संयुक्त प्रान्त आगरा व अवध

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संयुक्त प्रान्त आगरा व अवध
(यूनाईटेड प्राॅविन्सेज़ ऑफ ऐग्रा ऐण्ड औध)
ब्रिटिश राज
British Raj Red Ensign.svg
१९०२ – १९२१ British Raj Red Ensign.svg
स्थिति संयुक्त प्रान्त (यूनाईटेड प्राॅविन्सेज़)
संयुक्त प्रान्त आगरा व अवध का मानचित्र, 1903
राजधानी लखनऊ
इतिहास
 - स्थापना १९०२
 - अस्थापना १९२१
वर्तमान भाग उत्तर प्रदेश
उत्तराखण्ड
के कुछ भाग


आगरा एवं अवध का संयुक्त प्रान्त (United Provinces of Agra and Oudh) भारत पर ब्रितानी शासन के समय भारत का एक प्रान्त था जिसका अस्तित्व १९०२ से १९४७ तक रहा। भारत सरकार अधिनियम, १९३५ के अनुसार इसका आधिकारिक नाम संक्षिप्त करके केवल 'संयुक्त प्रान्त' या युनाइटेड प्रोविंस' कर दिया गया था। १९४७ में भारत के स्वतन्त्र होने के बाद १९५० तक यह इसी नाम से भारत का एक राज्य बना रहा। इस संयुक्त प्रान्त के अन्तर्गत आने वाले क्षेत्र वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड में है। सन १८५६ से लेकर १९०२ तक संयुक्त प्रान्त दो अलग-अलग प्रान्तों के रूप में था, उत्तर-पश्चिमी प्रान्त तथा अवध प्रान्त।

उस समय सामान्यतः इसे संयुक्त प्रान्त (अंग्रेजी में यू॰पी॰) के नाम से भी जानते थे। यह संयुक्त प्रान्त लगभग एक शताब्दी 1856 से 1947 तक अस्तित्व में बना रहा। इस प्रान्त में ब्रिटिश काल के दौरान रामपुरटिहरी गढ़वाल जैसी स्वतन्त्र रियासतें भी शामिल थीं। 25 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान की घोषणा से एक दिन पूर्व सरदार बल्लभ भाई पटेल ने इन सभी रियासतों को मिलाकर इसे उत्तर प्रदेश नाम दिया था।

3 जनवरी 1921 को जो राज्य पूर्णतः ब्रिटिश भारत का अंग बन गया था उसे स्वतन्त्र भारत में 20वीं सदी के जाते-जाते सन् 2000 में पुनः विभाजित कर उत्तरांचल (और बाद में उत्तराखण्ड) राज्य को स्थापित किया गया।

इतिहास[संपादित करें]

हिन्दुस्तान में 18वीं सदी तक, एक समय का वृहद मुगल साम्राज्य आन्तरिक क्लेशों के कारण ध्वस्त हो रहा था। अन्य कारण थे दक्कन से मराठों, बंगाल से अंग्रेज़ों और अफ़्गानिस्तान से अफ़गानों का विस्तार। उस सदी के मध्य तक, वर्तमान उत्तर प्रदेश बहुत से राज्यों में विभक्त कर दिया गया, मसलन मध्य और पूर्व में अवध, जिस पर किसी नवाब का शासन था और जिसकी मुगल साम्राज्य के प्रति निष्ठा थी अत: वह स्वतन्त्र था; पूर्व में रुहेलखण्ड जिस पर अफ़गानों का शासन था; मराठा, जिनका दक्षिण में बुन्देलखण्ड पर नियन्त्रण था और मुगल साम्राज्य जिनका समस्त दोआब (गंगा और यमुना नदियों के मध्य की भू-पट्टी) और दिल्ली पर नियन्त्रण था।

22 मार्च 1902 को आगरा व अवध नाम की दो प्रेसीडेंसी को मिलाकर बनाये गये संयुक्त प्रान्त आगरा व अवध के पहले उप राज्यपाल (लेफ्टीनेण्ट गवर्नर) थे सर जेम्स जॉन डिग्गस ला टशे (अंग्रेजी:Sir James John Digges La Touche)। 3 जनवरी 1921 से यह राज्य पूर्णत: ब्रिटिश भारत का अंग बन गया और सर स्पेंसर हरकोर्ट बटलर (अंग्रेजी:Sir Spencer Harcourt Butler) इसके पहले राज्यपाल (गवर्नर) नियुक्त किये गये। 1 अप्रैल 1937 से इसे संयुक्त प्रान्त या यू॰पी॰ कहा जाने लगा। 1 अप्रैल 1946 को इसे स्वायत्तशासी प्रान्त घोषित किया गया और गोविन्द बल्लभ पन्त इसके पहले मुख्य मन्त्री बने। अंग्रेजों द्वारा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को सत्ता हन्तान्तरण हेतु अस्थायी रूप से बनायी गयी अन्तरिम सरकार की व्यवस्था के तहत ऐसा किया गया था। 15 अगस्त 1947 तक पण्डित गोविन्द बल्लभ पन्त ब्रिटिश सरकार द्वारा घोषित स्वायत्तशासी प्रान्त यू॰पी॰ के मुख्य मन्त्री रहे। इसके अन्तिम गवर्नर थे सर फ्रांसिस वर्नर विली (अंग्रेजी: Sir Francis Verner Wylie)। 15 अगस्त 1947 को इसे स्वतन्त्र भारत का हिस्सा बना दिया गया।

जिसे आजकल उत्तर प्रदेश या अंग्रेजी में यू॰पी॰ कहते हैं उसमें ब्रिटिश काल के दौरान रामपुर व टिहरी गढ़वाल जैसी स्वतन्त्र रियासतें शामिल थीं। 25 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान की घोषणा से एक दिन पूर्व सरदार बल्लभ भाई पटेल के प्रयास से इसे उत्तर प्रदेश नाम दिया गया।[1]

प्रसाशनिक क्षेत्रों की सूचि[संपादित करें]

आगरा और अवध के संयुक्त प्रांत के 48 जिलों को 9 मंडल(डिवीजनों) में बांटा गया था

संयुक्त प्रान्त के रियासत(रजवाड़े)

सन्दर्भ[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]