भारतीय थलसेना

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
भारतीय सेना
Indian Army
ADGPI Indian Army.jpg
भारतीय सेना की कलगी
स्थापना 1 अप्रैल 1895; 121 वर्ष पहले (1895-04-01)
देश Flag of India.svg भारत
प्रकार थलसेना
विशालता १,२००,२५५ सक्रिय कर्मिक[1]
९९०,९६० रिजर्व कर्मीक[2]
१३६ विमान[3]
का भाग भारतीय सशस्‍त्र सेनाएँ
मुख्यालय नई दिल्ली
आदर्श वाक्य "सर्विस बिफोर सेल्फ़" (स्वपूर्व सेवा)
रंग सुनहरा, लाल और काला
            
वर्षगांठ १५ जनवरी – सेना दिवस
जालस्थल indianarmy.nic.in
सेनापति
थलसेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत[4]
उप सेनाप्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल सरत चन्द[5]
प्रसिद्ध
सेनापति
फ़ील्ड मार्शल के॰एम॰ करिअप्पा
फ़ील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ
बिल्ला
ध्वज Flag of Indian Army.svg
प्रयुक्त वायुयान
हैलीकॉप्टर एचएएल रुद्र
परिवहन एचएएल ध्रुव, एचएएल चेतल, एचएएल चीता और चीतल

भारतीय सेना थलसेना है जो भारतीय सशस्‍त्र सेनाओं का सबसे बड़ा घटक है। भारतीय सेना का प्रधान सेनापति भारत का राष्ट्रपति होता है[6] और इसकी कमान भारतीय थलसेनाध्यक्ष के हाथों में होती है जो कि चार-सितारा जनरल स्तर के अधिकारी होते हैं। पांच-सितारा रैंक के साथ फील्ड मार्शल की रैंक भारतीय सेना में श्रेष्ठतम सम्मान की औपचारिक स्थिति है, आजतक मात्र दो अधिकारियों को इससे सम्मानित किया गया है। भारतीय सेना का उद्भव ईस्ट इण्डिया कम्पनी, जो कि ब्रिटिश भारतीय सेना के रूप में परिवर्तित हुई थी, और भारतीय राज्यों की सेना से हुआ, जो स्वतंत्रता के पश्चात राष्ट्रीय सेना के रूप में परिणत हुई। भारतीय सेना की ईकाइयों और पलटनों का विविध इतिहास रहा है जिसने भारत की स्वतंत्रता से पूर्व एवं पश्चात् विश्व के विभिन्न युद्धों और अभियानों में भाग लेकर युद्ध एवं थियेटर सम्मान प्राप्त किये हैं।[7]

अनुक्रम

उद्देश्य[संपादित करें]

Indian Army Soldiers Diving
  • बाहरी खतरों के विरुद्ध शक्ति संतुलन के द्वारा या युद्ध छेड़ने की स्थिति में संरक्षित राष्ट्रीय हितों, संप्रभुता की रक्षा, क्षेत्रीय अखंडता और भारत की एकता की रक्षा करना।
  • सरकारी तन्त्र को छाया युद्ध और आन्तरिक खतरों में मदद करना और आवश्यकता पड़ने पर नागरिक अधिकारों में सहायता करना।"[8]
  • दैवीय आपदा जैसे भूकंप,बाढ़ , समुद्री तूफान ,आग लगने ,विस्फोट आदि के अवसर पर नागरिक प्रशासन की मदद करना।
  • नागरिक प्रशासन के पंगु होने पर उसकी सहायता करना।

इतिहास[संपादित करें]

१९४७ में आजा़दी मिलने के बाद ब्रिटिश भारतीय सेना को नये बने राष्ट्र भारत और इस्लामी गणराज्य पाकिस्तान की सेवा करने के लिये २ भागों में बांट दिया गया। ज्यादातर इकाइयों को भारत के पास रखा गया। चार गोरखा सैन्य दलों को ब्रिटिश सेना में स्थानांतरित किया गया जबकि शेष को भारत के लिए भेजा गया।

जैसा कि ज्ञात है, भारतीय सेना में ब्रिटिश भारतीय सेना से व्युत्पन्न हुयी है तो इसकी संरचना, वर्दी और परंपराओं को अनिवार्य रूप से विरासत में ब्रिटिश से लिया गया हैं|

प्रथम कश्मीर युद्ध (१९४७)[संपादित करें]

आजादी के लगभग तुरंत बाद से ही भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव पैदा हो गया था और दोनों देशों के बीच पहले तीन पूर्ण पैमाने पर हुये युद्ध के बाद राजसी राज्य कश्मीर का विभाजन कर दिया गय। कश्मीर के महाराजा की भारत या पाकिस्तान में से किसी भी राष्ट्र के साथ विलय की अनिच्छा के बाद पाकिस्तान द्वारा कश्मीर के कुछ हिस्सों मे आदिवासी आक्रमण प्रायोजित करवाया गया। भारत द्वारा आरोपित पुरुषों को भी नियमित रूप से पाकिस्तान की सेना मे शामिल किया गया। जल्द ही पाकिस्तान ने अपने दलों को सभी राज्यों को अपने में संलग्न करने के लिये भेजा। महाराजा हरि सिंह ने भारत और लॉर्ड माउंटबेटन से अपनी मदद करने की याचना की, पर उनको कहा गया कि भारत के पास उनकी मदद करने के लिये कोई कारण नही है। इस पर उन्होने कश्मीर के विलय के एकतरफा सन्धिपत्र पर हस्ताक्षर किये जिसका निर्णय ब्रिटिश सरकार द्वारा लिया गया पर पाकिस्तान को यह सन्धि कभी भी स्वीकार नहीं हुई। इस सन्धि के तुरन्त बाद ही भारतीय सेना को आक्रमणकारियों से मुकाबला करने के लिये श्रीनगर भेजा गया। इस दल में जनरल थिम्मैया भी शामिल थे जिन्होने इस कार्यवाही में काफी प्रसिद्धि हासिल की और बाद में भारतीय सेना के प्रमुख बने। पूरे राज्य में एक गहन युद्ध छिड़ गया और पुराने साथी आपस मे लड़ रहे थे। दोनो पक्षों में कुछ को राज्यवार बढत मिली तो साथ ही साथ महत्वपूर्ण नुकसान भी हुआ। १९४८ के अन्त में नियन्त्रण रेखा पर लड़ रहे सैनिकों में असहज शान्ति हो गई जिसको संयुक्त राष्ट्र द्वारा भारत और पाकिस्तान में विभाजित कर दिया गया। पाकिस्तान और भा‍रत के मध्य कश्मीर में उत्पन्न हुआ तनाव कभी भी पूर्ण रूप से समाप्त नहीं हुआ है।

