हाजीपुर

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हाजीपुर
Hajipur
ऊपर से वामावर्त: हाजीपुर रेलवे स्टेशन, होटल प्रबन्धन संस्थान, गण्डकी नदी पर पुराना गण्डक पुल, महात्मा गाँधी सेतु, श्री यंत्र मन्दिर, मॉल, पूर्व मध्य देलवे कार्यालय
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हाजीपुर is located in बिहार
हाजीपुर
हाजीपुर
बिहार में स्थिति
निर्देशांक: 25°51′29″N 85°17′46″E / 25.858°N 85.296°E / 25.858; 85.296निर्देशांक: 25°51′29″N 85°17′46″E / 25.858°N 85.296°E / 25.858; 85.296
देश भारत
राज्यबिहार
ज़िलावैशाली ज़िला
क्षेत्रफल
 • शहर19.64 किमी2 (7.58 वर्गमील)
 • देहात137.27 किमी2 (53.00 वर्गमील)
ऊँचाई46 मी (151 फीट)
जनसंख्या (2011)
 • शहर1,47,688
 • देहात2,96,288
भाषाएँ
 • प्रचलितहिन्दी
समय मण्डलभामस (यूटीसी+5:30)
पिनकोड844101 – 844103
दूरभाष कोड+91—(0)6224
साक्षरता दर76.80%
लिंगानुपात892 / 1000
वेबसाइटvaishali.nic.in

हाजीपुर (Hajipur) भारत के बिहार राज्य के वैशाली ज़िले में स्थित एक नगर है। यह ज़िले का मुख्यालय भी है।[1][2]

विवरण[संपादित करें]

12 अक्टुबर 1972 को मुजफ्फरपुर से अलग होकर वैशाली के स्वतंत्र जिला बनने के बाद हाजीपुर इसका मुख्यालय बना। ऐतिहासिक महत्त्व के होने के अलावा आज यह शहर भारतीय रेल के पूर्व-मध्य रेलवे मुख्यालय है, इसकी स्थापना 8 सितम्बर 1996 को हुई थी। [3], राष्ट्रीय स्तर के कई संस्थानों तथा केले, आम और लीची के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। हाजीपुर एक लोकसभा निर्वाचनक्षेत्र भी है।[4]

नामकरण[संपादित करें]

आज का हाजीपुर शहर महाजनपद काल में गाँव मात्र होने के बावजूद महत्त्वपूर्ण था। गंगा तट पर स्थित बस्ती का पुराना नाम उच्चकला था। मध्यकाल में बंगाल के गवर्नर‍ हाजी इलियास शाह के 13 वर्षों के शासनकाल में यह कस्बाई का रूप लेने लगा। ऐसा माना जाता है कि गंडक तट पर विकसित हुए शहर का वर्तमान नाम उसी शासक के नाम पर पड़ा है।

इतिहास[संपादित करें]

गंगा और गंडक नदी के तट पर बसे इस शहर का धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्त्व है। हिन्दू पुराणों में गज (हाथी) और ग्राह (मगरमच्छ) की लड़ाई में प्रभु विष्णु के स्वयं यहाँ आकर गज को बचाने और ग्राह को शापमुक्त करने का वर्णन है। कौनहारा घाट के पास कार्तिक पूर्णिमा को यहाँ प्रतिवर्ष मेला लगता है। ईसा पूर्व छठी शताब्दी के उत्तरी और मध्य भारत में विकसित हुए १६ महाजनपदों में वैशाली का स्थान अति महत्त्वपूर्ण था। नेपाल की तराई से गंगा के बीच फैली भूमि पर वज्जिसंघ द्वारा गणतांत्रिक शासन व्यवस्था की शुरुआत की गयी थी। वज्जिकुल में जन्में भगवान महावीर की जन्म स्थली शहर से ३५ किलोमीटर दूर कुंडलपुर (वैशाली) में है। महात्मा बुद्ध का इस धरती पर तीन बार आगमन हुआ था। भगवान बुद्ध के सबसे प्रिय शिष्य आनंद की पवित्र अस्थियाँ इस शहर (पुराना नाम- उच्चकला) में जमींदोज है।

