बाँका

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बाँका
Banka
बाँका Banka की बिहार के मानचित्र पर अवस्थिति
बाँका Banka
बाँका
Banka
बिहार में स्थिति
निर्देशांक: 24°53′N 86°55′E / 24.88°N 86.92°E / 24.88; 86.92निर्देशांक: 24°53′N 86°55′E / 24.88°N 86.92°E / 24.88; 86.92
प्रांत और देशबाँका ज़िला
बिहार
Flag of India.svg भारत
जनसंख्या
 • कुल35,416
भाषा
 • प्रचलित भाषाएँअंगिका, हिन्दी

डिमई ग्राम बांका जिला का मुख्य ग्राम है जहां के लोग बहुत अच्छे है बकार्डी जिला के जितने भी गांव हैं उनमें सबसे बेहतरीन इंसानों के अगर खोज की जाए तो आपको डिमई ग्राम में ही मिलेंगे।ये बात भी सत्य है कि यहां के लोगों की इक्षा है कि यहां की फिल्ड को बड़ा किया जाए।या के मुखिया जी के पास फंड आया था फिल्ड को चौड़ा करने के लिए लेकिन मुखिया जी ने पैसा खर्च नहीं किया जो फील्ड पहले से तैयार था उसी को ट्रैक्टर से खुलवा कर वापस मिट्टी को बराबर कर दिया और मीडिया वाले को बताया कि हमने फील्ड बनाया है जबकि वह फिल्म 1954 से ही बनी हुई है यहां के लोगों का कहना है कि पास के एक पोखर है जहां पर छठ पर्व करने के लिए घाठ बनाया जाए और एक छोटा सा जंगल है जिसको काटकर फिल्ड को बड़ा किया जाए गांव वाले की यह मांग है हम जिला अध्यक्ष महोदय से भी अभिनति करते हैं इस काम को जल्द से जल्द कराया जाए और कुछ अच्छे व्यक्तित्व के हाथों यह काम करवाया जाए क्योंकि जिन को यह काम दिया गया था उन्होंने पैसा चंपत कर गए जो काम किया हुआ था पहले से उसको भी बर्बाद कर दिया। और कुछ बोला तो एक नेता ने गांव वाले की बात को दबा दिया (Banka) भारत के बिहार राज्य के बाँका ज़िले में स्थित एक नगर है। डिमई है।[1]<ref>"Revenue Administration in India: A Case Study of Bihar," G. P. Singh, Mittal Publications, 1993, ISBN 9788170993810</re/> नमस्कार आप सभी भाईयों को मेरा प्रणाम है । मैं इंद्रजीत कुमार झा आज आपको एक ऐसे जगह के बारे में बताऊंगा जिसके बारे में सताद आपको मालूम नहीं होगा।जानना भी बेहद जरूरी ही कि आज के समय में बांका जिला का नाम विश्व भर मेजना जाता है जिसका श्रेय भी बांका की जनता की ही जाता है ।बांका के लोगों ने कई सारी खूबी दिखाई है देस में बड़े बड़े कारनामे किए हैं अमेरिका के कई संस्थानों में बांका के युवक बड़े बड़े पोस्ट को संभालते हैं ।ताज्जुब की बात ये है कि आज भारत के लोग बांका जिला के लोगों का सम्मान करते हैं क्योंकि यहां के लोग पूरे विश्व भर में नई नई टेक्नालॉजी को निर्मित करती है अमेरिका में बनी हुईबड़ी-बड़ी टेक्नोलॉजी ऐसी है जिसका नाम सुनकर आप हैरान रह जाएंगे और उसके बाद आप अचंभित हो जाएंगे कि उसका निर्माण भी बांका डिस्टिक के युवाओं ने ही किया है यह बात अलग है कि इसका निर्माण अमेरिका में ही हुआ लेकिन बनाने वाला तो कोई बांका जिला का ही व्यक्ति था। हमें टैलेंट भरपूर मात्रा में है हां यह बात सच है कि हमें सुविधा नहीं मिलती है जिससे कि हम अपने हुनर को सही मायने में दिखा पाएगी आखिरकार विकास कैसे हो सकता है हम लोगों में इतनी