कटिहार
कटिहार
Katihar | |
|---|---|
| शहर | |
| निर्देशांक: 25°32′N 87°35′E / 25.53°N 87.58°E | |
| देश | |
| राज्य | बिहार |
| प्रमंडल | पूर्णिया |
| ज़िला | कटिहार |
| शासन | |
| • प्रणाली | नगर निगम |
| • सभा | कटिहार नगर निगम |
| • सांसद | तारिक़ अनवर[1] |
| • विधायक | तारकिशोर प्रसाद[2] (BJP) |
| • महापौर | उषा देवी अग्रवाल[3] |
| क्षेत्रफल[4] | |
| • कुल | 50.46 kमी2 (19.48 वर्ग मील) |
| ऊँचाई | 35.25 मी॰ (115.6 फीट) |
| जनसंख्या (2011) | |
| • कुल | 2,40,565 |
| • पद | 117वाँ |
| भाषा | |
| • आधिकारिक | हिन्दी[5] |
| • अतिरिक्त आधिकारिक | उर्दू[5] |
| • स्थानीय | अंगिका, मैथिली,[6] बंगाली,[7] सूरजापुरी |
| समय मण्डल | IST (UTC+5:30) |
| PIN | 854105 (मुख्य),854109 (उत्तर),854103 (दक्षिण) ,854107 (पश्चिम) [8] |
| वाहन पंजीकरण | BR-39 |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | कटिहार |
| विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र | कटिहार |
| वेबसाइट | katihar |
कटिहार (अंग्रेज़ी: Katihar) भारत के बिहार राज्य के कटिहार ज़िले में स्थित एक नगर है। यह ज़िले का मुख्यालय भी है।[9][10] कटिहार राज्य का दसवाँ सबसे बड़ा शहर है।
विवरण
[संपादित करें]पश्चिम बंगाल की सीमा पर स्थित कटिहार एक ऐतिहासिक शहर है। त्रिमोहिनी संगम , बाल्दीबाड़ी, बेलवा, दुभी-सुभी, गोगाबिल झील, नवाबगंज, मनिहारी और कल्याणी झील आदि यहाँ के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में से है। पूर्व समय में यह जिला पूर्णिया जिले का एक हिस्सा था। इसका इतिहास बहुत ही समृद्ध रहा है। इस जिले का नाम इसके प्रमुख शहर दीघी-कटिहार के नाम पर रखा गया था। मुगल शासन के अधीन इस जिले की स्थापना सरकार तेजपुर ने की थी। 13वीं शताब्दी के आरम्भ में यहाँ पर मोहम्मद्दीन शासकों ने राज किया। 1770 ई॰ में जब मोहम्मद अली खान पूर्णिया के गर्वनर थे, उस समय यह जिला ब्रिटिशों के हाथ में चला गया। अत: काफी लम्बे समय तक इस जगह पर कई शासनों ने राज किया। अत: 2 अक्टूबर 1973 ई॰ को स्वतंत्र जिले के रूप में घोषित कर दिया गया। 12 फरवरी वर्ष 1948 में महात्मा गांधी के अस्थि कलश जिन 12 तटों पर विसर्जित किए गए थे, त्रिमोहिनी संगम भी उनमें से एक है |
प्रमुख आकर्षण
[संपादित करें]मणिकर्णिका गंगा घाट मनिहारी
मिथिलांचल, सीमांचल और पूर्वोत्तर राज्यों की काशी मनिहारी - राष्ट्रीय नदी मां गंगा किनारे अवस्थित मनिहारी नगर भारत में एक अन्तिम नगर है जो सम्पूर्ण मिथिलांंचल, सीमांचल और पूर्वोत्तर राज्यों के साथ हीं साथ चीन, तिब्बत, वर्तमान बांग्लादेश, भूटान, नेपाल और म्यांमार के हिन्दू सह बौद्ध तीर्थयात्रियों के लिए काशी के समान है, जहां से एक समय नॉर्थ ईस्ट क्वीन एक्सप्रेस जैसी रेलगाड़ियां गुवाहाटी तक चला करती थीं! माघी पूर्णिमा सह गंगा स्नान का जिक्र करते हुए तत्कालीन बंगाल के सर्वे कर्ता श्रीमान फ्रांसिस बुचानन 1810 - 11 के पूर्णियां जिला गजट में लिखते हैं कि उस वर्ष मनिहारी गंगा घाट पर लगभग 