संयुक्त राष्ट्र शान्ति सेना में योगदान[संपादित करें]

कोरिया में सितंबर १९५३ में तटस्थ बफर जोन के साथ शांति स्थापित करने के लिए भारतीय सेना के आगमन पर

वर्तमान में भारतीय सेना की एक टुकड़ी संयुक्त राष्ट्र की सहायता के लिये समर्पित रहती है। भारतीय सेना द्वारा निरंतर कठिन कार्यों में भाग लेने की प्रतिबद्धताओं की हमेशा प्रशंसा की गई है। भारतीय सेना ने संयुक्त राष्ट्र के कई शांति स्थापित करने की कार्यवाहियों में भाग लिया गया है जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं: अंगोला कम्बोडिया साइप्रस लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो, अल साल्वाडोर, नामीबिया, लेबनान, लाइबेरिया, मोजाम्बिक, रवाण्डा, सोमालिया, श्रीलंका और वियतनाम| भारतीय सेना ने कोरिया में हुयी लड़ाई के दौरान घायलों और बीमारों को सुरक्षित लाने के लिये भी अपनी अर्द्ध-सैनिकों की इकाई प्रदान की थी।

हैदराबाद का विलय (१९४८)[संपादित करें]

भारत के विभाजन के उपरान्त राजसी राज्य हैदराबाद, जो कि निजा़म द्वारा शासित था, ने स्वतन्त्र राज्य के तौर रहना पसन्द किया। निजा़म ने हैदराबाद को भारत में मिलाने पर अपनी आपत्ति दर्ज करवाई। भारत सरकार और हैदराबाद के निज़ाम के बीच पैदा हुई अनिर्णायक स्थिति को समाप्त करने हेतु भारत के उप-प्रधानमन्त्री सरदार बल्लभ भाई पटेल द्वारा १२ सितम्बर १९४८ को भारतीय टुकड़ियों को हैदराबाद की सुरक्षा करने का आदेश दिया। ५ दिनों की गहन लड़ाई के बाद वायु सेना के समर्थन से भारतीय सेना ने हैदराबाद की सेना को परास्त कर दिया। उसी दिन हैदराबाद को भारत गणराज्य का भाग घोषित कर दिया गया। पोलो कार्यवाही के अगुआ मेजर जनरल जॉयन्तो नाथ चौधरी को कानून व्यवस्था स्थापित करने के लिये हैदराबाद का सैन्य शाशक (१९४८-१९४९) घोषित किया गया।

गोवा, दमन और दीव का विलय (१९६१)[संपादित करें]

इन्हें भी देखें: गोवा मुक्ति संग्राम

ब्रिटिश और फ्रान्स द्वारा अपने सभी औपनिवेशिक अधिकारों को समाप्त करने के बाद भी भारतीय उपमहाद्वीप, गोवा, दमन और दीव में पुर्तगालियों का शासन रहा। पुर्तगालियों द्वारा बारबार बातचीत को अस्वीकार कर देने पर नई दिल्ली द्वारा १२ दिसम्बर १९६१ को ऑपरेशन विजय की घोषणा की और अपनी सेना के एक छोटे से दल को पुर्तगाली क्षेत्रों पर आक्रमण करने के आदेश दिए। २६ घंटे चले युद्ध के बाद गोवा और दमन और दीव को सुरक्षित आजाद करा लिया गया और उनको भारत का अंग घोषित कर दिया गया।

भारत-चीन युद्ध (१९६२)[संपादित करें]

१९५९ से भारत प्रगत नीति का पालन करना शुरु कर दिया। 'प्रगत नीति' के अंतर्गत भारतीय गश्त दलों ने चीन द्वारा भारतीय सीमा के काफी अन्दर तक हथियाई गई चौकियों पर हमला बोल कर उन्हें फिर कब्ज़े में लिया। भारत के मैक-महोन रेखा को ही अंतरराष्ट्रीय सीमा मान लिए जाने पर जोर डालने के कारण भारत और चीन की सेनाओं के बीच छोटे स्तर पर संघर्ष छिड़ गया। बहरहाल, भारत और चीन के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों के कारण विवाद ने अधिक तूल नहीं पकड़ा।

हैदराबाद व गोवा में अपने सैन्य अभियानों की सफलता से उत्साहित भारत ने चीन के साथ सीमा विवाद में आक्रामक रुख ले लिया। 1962 में, भारतीय सेना को भूटान और अरुणाचल प्रदेश के बीच की सीमा के निकट और विवादित मैकमहोन रेखा के लगभग स्थित ५ किमी उत्तर में स्थित थागला रिज तक आगे बढ़ने का आदेश दिया गया। इसी बीच चीनी सेनाएँ भी भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ कर चुकी थीं और दोनो देशों के बीच तनाव चरम पर पहुँच गया जाब भारतीय सेनाओं ने पाया कि चीन ने अक्साई चिन क्षेत्र में सड़क बना ली है। वार्ताओं की एक श्रृंखला के बाद, चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी ने थागला रिज पर भारतीय सेनाओं के ठिकानों पर हमला बोल दिया। चीन के इस कदम से भारत आश्चर्यचकित रह गया और 12 अक्टूबर को नेहरू ने अक्साई चिन से चीनियों को खदेड़ने के आदेश जारी कर दिए। किन्तु, भारतीय सेना के विभिन्न प्रभागों के बीच तालमेल की कमी और वायु सेना के प्रयोग के निर्णय में की गई देरी ने चीन को महत्वपूर्ण सामरिक व रणनीतिक बढ़त लेने का अवसर दे दिया। 20 अक्टूबर को चीनी सैनिकों नें दोनों मोर्चों उत्तर-पश्चिम और सीमा के उत्तर-पूर्वी भागों में भारत पर हमला किया और अक्साई चिन और अरुणाचल प्रदेश के विशाल भाग पर कब्जा कर लिया।

