रोहतास

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रोहतास जिला
निर्देशांक: (निर्देशांक ढूँढें)
जनसंख्या
घनत्व
२४,५०,७४८
• ६३६
आधिकारिक जालस्थल: http://rohtas.bih.nic.in/


मुख्यालय: सासाराम

क्षेत्र: ३८५० किमी

जनसंख्या: २४,४८,७६२(२००१ जनगणना)

उप प्रभागों: सासाराम, डेहरी, बिक्रमगन्ज

ब्लॉक: नौहट्टा, चेनारी, नासरीगन्ज्, रोहतास, नोखा, डेहरी, बिक्रमगन्ज, दिनारा, राजपुर, शिवसागर

कृषि: धान, गेहूं, दाल

उद्योग: सीमेंट, पत्थर माइंस

नदियों: सोन, काव

नहर- जगजीवन कैनाल, गारा चौबे कैनाल

रोहतास जिला बिहार के अड़तीस जिलो में से एक है। इसका मुख्यालय सासाराम है। इस जिले में तीन अनुमंडल हैं, जिनमें डेहरी आन सोन, बिक्रमगंज और सासाराम है।

रोहतास जिले के बिक्रमगंज में मां अस्कामिनी [1]का बेहद प्राचीन मंदिर है। रोहतास जिले के रोहतासगढ़ किले का भी ऐतिहासिक महत्व है। वहीं, सासाराम में शेरशाह सूरी का प्रसिद्ध मकबरा भी अवस्थित है। ऐसा कहा जाता है कि शेरशाह सूरी ने ही वर्तमान डाक-तार व्यवस्था की शुरुआत की थी। इस जिले की सबसे खास बात यह भी है कि यहाँ का जिलाधिकारी कार्यालय सासाराम में है, जबकि पुलिस मुख्यालय डेहरी आन सोन में है। साथ में न्यायिक कार्यालय क्रमशः सासाराम और बिक्रमगंज में है। बिक्रमगंज के समीप स्थित धारुपुर की मां काली का मंदिर भी काफी प्रसिद्ध है। यह एक मात्र ऐसा मंदिर है, जो नहर के बीचों-बीच अवस्थित है।

रोहतास जिला पटना डिवीजन का एक हिस्सा है और यह ३८५० वर्ग किलोमीटर का एक क्षेत्र है, २४,४८,७६२ (२००१ जनगणना) की आबादी और किमी² प्रति ६३६ व्यक्तियों की आबादी के घनत्व। इस क्षेत्र में बोली जाने वाली भाषा भोजपुरी है। जिले के प्रशासनिक मुख्यालय, सासाराम ऐतिहासिक महत्व की एक जगह है। राष्ट्रीय गौरव का एक अन्य महत्वपूर्ण प्रतीक सोन पुल, सोन नदी के ऊपर बना हुआ है वहाँ दो समानांतर पुलों, सड़क के लिए एक और रेलवे के लिए एक और कर रहे हैं। सड़क पुल (जवाहर सेतु १९६३-६५ में गैमन इंडिया द्वारा निर्मित) सोन पर लंबे समय तक एशिया में (३०६१ मी) था जब तक यह पटना में गंगा नदी के ऊपर महात्मा गांधी सेतु (5475 मीटर) द्वारा को पार कर गया था। रेलवे पुल अभी भी सबसे लंबे समय तक एशिया में रेलवे पुल है।

इसके तीन अनुमंडल बिक्रमगन्ज, सासाराम और डेहरी है। बिक्रमगंज में अस्कामिनि माँ का मन्दिर काफी प्रसिद्ध है। बिक्रमगन्ज के पास स्थित धारुपुर काली माँ का मन्दिर भी बहुत प्रसिद्ध है। ये मन्दिर नहर के बीचोबीच है। कैमूर पर्वत श्रृंखलाओं में स्थित मां ताराचंडी का शक्तिपिठ भी है। कैमूर पहाड़ियाँ पर्यटन के लिये भी प्रसिद्ध हैं। सासाराम में प्रसिद्ध शेरशाह का मकबरा है।

इतिहास[संपादित करें]

रोहतास एक जिले का नहीं, एक इतिहास का नाम है, जो बिहार में आर्यों के प्रसार के साथ बढ़ा।  सतयुगी सूर्यवंसी राजा सत्यहरिश्चंद्र के पुत्र रोहिताश्व [2]द्वारा स्थापित रोहतासगढ़ के नाम पर इस क्षेत्र का नामकरण रोहतास हुआ। 1582 ई. यानि मुग़ल बादशाह अकबर के समय रोहतास, सासाराम, चैनपुर सहित सोन के दक्षिण-पूर्वी भाग के परगनों- जपला, बेलौंजा, सिरिस और कुटुंबा शामिल थे। 1784 ई. में तीन परगनों- रोहतास, सासाराम और चैनपुर को मिलाकर रोहतास जिला बना और फिर 1787 ई. में यह जिला शाहाबाद जिले का अंग हो गया। 10 नवम्बर 1972[3] को शाहाबाद से अलग होकर रोहतास जिला पुनः अस्तित्व में आ गया। अंग्रेजों के जमाने में यह क्षेत्र पुरातात्विक महत्व का रहा। 1861 ई. में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की स्थापना के  साथ अलेक्जेंडर कनिंघम पुरातात्विक सर्वेयर नियुक्त हुए। उन्होंने गया जिले से लेकर पश्चिम में सिंध तक के पुरास्थलों  का सर्वे किया इस क्रम में रोहतास भी अछूता न था बाद में 1871 ई. में कनिंघम को भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण का महानिदेशक नियुक्त किया गया तो उसी समय 1882 ई. में सासाराम स्थित शेरशाह रौजे का जीर्णोद्वार हुआ।

रोहतास में रोहतास के किले, मकबरे, मंदिर, और मस्जिदों के अतिरिक्त यहाँ के प्रपात,बराज एवम बांध आदि पर्यटकों को आकर्षित करने के भरपूर संभावना रखते है।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "‌Bhagwan budh, Ranchi Hindi News" (हिन्दी भाषा में). 1 दिसम्बर 2016. https://www.livehindustan.com/news/ranchi/article1-‌Bhagwan-budh-617556.html. अभिगमन तिथि: 20 दिसम्बर 2017. 
  2. "रोहतासगढ़ के किले का रहस्‍य - खजाने का रहस्‍य" (हिन्दी भाषा में). 2 फ़रवरी 2011. https://aajtak.intoday.in/video/Unsolved-mystery-of-the-Rohtasgdh-fort-1-49844.html. अभिगमन तिथि: 20 दिसम्बर 2017. 
  3. "45 साल का हुआ रोहतास -जानिए रोहतासगढ़ किले का इतिहास » AmitKumarSachin" (हिन्दी भाषा में). 10 नवम्बर 2017. http://www.amitkumarsachin.com/history-rohtas-district-rohtasgarh-fort/. अभिगमन तिथि: 21 दिसम्बर 2017.