वार्ता:बद्रीनाथ मन्दिर

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यह पृष्ठ बद्रीनाथ मन्दिर लेख के सुधार पर चर्चा करने के लिए वार्ता पन्ना है। यदि आप अपने संदेश पर जल्दी सबका ध्यान चाहते हैं, तो यहाँ संदेश लिखने के बाद चौपाल पर भी सूचना छोड़ दें।

लेखन संबंधी नीतियाँ

समीक्षा पूर्व सुधार[संपादित करें]

इस संपादन से शुरू करें तो दो जगह समस्यायें प्रतीत हो रहीं।

1. शालिग्राम, जहाँ तक मुझे पता है फाइनल प्रोडक्ट होता है। शेल नामक चट्टान के काम्पैक्ट रूप वाली चट्टानों के टुकड़े जो नदी की धारा के साथ बहते हुए गोल अथवा अंडाकार रूप ले लेते हैं उन्हें शालिग्राम कहा जाता है और विष्णु के रूप में पूजा होती है। अब इस तरह के कॉम्पैक्ट शेल नामक पत्थर (मूल पदार्थ) को भी शालिग्राम कहते हैं या नहीं यह मुझे नहीं मालूम। विवरण से यह लग रहा कि मूर्ति उस पत्थर की बनी है जिससे शालिग्राम बनते हैं। ऐसे में यह कहना कि शालिग्राम निर्मित मूर्ति है शायद उचित न हो, क्योंकि इस दशा में हम रॉ मटेरियल के रूप में इस्तेमाल पत्थर को शालिग्राम कह रहे हैं। उसे किसी और तरीके से कहा जाता हो तो खोजा जाय अन्यथा इसमें पत्थर जैसा कुछ जोड़ना पड़ेगा; जैसे, शालिग्राम पत्थर से निर्मित मूर्ति या ऐसे ही कुछ... (मैंने कोई खोज नहीं की)।

2. "स्वयं व्यक्त क्षेत्र" के बारे में है जहाँ मैंने उद्धरण का टैग लगाया था। इसके लिए मैंने खोजा था और मुझे कोई प्रामाणिक स्रोत मिला नहीं। लेख में अंगरेजी वाला संदर्भ इस्तेमाल किया गया है जो पढ़ कर वेरीफाई करने योग्य नहीं है। अन्यत्र कहीं प्रामाणिक जगह पर इस तथ्य के बारे में लिखा मिल नहीं रहा। एक श्लोक मिला है:

आद्यं रङ्गमिति प्रोक्तं विमानं रङ्गसंज्ञितम् श्रीमुष्णं वेङ्कटाद्रिं च सालग्रामं च नैमिशम् । तोयाद्रिं पुष्करं चैव नरनारायणाश्रमम् अष्टौ मे मूर्तयः सन्ति स्वयंव्यक्ता महीतले ॥

पर यह किस ग्रंथ से है यह नहीं पता। जहाँ भी इसका विवेचन ऑनलाइन मिल रहा ब्लॉग जैसी जगहों पर ही मिल रहा। अगर यह सच है तो ऐसे प्रमाण कई पुस्तकों में मिलने चाहियें।

साथ ही, इसे भाषा में लिखने में भी कुछ समस्या है, "क्षेत्र" वे जगहें हैं जहाँ ऐसी मूर्तियाँ प्रकट हुई होंगी। मूर्तियाँ केवल "स्वयं व्यक्त" मूर्तियाँ ही कही जाएँगी। कृपया इसे भी खोजें और तदनुसार अद्यतन करें। --SM7--बातचीत-- 17:22, 11 दिसम्बर 2018 (UTC)