जब लड़ाई विवादित प्रदेशों से भी परे चली गई तो चीन ने भारत सरकार को बातचीत के लिए आमंत्रण दिया, लेकिन भारत अपने खोए क्षेत्र हासिल करने के लिए अड़ा रहा। कोई शांतिपूर्ण समझौता न होते देख, चीन ने एकतरफा युद्धविराम घोषित करते हुए अरुणाचल प्रदेश से अपनी सेना को वापस बुला लिया। वापसी के कारण विवादित भी हैं। भारत का दावा है कि चीन के लिए अग्रिम मोर्चे पर मौजूद सेनाओं को सहायता पहुँचाना संभव न रह गया था, तथा संयुक्त राज्य अमेरिका का राजनयिक समर्थन भी एक कारण था। जबकि चीन का दावा था कि यह क्षेत्र अब भी उसके कब्जे में है जिसपर उसने कूटनीतिक दावा किया था। भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच विभाजन रेखा को वास्तविक नियंत्रण रेखा का नाम दिया गया।

भारत के सैन्य कमांडरों द्वारा लिए गए कमज़ोर फैसलों ने कई सवाल उठाए। जल्द ही भारत सरकार द्वारा भारतीय सेना के खराब प्रदर्शन के कारणों का निर्धारण करने के लिए हेंडरसन ब्रूक्स समिति का गठन कर दिया गया। कथित तौर पर समिति की रिपोर्ट ने भारतीय सशस्त्र बलों की कमान की गलतियाँ निकाली और अपनी नाकामियों के लिए कई मोर्चों पर विफल रहने के लिए कार्यकारी सरकार की बुरी तरह आलोचना की। समिति ने पाया कि हार के लिए प्रमुख कारण लड़ाई शुरु होने के बाद भी भारत चीन के साथ सीमा पर कम सैनिकों की तैनाती था और यह भी कि भारतीय वायु सेना को चीनी परिवहन लाइनों को लक्ष्य बनाने के लिए चीन द्वारा भारतीय नागरिक क्षेत्रों पर जवाबी हवाई हमले के डर से अनुमति नहीं दी गई। ज्यादातर दोष के तत्कालीन रक्षा मंत्री कृष्ण मेनन की अक्षमता पर भी दिया गया। रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की लगातार माँग के बावजूद हेंडरसन - ब्रूक्स रिपोर्ट अभी भी गोपनीय रखी गई है।

द्वितीय कश्मीर युद्ध (१९६५)[संपादित करें]

Tanks of 18th Cavalry of the Indian Army take charge at Pakistani positions during the 1965 war.

बांग्लादेश मुक्ति युद्ध (१९७१)[संपादित करें]

सियाचिन विवाद (1984-)[संपादित करें]

[[चित्र:Mi-8 Indian Army.jpg|thumb|The Mi-8 of the Indian Army takes part in a military exercise. The

उपद्रव-रोधी गतिविधियाँ[संपादित करें]

कारगिल संघर्ष (1999)[संपादित करें]

प्रमुख युद्धाभ्यास[संपादित करें]

[[चित्र:IAexercise.jpg|thumb|Indian Army T-90 tanks take part during an exercise in the Thar Desert.]]

ऑपरेशन पराक्रम[संपादित करें]

अन्य सैन्य व्यूह (Other Field Formations)[संपादित करें]

A section of the Indian Army takes charge during a military exercise.

पैदल सेना रेजिमेंट (Infantry Regiments)[संपादित करें]

तोपखाना रेजिमेंट (Artillery Regiments)[संपादित करें]

तोपखाना सेना के विध्वंसक शक्ति का मुख्य अंग है | भारत में प्राचीन ग्रंथों में तोपखाने का वर्णन मिलता है | तोप को संस्कृत में शतघ्नी कहा जाता है | मध्य कालीन इतिहास में तोप का प्रयोग सर्वप्रथम बाबर ने पानीपत के प्रथम युद्ध में सन १५२६ ई० में किया था| कुछ नवीन प्रमाणों से यहाँ प्रतीत होता है के तोप का प्रयोग बहमनी राजाओं ने १३६८ में अदोनी के युद्ध में तथा गुजरात के शासक मोहमद शाह ने १५ वीं शताब्दी में किया था |भरत मे तोप खाना के दोउ केन्द्र है ह्य्द्रबद और नसिक रोअद

थलसेना का कार्यबल[संपादित करें]

क्षमता[संपादित करें]

विदेशी राष्ट्राध्यक्ष की राजकीय यात्रा में घुडसवार राष्ट्रपति अंगरक्षक.
भारतीय थल सेना सम्बंधित आंकड़े
कार्यरत सैनिक 1,300,000
आरक्षित सैनिक 1,200,000
प्रादेशिक सेना 200,000**
मुख्य युद्धक टैंक 4500
तोपखाना 12,800
प्रक्षेपास्त्र 100 (अग्नि-1, अग्नि-2)
क्रूज प्रक्षेपास्त्र ब्रह्मोस
वायुयान 10 स्क्वाड्रन हेलिकॉप्टर
सतह से वायु प्रक्षेपास्त्र 90000

* 300,000 प्रथम पंक्ति ओर 500,000 द्वितीय पंक्ति के योद्धा सम्मिलित हैं

** 40,000 प्रथम पंक्ति ओर 160,000 द्वितीय पंक्ति के योद्धा सम्मिलित हैं


पदानुक्रम संरचना[संपादित करें]

The 1st Battalion of 1 Gorkha Rifles of the Indian Army take position outside a simulated combat town during a training exercise.

भारतीय सेना के विभिन्न पद अवरोही क्रम में इस प्रकार हैं:

कमीशन प्राप्त अधिकारी

कनिष्ठ कमीशन प्राप्त अधिकारी (JCOs)

गैर कमीशन प्राप्त अधिकारी (NCOs)

नोट:
•1। आज तक केवल दो ही जनरल फील्ड मार्शल के पद से विभूषित हुए हैं। - : फील्ड मार्शल के एम करिअप्पा – भारतीय सेना के प्रथम कमाण्डर इन चीफ (यह पद अब समाप्त कर दिया गया है)  – तथा फील्ड मार्शल सैम मानेकशा, १९७१ युद्ध के दौरान सेनाध्यक्ष
•2. This has now been discontinued. Non-Commissioned Officers in the rank of Havildar are elible for Honorary JCO ranks.
•3. Given to Outstanding JCO's Rank and pay of a Lieutenant, role continues to be of a JCO.

युद्ध सिद्धान्त[संपादित करें]

उपस्कर एवं उपकरण[संपादित करें]

T-72 Ajeya.
Nag missile and NAMICA (Nag Missile Carrier).