हर्षवर्धन के शासन के बाद यहाँ कुछ समय तक स्थानीय क्षत्रपों का शासन रहा तथा आठवीं सदी के बाद यहाँ बंगाल के पाल वंश के शासकों का शासन शुरू हुआ। तिरहुत पर लगभग 11वीं सदी में चेदि वंश का भी कुछ समय शासन रहा। तुर्क-अफगान काल में 1211 से 1226 बीच गयासुद्दीन एवाज़ तिरहुत का पहला मुसलमान शासक बना। 1323 में तुग़लक वंश के शासक गयासुद्दीन तुग़लक का राज आया। इसी दौरान बंगाल के एक शासक हाजी इलियास शाह ने 1345 ई से 1358 ई तक यहाँ शासन किया। चौदहवीं सदी के अंत में तिरहुत समेत पूरे उत्तरी बिहार का नियंत्रण जौनपुर के राजाओं के हाथ में चला गया, जो तब तक जारी रहा जब तक दिल्ली सल्तनत के सिकन्दर लोधी ने जौनपुर के शासकों को हराकर अपना शासन स्थापित नहीं किया।
बाबर ने अपने बंगाल अभियान के दौरान गंडक तट पर एक किला होने का जिक्र 'बाबरनामा' में किया है। 1572 ई॰ से 1542 ई॰ के दौरान बंगाल विद्रोह को कुचलने के क्रम में अकबर की सेना ने दो बार हाजीपुर किले पर घेरा डाला था। 18 वीं सदी के दौरान अफ़ग़ानों द्वारा शहर पर कब्जा किया गया। स्वतंत्रता आन्दोलन के समय हाजीपुर के शहीदों की अग्रणी भूमिका रही है। वसाबन सिंह, बेचन शर्मा, अक्षयवट राय, सीताराम सिंह जैसे स्वतंत्रता सेनानियों ने अंग्रेज़ी हुकूमत के खिलाफ लड़ाई में महत्त्वपूर्ण हिस्सा लिया। ७ दिसम्बर १९२० तथा १५ और १६ अक्टुबर १९२५ को महात्मा गाँधी का हाजीपुर आगमन हुआ था। पुनः बिहार में भीषण भूकम्प के बाद १४ मार्च १९३४ को बापू का तीसरी बार हाजीपुर आना हुआ।

जलवायु, भूगोल और जनसांख्यिकी[संपादित करें]

जलवायु[संपादित करें]

वैशाली जिले का यह शहर उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु क्षेत्र में है। ७° से ४५° सेंटीग्रेड वार्षिक तापान्तर तथा १०५० मिलीलीटर सालाना वर्षा के साथ यह आर्द्र क्षेत्र मुख्यतः उत्तर-पश्चिमी मानसूनी वर्षा पर निर्भर करता है। मई-जून में 'लू' का चलना तथा दिसम्बर-जनवरी के महीनों में 'शीतलहर' का प्रकोप आमतौर पर देखा जाता है। मानसून का आगमन जून के मध्य में होता है। स्थानीय जलवायु धान, गेहूँ के अलावे मक्का, तिलहन तथा दलहन फसलों के लिए उपयुक्त है।

भौगोलिक स्थिति[संपादित करें]

दक्षिण में गंगा और पश्चिम में गंडक नदी से घिरा यह स्थान अपनी सामरिक और व्यापारिक गतिविधियों के लिए इतिहास प्रसिद्ध रहा है। वर्तमान शहर पटना से २० कि॰मी॰, मुजफ्फरपुर से ५४ कि॰मी॰ और वैशाली से ३५ कि॰मी॰ की दूरी पर है। उत्तर बिहार को पटना से जोडने वाली गंगा नदी पर सड़क पुल बनने के बाद हाजीपुर का महत्त्व बढ गया। सिवान, छपरा और सारण को हाजीपुर को जोडने के लिए गंडक नदी पर १८१७ में बना सड़क पुल तथा जगजीवन रेल पुल है। एक नये सड़क पुल का निर्माण हाल ही में हुआ है जबकि गंडक पर नये रेल पुल का काम चल रहा है। हाजीपुर को पटना से रेलमार्ग द्वारा जोड़ने के लिए गंगा नदी पर दीघा-सोनपुर रेल-सह-सड़क पुल का निर्माण हो चुका है और रेलों का आवागमन भी हो रहा है। पटना, पाटलिपुत्र जंक्शन से पहलेजा ब रास्ता सोनपुर तथा हाजीपुर की ओर रेल मार्ग द्वारा आया-जाया जा सकता है। जलोढ मिट्टी और उर्वर भूमि के कारण यहाँ बागवानी कृषि का अच्छा विकास हुआ है। मालभोग, चीनिया और अलपान केले तथा आम की मालदह, सीपिया, कृष्णभोग, लड़ुई मिठुआ, दसहरी किस्मों के लिए हाजीपुर की अच्छी ख्याति है। इसके अतिरिक्त रसीले शाही लीची का स्वाद यहाँ की गर्मियों को उबाऊ नहीं बनने देता। सोनपुर में लगनेवाले हरिहरक्षेत्र मेले के समय हाजीपुर महत्त्वपूर्ण सम्पर्क शहर बन जाता है।