4 लाख श्रद्धालुओं की भीड़ इकट्ठा हुईं थी, जो मनिहारी गंगा घाट के महत्त्व और ऐतिहासिकता का स्वयमेव प्रमाण है जबकि मनिहारी रेलवे 1887 में शुरू हुआ था और उस समय पक्की सड़कें भी नहीं हुआ करती थीं। जहां गोगाबील सामुदायिक पक्षी अभ्यारण्य सह गोखुर झील एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। इस राष्ट्रीय नदी मार्ग एक में राष्ट्रीय जलीय जीव डॉल्फिन या सोंस के लिए भागलपुर से मनिहारी तक अभ्यारण्य भी है। सातवीं शताब्दी के विश्व विख्यात चीनी बौद्घ तीर्थयात्री ह्वेन-त्सांग का यात्रा मार्ग भी मनिहारी गंगा घाट होकर हीं कामरूप भ्रमण का रहा है। यहां अर्धनारीश्वर गौरी शंकर मन्दिर, मध्यकालीन हज घर शाही मस्जिद, पीर पहाड़, नीलहा कोठी, 1936 में निर्मित संतमत सत्संग कुटी (महर्षि मेंही जी का ज्ञान प्राप्ति स्थल), 1900 में बना स्वास्थ्य केन्द्र, थाना 333, 1887 में बना रेलवे स्टेशन, 1855 - 56 की लड़ाई पूर्णियां के नवाब शौकत जंग और बंगाल के नवाब सिराजुदौला के बीच हुई लड़ाई का गवाह बाल्डियाबादी, मोवार राज परिवार मेदनीपुर, मिर्जापुर, नवाबगंज, रेलवे कॉलोनी, गंगा नदी में अवस्थित राजमहल पहाड़ी शिला आदि प्रमुख स्थल दर्शनीय स्थल हैं। इतिहासकार एवम् दिल्ली विश्वविद्यालय में शोधार्थी धीरज कु. निर्भय बताते हैं कि मनिहारी का इतिहास प्राचीन काल से रहा है। चाहे आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाए या पुरातात्विक दृष्टि से, आप मनिहारी को विशेष पाएंगे, भले ही सरकार और नेताओं की अनदेखी का यह शिकार होता रहा है अन्यथा आज भी गंगा स्नान, माघी पूर्णिमा मेला, छठ महापर्व, सावन का पवित्रतम मास अथवा पूरे मिथिलांचल, सीमांचल की कोई भी सांस्कृतिक गतिविधि हो, लोग मनिहारी गंगा घाट अवश्य आते हैं। आज मनिहारी से जानकी एक्सप्रेस ट्रेन चलाई जाती है, जो मिथिला की संस्कृति को मनिहारी घाट से जोड़ती है। भौगोलिक दृष्टि से आप पूरे मिथिलांचल व कोसी क्षेत्र का एकमात्र पहाड़ मनिहारी में देख सकते हैं। साथ ही गंगा नदी किनारे अंग्रेजों की कोठी के निकट राजमहल पहाड़ियों के हिस्से को भी जनवरी माह से जून माह तक देख सकते हैं। दोमट मिट्टी का यह क्षेत्र प्राकृतिक सुन्दरता के लिए भी प्रसिद्ध है। नार्वे की संस्था के सहयोग से चलने वाला ईसाइयों के लिए एकमात्र चर्च सह बेतेल मिशन स्कूल, आज़ादी की क्रांति को प्रदर्शित करता पुरानी धर्मशाला की दीवारें भी आप यहां देख सकते हैं।[11]
नमामि गंगे सह अर्थ गंगा
भारतीय संस्कृति दर्शन के साथ हीं धार्मिक, आर्थिक सह प्राकृतिक पर्यटन के लिए मनिहारी एक प्राचीनतम व ऐतिहासिक नगर है। यह बिहार, झारखण्ड और पश्चिम बंगाल आदि 3 राज्यों के साथ हीं भारत, नेपाल,भूटान, बांग्लादेश, चीन, तिब्बत और म्यांमार आदि देशों का भी निकटतम मिलन स्थल है. जो नदी और समुद्र मार्ग से इन सभी देशों से जुड़ा हुआ है. यहां नियमित रूप से गंगा आरती भी की जाती है। तीसरी कसम और बंदिनी जैसी बेहतरीन फिल्मों का सम्बंध मनिहारी गंगा घाट से ही रहा है।