विमान[संपादित करें]

विमान उद्गम प्रकार संस्करण सेवारत [9] टिप्पणी
HAL Dhruv Flag of India.svg भारत utility helicopter 36+ To acquire 73 more Dhruv in next 5 years.
Aérospatiale SA 316 Alouette III Flag of France.svg फ्रांस utility helicopter SA 316B Chetak 60 to be replaced by Dhruv
Aérospatiale SA 315 Lama Flag of France.svg फ्रांस utility helicopter SA 315B Cheetah 48 to be replaced by Dhruv
DRDO Nishant Flag of India.svg भारत reconnaissance UAV 1 Delivery of 12 UAV's in 2008.
IAI Searcher II Flag of Israel.svg इस्राइल reconnaissance UAV 100+
IAI Heron II Flag of Israel.svg इस्राइल reconnaissance UAV 50+

[10]

परम वीर चक्र विजेता[संपादित करें]

भारत का सर्वोच्च वीरता पुरस्कार परमवीर चक्र प्राप्त करने वाले वीरों की सूची इस प्रकार है :

संख्या नाम रेजीमेंट तिथि स्थान टिप्पणी
IC-521 मेजर सोमनाथ शर्मा चौथी बटालियन, कुमाऊँ रेजीमेंट 3 नवंबर, 1947 बड़गाम, कश्मीर मरणोपरांत
IC-22356 लांस नायक करम सिंह पहली बटालियन, सिख रेजीमेंट 13 अक्तूबर, 1948 टिथवाल, कश्मीर
SS-14246 सेकेंड लेफ़्टीनेंट राम राघोबा राणे इंडियन कार्प्स ऑफ इंजिनयर्स 8 अप्रैल, 1948 नौशेरा, कश्मीर
27373 नायक यदुनाथ सिंह पहली बटालियन, राजपूत रेजीमेंट फरवरी 1948 नौशेरा, कश्मीर मरणोपरांत
2831592 कंपनी हवलदार मेजर पीरू सिंह छ्ठी बटालियन, राजपूताना राइफल्स 17-18 जुलाई, 1948 टिथवाल, कश्मीर मरणोपरांत
IC-8497 कैप्टन गुरबचन सिंह सलारिया तीसरी बटालियन, १ गुरखा राइफल्स 5 दिसंबर, 1961 एलिजाबेथ विले, काटंगा, कांगो मरणोपरांत
IC-7990 मेजर धनसिंह थापा पहली बटालियन, गुरखा राइफल्स 20 अक्तूबर, 1962 लद्दाख,
JC-4547 सूबेदार जोगिंदर सिंह पहली बटालियन, सिख रेजीमेंट 23 अक्तूबर, 1962 तोंगपेन ला, नार्थ इस्ट फ्रंटियर एजेंसी, भारत मरणोपरांत
IC-7990 मेजर शैतान सिंह तेरहवीं बटालियन, कुमाऊँ रेजीमेंट 18 नवंबर, 1962 रेज़ांग ला मरणोपरांत
2639885 कंपनी क्वार्टर मास्टर हवलदार अब्दुल हमीद चौथी बटालियन, बाम्बे ग्रेनेडियर्स 10 सितंबर, 1965 चीमा, खेमकरण सेक्टर मरणोपरांत
IC-5565 लेफ्टीनेंट कर्नल आर्देशिर तारापोर द पूना हार्स 15 अक्तूबर, 1965 फिलौरा, सियालकोट सेक्टर, पाकिस्तान मरणोपरांत
4239746 लांस नायक अलबर्ट एक्का चौदहवीं बटालियन, बिहार रेजीमेंट 3 दिसंबर, 1971 गंगासागर मरणोपरांत
10877 F(P) फ्लाईंग आफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों अठारहवीं स्क्वैड्रन, भारतीय वायुसेना 14 दिसंबर, 1971 श्रीनगर, कश्मीर मरणोपरांत
IC-25067 लेफ्टीनेंट अरुण क्षेत्रपाल पूना हार्स 16 दिसंबर, 1971 जरपाल, शकरगढ़ सेक्टर मरणोपरांत
IC-14608 मेजर होशियार सिंह तीसरी बटालियन, बाम्बे ग्रेनेडियर्स 17 दिसंबर, 1971 बसंतार नदी, शकरगढ़ सेक्टर
JC-155825 नायब सूबेदार बन्ना सिंह आठवीं बटालियन, जम्मू कश्मीर लाइट इनफेन्ट्री 23 जून, 1987 सियाचिन ग्लेशियर, जम्मू कश्मीर
IC-32907 मेजर रामास्वामी परमेश्वरन आठवीं बटालियन, महार रेजीमेंट 25 नवंबर, 1987 श्रीलंका मरणोपरांत
IC-56959 लेफ्टीनेंट मनोज कुमार पांडे प्रथम बटालियन, ग्यारहवीं गोरखा राइफल्स 3 जुलाई, 1999 ज़ुबेर टाप, बटालिक सेक्टर, कारगिल क्षेत्र, जम्मू कश्मीर मरणोपरांत
2690572 ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव अठारहवीं बटालियन, द ग्रेनेडियर्स 4 जुलाई, 1999 टाइगर हिल्स, कारगिल क्षेत्र
13760533 राइफलमैन संजय कुमार तेरहवीं बटालियन, जम्मू कश्मीर राइफल्स 5 जुलाई, 1999 फ्लैट टाप क्षेत्र, कारगिल
IC-57556 कैप्टन विक्रम बत्रा तेरहवीं बटालियन, जम्मू कश्मीर राइफल्स 6 जुलाई, 1999 बिंदु 5140, बिंदु 4875, कारगिल क्षेत्र मरणोपरांत

