भोजपुरी, मगही, बज्जिका, अंगिका तथा एवं संथाली भी बोली जाती है। राज्य का कुल क्षेत्रफल 94,163 वर्ग किलोमीटर है जिसमें 92,257.51 वर्ग किलोमीटर ग्रामीण क्षेत्र है। 2001 की जनगणना के अनुसार बिहार राज्य की जनसंख्या 8,28,78,796 है जिनमें ६ वर्ष से कम आयु का प्रतिशत 19.59% है। 2002 में झारखंड के अलग हो जाने के बाद बिहार का भूभाग मुख्यतः नदियों के बाढमैदान एवं कृषियोग्य समतल भूमि है। गंगा तथा इसकी सहायक नदियों द्वारा लायी गयी मिट्टियों से बिहार का जलोढ मैदान बना है जिसकी औसत ऊँचाई १७३ फीट है।

बिहार का उपग्रह द्वारा लिया गया चित्र

राजनैतिक भूगोल[संपादित करें]

विधायिका का स्वरुप

बिहार द्विसदनीय व्यवस्था वाला भारतीय राज्य है। विधान सभा के अतिरिक्त यहाँ विधान परिषद की व्यवस्था है जिसके सदस्य अप्रत्यक्ष तौर पर चुने जाते हैं। राज्यपाल विधान सभा में बहुमत प्राप्त दल के विधायकों द्वारा वुने गए नेता को मुख्य मंत्री नियुक्त करते है। वर्तमान में नितीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री हैं जो राज्य में जनता दल (यूनाईटेड) तथा भारतीय जनता पार्टी के संयुक्त नेता हैं। मंत्री परिषद का गठन मुख्यमंत्री करते हैं जिसमें मंत्रियों की संख्या आवश्यकतानुसार बदली जाती है। दूसरे प्रमुख दल विपक्ष के नेता का चुनाव करते हैं। विधान सभा के सभी सदस्य पाँच वर्ष के लिए चुने जाते हैं जबकि विधान परिषद के सदस्यों का कार्यकाल छह साल का होता है। विधान परिषद की संरचना इस प्रकार की गई है कि दो साल में एक तिहाई सदस्य हट जाते हैं।

न्याय व्यवस्था
सन 1916 में स्थापित पटना उच्च न्यायालय के अधीन बिहार के सभी जिलों के सत्र न्यायालय आते हैं। पंचायती व्यवस्था के अन्तर्गत राज्य में पंचायतों को दीवानी मामलों में कुछ अधिकार दिए गए हैं लेकिन इनकी कार्य कुशलता हमेशा संदेहप्रद है। हाल में राज्य के मुख्यमंत्री तथा जिलाधिकारियों द्वारा शुरु किया गया जन अदालत त्वरित न्याय के लिए लोकप्रिय हुआ है।
प्रशासकीय विभाजन

प्रशासनिक दृष्टिकोण से बिहार को 9 प्रमंडल तथा 38 मंडल (जिला) में बाँटा गया है। जिलों को 101 अनुमंडलों, 534 प्रखंडों, 8,471 पंचायतों तथा 45,103 गाँवों में बाँटा गया है। शहरों की संख्या 130 है। राज्य का मुख्य सचिव नौकरशाही का प्रमुख होता है जिसके नीचे क्रमानुसार आयुक्त, जिलाधिकारी, अनुमंडलाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी या अंचलाधिकारी तथा इनके साथ जुड़े अन्य अधिकारी एवं कर्मचारीगण होते हैं। पंचायत तथा गाँवों का कामकाज़ प्रत्यक्ष चुनाव से जीतकर आए मुखिया, सरपंच तथा वार्ड सदस्यों के अधीन संचालित किया जाता है। कानून व्यवस्था के संचालन के लिए बनाए गए 41 पुलिस जिलों के अंतर्गत 853 थाने आते हैं जिनमें 4 रेलवे पुलिस जिले तथा 40 रेलवे थाने शामिल हैं। आरक्षी निरीक्षक (पुलिस इंसपेक्टर), निरीक्षक (इंसपेक्टर), आरक्षी अधीक्षक (सुपरिंन्टेंडेंट ऑफ पुलिस), आरक्षी उप महानिरीक्षक (डीआईजी), आरक्षी महानिरीक्षक (आईजीपी) तथा आरक्षी महानिदेशक (डीजीपी) क्रमश: श्रेणीक्रम में अपना कर्यभार देखते है (?)।
पटना, तिरहुत, सारण, दरभंगा, कोशी, पूर्णिया, भागलपुर, मुंगेर तथा मगध प्रमंडल के अन्तर्गत आनेवाले जिले इस प्रकार हैं:

