जलंधर

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
जालंधर
ਜਲੰਧਰ
—  शहर  —
जालंधर का बीएमसी चौक
जालंधर का बीएमसी चौक
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
राज्य पंजाब
ज़िला जालंधर
महापौर श्री सुरिंदर महाय
सांसद
जनसंख्या
घनत्व
१,९५३,५०८ (२००१ के अनुसार )
• ५७४
क्षेत्रफल
ऊँचाई (AMSL)
३४०१ कि.मी²
• २२८ मीटर

Erioll world.svgनिर्देशांक: 31°19′32″N 75°34′45″E / 31.3256, 75.5792 जालंधर भारत के पंजाब प्रांत का एक शहर है। जालंधर एक बड़ा औद्योगिक शहर है। यहां चमड़े और खेल की वस्तुओं का अधिक उत्पादन होता है। जिस कारण यह सम्पूर्ण विश्व में विख्यात है। जालंधर पंजाब का सबसे पुराना शहर है। जालंधर वह जगह है जिसने देश को कई वीर योद्धा दिए है। जालंधर में ऐसे कई मंदिर, गुरूद्वारे, किले और संग्रहालय है जहां घूमा जा सकता है।

पौराणिक सन्दर्भ[संपादित करें]

चित्र:Jalandhar Public Activity gopal1035.jpg
जालंधर के लोग

जालंधर जिले का नाम राक्षस के नाम पर रखा गया है, जिसका उल्लेख पुराण और महाभारत में भी हुआ है। जबकि कुछ का मानना है कि यह जगह राम के पुत्र लव की राजधानी थी। वही कुछ मानते हैं कि जालंधर का अर्थ पानी के अंदर होता है तथा यहां पर सतलुज और बीस नदियों का संगम होता है इसलिए इस जगह का नाम जालंधर रखा गया। जालंधर को त्रिरत्ता के नाम से भी जाना जाता है।

मुख्य आकर्षण[संपादित करें]

देवी तलब मंदिर[संपादित करें]

देवी तलब का यह मंदिर रेलवे स्टेशन से कुछ दूरी पर स्थित है। इस मंदिर की मरम्मत दुबारा की गई है। और फिर से इस मंदिर का निर्माण किया गया। इस मंदिर की इमारत का निर्माण अमरनाथ मंदिर के मॉडल की तरह करवाया गया है। देवी तलब मंदिर के पास ही एक अन्य मंदिर भी है। यह मंदिर मां काली का है। सोने से बना यह देवी तलब का मंदिर हरिबल्लभ संगीत सम्मेलन के लिए काफी प्रसिद्ध है। यह सम्मेलन प्रत्येक वर्ष दिसम्बर माह में होता है। इसके अलावा इस सम्मेलन का आयोजन पिछले 125 वर्षों से किया जा रहा है।

शिव मंदिर[संपादित करें]

यह मंदिर गुरू मंडी, ईमाम नसीर मकबर के समीप स्थित है। ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण नवाब सुल्तानपुर लोदी ने करवाया था। इस मंदिर की वास्तुकला हिन्दू, मुस्लिम दोनों शैलियों से सम्मिलित है। इस मंदिर के प्रमुख द्वार का निर्माण मस्जिद की शैली में बना हुआ है। ऐसा माना जाता है कि जालंधर के नवाब ने एक नववधु के साथ विवाह कर लिया था जो भगवान शिव की भक्त थी।

=शहीद-ए-आजम सरदार भगत संग्रहालय[संपादित करें]

खटकर कलन संग्रहालय शहीद सरदार भगत सिंह के गांव, खटकर कलन में स्थित है। इस संग्रहालय शुरूआत भगत सिंह की 150वीं पुण्यतिथि में की गई। पहले यह संग्रहालय जालंधर जिले में था, लेकिन अब यह नवाशहर जिले का हिस्सा है। जालंधर की इस मिट्टी ने देश को ऐसे कई वीर योद्धा दिए है जो अपने वतन के लिए शहीद हो गए। उन शहीदों की याद आज भी इस जगह से जुड़ी हुई है।

वंडर लैंड[संपादित करें]

वंडर लैंड थीम पार्क एक एम्यूजमेंट वाटर पार्क है। यहां आप पानी में कई खेलों और झूलों का आनन्द उठा सकते हैं। यह पार्क तकरीबन 11 एकड़ में फैला हुआ है। यहां सभी उम्र के लोगों को ध्यान में रखकर झूले तैयार किए गए है। यह पार्क जालंधर बस टर्मिनल से 6 किलोमीटर और नाकोदर रोड़ पर स्थित रेलवे स्टेशन से 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। पानी के झूलों के साथ बंपर कार, फ्लाइंग जेट, हॉरर हॉउस, बोटिंग, प्ले हॉउस, फ्लाइंग डेरगन और स्लॉइड स्पैलेश आदि भी है।

सोदल मंदिर[संपादित करें]

सितम्बर माह में आने वाली आनन्द चतुदर्शी के अवसर पर हजारों की संख्या में भक्तगण यहां आते हैं। माना जाता है कि जिनकी संतान नहीं होती है वह इस मंदिर में आकर संतान प्राप्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।

ईमाम नसीर मकबरा और जामा मस्जिद[संपादित करें]

ईमाम नसीर का मकबरा करीबन आठ सौ साल पुराना है। इसके नजदीक में ही जामा मस्जिद भी है। कहा जाता है कि यह मस्जिद चार सौ साल पुरानी है। इसके अलावा जामा मस्जिद अपनी वास्तुकला के लिए भी काफी प्रसिद्ध है।

गुरूद्वारा चेवीन पदशाही[संपादित करें]

गुरू गोविन्द सिंह जब दौबा क्षेत्र में यात्रा के लिए आए थे, उस दौरान वह जालंधर शहर भी आए थे। गुरूद्वारा चेवीन पदशाही जालंधर शहर के बस्ती शेख में स्थित है। यह गुरूद्वारा उसी स्थान पर स्थित है जहां गुरूजी ने मुस्लिम संत को जिन्हं शेख दरवेश के नाम से जाना जाता है को साक्षात्कार दिया था। साक्षात्कार लेते समय संत ने अपनी आंखे बंद कर ली थी और उन्होंने गुरू को नहीं देखा था।

तुलसी मंदिर[संपादित करें]

यह मंदिर वृंदा के नाम पर बना हुआ है जो जालंधर की पत्नी थी। यह मंदिर कोट किशन चंद जगह पर स्थित है। जिसे अब तुलसी मंदिर के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर के एक तरफ टैंक है। ऐसा कहा जाता है कि इस जगह पर जालंधर नहाया करते थे। मंदिर से कुछ ही दूरी पर गुफा मंदिर भी है। इस मंदिर में अन्नपूर्णा देवी की प्रतिमा स्थापित है। इसके अलावा पास ही में ब्रह्म कुंड भी है।

आवागमन[संपादित करें]

हवाई अड्डा

सबसे नजदीकी एयरपोर्ट राजा संसी है। अमृतसर से जालंधर की दूरी 90 किलोमीटर है। इसके अलावा रोजाना दिल्ली से अमृतसर और चंडीगढ़ से दिल्ली के लिए उड़ान भरी जाती है।

रेल मार्ग

जालंधर के लिए रेलवे सेवा कुछ प्रमुख शहरों से जुड़ी हुई है।

सड़क मार्ग

देश के कई प्रमुख शहरों से जालंधर के लिए बसें चलती है।

सन्दर्भ[संपादित करें]

बाहरी कड़ियां[संपादित करें]