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Press Information Bureau [पत्र सूचना कार्यालय]". pib.nic.in. http://pib.nic.in/newsite/erelease.aspx?relid=(Release%20ID%20:148814). 
  2. सामरिक अध्ययन के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थान (३ फ़रवरी २०१४) (अंग्रेज़ी में). The Military Balance 2014 [सैन्य संतुलन २०१४,]. लंदन: रूटलेज. प॰ २४१–२४६. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9781857437225. 
  3. "World Air Forces 2015 [विश्व वायु सेना २०१५]" (अंग्रेज़ी में) (पीडीएफ). p. १७. https://d1fmezig7cekam.cloudfront.net/VPP/Global/Flight/Airline%20Business/AB%20home/Edit/WorldAirForces2015.pdf. अभिगमन तिथि: १९ फ़रवरी २०१७. 
  4. "Chief of the Army Staff" (अंग्रेज़ी में). http://indianarmy.nic.in/Site/FormTemplete/frmTemp1PTC2C.aspx?MnId=AK1o9xW+BP4oIf5XyUiT3w==&ParentID=HnwuzQObYhoYhuxEIPsHoA==. अभिगमन तिथि: १९ फ़रवरी २०१७. 
  5. "Lieutenant-general sarath chand is vice chief of army staff [लेफ्टिनेंट जनरल सरत चन्द भारतीय सेना के उप प्रमुख बने]" (अंग्रेज़ी में). इंडियन एक्सप्रेस. ५ जनवरी २०१७. http://www.newindianexpress.com/states/kerala/2017/jan/05/lieutenant-general-sarath-chand--is-vice-chief-of-army-staff-1556229.html. अभिगमन तिथि: १९ फ़रवरी २०१७. 
  6. "About – The President of India [भारत के राष्ट्रपति – के बारे में]" (अंग्रेज़ी में). http://presidentofindia.nic.in/about.htm. अभिगमन तिथि: १९ फ़रवरी २०१७. 
  7. सिंह, सरबंस (१९९३) (अंग्रेज़ी में). Battle Honours of the Indian Army 1757–1971 [भारतीय सेना के युद्ध सम्मान १७५७–१९७१]. नई दिल्ली: विजन बुक्स. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 8170941156. 
  8. Indian Army doctrine
  9. Indian military aviation OrBat
  10. [1]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]


हैदराबाद और गोवा में अपने सैन्य अभियानों की सफलता से उत्साहित भारत चीन के साथ सीमा विवाद की दिशा में एक और अधिक आक्रामक रुख ले लिया। 1962 में, भारतीय सेना को स्थानांतरित करने का आदेश दिया गया था Thagla रिज भूटान और [[अरुणाचल प्रदेश] और तीन (5 किमी) के बारे में विवादित के मील उत्तर के बीच की सीमा के पास स्थित मैकमोहन रेखा. इस बीच, चीनी सैनिकों को भी दोनों के बीच आयोजित भारतीय क्षेत्र और तनाव में घुसपैठ कर दिया था एक नई उच्च पहुँचे जब भारतीय सेना में चीन द्वारा निर्मित सड़क की खोज अक्साई चिन. विफल वार्ता के एक श्रृंखला के बाद, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी Thagla रिज पर भारतीय सेना के पदों पर हमला. चीन द्वारा इस कदम से आश्चर्य द्वारा भारत पकड़ा और द्वारा 12 अक्टूबर नेहरू चीनी के लिए आदेश दिया अक्साई चिन से निष्कासित किया। हालांकि, भारतीय सेना के विभिन्न प्रभागों और देर विशाल संख्या में भारतीय वायु सेना जुटाने का फैसला के बीच गरीब समन्वय चीन भारत पर एक महत्वपूर्ण सामरिक और रणनीतिक लाभ दिया. 20 अक्टूबर को चीनी सैनिकों दोनों उत्तर - पश्चिम और सीमा के उत्तर - पूर्वी भागों में भारत पर हमला किया और अक्साई चिन और अरुणाचल प्रदेश के विशाल भाग पर कब्जा कर लिया।

के रूप में लड़ विवादित प्रदेशों से परे चला गया है, चीन भारत सरकार पर बुलाया के लिए बातचीत, लेकिन भारत खो क्षेत्र हासिल करने के लिए निर्धारित बने रहे. दृष्टि में कोई शांतिपूर्ण समझौते के साथ, चीन एकतरफा अरुणाचल प्रदेश से अपने बलों को वापस ले लिया। वापसी के लिए कारण भारत चीन के लिए विभिन्न साजो समस्याओं का दावा है और संयुक्त राज्य अमेरिका से राजनयिक का समर्थन करते हुए चीन ने कहा है कि यह अभी भी क्षेत्र में आयोजित किया है कि यह कूटनीतिक दावा किया था पर साथ विवादित हैं। भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच विभाजन रेखा [वास्तविक नियंत्रण] [रेखा] के रूप में नाम था।

गरीब भारत के सैन्य कमांडरों द्वारा किए गए फैसले कई सवाल उठाए. [[रिपोर्ट हेंडरसन - ब्रूक्स | समिति हेंडरसन - ब्रूक्स] जल्द ही भारत सरकार द्वारा स्थापित भारतीय सेना के खराब प्रदर्शन के कारणों का निर्धारण. समिति की रिपोर्ट के जाहिरा तौर पर भारतीय सशस्त्र बलों की कमान के ज्यादा गलती है और अपनी नाकामियों के लिए कई मोर्चों पर बुरी तरह कार्यकारी सरकार की आलोचना की. समिति ने पाया है कि हार के लिए प्रमुख कारण भारत चीन के साथ सीमा पर सैनिकों की तैनाती कम था के बाद भी दुश्मनी शुरू किया और यह भी के लिए अनुमति देने के लिए भारतीय वायु सेना चीनी परिवहन लाइनों को लक्ष्य चीनी जवाबी हमले हवाई के डर से बाहर नहीं है फैसले की आलोचना की भारतीय नागरिक क्षेत्रों पर. ज्यादातर दोष के तत्कालीन रक्षा मंत्री की अक्षमता पर भी निशाना बनाया गया, कृष्ण मेनन. अपनी रिहाई के लिए लगातार कॉल के बावजूद, हेंडरसन - ब्रूक्स रिपोर्ट अभी भी वर्गीकृत रहता है।

द्वितीय कश्मीर (1965) युद्ध[संपादित करें]

साँचा:में पाकिस्तानी पदों पर भारतीय सेना की 18 वीं कैवलरी के टैंक 1965 के युद्ध के दौरान प्रभारी ले. पाकिस्तान के साथ एक दूसरे टकराव पर मोटे तौर पर 1965 में जगह ले ली कश्मीर. पाकिस्तानी राष्ट्रपति अयूब खान शुरूऑपरेशन जिब्राल्टर१,९६५ अगस्त में जिसके दौरान कई पाकिस्तानी अर्धसैनिक सैनिकों को भारतीय प्रशासित कश्मीर में घुसपैठ और भारत विरोधी विद्रोह चिंगारी की कोशिश की. पाकिस्तानी नेताओं का मानना ​​है कि भारत, जो अभी भी विनाशकारी युद्ध भारत - चीन से उबरने था एक सैन्य जोर और विद्रोह के साथ सौदा करने में असमर्थ होगा. हालांकि, आपरेशन एक प्रमुख विफलता के बाद से कश्मीरी लोगों को इस तरह के एक विद्रोह के लिए थोड़ा समर्थन दिखाया और भारत जल्दी बलों स्थानांतरित घुसपैठियों को बाहर निकालने. भारतीय जवाबी हमले के प्रक्षेपण के एक पखवाड़े के भीतर, घुसपैठियों के सबसे वापस पाकिस्तान के लिए पीछे हट गया था।