बिहार के कटिहार जिले के अंतर्गत कुर्सेला प्रखंड के कटरिया गांव के NH-31 से रास्ता त्रिमोहिनी संगम[12] की ओर जाती है। प्रकृति की अनुपम दृश्य देखने को मिलता है। यहाँ तीन नदियों का संगम है जिसमे प्रमुख रूप से गंगा और कोशी का मिलन है। त्रिमोहिनी संगम भारत की सबसे बड़ी उत्तरायण गंगा का संगम है। गंगा नदी दक्षिण से उत्तर दिशा में प्रवाहित होती है। सूर्योदय से ही उत्तर दिशा में प्रवाहित होती है। सूर्योदय की किरणें सीधे गंगा के लहरों पर पड़ती है। जिससे प्रकृति का अनुपम दृश्य उपस्थित हो जाता है। नेपाल से निकलने वाली कोसी के सप्तधाराओं में एक सीमांचल क्षेत्र के कई जिलों से गुजरते हुए यहां आकर गंगा नदी से संगम कर अपना वजूद खो देती है। एक नदी की उत्पत्ति भारत कि सबसे बड़ी उत्तरवाहिनी गंगा तट से हुई है। जिसे कलबलिया के नाम से जाना जाता है। कलबलिया करीब 32 किलोमीटर का सफर तय करती है। 12 फरवरी वर्ष 1948 में महात्मा गांधी के अस्थि कलश जिन 12 तटों पर विसर्जित किए गए थे, त्रिमोहिनी संगम भी उनमें से एक है |
गुरु तेग बहादुर एतिहासिक गुरुद्वारा लक्ष्मीपुर
[संपादित करें]सिखों के नवमें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर की याद में यह गुरुद्वारा स्थापित है। सन 1666 में गुरु जी यहां के कांतनगर में पधारे थे। इस गुरुद्वारे में गुरुजी से जुड़ी कई अनमोल धरोहर आज भी सुरक्षित है। लक्ष्मीपुर सिख बाहुल्य गांव है व यहां प्रत्येक वर्ष गुरु तेग बहादुर जी का शहीदी दिवस मनाया जाता है।
शान्ति टोला फसीया
[संपादित करें]यह एक छोटा सा गांव है। मुख्यालय से लगभग ६ किलोमीटर की दूरी पर है। इस गाँव की आबादी लगभग 1300 है। इस गांव में सभी जाति के लोग रहते हैं। इस गांव में एक 200 वर्ष पुराना मंदिर भी है जिसे महंथ स्थान के नाम से जाना जाता है। इस गांव में एक राधा कृष्ण का भी मन्दिर है। यह अपने जिला मुख्यालय से 4 किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित है , यह अब नगरनिगम कटिहार के वार्ड न. ४४ के अंतर्गत आता है। इस गांव के लोग अपनी सादगी एवं सद्भाव के लिए जाने जाते हैं यंहा 99 % लोग खरवार समुदाय जो अनुसूचित जनजाति से आते हैं। ये लोग पहले खेती बाड़ी एवं मजदूरी कर अपना जीवन यापन करते थे पर इधर कुछ वर्षों से इनके शिक्षा में सुधार के कारण काफी संख्या में युवा वर्ग अच्छे पदों पर नियुक्त हुए हैं जिससे इनके जीवन स्तर में काफी सुधार हुआ है। इस गांव के लोग काफी मिलनसार हैं यह हमारे इतिहास का अनमोल धरोहर है। जिसे हम सब को संजो कर रखनी है।
बाल्दीबाड़ी
[संपादित करें]गंगा नदी के समीप स्थित मनिहारी से लगभग 2.5 किलोमीटर की दूरी पर बाल्दीबाड़ी गांव स्थित है। इसी जगह पर मुर्शीदाबाद के नवाब सिराज-उद-दौला और पूर्णिया के गर्वनर नवाब शौकत जंग के बीच युद्ध हुआ था।
बेलवा
[संपादित करें]यह एक छोटा सा गांव है। यह जगह बरसोई के खण्ड मुख्यालय के दक्षिण से लगभग आठ किलोमीटर की दूरी पर है। यहाँ पर प्राचीन समय की कई इमारतें स्थित है। इसके अतिरिक्त यहाँ एक मंदिर भी है। इस मंदिर में भगवान शिव और देवी सरस्वती की पत्थर की मूर्तियां स्थित है। प्रत्येक वर्ष बसंत पंचमी के अवसर पर यहाँ मेले का आयोजन किया जाता है।