ऊर्जा है इतनी साहस इतनी ताकत है इतना होना है कि हम अपने दम पर कामयाब हो सकते हैं हमें किसी के टुकड़ों पर पलने की जरूरत नहीं लेकिन हमें सही दिशा निर्देश मिलना चाहिए वह चीज हमें मिलनी चाहिए जिसको हम पाना चाहते हैं जैसे किसी भी क्षेत्र में अगर हमें कुछ करने का मन है तो उस क्षेत्र में सारी चीजें हमें उपलब्ध होनी चाहिए आर्थिक कमजोरी के कारण लोग पढ़ाई नहीं कर पाते कई तरह की मजबूरियां होती है जिसके कारण आज भी बांका डिस्टिक के कई युवा बेरोजगार है घरों में बैठे हैं उनके पास डिग्री तो है मगर नौकरी नहीं है डिग्री लेकर बैठे हुए हैं लेकिन नौकरी नहीं मिली है बांका डिस्टिक के गांव जिसका नाम है डिमई । डिमई ग्राम प्राकृतिक रूप से एक बेहतरीन जगह है जहां चरी तरफ हरियाली ही हरियाली है। मैं कई सालों से ये देख रहा हूं कि डिमई का विकास सही ढंग से नहीं हुआ है। डिमई के लगभग सारे युवा बेरोजगार ही है जिसके इस कोई काम नहीं है वो ऐसे ही दिनभर किसी भी प्रकार से जीवन गुजारा करने की मजबूत है।बना के DM साहब से में उम्मीद करता हूं कि एक डिमई में एक हाई स्कूल जरूर खोलने पर ध्यान देंगे क्योंकि यहां वर्तमान में जोगी मिडिल स्कूल है उसमें मास्टर जी नहीं है शिक्षा नहीं हो पाती है छोटे-छोटे बच्चे ऐसे ही खेलते रहते हैं पढ़ाई या नहीं होती है बताइए कामयाब कैसे बनेंगे यहां के बच्चे जो भी मास्टर हैं उनको कुछ आता नहीं है आसपास के क्षेत्र हैं जैसे लोडिया रागनियां जहां के बच्चे भी पढ़ने आते हैं लेकिन उसकी सिक्षा जिस प्रकार होनी चाहिए नहीं मिल पाती है बच्चों के पास किताब नहीं है कपड़े नहीं है पैसे नहीं हैं अनेकों तरह की परेशानियां हैं उनके मां बाप गरीब हैं उनके पास पैसा नहीं है आखिर करें तो करें किया।सिर्फ डी माई की ही बात नहीं है आसपास के तमाम बस्तियों की हालत यही है किसी भी मायने में कहें तो यह सही नहीं है क्योंकि जब बच्चों को अच्छा माहौल ही नहीं मिलेगा अच्छे स्कूल ही नहीं मिलेंगे अच्छे शिक्षक नहीं मिलेंगे अच्छा वातावरण नहीं मिलेगा तो बच्चा कैसे विकास कर पाएगा संभव ही नहीं है मैं चाहूंगा कि बांका के डीएम साहब या फिर जिला अध्यक्ष महोदय जी से प्रार्थना करना चाहता हूं कि वह कुछ बेहतर करने की कोशिश करें इस क्षेत्र में बहुत दयनीय स्थिति है दलितों की ही समस्या का ब्यौरा देना चाहो तो उनकी हालत बहुत जर्जर हो चुकी है लोग दूसरे के घरों में जाकर दो सो ₹300 कमाने को मजबूर हैं यहां के लोग दूसरे राज्यों में जाकर 10,000 15,000 की नौकरी करने के लिए मजबूर हैं क्योंकि इनके अलावा उनके पास और कोई रास्ता नहीं है यहां के लोग इतने परेशान हैं यहां के लोग हर बार छोड़ने के लिए जान की बाजी लगाकर यहां से शहर की तरफ भाग रहे मजबूरी है क्या करें। अगर एक बात कहूं तो बांका के पोलिटिक्स में बीजेपी हो या कांग्रेश विकास बेहद जरूरी है यह बात आपकी नहीं है क्योंकि जरूरी नहीं कि सरकारें इस बार ही बन रही हो सरकार कई सालों से बन रही है लोग वोट मांगने तो आते हैं लेकिन विकास नहीं करते हैं डिमई गांव में एक सरस्वती मंदिर है जिनका नाम है बलदेव सरस्वती मंदिर मंदिर के एक साइड पोखर है तो दूसरे साइड जंगल का गांव वाले चाहते हैं कि उस जंगल को झाड़ियों ज्यादा है तू झाड़ियों को हटाकर पीसीसी करा दिया जाए और उसको इतना बेहतर कर दिया जाए कि लोग दूर-दूर से यहां घूमने आने लगे एक धर्मस्थल बनाने की मांग कर रहे हैं यहां के लोग। डिमई सरस्वती मंदिर को लेकर ही फेमस है जिसका निर्माण सू अनिरुद्ध झा ने करवाया है।