ऑपरेशन जिब्राल्टर की विफलता से पस्त है और सीमा पार भारतीय बलों द्वारा एक प्रमुख आक्रमण की उम्मीद है, पाकिस्तान [[ऑपरेशन ग्रैंड स्लैम] 1 सितंबर को शुरू, भारत Chamb - Jaurian क्षेत्र हमलावर. जवाबी कार्रवाई में, 6 सितंबर को पश्चिमी मोर्चे पर भारतीय सेना के 15 इन्फैन्ट्री डिवीजन अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर गया।

प्रारंभ में, भारतीय सेना के उत्तरी क्षेत्र में काफी सफलता के साथ मुलाकात की. पाकिस्तान के खिलाफ लंबे समय तक तोपखाने barrages शुरू करने के बाद, भारत कश्मीर में तीन महत्वपूर्ण पर्वत पदों पर कब्जा करने में सक्षम था। 9 सितंबर तक भारतीय सेना सड़कों में काफी पाकिस्तान में बनाया था। भारत पाकिस्तानी टैंकों की सबसे बड़ी दौड़ था जब पाकिस्तान के एक बख्तरबंद डिवीजन के आक्रामक [Asal उत्तर [लड़ाई]] पर सितंबर 10 वीं पा गया था। छह पाकिस्तानी आर्मड रेजिमेंट लड़ाई में भाग लिया, अर्थात् 19 (पैटन) लांसर्स, 12 कैवलरी (Chafee), 24 (पैटन) कैवलरी 4 कैवलरी (पैटन), 5 (पैटन) हार्स और 6 लांसर्स (पैटन). इन तीन अवर टैंक के साथ भारतीय आर्मड रेजिमेंट द्वारा विरोध किया गया, डेकन हार्स (शेरमेन), 3 (सेंचुरियन) कैवलरी और 8 कैवलरी (AMX). लड़ाई इतनी भयंकर और तीव्र है कि समय यह समाप्त हो गया था द्वारा, 4 भारतीय डिवीजन के बारे में या तो नष्ट में 97 पाकिस्तानी टैंक, या क्षतिग्रस्त, या अक्षुण्ण हालत में कब्जा कर लिया था। यह 72 पैटन टैंक और 25 Chafees और Shermans शामिल हैं। 28 Pattons सहित 97 टैंक, 32 शर्त में चल रहे थे। भारतीय खेम करण पर 32 टैंक खो दिया है। के बारे में मोटे तौर पर उनमें से पन्द्रह पाकिस्तानी सेना, ज्यादातर शेरमेन टैंक द्वारा कब्जा कर लिया गया। युद्ध के अंत तक, यह अनुमान लगाया गया था कि 100 से अधिक पाकिस्तानी टैंक को नष्ट कर दिया और गया एक अतिरिक्त 150 भारत द्वारा कब्जा कर लिया गया। भारतीय सेना ने संघर्ष के दौरान 128 टैंक खो दिया है। इनमें से 40 टैंक के बारे में, उनमें से ज्यादातर AMX-13s और Shermans पुराने Chamb और खेम ​​करण के पास लड़ाई के दौरान पाकिस्तानी हाथों में गिर गया।

23 सितंबर तक भारतीय सेना +३००० रणभूमि मौतों का सामना करना पड़ा, जबकि पाकिस्तान ३,८०० की तुलना में कम नहीं सामना करना पड़ा. सोवियत संघ दोनों देशों के बीच एक शांति समझौते की मध्यस्थता की थी और बाद में औपचारिक वार्ता में आयोजित किए गए ताशकंद, एक युद्धविराम पर घोषित किया गया था [23 सितंबर]]. भारतीय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और अयूब खान लगभग सभी युद्ध पूर्व पदों को वापस लेने पर सहमत हुए. समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद घंटे, लाल बहादुर शास्त्री ताशकंद विभिन्न षड्यंत्र के सिद्धांत को हवा देने में रहस्यमय परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। युद्ध पूर्व पदों के लिए वापस करने का निर्णय के कारण भारत के रूप में नई दिल्ली में राजनीति के बीच एक चिल्लाहट युद्ध के अंत में एक लाभप्रद स्थिति में स्पष्ट रूप से किया गया था। एक स्वतंत्र विश्लेषक के मुताबिक, युद्ध को जारी रखने के आगे नुकसान का नेतृत्व होता है और अंततः पाकिस्तान के लिए हारसन्दर्भ त्रुटि: <ref> टैग के लिए समाप्ति </ref> टैग नहीं मिला भारतीय सेना के लिए और अधिक नियंत्रण से ग्लेशियर के 2/3rd जारी है।[1] पाकिस्तान siachen.htm सियाचिन पर नियंत्रण पाने के कई असफल प्रयास किया। देर से 1987 में, पाकिस्तान के बारे में 8,000 सैनिकों जुटाए और उन्हें Khapalu निकट garrisoned, हालांकि Bilafond La. कब्जा करने के लिए लक्ष्य है, वे भारतीय सेना कर्मियों Bilafond रखवाली उलझाने के बाद वापस फेंक दिया गया। पाकिस्तान द्वारा 1990, 1995, 1996 और 1999 में पदों को पुनः प्राप्त करने के लिए आगे प्रयास शुरू किया गया।

भारत के लिए अत्यंत दुर्गम परिस्थितियों और नियमित रूप से पहाड़ युद्ध.[2] सियाचिन से अधिक नियंत्रण बनाए रखने भारतीय सेना के लिए कई सैन्य चुनौतियों poses. कई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के क्षेत्र में निर्माण किया गया, समुद्र के स्तर से ऊपर एक हेलिपैड 21,000 फीट (+६४०० मीटर) सहित[3] 2004 में भारतीय सेना के एक अनुमान के अनुसार 2 लाख अमरीकी डॉलर एक दिन खर्च करने के लिए अपने क्षेत्र में तैनात कर्मियों का समर्थन. http://www.atimes.com/atimes/South_Asia/FI23Df04[4]

उपद्रव - रोधी गतिविधियाँ[संपादित करें]

भारतीय सेना अतीत में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लड़ाई विद्रोही और आतंकवादियों राष्ट्र के भीतर. सेना ऑपरेशन ब्लूस्टार और [ऑपरेशन [Woodrose]] [[सिख] विद्रोहियों का मुकाबला करने के लिए 1980 के दशक में. शुभारंभ सेना के साथ अर्द्धसैनिक बलों भारत के कुछ अर्धसैनिक बलों, बनाए रखने के प्रधानमंत्री जिम्मेदारी है [[कानून और व्यवस्था (राजनीति) | कानून और व्यवस्था] परेशान जम्मू कश्मीर क्षेत्र में. भारतीय सेना श्रीलंका 1987 में के एक भाग के रूप में भी एक दल भेजा है भारतीय शांति सेना.