दुभी-सुभी
[संपादित करें]यह गांव बरसोई खण्ड में स्थित है। इस जगह का सम्बन्ध एक दिलचस्प कहानी के साथ जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि एक नवयुवक ने कुश से अपना गला काटकर प्राणों की आहुति दी थी। यह घटना लगभग 70 वर्ष पूर्व की है। इस कारण धार्मिक दृष्टि से भी यह स्थान काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।
गोगाबिल झील
[संपादित करें]यह एक खूबसूरत विशाल झील प्रसिद्ध पक्षी अभ्यारण भी है। पूरे वर्ष यहाँ पक्षियों की विभिन्न प्रजातियां देखी जा सकती है।और खासकर नबम्बर से फरवरी के महीनो में रूस से पक्षी प्रवास के लिए आती है,राजहंस,लालसर इत्यादि पक्षी होती है। ये अभ्यारण मनिहारी से लगभग 7 किलो मीटर surapartal main hai jinko dekhne ke bahar se kafi lug aate hain kas kar happy new year main door se log picnik manane ke liye aate hain jo kafi parchilit hai
नवाबगंज
[संपादित करें]यह गांव मनिहारी से लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मुगल काल के समय में इस जिले के गर्वनर नवाब शौकत गंज के पुराने सिंहासन के लिए यह जगह जानी जाती है।
मनिहारी
[संपादित करें]कटिहार के दक्षिण से 25 किलोमीटर की दूरी पर मनिहारी तहसील स्थित है। पौराणिक कथा के अनुसार, इस जगह पर भगवान कृष्ण से एक मणी (आभूषण) खो गया था, जिसे ढूंढते हुए वह इस जगह पर पहुंचे थे।इस कारण से इस जगह का नाम मनिहारी पड़ा ।
कल्याणी झील
[संपादित करें]झौआ रेलवे स्टेशन के उत्तर से पांच किलोमीटर की दूरी पर कल्याणी झील स्थित है। प्रत्येक वर्ष माघ मास की पूर्णिमा तिथि के अवसर पर काफी संख्या में लोग यहाँ स्नान करने के लिए आते हैं। यूँ तो सभी दिन पवित्रता के लिए इक्के-दुक्के आवागमन होते रहते है। प्रतिवर्ष माघी पूर्णिमा मेले में लोग पुजा अर्चना बाजार करने बहुत दुरदराज से लोग पहुँचते है। इसके अलावे पुराने पुरोहितों के अनुसार यहाँ साक्षात् माँ कल्याणी देवी के अनेक रहस्य भी है। जिनके कारण ये स्थान अतुल्य है। इस नदी के तट में एक ऐतिहासिक पत्थरनुमा शिवलिंग है जो अनेकों वर्षों से स्थित है स्थानीय लोगों के अनुसार यह अपने आकार में पहले की अपेक्षा बढ़ रहा है। अभी गत् वर्ष 2015 में नियम निष्ठा पूर्वक माँ कल्याणी देवी मंदिर के समीप अनेक कलाकृत्यों द्वारा निर्मित भव्य शिवमंदिर शिवलिंग के साथ स्थापित किया गया।
कटिहार से 40 किलोमीटर की दूरी पर फलका प्रखंड के पोठिया पंचायत में अवस्थित मां भगवती का शक्तिपीठ है।लगभग 250 वर्ष पूर्व मां का आगमन हुआ।यहां वर्ष में चारों नवरात्रि में विधिपूर्वक मां की आराधना होती है।मान्यता है कि मां सबकी मनोकामना पूर्ण करती हैं।दशहरे में भव्य विसर्जन होता है। आवागमन सुलभ है।नजदीकी रेलवे स्टेशन कुर्सेला और फलका से 12 किलोमीटर की दूरी।डुम्मर एनएच 31 से 6 किलोमीटर
आवागमन
[संपादित करें]वायु मार्ग: यहाँ का सबसे निकटतम हवाई अड्डा पूर्णियाँ हवाई अड्डा है।