जनसांख्यिकी[संपादित करें]

ऐतिहासिक जनसंख्याएं
वर्ष जन.
1901 21,398
1911 19,233 −10.1%
1921 16,760 −12.9%
1931 19,299 15.1%
1941 21,963 13.8%
1951 25,149 14.5%
1961 34,044 35.4%
1971 41,890 23.0%
1981 62,520 49.2%
1991 87,687 40.3%
2001 1,19,412 36.2%
2011 1,47,688 23.7%
हाजीपुर शहर का जनसंख्या इतिहास (1901-2011)

शहर की आबादी में हिन्दू और मुस्लिम की प्रधानता है। शिक्षा के माध्यम के रूप में हिन्दी या उर्दू भाषा का प्रयोग होता है। 1901 ई॰ में हाजीपुर की आबादी 21398 थी, जो 2011 में बढ़कर 147,688 हो गयी। वर्तमान में शहर में पुरुषों की संख्या 78,047(53%) तथा स्त्रियों की संख्या 69,641(47%) है। 14.15% जनसंख्या 0-6 आयुवर्ग में है। साक्षरता दर राष्ट्रीय औसत के करीब (60%) है। 8 सितम्बर 1996 को पूर्व मध्य रेलवे क्षेत्र का मुख्यालय बनने के बाद, रेलवे तथा राष्ट्रीय स्तर के अन्य संस्थानों के सरकारी तथा गैर-सरकारी सेवकों का अस्थायी निवास बनने से हाजीपुर के जनसांख्यीय परिदृश्य में बदलाव आया है। शहर की आबादी में वैशाली तथा पड़ोसी जिले को स्थानीय लोगों की बहुतायत है। हाजीपुर नगर क्षेत्र 39 वार्डों में बँटा है। नागरिक सुविधाओं तथा स्थानीय सड़कों का देखभाल हाजीपुर नगर परिषद् करती है।

धर्म सांख्यिकी (2011)[5]
Religion Percent
हिन्दू धर्म
  
85.84%
इसलाम
  
13.86%
ईसाई धर्म
  
0.13%
बुद्ध धर्म
  
0.04%
सिख धर्म
  
0.02%
जैन धर्म
  
0.01%
Others
  
0.10%

दर्शनीय स्थल[संपादित करें]

महात्मा गाँधी सेतु, हाजीपुर - एशिया का सबसे लम्बा पुल (५,५७५ मी.) हाजीपुर को पटना से जोड़ता हुआ गंगा नदी पर बना है।

५ किलोमीटर ५७५ मीटर लम्बी प्रबलित कंक्रीट से गंगा नदी पर बना महात्मा गाँधी सेतु पुल है जो १९८२ में बनकर तैयार हुआ और भारत की तत्कालिन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी द्वारा राष्ट्र को समर्पित किया गया था। यह देश का तीसरा सबसे लंबा नदी पुल है। लगभग १२१ मीटर लम्बे स्पैन का प्रत्येक पाया बॉक्स-गर्डर किस्म का प्रीटेंशन संरचना है जो देखने में अद्भुत है। ४६ पाये वाले इस पुल से गंगा को पार करने पर केले की खेती का विहंगम दृश्य दिखायी देता है। इस पुल से पटना महानगर के विभिन्न घाटों तथा भूचिन्ह (लैंडमार्क) का अवलोकन किया जा सकता है। इस पुल को उत्तर बिहार की लाइफ लाइन भी कहा जाता है। उत्तर बिहार को सड़क मार्ग से राजधानी से जोड़ने वाला एक मात्र पुल आज खुद बहुत ही जर्जर स्थिति में है।[6] [7]