कारगिल (1999) संघर्ष[संपादित करें]

और कुछ दिनों के बाद, पाकिस्तान और अधिक द्वारा प्रतिक्रिया परमाणु परीक्षणों देने के दोनों देशों के परमाणु प्रतिरोध क्षमता | 1998 में, भारत [परमाणु परीक्षण] [पोखरण द्वितीय] किया जाता है कूटनीतिक तनाव के बाद ढील लाहौर शिखर सम्मेलन 1999 में आयोजित किया गया था। आशावाद की भावना कम रहता था, तथापि, के बाद से मध्य 1999-पाकिस्तानी अर्धसैनिक बलों में और कश्मीरी आतंकवादियों पर कब्जा कर लिया वीरान है, लेकिन सामरिक, कारगिल जिले भारत के हिमालय हाइट्स. इन दुर्गम सर्दियों की शुरुआत के दौरान किया गया था भारतीय सेना द्वारा खाली थे और वसंत में reoccupied चाहिए. मुजाहिदीनजो इन क्षेत्रों का नियंत्रण ले लिया महत्वपूर्ण समर्थन प्राप्त है, दोनों हाथ और आपूर्ति के रूप में पाकिस्तान से. उनके नियंत्रण है, जो भीटाइगर हिलके तहत हाइट्स के कुछ महत्वपूर्ण श्रीनगर -[[ लेह] राजमार्ग (एनएच 1A), बटालिक और Dras की अनदेखी .

सेना ट्रकों भारतीय गर्मियों में 1999 में कारगिल में लड़ रहे सैनिकों के लिए आपूर्ति ले एक बार पाकिस्तानी आक्रमण के पैमाने का एहसास था, भारतीय सेना जल्दी 200.000 के बारे में सैनिकों जुटाए और ऑपरेशन विजय शुरू किया गया था। हालांकि, बाद से ऊंचाइयों पाकिस्तान के नियंत्रण के अधीन थे, भारत एक स्पष्ट रणनीतिक नुकसान में था। राष्ट्रीय राजमार्ग 1 ए पर भारतीयों पर भारी हताहत inflicting <रेफरी नाम = "NLI" | अपने प्रेक्षण चौकी से पाकिस्तानी बलों की दृष्टि से एक स्पष्ट रेखा अप्रत्यक्ष तोपखाने आग [] [अप्रत्यक्ष आग] नीचे रखना पड़ा > भारतीय सामान्य कारगिल में पाकिस्तानी वीरता भजन 5 मई [[+२,००३] डेली टाइम्स, पाकिस्तान </ रेफरी> यह भारतीय सेना के लिए एक गंभीर समस्या है के रूप में राजमार्ग अपने मुख्य सैन्य और आपूर्ति मार्ग था इ शार्प, 2003 द्वारा प्रकाशित रॉबर्ट Wirsing करके युद्ध की छाया में<ref> कश्मीर थी। ISBN 0-7656-1090-6 pp36 </ ref> इस प्रकार, भारतीय सेना की पहली प्राथमिकता चोटियों कि NH1a के तत्काल आसपास के क्षेत्र में थे हटा देना था। यह भारतीय सैनिकों में पहली बार टाइगर हिल और Dras में Tololing जटिल लक्ष्यीकरण परिणामस्वरूप<ref> प्रबंध Adekeye Adebajo, चंद्र लेखा श्रीराम 21 वीं सदी में सशस्त्र संघर्ष pp192 रूटलेज, 193 द्वारा प्रकाशित </ ref> यह जल्द ही अधिक हमलों से पीछा किया गया था। बटालिक Turtok उप - क्षेत्र है जो सियाचिन ग्लेशियर तक पहुँच प्रदान पर. 4590 प्वाइंट है, जो NH1a के निकटतम दृश्य था सफलतापूर्वक पर 14 जून को भारतीय बलों द्वारा पुनः कब्जा दक्षिण एशिया में युद्ध के नेब्रास्का प्रेस प्रदीप बरुआ 261 </ ref><ref> राज्य में पेज के यू द्वारा प्रकाशित किया गया था।

हालांकि राजमार्ग के आसपास के क्षेत्र में पदों के अधिकांश मध्य जून तक मंजूरी दे दी, द्रास के पास राजमार्ग के कुछ भागों में युद्ध के अंत तक गोलीबारी छिटपुट देखा. एक बार NH1a क्षेत्र साफ हो गया था, भारतीय सेना नियंत्रण रेखा के पार वापस हमलावर बल ड्राइविंग के लिए बदल गया। [Tololing [लड़ाई]], अन्य हमलों के बीच धीरे - धीरे भारत के पक्ष में मुकाबला झुका. फिर भी, कुछ पदों की एक कड़ी प्रतिरोध डाल सहित टाइगर हिल (5140 प्वाइंट) है कि केवल युद्ध के बाद में गिर गया,. के रूप में पूरी तरह से ऑपरेशन चल रहा था, के बारे में 250 तोपों में लाया गया पोस्ट में थे में घुसपैठियों को स्पष्ट दृष्टि से [लाइन]]. कई महत्वपूर्ण बिंदुओं में, न तो तोपखाने और न ही हवा शक्ति बेदखल कर सकता है चौकियों पाकिस्तान सैनिकों, जो दिखाई रेंज के बाहर थे द्वारा मानव. भारतीय सेना के कुछ प्रत्यक्ष ललाट जमीन हमले है जो धीमी गति से थे और एक भारी टोल ले लिया खड़ी चढ़ाई है कि 18,000 फीट (+५५०० मीटर) के रूप में उच्च के रूप में चोटियों पर बनाया जाना था दिया मुहिम शुरू की. संघर्ष में दो महीने, भारतीय सेना धीरे लकीरें वे खो दिया था की सबसे retaken था, सर्दी की<ref> कड़वे शांत - तारिक अली, लंदन की समीक्षा पुस्तकों की </ ref><ref> साँचा:पुस्तक का हवाला देते हैं [बुक के https://www.vedamsbooks.com/no14953.htm ऑनलाइन सारांश] </ ref> सरकारी गिनती के अनुसार, एक अनुमान के अनुसार 75% -80% और घुसपैठ क्षेत्र के लगभग सभी उच्च भूमि भारतीय नियंत्रण के तहत वापस आ गया था।