आज भी मंदिर दूर से ही अपनी छटा बिखरती है लोग दूर-दूर से मेरा देखने आते हैं पोखर काफी बड़ा नहीं है लेकिन पकड़ के एक साइड रोड है जो रोड डिमई गांव से होकर गुजरती है गांव वाले चाहते हैं कि बाहर के एक साइड जिस साइट छठ व्रत किया जाता है उस साइड छठ घाट बनाया जाए और उस जंगल को हटाकर एक बड़ा मैदान बनाया जाए और मंदिर के कुछ हिस्सों में मंदिर के बाहर ही कुछ ऐसा में पीसीसी करवा कर मंदिर को बेहतरीन बनाया जाएगांव वाली इसकी मांग 30 से 25 वर्ष पहले से ही कर रहे हैं लेकिन कोई भी सरकार इस बात को मानने को तैयार नहीं है जबकि इसमें ज्यादा पैसे खर्च भी नहीं होंगे जंगल में ज्यादा बड़े बड़े वृक्ष नहीं है आमतौर पर छोटे छोटे वृक्ष है जिस को हटाकर हमें लगता है कि बड़ा मैदान हो सकता है गांव वालों के लिए दूसरे गांव के लोग भी यहां पर आकर क्रिकेट खेलते हैं या फिर मेले का आयोजन होता है फिल्ड का भाग बहुत छोटा इसलिए इसको बड़ा करना बेहद जरूरी है ताकि हमें एक बड़ा मैदान मिल सके जिस पर हम क्रिकेट की प्रैक्टिस कर सकें फुटबॉल की प्रैक्टिस कर सकें हर गांव में एक बड़ा फेल होना बेहद जरूरी है इसके लिए बाकायदा हमारे पास जमीन भी है कुछ नहीं है तो सिर्फ पैसा जिससे कि हमें लगता है कि 10 से 15 हजार भी खर्च कर दिया जाए तो फील्ड जबरदस्त हो जाएगा। और पीसीसी करवाने में ज्यादा से ज्यादा 20 से ₹30000 लगेंगे मैं एक बार फिर जिला परिषद से और बांका डिस्ट्रिक्ट के नेताओं से अपील करता हूं कि कृपा करके यह काम जल्दी पूरा करवाया जाए हम कब तक छोटे फिल पर खेलते रहेंगे हमारे पास हमारे हुनर को दिखाने के लिए एक अच्छा स्टेज तो जरूर होना चाहिए हम कव्वाली चाहते हैं कि जल्द से जल्द यह फील्ड का निर्माण हो एक बार फंड भी आ चुका है इसमें फील्ड को ज्यादा बड़ा नहीं किया गया आमतौर पर उसी फील्ड को कॉल कर फिर से उसी को बराबर कर दिया गया कोला इसलिए गया था कि मीडिया वालों को यह दिखा सके कि हमने फील्ड का निर्माण किया है मटकी भरवाया है जबकि मिट्टी तो 1954 से ही भरी हुई थी मुखिया जी ने सिर्फ मिट्टी कर दिया ट्रैक्टर से और मीडिया वालों को लाकर दिखाया कि हमने फिल्ड है इतना बड़ा झूठ बोला हम गांव वालों के साथ हमारी बातों को भी दबा दिया जाता है अब अगर डिस्टिक लेवल पर बैठे अधिकारी अगर हमारी बात नहीं सुनेंगे तो भला हम लोग कहां जाएंगे हमारे पास कोई अच्छा फिर नहीं है हम दूसरे को में जाकर क्रिकेट खेलने को मजबूर हैं। जरा जल्दी से जल्दी हमारे डिमई की फिल्ड का निर्माण करायाजाए ताकि हमें प्रैक्टिस करने के लिए एक अच्छे मंच मिल सके यहां टूर्नामेंट कराने कि कोशिश की हा रही है कुछ नहीं है तो सिर्फ के अच्छी फिल्ड।

