बाँका

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search
बाँका
Banka
बाँका की बिहार के मानचित्र पर अवस्थिति
बाँका
बाँका
बिहार में स्थिति
सूचना
प्रांतदेश: बाँका ज़िला
बिहार
Flag of India.svg भारत
जनसंख्या (2001): 35,416
मुख्य भाषा(एँ): अंगिका, हिन्दी
निर्देशांक: 24°53′N 86°55′E / 24.88°N 86.92°E / 24.88; 86.92

बाँका (Banka) भारत के बिहार राज्य के बाँका ज़िले में स्थित एक नगर है। यह उस ज़िले का मुख्यालय भी है।[1][2]

इतिहास[संपादित करें]

यह एक अत्यंत प्राचीन शहर है। पुराणों में और महाभारत में इस क्षेत्र को अंग प्रदेश का हिस्सा माना गया है। इस अंग प्रदेश के निकट स्थित चम्पानगर महान पराक्रमी शूरवीर कर्ण की राजधानी मानी जाती रही है। यह बिहार के मैदानी क्षेत्र का आखिरी सिरा और झारखंड और बिहार के सीमा का मिलन स्थल है। यहाँ का निकटतम हवाई अड्डा गया और पटना है। रेल और सड़क मार्ग से भी यह शहर अच्छी तरह जुड़ा है। पुराणों में वर्णित समुद्र मंथन में प्रयुक्‍त मथान अर्थात मंदराचल तथा मथानी में लपेटने के लिए जो रस्‍सा प्रयोग किया गया था वह दोनों ही उपकरण यहाँ विद्यमान हैं और आज इनका नाम तीर्थस्‍थ‍लों के रूप में है ये हैं वासुकिनाथ और मंदारहिल. इस शहर मे बहुत ही अछे-अछे विधालय भी है। शहर में एक महाविधालय भी है - पी० बी० एस० महाविधालय।

भागलपुर का कुख्यात अखफोड़वा कांड रजौन थाने से ही शुरू हुआ था, और सबसे ज्यादा कांड यहीं हुआ था। इस पर गंगाजल पिक्चर भी बनी है. रजौन प्रखन्ड में कुछ गांव है:-तेलोन्ध खिड्डी, बनगांव, नरीपा, नीमा, नवादा, धर्मचक, सोहानि, खैरा आदि, खैरा में एक प्रसिद्ध मन्दिर भी है।

उपविभाग[संपादित करें]

बाँका जिले में ११ तहसिलें हैं- बाँका, रजौन, अमरपुर, धोरैया, कटोरिया, बौसी, शंभुगंज, बाराहाट, बेलहर, चांदन,तेलोन्ध फूल्लीडूमर।

मुख्य आकर्षण[संपादित करें]

मंदार पहाड़ी- वैसे तो यहाँ अनेक पहाड़ी है लेकिन कुछ देखने लायक है, इसमें से एक है मंदार पहाड़ी। यह पहाड़ी भागलपुर से 48 किलोमीटर की दूरी पर है, जो अब बांका जिले में स्थित है। इसकी ऊंचाई 800 फीट है। इसके संबंध में कहा जाता है कि इसका प्रयोग सागर मंथन में किया गया था। किंवदंतियों के अनुसार इस पहाड़ी के चारों ओर अभी भी शेषनाग के चिन्‍ह को देखा जा सकता है, जिसको इसके चारों ओर बांधकर समुद्र मंथन किया गया था। कालिदास के कुमारसंभवम में पहाड़ी पर भगवान विष्‍णु के पदचिन्‍हों के बारे में बताया गया है। इस पहाड़ी पर हिन्‍दू देवी देवताओं का मंदिर भी स्थित है। यह भी माना जाता है कि जैन के 12वें तिर्थंकर ने इसी पहाड़ी पर निर्वाण को प्राप्‍त किया था। लेकिन मंदार हिल की सबसे बड़ी विशेषता इसकी चोटी पर स्थित झील है। इसको देखने के लिए दूर-दूर से पर्यटक आते हैं। पहाड़ी के थीक नीचे एक पापहरनी तलाब है, इस तलाब के बीच में एक विष्णु मन्दिर इस दृश्य को रोमान्चक बानाता है। यहाँ जाने के लिये भागलपुर से बस और रेल दोनों की सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावे यहा चान्दन डैम और कोज़ी डैम भी देखने लायक है। यहाँ से देवघर और बाबा बासुकीनाथ नजदीक है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Bihar Tourism: Retrospect and Prospect," Udai Prakash Sinha and Swargesh Kumar, Concept Publishing Company, 2012, ISBN 9788180697999
  2. "Revenue Administration in India: A Case Study of Bihar," G. P. Singh, Mittal Publications, 1993, ISBN 9788170993810