  • कौनहारा घाट

गंगा और गंडक के पवित्र संगम स्थल की महिमा भागवत पुराण में वर्णित है। गज-ग्राह की लडाई में स्वयं श्रीहरि विष्णु ने यहाँ आकर अपने भक्त गजराज को जीवनदान और शापग्रस्त ग्राह को मुक्ति दी थी। इस संग्राम में कौन हारा? ऐसी चर्चा सुनते सुनाते इस स्थान का नाम 'कौनहारा (कोनहारा)' पड़ गया। बनारस के प्रसिद्ध मनिकर्णिका घाट की तरह यहाँ भी श्मशान की अग्नि हमेशा प्रज्वलित रह्ती है। ऐसी मान्यता है कि इस स्थान पर शरीर की अंत्येष्टि क्रिया मोक्षप्रदायनी है।

  • नेपाली छावनी मंदिर
मातबर सिंह थापा द्वारा हाजीपुर में निर्मित नेपाली छावनी शिव मंदिर

एक नेपाली सेनाधिकारी मातबर सिंह थापा द्वारा १८वीं सदी में पैगोडा शैली में निर्मित शिवमंदिर कौनहारा घाट के समीप है। यह अद्वितीय मंदिर नेपाली वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण है। काष्ट फलकों पर बने प्रणय दृश्य का अधिकांश भाग अब नष्टप्राय है या चोरी हो गया है। कला प्रेमियों के अलावे शिव भक्तों के बीच इस मंदिर की बड़ी प्रतिष्ठा है। काष्ठ पर उत्कीर्ण मिथुन के भित्ति चित्र के लिए यह विश्व का इकलौता पुरातात्विक धरोहर है। दुर्भाग्यवश, देखरेख एवं रखरखाव के अभाव में अद्भुत कलाकृतियों को दीमक अपना ग्रास बना रहा है।

मंदिर के पूरब में एक मुस्लिम संत हज़रत जलालुद्दीन अब्दुल की मज़ार भी है।

काष्ठ फलकों पर बने प्रणय दृश्य (नेपाली छावनी मंदिर, कौनहारा घाट)
  • रामचौरा मंदिर

नगर के दक्षिणी भाग में स्तूपनुमा अवशेष पर बना रामचौरा मंदिर हिन्दू आस्था का महत्त्वपूर्ण केन्द्र है। ऎसी मान्यता है कि अयोध्या से जनकपुर जाने के क्रम में भगवान श्रीराम ने यहाँ विश्राम किया था। उनके चरण चिह्न प्रतीक रूप में यहाँ मौजूद है। पुरातत्वविदों का मानना है कि बुद्धप्रिय आनंद की अस्थि को रखे गये स्तूप के अवशेष स्थल पर ही इस मंदिर का निर्माण किया गया था।

  • पतालेश्वर स्थान

नगर के रक्षक भगवान शिव पतालेश्वर नाम से प्रसिद्ध हैं। पतालेश्वर स्थान नाम से मशहूर स्थानीय हिन्दुओं का सबसे महत्त्वपूर्ण पूजास्थल शहर के दक्षिण में रामचौरा के पास रामभद्र में स्थित है। १८९५ में धरती से शिवलिंग मिलने के बाद यहाँ मन्दिर निर्माण हुआ। भीड़ भरे माहौल से दूर बने इस शिव मन्दिर का स्थापत्य साधारण लेकिन आकर्षक है। लगभग २२८०० वर्गफ़ीट में बने इस मन्दिर का वर्तमान स्वरूप १९३२-३४ के बीच अस्तित्व में आया। मन्दिर परिसर में बने विवाह मंडप में सालोंभर विवाह-संस्कार संपन्न कराये जाते हैं, जिसकी आधिकारिक मान्यता भी है।