इतिहास[संपादित करें]

यह एक अत्यंत प्राचीन शहर है। पुराणों में और महाभारत में इस क्षेत्र को अंग प्रदेश का हिस्सा माना गया है। इस अंग प्रदेश के निकट स्थित चम्पानगर महान पराक्रमी शूरवीर कर्ण की राजधानी मानी जाती रही है। यह बिहार के मैदानी क्षेत्र का आखिरी सिरा और झारखंड और बिहार के सीमा का मिलन स्थल है। यहाँ का निकटतम हवाई अड्डा गया और पटना है। रेल और सड़क मार्ग से भी यह शहर अच्छी तरह जुड़ा है। पुराणों में वर्णित समुद्र मंथन में प्रयुक्‍त मथान अर्थात मंदराचल तथा मथानी में लपेटने के लिए जो रस्‍सा प्रयोग किया गया था वह दोनों ही उपकरण यहाँ विद्यमान हैं और आज इनका नाम तीर्थस्‍थ‍लों के रूप में है ये हैं वासुकिनाथ और मंदारहिल. इस शहर मे बहुत ही अच्छे-अच्छे विद्यालय भी है। शहर में एक महाविद्यालय भी है - पी० बी० एस० महाविद्यालय।

भागलपुर का कुख्यात अखफोड़वा कांड रजौन थाने से ही शुरू हुआ था, और सबसे ज्यादा कांड यहीं हुआ था। इस पर गंगाजल पिक्चर भी बनी है. रजौन प्रखन्ड में कुछ गांव है:-तेलोन्ध खिड्डी, बनगांव, नरीपा, नीमा, नवादा, धर्मचक, सोहानि, खैरा आदि, खैरा में एक प्रसिद्ध मन्दिर भी है।

यदि स्वतंत्रता सेनानी की बात करे तो पटना सचिवालय कांड में शहिद सतीश चन्द्र झा को याद किया जाता है उनकी प्रतिमाएं ढाकामोड़ के चौराहे पर खड़ा किया गया है।

उपविभाग[संपादित करें]

बाँका जिले में ११ तहसिलें हैं- बाँका, रजौन, अमरपुर, धोरैया, कटोरिया, बौसी, शंभुगंज, बाराहाट, बेलहर, चांदन,तेलोन्ध फूल्लीडूमर।

मुख्य आकर्षण[संपादित करें]

मंदार पहाड़ी- वैसे तो यहाँ अनेक पहाड़ी है लेकिन कुछ देखने लायक है, इसमें से एक है मंदार पहाड़ी। यह पहाड़ी भागलपुर से 48 किलोमीटर की दूरी पर है, जो अब बांका जिले में स्थित है। इसकी ऊंचाई 800 फीट है। इसके संबंध में कहा जाता है कि इसका प्रयोग सागर मंथन में किया गया था। किंवदंतियों के अनुसार इस पहाड़ी के चारों ओर अभी भी शेषनाग के चिन्‍ह को देखा जा सकता है, जिसको इसके चारों ओर बांधकर समुद्र मंथन किया गया था। कालिदास के कुमारसंभवम में पहाड़ी पर भगवान विष्‍णु के पदचिन्‍हों के बारे में बताया गया है। इस पहाड़ी पर हिन्‍दू देवी देवताओं का मंदिर भी स्थित है। यह भी माना जाता है कि जैन के 12वें तिर्थंकर ने इसी पहाड़ी पर निर्वाण को प्राप्‍त किया था। लेकिन मंदार हिल की सबसे बड़ी विशेषता इसकी चोटी पर स्थित झील है। इसको देखने के लिए दूर-दूर से पर्यटक आते हैं। पहाड़ी के ठीक नीचे एक पापहरनी तलाब है, इस तलाब के बीच में एक विष्णु मन्दिर इस दृश्य को रोमान्चक बनाता है। यहाँ जाने के लिये भागलपुर से बस और रेल दोनों की सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा यहाँ चंदन डैम और कोज़ी डैम भी देखने लायक है। यहाँ से देवघर और बाबा बासुकीनाथ नजदीक है। जिले के अमरपुर प्रखंड स्थित एक पहाड़ियों के बीच एक झरना भी है जहां हर मकर सक्रांति पर एक मेले का भी आयोजन होता है जो अपने आप में एक रोचक भी है

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Bihar Tourism: Retrospect and Prospect Archived 18 जनवरी 2017 at the वेबैक मशीन.," Udai Prakash Sinha and Swargesh Kumar, Concept Publishing Company, 2012, ISBN 9788180697999