हर की पौड़ी
| हर की पौड़ी | |
|---|---|
हर की पौडी पर सांय का दृश्य | |
| धर्म संबंधी जानकारी | |
| सम्बद्धता | सनातन धर्म |
| प्रोविंस | हरिद्वार |
| निर्माण वर्ष | पौराणिक |
| अवस्थिति जानकारी | |
| अवस्थिति | हरिद्वार उत्तराखण्ड |
| ज़िला | हरिद्वार |
| राज्य | उत्तराखण्ड |
हर की पौड़ी भारत के उत्तराखण्ड राज्य की एक धार्मिक नगरी हरिद्वार का एक पवित्र और सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है।[1] इसका भावार्थ है भगवान विष्णु (हरि) के पैर।[2]
ऐसा माना जाता है कि यह वही सटीक स्थान है जहाँ गंगा पहाड़ों को छोड़कर मैदानों में प्रवेश करती है। यह घाट गंगा नहर के पश्चिमी तट पर है जिसके माध्यम से गंगा को उत्तर की ओर मोड़ दिया जाता है। हर की पौड़ी वह क्षेत्र भी है जहाँ हज़ारों तीर्थयात्री एकत्रित होते हैं और कुंभ मेले के दौरान उत्सव शुरू होते हैं , जो हर बारह साल में होता है, और अर्ध कुंभ मेला , जो हर छह साल में होता है और वैसाखी का पंजाबी त्यौहार , जो हर साल अप्रैल के महीने में होने वाला एक फ़सल उत्सव है।[3]
शाब्दिक रूप से, " हर " का अर्थ है "ईश्वर", "की" का अर्थ है "की" और "पौड़ी" का अर्थ है "सीढ़ियाँ"। ऐसा माना जाता है कि भगवान विष्णु ने वैदिक काल में हर की पौड़ी में ब्रह्मकुंड का दौरा किया था ।[4] इसका ऐतिहासिक घंटाघर 1938 में बनाया गया था।[5]
कथा
[संपादित करें]हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मन्थन के बाद जब धन्वंतरी अमृत के लिए झगड़ रहे देव-दानवों से बचाकर अमृत ले जा रहे थे तो पृथ्वी पर अमृत की कुछ बूँदें गिर गई और वे स्थान धार्मिक महत्व वाले स्थान बन गए। अमृत की बूँदे हरिद्वार में भी गिरी और जहाँ पर वे गिरी थीं वह स्थान हर की पौड़ी था। यहाँ पर स्नान करना हरिद्वार आए हर श्रद्धालु की सबसे प्रबल इच्छा होती है क्योंकि यह माना जाता है कि यहाँ पर स्नान से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
मान्यता
[संपादित करें]हर की पौड़ी या ब्रह्मकुण्ड पवित्र नगरी हरिद्वार का मुख्य घाट है।[6] ये माना गया है कि यही वह स्थान है जहाँ से गंगा नदी पहाड़ों को छोड़ मैदानी क्षेत्रों की दिशा पकड़ती है। मान्यता के अनुसार इस स्थान पर नदी में पापों को धो डालने की शक्ति है और यहाँ एक पत्थर में श्रीहरि के पदचिह्न इस बात का समर्थन करते हैं। यह घाट गंगा नदी की नहर के पश्चिमी तट पर है जहाँ से नदी उत्तर दिशा की ओर मुड़ जाती है। हर शाम सूर्यास्त के समय साधु संन्यासी गंगा आरती करते हैं, उस समय नदी का नीचे की ओर बहता जल पूरी तरह से रोशनी में नहाया होता है और याजक अनुष्ठानों में संलग्न होते हैं।
निकटवर्ती
[संपादित करें]इस मुख्य घाट के अतिरिक्त यहाँ पर नहर के किनारे ही छोटे-छोटे अनेक घाट हैं। थोड़े-थोड़े अन्तराल पर ही सन्तरी व सफेद रंग के जीवन रक्षक टावर लगे हुए हैं जो ये निगरानी रखते हैं कि कहीं कोई श्रद्धालु बह न जाए।
चित्र दीर्घा
[संपादित करें]- हर की पौड़ी पर सन्ध्या आरती का एक दृश्य।
- हर की पौड़ी पर घण्टाघर।
- रात्री के समय हर की पौड़ी।
- साँझ के समय हर की पौड़ी।
बाहरी कड़ियाँ
[संपादित करें]- हर की पौड़ी पर संध्या आरती
- हर की पौड़ी के समाचार
- हर की पौड़ी पर एक कविता द्वारा मीनाक्षी ठाकुर
- हर की पौड़ी - चित्रावली १
संदर्भ
[संपादित करें]- ↑ Saluja, Kuldeep (2021). "Famous religious places". Impact Of Vaastu On Nations, Religious & Historical Places (अंग्रेज़ी भाषा में). New Delhi: Diamond Pocket Books Pvt Ltd. pp. 91–94. ISBN 978-93-90504-86-2. 31 जनवरी 2023 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 31 जनवरी 2023.
- ↑ Bansal, Sunita Pant (2012). "Sapt Puri". Hindu Pilgrimage (अंग्रेज़ी भाषा में). New Delhi: V&S Publishers. p. 45. ISBN 978-93-5057-251-1. 31 जनवरी 2023 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 31 जनवरी 2023.
- ↑ "Har Ki Pauri Haridwar - Har Ki Pauri Haridwar Uttarakhand India". www.bharatonline.com. अभिगमन तिथि: 16 अक्टूबर 2010.
{{cite web}}: CS1 maint: url-status (link) - ↑ TheHaridwar इम्पीरियल गजेटियर आफ़ इण्डिया, 1909, v. 13, p. 52.
- ↑ Kumar, Ashish (2021). A Citygraphy of Panchpuri Haridwar (अंग्रेज़ी भाषा में). Chennai: Clever Fox Publishing. p. 33. ISBN 978-81-949291-8-5. 29 मार्च 2023 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 6 फ़रवरी 2023.
- ↑ "Har Ki Pauri". 29 मई 2022 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 21 मई 2022.