"बद्रीनाथ मन्दिर": अवतरणों में अंतर

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'''बद्रीनाथ''' अथवा '''बद्रीनारायण मन्दिर''' भारतीय राज्य [[उत्तराखण्ड]] के [[चमोली जिला|चमोली जनपद]] में [[अलकनन्दा नदी]] के तट पर स्थित एक [[मन्दिर|हिन्दू मन्दिर]] है। यह [[हिन्दू देवी देवताओं की सूची|हिंदू देवताभगवान]] [[विष्णु]] को समर्पित मंदिर है और यह स्थान इस धर्म में वर्णित सर्वाधिक पवित्र स्थानों, [[चार धाम|चार धामों]], में से एक यह एक प्राचीन मंदिर है जिसका निर्माण ७वीं-९वीं सदी में होने के प्रमाण मिलते हैं। मन्दिर के नाम पर ही इसके इर्द-गिर्द बसे नगर को भी [[बद्रीनाथ (नगर)|बद्रीनाथ]] ही कहा जाता है। भौगोलिक दृष्टि से यह स्थान [[हिमालय]] पर्वतमाला के ऊँचे शिखरों के मध्य, [[गढ़वाल हिमालय|गढ़वाल क्षेत्र]] में, समुद्र तल से ३,१३३ मीटर (१०,२७९ फ़ीट) की ऊँचाई पर स्थित है। जाड़ों की ऋतु में हिमालयी क्षेत्र की रूक्ष मौसमी दशाओं के कारण मन्दिर वर्ष के छह महीनों (अप्रैल के अंत से लेकर नवम्बर की शुरुआत तक) की सीमित अवधि के लिए ही खुला रहता है। यह भारत के कुछ सबसे व्यस्त तीर्थस्थानों में से एक है; २०१२ में यहाँ लगभग १०.६ लाख तीर्थयात्रियों का आगमन दर्ज किया गया था।
 
बद्रीनाथ मन्दिर में हिंदू धर्म के देवता विष्णु के एक रूप "बद्रीनारायण" की पूजा होती है। यहाँ उनकी १ मीटर (३.३ फीट) लंबी [[शालीग्राम|शालिग्राम]] से निर्मित मूर्ति है जिसके बारे में मान्यता है कि इसे [[आदि शंकराचार्य]] ने ८वीं शताब्दी में समीपस्थ नारद कुण्ड से निकालकर स्थापित किया था। इस मूर्ति को कई हिंदुओं द्वारा विष्णु के आठ ''स्वयं व्यक्त क्षेत्रों'' (स्वयं प्रकट हुई प्रतिमाओं) में से एक माना जाता है। यद्यपि, यह मन्दिर उत्तर भारत में स्थित है, "रावल" कहे जाने वाले यहाँ के मुख्य पुजारी दक्षिण भारत के [[केरल]] राज्य के नम्बूदरी सम्प्रदाय के ब्राह्मण होते हैं। बद्रीनाथ मन्दिर को ''उत्तर प्रदेश राज्य सरकार अधिनियम – ३०/१९४८'' में ''मन्दिर अधिनियम – १६/१९३९'' के तहत शामिल किया गया था, जिसे बाद में "''श्री बद्रीनाथ तथा श्री केदारनाथ मन्दिर अधिनियम''" के नाम से जाना जाने लगा। वर्तमान में [[उत्तराखण्ड सरकार]] द्वारा नामित एक सत्रह सदस्यीय समिति दोनों, बद्रीनाथ एवं [[केदारनाथ कस्बा|केदारनाथ]] मन्दिरों, को प्रशासित करती है।
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