प्राकृतिक प्रदेश[संपादित करें]

बिहार के दक्षिण में छोटानागपुर का पठार, जिसका अधिकांश हिस्सा अब झारखंड है, तथा उत्तरी भाग में हिमालय पर्वत की नेपाल श्रेणी है। राज्य के 94.2 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में से 53300 वर्ग किमी गंगा का उत्तरी मैदान है जबकि 40900 वर्ग किमी दक्षिण बिहार में पड़ता है। भौगोलिक तौर पर बिहार को तीन प्राकृतिक भागों में बाँटा जाता है- उत्तर का पर्वतीय एवं तराई भाग, मध्य का विशाल मैदान तथा दक्षिण का पहाड़ी किनारा

  • उत्तर का पर्वतीय प्रदेश सोमेश्वर श्रेणी का हिस्सा है। इस श्रेणी की औसत ऊँचाई 455 मीटर है परन्तु इसका सर्वोच्च शिखर 874 मीटर उँचा है। सोमेश्वर श्रेणी के दक्षिण में तराई क्षेत्र है। यह दलदली क्षेत्र है जहाँ साल वॄक्ष के घने जंगल हैं। इन जंगलों में प्रदेश का इकलौता बाघ अभयारण्य वाल्मिकीनगर में स्थित है।
  • मध्यवर्ती विशाल मैदान बिहार के 95% भाग को समेटे हुए है। नदियों की अपवाह प्रणाली, बाढ, वर्षा और मिट्टी के चरित्र में आनेवाली क्षेत्रीय विशेषताओं के कारण बिहार के मैदान को तीन क्षेत्रों में बाँटा जा सकता है:-

1- तराई क्षेत्र यह सोमेश्वर श्रेणी के तराई में लगभग 10 किलोमीटर चौ़ड़ा कंकर-बालू का निक्षेप है। इसके दक्षिण में तराई उपक्षेत्र है जो प्रायः दलदली है।
2-भांगर क्षेत्र यह पुराना जलोढ़ क्षेत्र है। सामान्यतः यह आस-पास के क्षेत्रों से 7-8 मीटर ऊँचा रहता है।
3-खादर क्षेत्र इसका विस्तार गंडक से कोसी नदी के क्षेत्र तक सारे उत्तरी बिहार में है। प्रत्येक वर्ष आने वाली बाढ़ के कारण यह क्षेत्र बहुत उपजाऊ है। परन्तु इसी बाढ़ के कारण यह क्षेत्र तबाही के कगार पर खड़ा है।

  • दक्षिणी पहाड़ी किनारा

मौसम एवं जलवायु[संपादित करें]

राज्य का औसत तापमान गृष्म ऋतु में 35-45 डिग्री सेल्सियस तथा जाड़े में 5-15 डिग्री सेल्सियस रहता है। जाड़े का मौसम नवंबर से मध्य फरवरी तक रहता है। अप्रैल में ग्रीष्म ऋतु का आरंभ होता है जो जुलाई के मध्य तक रहता है। जुलाई-अगस्त में वर्षा ऋतु का आगमन होता है जिसका अवसान अक्टूबर में होने के साथ ही ऋतु चक्र पूरा हो जाता है। औसतन 1205 मिलीमीटर वर्षा का वार्षिक वितरण लगभग 52 दिनों तक रहता है जिसका अधिकांश भाग मानसून से होनेवाला वर्षण है।

भूमि संसाधन[संपादित करें]