रेल मार्ग: कटिहार में रेलवे स्टेशन कटिहार रेलमार्ग द्वारा भारत के कई प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। पूर्वोतर के राज्यों में आवागमन का प्रमुख रेल मार्ग बरौनी-कटिहार-गौहाटी ही है। और मुख्य पाँच अलग - अलग मार्गाों में ट्रेनों का आवागमन भी यही से होता है।
सड़क मार्ग: भारत के कई प्रमुख शहरों से कटिहार सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है। राष्ट्रीय राजमार्ग 31 इस जिले तक पहुंचने का सुलभ राजमार्ग है। और झारखण्ड जाने के लिए मनिहारी गंगा में एल टी सी सेवा उपलब्ध् है, जो गंगा नदी के रास्ते साहिबगंज को जाती है। और मनिहारी में गंगा पुल होने का कार्य भी प्रारम्भ हो चुका है जो जल्दी ही कटिहार-झारखंड मार्ग को अति सुलभ बनाऐगी।
शिक्षा
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कटिहार में बहुत से शिक्षा संस्थान हैं-
- रामकृष्ण मिशन विद्यामन्दिर
- रामकृष्ण मिशन शारदा विद्यामन्दिर
- स्वामी विवेकानंद माध्यमिक विद्यालय
- केन्द्रीय विद्यालय
- जवाहर नवोदय विद्यालय
- नेताजी विद्यामन्दिर
- मनिपाल पब्लिक स्कूल
- पूर्णिया विश्वविद्यालय
- सूर्यदेव विधि महाविद्यालय
- कटिहार आयुर्विज्ञान महाविद्यालय एवं अनुसन्धान केन्द्र
- जयमाला शिक्षा निकेतन
इन्हें भी देखें
[संपादित करें]सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ "Tariq's post triggers debate over Cong's poll strategy". The Times of India. 2025-02-11. आईएसएसएन 0971-8257. अभिगमन तिथि: 2025-02-15.
- ↑ "Tarkishore Prasad, frontrunner in race for Bihar deputy CM, is part of BJP's Bengal plan. Here's how". Hindustan Times (अमेरिकी अंग्रेज़ी भाषा में). 2020-11-16. 1 November 2021 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 2025-02-15.
- ↑ "Katihar Municipal Corporation". katiharnagarnigam.net. अभिगमन तिथि: 2025-02-15.
- ↑ "KATIHAR". Cseindia.org. अभिगमन तिथि: 30 June 2022.
- 1 2 "52nd Report of the Commissioner for Linguistic Minorities In India" (PDF). nclm.nic.in. Ministry of Minority Affairs. मूल से (PDF) से 25 May 2017 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 4 October 2019.
- ↑ Kumari, Arunima (19 January 2021). Encyclopedia of Bihar: Encyclopedia of Bihar: Uncovering the Rich Heritage and History by Arunima Kumari. Prabhat Prakashan. ISBN 9789350483909.
- ↑ कटिहार में बंगाली समुदाय में धूमधाम से मनाई गई लक्खी पूजा.
- ↑
- ↑ "Bihar Tourism: Retrospect and Prospect Archived 2017-01-18 at the वेबैक मशीन," Udai Prakash Sinha and Swargesh Kumar, Concept Publishing Company, 2012, ISBN 9788180697999
- ↑ "Revenue Administration in India: A Case Study of Bihar," G. P. Singh, Mittal Publications, 1993, ISBN 9788170993810
- ↑ Dhiraj Dasanana (2023-09-19). Dhiraj Dasanana 1.
- ↑ "Trimohini Sangam Sthal,Kataria". m.facebook.com. अभिगमन तिथि: 2021-01-31.