  • संगी जामा मस्जिद
अकबर काल में बनी संगी जामा मस्जिद, अंदरकिला, हाजीपुर

शेख हाजी इलियास द्वारा निर्मित किले के अवशेष क्षेत्र के भीतर बनी संगी जामा मस्जिद [1] Archived 2021-01-27 at the Wayback Machine हाजीपुर में मुगलकाल की महत्त्वपूर्ण इमारत है। शहजादपुर अन्दरकिला में जी॰ ए॰ इंटर स्कूल के पास पत्थर की बनी तीन गुम्बदों वाली यह आकर्षक मस्जिद आकार में २५•८ मीटर लम्बी और १०•२ मीटर चौड़ी है। मस्जिद के प्रवेश पर लगे प्रस्तर में इसे अकबर काल में मख्सूस शाह एवं सईद शाह द्वारा १५८७ ई॰ (१००५ हिजरी) में निर्मित बताया गया है। मस्जिद के पास जिलाधिकारी आवास के निकट हाजी इलियास तथा हाजी हरमेन की मज़ार बनी है।

  • मामू-भाँजा की मज़ार

मुगलशासक औरंगजेब के मामा शाईस्ता खान ने हज़रत मोहीनुद्दीन उर्फ दमारिया साहेब और कमालुद्दीन साहेब की मज़ार हाजीपुर से ५ किलोमीटर पूरब मीनापुर, जढुआ में बनवायी थी। सूफी संतो की यह मजार स्थानीय लोगों में मामू-भगिना या मामा-भाँजा की मज़ार के नाम से प्रसिद्ध है। यहीं बाबा फरीद के शिष्य ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती के मज़ार की अनुकृति भी बनी है। सालाना उर्स के मौके पर इलाके के मुसलमानों का यहाँ भाड़ी जमावड़ा होता है। इसके पास ही मुगल शासक शाह आलम ने लगभग १८० वर्ष पूर्व करबला का निर्माण कराया था, जो मुसलमानों के लिए पवित्र स्थल है।

  • गाँधी आश्रम

हाजीपुर रेलवे स्टेशन के समीप स्थित गाँधी आश्रम महात्मा गाँधी के तीन बार हाजीपुर पधारने के दौरान उनसे जुड़ी स्मृतियों का स्थल है। एक पुस्तकालय के अतिरिक्त गाँधीजी के चरखा प्रेम और खादी जीवन को बढ़ावा देने हेतु द्वारा संचालित परिसर है।[8] स्थानीय विक्रय केन्द्र पर खादी वस्त्र, मधु, कच्ची घानी सरसों तेल आदि उपलब्ध है। हाजीपुर औद्योगिक क्षेत्र में खादी और ग्रामोद्योग का केन्द्रीय पूनी संयंत्र भी है, जहाँ खादी वस्त्र तैयार किये जाते हैं।

  • हरिहरक्षेत्र मेला

गज-ग्राह घटना की याद में कौनहारा घाट के सामने सोनपुर में हरिहरक्षेत्र मेला लगता है। स्थानीय लोगों में 'छत्तर मेला' के नाम से मशहूर है। प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा को पवित्र गंडक-स्नान से शुरू होनेवाले मेले का आयोजन पक्ष भर चलता है। सोनपुर मेला की प्रसिद्धि एशिया के सबसे बड़े पशु मेले के रूप में है। हाथी-घोड़े से लेकर रंग-बिरंगे पक्षी तक मेले में खरीदे-बेचे जाते हैं। आनेवाले जाड़े के लिए गर्म कम्बल से लेकर लकड़ी के फर्नीचर तक स्थानीय लोगों की जरुरतों को पूरा करती हैं। तमाशे, लोकनृत्य, लोककलाएँ और प्रदर्शनियाँ देशी-विदेशी पर्यटकों की कौतूहल को शान्त करती हैं। मेले के दौरान पर्यटक या तो हाजीपुर के किसी होटल में रुक सकते हैं या बिहार पर्यटन विकास निगम की सुविधाजनक तम्बू को भाड़े पर लेकर गंडक तट की बालूका राशि पर डेरा डाल सकते हैं।

  • वैशाली महोत्सव

प्रतिवर्ष वैशाली महोत्सव का आयोजन जैन धर्म के २४वें तीर्थंकर भगवान महावीर के जन्म दिवस पर बैसाख पूर्णिमा को किया जाता है। भगवान महावीर का जन्म वैशाली के वज्जिकुल में बसोकुंड (बसाढ) ग्राम में हुआ था। अप्रैल के मध्य में आयोजित होनेवाले इस राजकीय उत्सव में देशभर के संगीत और कलाप्रेमी हिस्सा लेते हैं। वैशाली में अशोक का स्तम्भ, अभिषेक पुष्करिणी, विश्व शान्ति स्तूप, चौमुखी महादेव मंदिर को भी आयोजन के दौरान देखा जा सकता है।