बिहार की अर्थव्यवस्था में भूमि संसाधन का स्थान सर्वोपरि है। राज्य के सभी भागों में भूमि प्रायः उपजाऊ एवं कृषियोग्य है लेकिन सघन जनसंख्या के चलते भूमि पर दबाव अधिक है। कृषि योग्य कुल 93.6 लाख हेक्टेयर भूमि में से 56.03 लाख हेक्टेयर क्षेत्र पर शुद्ध रूप से खेती की जाती है [1]। राज्य में 6764.14 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र है जो कुल भूमि का मात्र 7.1% है। मृदा के प्रकार, वर्षा तथा तापमान का वितरण तथा स्थलाकृतियों के हिसाब से बिहार के मैदान को इस प्रकार बाँटा गया है:

  • उत्तरी जलोढ मैदान
  • उत्तर-पूर्वी जलोढ मैदान
  • दक्षिण-पूर्वी जलोढ मैदान
  • दक्षिण-पश्चिमी जलोढ मैदान
मैदानी भाग एवं कृषि

राज्य की जनसंख्या का 76% कृषि से जुड़ा है। मुख्यतः खरीफ या रबी मौसम में खेती की जाती है। खरीफ फसलों का समय मध्य मई से प्रारंभ होकर अक्टुबर तक रहता है जबकि जाड़े के आरंभ होने पर रबी फसलें बोयी जाती है। फसल एवं ऋतु के पारस्परिक संबंधों पर राज्य की कृषि चार वर्गों में विभाजित है:

  • भदई (शरदकालीन)- मानसून पूर्व की वर्षा पर आधारित भदई फसलें भादों महीने (अगस्त-सितंबर) तक तैयार हो जाती है। मक्का, ज्वार, जूट तथा धान की कुछ विशेष किस्में भदई कहलाती हैं।
  • अगहनी (शीतकालीन) बिहार की कृषि में अगहनी फसल का स्थान सर्वोपरि है। इसकी बुआई जून में की जाती है और अगहन (दिसंबर) में तैयार हो जाता है। अगहनी फसल में धान प्रमुख है।
  • रबी (वसंतकालीन)- गेहूँ, जौ, चना, खेसारी, मटर, मसूर, अरहर, अलसी, सरसों आदि फसलें रबी के अन्तर्गत आती है। इनकी बुआई अक्टुबर-नवम्बर के महीने में होती है और गर्मी के प्रारंभ होने तक तैयार हो जाती है। राज्य में कुल भूमि के एक तिहाई हिस्से पर रबी फसल बोई जाती है।
  • गरमा (ग्रीष्मकालीन)- आर्द्र भूमि वाले कुछ क्षेत्रों में विशेष किस्म की धान, मक्का तथा सब्जियों की खेती की जाती है। सिंचाई व्यवस्था में प्रगति के साथ गरमा कृषि के प्रसार की अच्छी संभावना है।

धान, गेहूँ, मक्का, दलहन, तिलहन, तम्बाकू,सब्जी तथा केला, आम और लीची जैसे फलों की खेती की जाती है। हाजीपुर का केला,दरभंगा का आम तथा मखाना एवं मुजफ्फरपुर की लीची तथा शहद बहुत प्रसिद्ध है| लीची (28000 हेक्टेयर में) तथा शहद के उत्पादन में बिहार देश में अव्वल है [2]। वर्ष 2005 के आँकड़ों के मुताबिक देश के कुल पैदावार की तुलना में कुछ महत्वपूर्ण फसलों का उत्पादन स्तर इस प्रकार है:-

  • फल: लीची- 88%, आम- 15%), अमरूद- 19%), अन्नानास- 9%, केला- 3%
  • सब्जी: भिंडी- 28%, गोभी- 20%, प्याज- 18%, बैंगन- 14%, बंदगोभी- 10%, टमाटर- 8%,
  • खाद्यान्न: चावल- 50.94 लाख टन (6%), गेहूँ- 41.08 लाख टन (6%), मक्का- 11%, दलहन- 4%, तिलहन- 1%
  • नगदी फसलें: जूट- 9%, गन्ना- 1%, आलू-4%, तम्बाकू, मिर्च तथा फूल की विभिन्न किस्में

