गढ़वाल रियासत

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टिहरी गढ़वाल सियासत
गढ़वाल राज्य

888–1949

ध्वज

संयुक्त प्रान्त के मानचित्र पर गढ़वाल का स्थान
राजधानी देवलगढ़ 1500-1519
श्रीनगर 1519-1804
टिहरी 1815-1862
प्रतापनगर 1862-1890
कीर्तिनगर 1890-1925
नरेंद्र नगर 1925-1949
भाषाएँ गढ़वाली, संस्कृत, हिन्दी
शासन राजशाही
रजवाड़ा (1815–1949)
इतिहास
 -  स्थापित 888
 -  अंत 1949
आज इन देशों का हिस्सा है: उत्तराखण्ड, भारत
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गढ़वाल राज्य(Garhwal Kingdom) वर्तमान उत्तराखंड, भारत के विस्तार-क्षेत्र के पश्चिमी हिस्से वाले इलाके में पुराने समय में एक राज्य था यह 1358 ई. में स्थापित एक राजसी राज्य था जिस पर गोरखाओं द्वारा 1803 में कब्जा कर लिया गया था। एंग्लो नेपाली युद्ध और 1815 की सुगौली की संधि के बाद एक छोटे टिहरी गढ़वाल राज्य के गठन के साथ गढ़वाल राज्य को बहाल कर दिया गया, जोकि 1949 में भारत में सम्मिलित कर लिया गया।[1]

इतिहास[संपादित करें]

परंपरागत रूप से इस क्षेत्र का केदारखंड के रूप में विभिन्न हिंदू ग्रंथों में उल्लेख मिलता है। गढ़वाल राज्य क्षत्रियों का राज था। दूसरी शताब्दी ई.पू. के आसपास कुनिंदा राज्य भी विकसित हुआ . बाद में यह क्षेत्र कत्युरी राजाओं के अधीन रहा, जिन्होंने कत्युर घाटी, बैजनाथ, उत्तराखंड से कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्र में 6 वीं शताब्दी ई. से 11 वीं शताब्दी ई. तक राज किया, बाद में चंद राजाओं ने कुमाऊं में राज करना शुरू किया, उसी दौरान गढ़वाल कई छोटी रियासतों में बाँट गया, ह्वेनसांग, नामक चीनी यात्री, जिसने 629 ई. के आसपास क्षेत्र का दौरा किया था, ने इस क्षेत्र में ब्रह्मपुर नामक राज्य का उल्लेख किया है।

823 ई. में जब मालवा के राजकुमार कनकपाल बद्रीनाथ मंदिर की यात्रा पर आये, तब राजा भानु प्रताप, जोकि चाँदपुर गढ़ी के मुखिया थे, से मुलाकात के बाद स्थापना हुयी . बाद में राजा भानु प्रताप ने राजकुमार से अपनी बेटी से शादी की और बाद में अपना राज्य, किले, शहर इत्यादि कनकपाल को सौंप दिए. कनकपाल और पंवार शाह के वंशजो ने धीरे - धीरे सभी स्वतंत्र (गढ़) के 52 छोटे सरदारों पर विजय प्राप्त की है और अगले 915 वर्षों गढ़वाल राज्य पर 1803 ई. तक शासन किया।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. en.wikipedia.org/wiki/Garhwal_Kingdom