स्थानीय संस्कृति[संपादित करें]

महत्त्वपूर्ण सामरिक अवस्थिति के चलते अतीत में बाहरी लोगों के आकर बसने से यहाँ मिली-जुली स्थानीय संस्कृति पनपी है। हिन्दू और मुसलमान दोनों यहाँ के गौरवशाली अतीत और आपसी सहिष्णुता पर नाज़ करते हैं। कृषियोग्य उर्वर भूमि और मृदु जलवायु के चलते प्राचीन काल से ही यह स्थान सघन आबादी का क्षेत्र रहा है। बिहार की राजधानी पटना से जुड़ाव और भूगोलीय निकटता ने यहाँ की घटनाओं और अवसरों के महत्त्व को कई गुणा बढ़ा दिया है।

  • बोली एवं पहनावा:

हिन्दी प्रमुख भाषा है किंतु पश्चिमी मैथिली यहाँ की स्थानीय बोली है, जो मुजफ्फरपुर, सीतामढी, शिवहर और समस्तीपुर के अतिरिक्त नेपाल के सर्लाही जिले में भी बोली जाती है। युवक और युवतियाँ सभी आधुनिक भारतीय पहनावे पहनते हैं, लेकिन गाँव में रहनेवाले अधिकांश व्यस्क स्त्री-पुरुष धोती या साड़ी पहनना ही पसन्द करते हैं।

  • पर्व-त्योहार:

हिन्दूओं और मुस्लिमों के सभी पर्व मिलजुल कर मनाये जाते हैं। कई राष्ट्रीय त्यौहार जैसे गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस और गाँधी जयन्ती यहाँ खूब हर्षोल्लास से मनाये जाते हैं। यहाँ के धार्मिक त्यौहारों में छठ, होली, दिवाली, दुर्गा पूजा, ईद उल फितर, मुहर्रम, महावीर जयन्ती, महाशिवरात्रि, बुद्ध पूर्णिमा, जितिया,कृष्णाष्टमी, सतुआनी, श्रावणी घड़ी और मकर संक्रांति जैसे पर्व हैं। कार्तिक में चार दिवसीय छठपूजा तथा महाशिवरात्रि के अवसर पर शहर में शिव और पार्वती की विवाह यात्रा की बड़ी धूम होती है। मुहर्रम के अवसर पर ताजिए के साथ निकलने वाले जुलूस में हिन्दू और मुसलमान दोनों हिस्सा लेते हैं।

मनोरंजन के साधन[संपादित करें]

शहर के 5 सिनेमा हॉल मनोरंजन के सबसे बड़े साधन हैं। नेशनल सिनेमा (राजेन्द्र चौक) शहर का सबसे पुराना हॉल है, जो १९४० के दशक में बना था। हिन्दी और भोजपुरी फिल्मों के अलावे कभी-कभी हॉलीवुड फिल्मों का हिन्दी रुपान्तरण सिनेमा में दिखाये जाते हैं। लोग क्रिकेट और फुटबॉल के शौकीन हैं। स्थानीय अक्षयवट राय स्टेडियम टूर्नामेंट का मुख्य केन्द्र है। टाऊन हॉल में होनेवाले नाटक के मंचन अथवा अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम कुछ लोगों के उच्चस्तरीय मनोरंजन का साधन है। हाजीपुर में सिनेमाघरों की संख्या 5 हैं

  • नेशनल सिनेमा
  • गणेश सिनेमा
  • कार्निवाल
  • शंकर सिनेमा
  • एस आर एस सिनेमा

हाजीपुर के शिक्षा संस्थान[संपादित करें]