इसके अतिरिक्त देश का लगभग आधा शहद (मधु) बिहार में तैयार होता है जहाँ इससे 106,000 परिवार जुड़े हैं। कृषि से जुड़े विषयों पर शिक्षा तथा शोध के लिए राज्य में संस्थानों की आधारभूत संरचना है। राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय, पुसा (समस्तीपुर) तथा इसके अन्तर्गत ३६ जिलों में खोले गए कृषि विज्ञान केंद्र बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में होने वाले फसलों तथा बागवानी को बढावा देने में सक्षम है। इसके अतिरिक्त राज्य में लीची, मखाना तथा पान पर शोध के लिए मुजफ्फरपुर में राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र की स्थापना भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा की गयी है।

पहाड़ी भाग
  • राजगीर की पहाड़ियाँ
  • बराबर की पहाड़ियाँ
  • बटेश्वर की पहाड़ियाँ
  • कैमूर की पहाड़ियाँ
  • ब्रह्मयोनि पहाड़ी
  • प्रेतशिला पहाड़ी
  • रामशिला पहाड़ी
दलदली क्षेत्र

सामान्यतः चौर कहा जाने वाला यह क्षेत्र बिहार में कई भौगोलिक विशेषताओं का प्रदेश है। कई दलदली भाग तो इतने विशाल हैं कि यह जैव विविधताओं के अतिरिक्त नदियों का उद्गम स्थल भी है। पटना, नालंदा तथा मुंगेर जिलों में जलजमाव का क्षेत्र तालक्षेत्र कहलाता है।

जल संसाधन[संपादित करें]

चित्र:RiverBasinMap-Bihar.jpg
बिहार की नदियों का अपवाह क्षेत्र
जलस्रोत

बिहार राज्य के धरातलीय स्रोत 15 नदियों के प्रवाह प्रदेश में विभाजित है। राज्य का उत्तरी मैदान धरातलीय तथा भूमिगत जल दोनों ही दृष्टि से संपन्न है। गंगा के दक्षिणी मैदान में उपयोग में लाने योग्य जल संसाधन की मात्रा उत्तरी बिहार की तुलना में कम है किंतु इसी भाग में जल संसाधन का अपेक्षाकृत अधिक उपयोग हुआ है। हिमालय, छोटानागपुर का पठार तथा विंध्याचल की पहाड़ियों से उतरने वाली कई नदियाँ तथा जलधाराएँ बिहार में प्रवाहित होकर गंगा में विसर्जित होती हैं। गंगा नदी राज्य के लगभग बीचों-बीच बहती है। उत्तरी बिहार का समतल मैदान घाघरा, गंडक, बूढी गंडक, बागमती, अधवारा, कमला, कोसी और महानंदा नदियों का प्रवाह प्रदेश है। कर्मनाशा, सोन, पुनपुन, किऊल-हरोहर, वडुआ, चंदन तथा चीर नदियों के सात प्रवाह प्रदेश बिहार में गंगा का दक्षिणी मैदान से बहनेवाली नदियाँ हैं। वर्षा के दिनों में उत्तर बिहार की नदियों में बाढ़ एक बड़ी समस्या है। राज्य की प्रमुख नदी-बेसिन का अपवाह क्षेत्र, नदियों की लंबाई तथा बाढ प्रभावित क्षेत्र इस प्रकार है:

नदी बेसिन अपवाह क्षेत्र
(वर्ग किमी)
नदी की लंबाई
(किमी)
बाढ प्रभावित क्षेत्र
(वर्ग किमी)
गंगा 19322 445 12920
कोसी 11410 260 10150
बूढी गंडक 9601 320 8210
किऊल हरोहर 17225 ? 6340
पुनपुन 9026 235 6130
महानंदा 6150 376 5150
सोन 15820 202 3700
बागमती 6500 394 4440
कमला बलान 4488 120 3700
गंडक 4188 260 3350
घाघरा 2995 83 2530
चंदन 4093 118 1130
वडुआ 2215 130 1050
कुल ? ? 68800
सिंचाई के साधन

