सिक्किम अधिराज्य

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सिक्किम अधिराज्य
  • भारत का संरक्षित राज्य (1861–1947, 1950–1975)
1642–1975
सिक्किम का मुहर
ध्वज कुल-चिन्ह
राष्ट्रीय गान
जहाँ बग्छ टिस्टा रंगीत
जहाँ बहती है टिस्टा रंगीत
पूर्वोत्तर भारत में सिक्किम का ऐतिहासिक मानचित्र
राजधानी
भाषाएँ सिक्किमी, नेपाली
धर्म महायाना बौद्ध
शासन राजतंत्र
चोग्याल
 -  1642–1670 फुंत्सोग नामग्याल (प्रथम)
 -  1963–1975 पाल्डेन ठोंडुप नामग्याल (अंतिम)
विधानमंडल सिक्किम कि राज्य परिषद
इतिहास
 -  स्थापना 1642
 -  तितालिया संधि पर हस्ताक्षर 1817
 -  ब्रिटिश भारत को दार्जीलिंग अनुदान में सौंप दिया गया 1835
 -  पाल्डेन ठोंडुप नामग्याल को त्याग के लिए मजबूर किया गया 1975
 -  भारत में विलय 16 मई 1975
आज इन देशों का हिस्सा है: Flag of India.svg भारत
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पूर्वी हिमालय में 1642 से 16 मई 1975 के बीच सिक्किम अधिराज्य एक वंशानुगत राजशाही राज्य था। यह राज्य चोग्याल राजाओं के द्वारा शाषित था।

इतिहास[संपादित करें]

नेपाली वर्चस्व[संपादित करें]

मध्य 18वीं शताब्दी में सिक्किम पर नेपाल (उस समय गोरखा अधिराज्य) ने आक्रमण किया और उसके बाद 40 वर्षों से अधिक समय तक गोरखाओं ने इस पर राज किया। 1775 से 1815 तक लगभग 180,000 नेपाली जाति के लोग[कृपया उद्धरण जोड़ें] पूर्वी नेपाल और मध्य नेपाल से आकर सिक्किम में बस गये।[कृपया उद्धरण जोड़ें] यद्यपि, भारत पर अंग्रेजी शाषण स्थापित होने के बाद, सिक्किम अंग्रेजों के साथ इस बात पर एकमत हो गया कि नेपाल – दोनों का समान शत्रु है।[कृपया उद्धरण जोड़ें] इस बात से व्यथित नेपाल ने प्रतिशोध में आकर सिक्किम पर हमला किया और सिक्किम का अधिकांश हिस्सा (तराई सहित) अपने कब्जे में कर लिया। इस बात ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को 1814 में नेपाल पर आक्रमण करने के लिए प्रेरित किया, जिसके परिणामस्वरूप गोरखा युद्ध छिड़ गया।[कृपया उद्धरण जोड़ें] नेपाल और ब्रिटेन के बीच सुगौली संधि और सिक्किम और ब्रिटिश भारत के बीच तितालिया संधि के परिणामस्वरूप नेपाल का क्षेत्रिय रियायतें सिक्किम ने ब्रिटिश भारत को सौंप दिया।[1]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "History of Nepal: A Sovereign Kingdom". Official website of Nepal Army.