  • विद्यालय:
    • सरकारी विद्यालय: जी॰ ए॰ इंटर स्कूल, श्री मुल्कजादा सिंह उच्च विद्यालय दीग्घी, राज्य सम्पोषित बालिका उच्च विद्यालय, टाऊन मिडल स्कूल, प्रेम उच्च विद्यालय
    • निजी विद्यालय: गुरु वशिष्ठ विद्याययन, संतपॉल हाईस्कूल (बागमली एवं इज़रा), संत जेवियर स्कूल, इंडियन पब्लिक स्कूल, ज्ञानज्योति उच्च विद्यालय, ऑक्सफोर्ड हाईस्कूल, पी॰ के॰ झा आवासीय विद्यालय, एस॰ के॰ एस॰ सेमिनरी, अक्षरा विद्यालय
  • महाविद्यालय

राजनारायण महाविद्यालय, देवचंद महाविद्यालय, जमुनीलाल राय महाविद्यालय, वैशाली महिला महाविद्यालय, सतेंद्रनारायण महाविद्यालय, राव विरेंद्र सिंह इंटर महाविद्यालय एकारा, वी॰ एस॰ इंटर महाविद्यालय, सुखलाल मुखलाल महाविद्यालय जढुआ
सभी महाविद्यालय बाबासाहब भीमराव अंबेदकर बिहार विश्वविद्यालय मुज़फ्फरपुर की अंगीभूत इकाई है।

  • विश्वविद्यालय

[2] डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय, वैशाली, बिहार यह हाजीपुर से 20 किमी एवम सराय से 10 किमी उत्तर राष्ट्रीय राजमार्ग 22 के पास भगवानपुर गांव में स्थित है। यह भारत सरकार की विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से मान्यता प्राप्त है। यह बिहार की निजी विश्वविद्यालय में शुमार है। यह ऐसेक्टस ग्रुप ऑफ यूनिवर्सिटीज, भोपाल का अंग है।]

  • व्यवसायिक संस्थान

औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान दिग्घीकला, होटल प्रबंधन, पोषाहार एवं पोषाहार संस्थान राष्ट्रीय राजमार्ग १९, केंद्रीय प्लास्टिक इंजिनियरिंग एवं तकनीकि संस्थान औद्योगिक क्षेत्र, केंद्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान औद्योगिक क्षेत्र, कृषि विज्ञान केंद्र

शहीद महेश्वर स्मारक संस्थान

यातायात सुविधाएँ[संपादित करें]

सड़क सेवा: हाजीपुर बिहार के सभी मुख्य शहरों से राजमार्गों द्वारा जुड़ा हुआ है। यहाँ से वर्तमान में तीन राष्ट्रीय राजमार्ग तथा 3 राजकीय राजमार्ग गुजरती हैं। महात्मा गाँधी सेतु पार कर पटना से जुडा़ राष्ट्रीय राजमार्ग 31 हाजीपुर होकर उत्तर प्रदेश के गाजीपुर तक जाती है। हाजीपुर से मुजफ्फरपुर तथा सीतामढी़ होकर सोनबरसा तक जानेवाली 142 किलोमीटर लम्बी सड़क राष्ट्रीय राजमार्ग 22 है। राष्ट्रीय राजमार्ग 322 शहर को चकसिकन्दर, जन्दाहा, चकलालशाही होते हुए किसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित मुसरीघरारी से जोड़ती है। राजकीय राजमार्ग द्वारा यह वैशाली (राजकीय राजमार्ग-74), महुआ (राजकीय राजमार्ग-49) तथा महनार (राजकीय राजमार्ग-93) से जुडा़ है। हाजीपुर का सार्वजनिक यातायात मुख्यतः बसों, ऑटोरिक्शा और साइकिल रिक्शा पर आश्रित है। 20 किलोमीटर दूर राज्य की राजधानी पटना को जोड़नेवाली यातायात की ज़रुरतें बसें और ऑटोरिक्शा पूरा करती हैं। स्थानीय भ्रमण हेतु हाजीपुर स्टेशन से टैक्सी सेवा भी उपलब्ध है, जो निजी मालिकों द्वारा संचालित हैं। इनका किराया आपसी मोलजोल के आधार पर तय होता है और 10 से 15 रु/कि॰मी॰ तक हो सकता है। लम्बी दूरी की बसें सिलीगुडी, बेतिया, रक्सौल, मोतिहारी, सिवान, छपरा, समस्तीपुर, सीता़मढी़, मुजफ्फरपुर के लिए उपलब्ध हैं।