बिहार में कृषियोग्य भूमि का 43.86 लाख हेक्टेयर कुलक्षेत्र तथा 33.51 लाख हेक्टेयर शुद्ध कृषि क्षेत्र विभिन्न साधनों द्वारा सिंचित है। राज्य में सिंचाई का सर्वप्रमुख साधन नहरें हैं जो नित्यवाही कोटि के अन्तर्गत आती है। कुआँ, नलकूप तथा तालाब अन्य प्रमुख साधन हैं। बिहार की सरकारी नहरें मुख्य रूप से भोजपुर, बक्सर, रोहतास, गया औरंगाबाद, पटना, मुंगेर, सहरसा, मधेपुरा, दरभंगा, सीतामढी, मुजफ्फरपुर तथा चंपारण जिलों में स्थित है। सिंचाई की दृष्टि से बिहार की निम्नलिखित नहरें महत्वपूर्ण हैं:

  • सोन नहर सोन नदी से डिहरी के समीप निकाली गयी नहरों की कुल लंबाई 1600 किमी तथा सिंचित क्षेत्र 5,35,530 हेक्टेयर है। ये नहरें पश्चिम में भोजपुर, बक्सर तथा रोहतास तथा पूर्व में पटना औरंगाबाद, जहानाबाद तथा गया जिले के अधिकांश क्षेत्रों में सिंचाई करती है।
  • त्रिवेणी नहर 377 किमी लंबाई की नहर का नि‍र्माण गंडक नदी पर बाँध बनाकर किया गया है जो पूर्वी तथा पश्चिमी चंपारण के 85,980 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई करती है।
  • गंडक नहर त्रिवेणी बाँध के समीप ही बाल्मिकीनगर के समीप निकाली गयी नहरों से बिहार के चंपारण, छपड़ा, मुजफ्फरपुर तथा दरभंगा जिलों में सिंचाई होती है।
  • कोसी नहर बिहार का शोक कही जाने वाली कोसी नदी द्वारा उत्पन्न बाढ संकट पर नियंत्रण तथा इस क्षेत्र को सिंचित करने के उद्देश्य से 1954 में नेपाल सरकार के साथ हुए समझौते के तहत कोसी नदी पर भीमनगर के समीप बांध बनाकर पश्चिमी कोसी तथा पूर्वी कोसी नहर का निर्माण किया गया है। कोसी नहर प्रणाली से सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया तथा अररिया जिलों के लगभग 9.96 लाख हेक्टेयर भूमि में सिंचाई होती है।
  • कमला नहर दरभंगा जिले के उत्तरी भाग में प्रवाहित कमला नदी से नेलाली गयी नहर प्रमुख रूप से मधुबनी जिले की सिंचाई करती है।
  • वडुआ जलाशय से निकले गए नहर से भागलपुर तथा मुंगेर के 37532 हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई होती है।
जलविद्युत का विकास

समतल प्रदेश होने के कारण जलविद्युत के विकास की संभावनाएँ सीमित हैं लेकिन पश्चिमी चम्पारण का तराई क्षेत्र, कैमूर की पहाड़ियाँ तथा सोन नदी से निकलने वाली नहरों के प्रपात पर जल विद्युत आधारित शक्ति केंद्र लगाए जा रहे हैं। अभी सोन नहर प्रणाली पर ४५ मेगावाट जलविद्युत स्थापित है। बाल्मिकीनगर के पास भैंसालोटन में तथा नेपाल सीमा पर भीमनगर में कोसी बैराज पर जल शक्ति केंद्र संचालित है। हाल में राज्य सरकार द्वारा त्रिवेणी (३ मेगावाट), अगनूर, नासिरीगंज, ढेलाबाग, जयनगरा तथा श्रीखिंडा (प्रत्येक १ मेगावाट) लघु जलविद्युत परियोजनाएँ पुरा कर लिया गया है। बिहार राज्य जलविद्युत निगम[1]सहरसा में स्थापित होनेवाला १२६ मेगावाट की डागमारा परियोजना, ४५० मेगावाट की इंद्रपुरी परियोजना तथा कोसी बेसिन में २२६ मेगावाट की परियोजनाओं को वित्तीय संस्थाओं से ऋण लेकर कार्यान्वित करने हेतु प्रयासरत है।