रेल सेवा: हाजीपुर भारतीय रेल के नक्शे का एक महत्त्वपूर्ण जंक्शन है। यहाँ पूर्व मध्य रेलवे का मुख्यालय भी है। दिल्ली-गुवाहाटी रूट पर स्थित रेल लाईनें शहर को छपरा, मुजफ्फरपुर और बरौनी से जोड़ती है। वैशाली होते हुए लौरिया (चंपारण) को जोड़नेवाली एक अन्य रेल लाईन प्रस्तावित है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के अतिरिक्त यहाँ से मुम्बई, चेन्नई, कोलकाता, अहमदाबाद, जम्मू, अमृतसर, गुवाहाटी तथा अन्य महत्त्वपूर्ण शहरों के लिए सीधी ट्रेनें उपलब्ध है। हाजीपुर से पटना को जोड़ने के लिए नदी पर पुल का निर्माण हो चुका है, 8 अगस्त 2015 को पुल पर इंजन परीक्षण सम्पन्न हुआ, अक्टूबर महिना से इस पर सवारी गाड़ी चलने लगी है।

दिल्ली के लिए
कोलकाता के लिए
  • बाघ एक्सप्रेस (13020),
  • पूर्वांचल एक्सप्रेस (15048),
  • गोरखपुर कोलकाता एक्सप्रेस (15050),
  • बलिया सियालदह एक्सप्रेस (13106)
मुम्बई के लिए
लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस (11062, 11066), लोकमान्य जनसाधारण एक्सप्रेस (15267)

चेन्नई के लिए:

  • राप्ती सागर एक्सप्रेस (12521)

अहमदाबाद के लिए:

  • साबरमती एक्सप्रेस (19166),
  • मुज़फ्फरपुर-अहमदाबाद एक्सप्रेस (15269)

गुवाहाटी के लिए:

  • डिब्रुगढ राजधानी एक्सप्रेस (12436),
  • अवध-असाम एक्सप्रेस (15610),
  • लोहित एक्सप्रेस (15622)
जम्मू के लिए
  • अमरनाथ एक्सप्रेस (15097),
  • लोहित एक्सप्रेस (5622)
अमृतसर के लिए
  • ग़रीबरथ एक्सप्रेस (12203),
  • सहरसा-अमृतसर जनसाधारण एक्सप्रेस (14603,15209),
  • आम्रपाली एक्सप्रेस (15707), शहीद एक्सप्रेस (14673),
  • सरयू-यमुना एक्सप्रेस (14649)
  • राँची के लिए मौर्य एक्सप्रेस (15028)
  • पुणे के लिए दरभंगा-पुणे एक्सप्रेस (11034)
  • अंबाला के लिए मुज़फ्फरपुर-अंबालाकैंट एक्सप्रेस (14523) हाजीपुर होकर चलती है।

वायु सेवा: निकटस्थ हवाई अड्डा हाजीपुर से 21 किलोमीटर दूर पटना में स्थित है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण द्वारा संचालित लोकनायक जयप्रकाश हवाईक्षेत्र, पटना (IATA कोड- PAT) अंतरदेशीय तथा सीमित अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए बना है। इंडियन, किंगफिशर, जेट एयर, स्पाइस जेट तथा इंडिगो की उड़ानें दिल्ली, कोलकाता, गुवाहाटी और राँची के लिए उपलब्ध हैं। हाजीपुर से टैक्सी, बस या ऑटो द्वारा हवाई अड्डा तक कभी भी जाया जा सकता है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Bihar Tourism: Retrospect and Prospect Archived 2017-01-18 at the Wayback Machine," Udai Prakash Sinha and Swargesh Kumar, Concept Publishing Company, 2012, ISBN 9788180697999
  2. "Revenue Administration in India: A Case Study of Bihar," G. P. Singh, Mittal Publications, 1993, ISBN 9788170993810
  3. official website of east central railway ecr.indianrailways.gov.in
  4. "संग्रहीत प्रति". मूल से 19 जनवरी 2015 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 20 नवंबर 2014.
  5. धर्म के बारे में जानकारी census2011.co.in
  6. "संग्रहीत प्रति". मूल से 23 सितंबर 2015 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 29 नवंबर 2014.
  7. "संग्रहीत प्रति". मूल से 29 नवंबर 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 29 नवंबर 2014.
  8. गांधी आश्रम के बारे में जानकारी