खनिज संसाधन[संपादित करें]

अविभाजित बिहार खनिज संपदा के दृष्टिकोण से भारत के सबसे धनी राज्यों में एक था। सन 2000 में झारखंड के अलग होने के बाद खनिज के कुल संचित भंडार का अधिकांश हिस्सा अलग हो गया। गंगा तथा इसकी सहायक नदियों के मैदानी भाग में खनिजों का सख्त अभाव है। जहाँ-तहाँ थोड़ी मात्रा में शोरा, रेह तथा चिकनी मिट्टी पायी जाती है। वर्तमान में राज्य में खनिजों का वार्षिक उत्पादन इस प्रकार है:
स्टेटाइट- 945 टन पायराईट - 9,539 टन क्वार्टजाइट - 14,865 टन अभ्रक - 53 टन चूना-पत्थर - 4,78,000 टन

जनसंख्या एवं अधिवास[संपादित करें]

जनसांख्यीय परिदृश्य

बिहार राज्य की जनसंख्या 104,099,452 है जिसमें 54,278,157 पुरूष तथा 49,821,295 स्त्रियाँ हैं(2011)। 1,102 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर जनसंख्या के घनत्व के हिसाब से भारत में सबसे सघन राज्य है।प्रति हजा़र स्त्री-पुरूष अनुपात 916 है। गोपालगंज जिले का स्त्री-पुरूष अनुपात सार्वाधिक (1021) है। साक्षरता का स्तर 63.82% है जो राष्ट्रीय औसत से नीचे है।

अधिवास स्तर एवं वितरण

बिहार का अधिवास स्तर इसके भौतिक एवं सांस्कृतिक तथा क्षेत्रीय परिवेश का परिचायक है। लगभग सारा अधिवास क्षेत्र गंगा के मैदानी भाग में है। क्रियात्मक स्वरुप के आधार पर यहाँ का अधिवास ग्रामीण तथा नगरीय जैसे दो भागों में विभक्त है। कृषिभूमि का बिखराव, जंगल, बाढ, वर्षा तथा धरातलीय जल की प्रचुरता के अनुसार ग्रामीण अधिवास सघन या प्रकीर्ण क्षेत्र में इस प्रकार बँटा है:
ग्रामीण अधिवास

  • उत्तर-पूर्वी प्रकीर्ण अधिवास क्षेत्र
  • गंगा, बूढी गंडक दोआब का अर्ध प्रकीर्ण अधिवास
  • दियारा क्षेत्र का प्रकीर्ण अधिवास
  • गंगा मैदान के अन्य क्षेत्रों की सघन बस्तियाँ

सघन नगरीय अधिवास

परिवहन एवं संचार[संपादित करें]

यातायात एवं परिवहन
  • रेल परिवहन
    समतल भूप्रदेश होने के चलते बिहार में रेल परिवहन का अच्छा नेटवर्क है। दिल्ली से पटना तथा गया होकर कोलकाता जानेवाली तथा हाजीपुर- मुजफ्फरपुर-बरौनी होकर गुवाहटी जानेवाली रेल लाईनें बिहार में महत्वपूर्ण है। रेलसंपर्क से जुड़े देश के सभी हिस्से के लिए बिहार से गाड़ियाँ जाती है।
  • जल परिवहन
    व्यापार के लिए जल परिवहन बिहार में सबसे पुराना माध्यम रहा है। गुप्तकाल, मुगलकाल तथा ईस्ट इंडिया कंपनी के ज़माने में गंगा तथा गंडक नदी के माध्यम से व्यापार के चलते बिहार एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका था। सड़क तथा रेल परिवहन के आने से नदियों के द्रारा होनेवाला माल ढुलाई अब काफी कम हो चुका है लेकिन हाल में भारत सरकार के अंतर्देशीय जल परिवहन नीति में बदलाव आने से बिहार का स्थान पुनः महत्वपूर्ण हो गया है। इलाहाबाद से हल्दिया को गंगा के द्वारा जोडनेवाला 1680 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय जलमार्ग 1 बिहार होकर गुजरता है। बिहार की राजधानी पटना सहित अन्य कई महत्वपूर्ण शहर जैसे बक्सर, आरा, मुंगेर, भागलपुर आदि इस राष्ट्रीय जलमार्ग स्थित है। परिवहन के लिए गंगा नदी के अतिरिक्त गंडक, सोन तथा इससे निकलनेवाली नहरों का भारवहन के लिए खूब प्रयोग किया जाता है। वास्तव में, पश्चिमी बिहार से पूर्वी बिहार तक माल ढुलाई तथा नागरिक यातायात के लिए यह सबसे सस्ता तथा तेज माध्यम हो सकता है।
    वर्ष 2004 में स्थापित देश का एकमात्र राष्ट्रीय अंतर्देशीय नौकायन संस्थान पटना के गायघाट में स्थित है।
  • वायु परिवहन
    राज्य में पटना तथा बोधगया में सीमित अंतरराष्ट्रीय उड़ानो के लिए वायुपट्टी है जबकि मुजफ्फरपुर, दरभंगा, जोगबनी (पूर्णिया) तथा रक्सौल में बने एयरपोर्ट गैर-सिविल कार्यों के लिए प्रयोग में लाए जाते हैं।
संचार व्यवस्था

बिहार में रेडियो तथा दूरसंचार का अच्छा नेटवर्क मौजूद है। पटना, मुजफ्फरपुर तथा दरभंगा में प्रसार भारती द्वारा नियंत्रित आकाशवाणी केंद्र कार्यरत है। बीएसएनएल के अलावे प्रायः सभी दूरसंचार कंपनियाँ अपनी सेवा ग्राहकों को देती है। एयरटेल, रिलाएंस, आईडिया तथा एयरसेल ने समूचे राज्य में अपना जाल फैला रखा है। राज्य के सभी प्रखंडों में डाकघर तथा बैंकिंग सुविधा उपलब्ध है।

उद्योग एवं व्यापार[संपादित करें]

राज्य के बँटवारे के पश्चात बिहार के भारी उद्योगों का समूह झारखंड में चला गया। विभाजित बिहार में खनिज संसाधन की अल्पता के चलते भारी उद्योग का सीमित विकास ही संभव है लेकिन कृषि आधारित उद्योगों के लिए यहाँ उपयुक्त माहौल है। वर्तमान में बिहार में वृहत तथा मध्यम आकार के कुल 250 इकाईयाँ है जिनमें सार्वाधिक पटना (72), वैशाली (22), मुजफ्फरपुर (18) तथा बेगुसराय (16) जिले में है। महत्वपूर्ण उद्योगों में बरौनी स्थित तेलशोधन तथा उर्वरक कारखानों के अलावे सिमेंट, इलेक्ट्रिकल, ग्लास तथा कपड़ा उद्योग शामिल है। बिहार में देश के सब्जी का 9% तथा फलों का 8% उत्पादन होता है। लीची, मधु तथा मखाना उत्पादन में तो राज्य अव्वल है। यहाँ देश के कुल उत्पादन का 88% लीची, 83% मखाना तथा 50% मधु पैदा किया जाता है। कृषि आधारित तथा खाद्य-प्रसंस्करण उद्योगों के विकास की यहाँ अच्छी संभावना है।

  • खनिज आधारित उद्योग
  • कृषि आधारित उद्योग

== बिहार का सबसे लोकप्रिय गाँव अमौरा,

अमौरा बिहार के रोहतास जिले का सबसे लोकप्रिय गाँव है। यहाँ का पिन कोड 802214 है।

अमौरा का काली मंदिर और भी लोकप्रिय है

ये गाँव अभी पूरी तरह से विकसित नही है फिर भी बहुत अच्छा है।बिहार के बांका जिला के रजौन प्रखंड में मछली का उत्पादन किया जाता है।इसके लिए महादा गाँव प्रसिद्ध है।

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

1.जल संसाधन विभाग, बिहार सरकार का अधिकारिक बेवजाल
2.उद्योग विभाग, बिहार सरकार का अधिकारिक बेवजाल

  1. http://www.bshpcltd.com/newsitem.htm