भारत पर, समाचार जिनमें से चिंतित अमेरिकी | के रूप में पाकिस्तान पाया खुद एक कांटेदार स्थिति में entwined सेना छिपकर [] परमाणु हमले [परमाणु युद्ध] की योजना बनाई थी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन, एक कड़ी चेतावनी में नवाज शरीफ के परिणामस्वरूप<ref> 'पाकिस्तान तैयार परमाणु हड़ताल ' </ ref> वाशिंगटन पर समझौते के बाद 4 जुलाई, जहां शरीफ पाकिस्तानी सैनिकों को वापस लेने पर सहमत हुए, लड़ने के सबसे एक क्रमिक रोकने के लिए आया था, लेकिन कुछ पाकिस्तानी सेना ने भारतीय पक्ष पर स्थिति में बने रहे नियंत्रण रेखा. इसके अलावा, यूनाइटेड जिहाद काउंसिल (सभी [अतिवादी []] समूहों के लिए एक छाता) एक चढ़ाई नीचे के लिए पाकिस्तान की योजना को अस्वीकार कर दिया है, बजाय पर लड़ने के निर्णय लेने.<ref> co.uk/1/hi/world/south_asia/386537.stm पाकिस्तान और कश्मीर के आतंकवादियों </ ref> जुलाई के आखिरी हफ्ते में भारतीय सेना अपनी अंतिम हमलों का शुभारंभ किया, के रूप में जल्द ही के रूप में द्रास Subsector पाकिस्तान की मंजूरी दे दी थी बलों से लड़ने पर रह गए 26 जुलाई. दिन के बाद सेकारगिल विजयभारत में (कारगिल विजय दिवस) दिवस के रूप में चिह्नित किया गया है है। युद्ध के अंत तक भारत सभी क्षेत्र दक्षिण और नियंत्रण रेखा के पूर्व का नियंत्रण फिर से शुरू किया था, के रूप में जुलाई 1972 में शिमला समझौते के अनुसार स्थापित किया गया था।

प्रमुख युद्धाभ्यास[संपादित करें]

2001-2002 भारत - पाकिस्तान} गतिरोध} के बाद 13 दिसंबर [2001] [[भारतीय संसद] ऑपरेशन पराक्रम में जो भारतीय सैनिकों की हजारों की दसियों भारत - पाकिस्तान सीमा पर तैनात किया गया था शुरू किया गया था पर हमले. भारत हमले समर्थन के लिए पाकिस्तान को दोषी ठहराया. सबसे बड़ा सैन्य किसी एशियाई देश से बाहर किए गए व्यायाम आपरेशन किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य अभी स्पष्ट नहीं है है लेकिन परमाणु संघर्ष पाकिस्तान, जो भारतीय संसद पर दिसंबर हमले के बाद तेजी से संभव लग रहा था के साथ किसी भी भविष्य के लिए सेना को तैयार करने के लिए किया गया है प्रकट होता है।

ऑपरेशन संघ शक्ति[संपादित करें]

इसके बाद से कहा है कि इस अभ्यास का मुख्य लक्ष्य अम्बाला [[]] आधारितद्वितीय स्ट्राइककोर जुटाना रणनीति को मान्य किया गया था। एयर समर्थन इस अभ्यास का एक हिस्सा था और हवाई छतरी सेना की एक पूरी बटालियन के युद्ध खेल के संचालन के दौरान paradropped संबद्ध उपकरणों के साथ. कुछ २०००० सैनिक अभ्यास में भाग लिया।

अश्वमेध युद्धाभ्यास[संपादित करें]

भारतीय सेना व्यायाम अश्वमेध में अपने नेटवर्क केंद्रित युद्ध क्षमताओं का परीक्षण किया। व्यायाम थार रेगिस्तान में आयोजित किया गया, जिसमें 30,000 से अधिक सैनिकों ने भाग लिया<ref> भारतीय सेना परीक्षण Ashwamedh युद्ध खेल में नेटवर्क केंद्रित युद्ध क्षमता </ ref. >. असममित युद्ध क्षमता भी दौरान भारतीय सेना द्वारा परीक्षण किया गया था 'अश्वमेध' पैदल सैनिकों के महत्व] </ ref> पुष्ट

भारतीय थलसेना की संरचना[संपादित करें]

प्रारंभ में, सेना के मुख्य उद्देश्य राष्ट्र की सीमाओं की रक्षा के लिए किया गया था। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में, सेना भी ले लिया है उग्रवादी मारा में विशेष रूप से आंतरिक सुरक्षा प्रदान करने की जिम्मेदारी, कश्मीर और उत्तर - पूर्व.

सेना के बारे में एक लाख सैनिकों और क्षेत्रों के 34 डिवीजनों के एक ताकत है। इसका मुख्यालय भारत की राजधानी में स्थित है [[नई दिल्ली] और के समग्र आदेश के तहत थल सेनाध्यक्ष (थलसेनाध्यक्ष), वर्तमान में जनरल दीपक कपूर .

(आदेश) कमान[संपादित करें]

सेना के सामरिक 6 आदेशों चल रही है। प्रत्येक आदेश [[लेफ्टिनेंट जनरल] रैंक के साथ जनरल कमांडिंग इन चीफ अधिकारी की अध्यक्षता में है। प्रत्येक आदेश सीधे में सेना मुख्यालय से संबद्ध है [[नई दिल्ली]. इन आदेशों नीचे उनके सही क्रम को ऊपर उठाने के स्थान (शहर) और उनके कमांडरों में दिया जाता है। उनकी भी एक प्रशिक्षण ARTRAC के रूप में जाना जाता है आदेश है।

-

Bgcolor = "# cccccc" | कमान! Bgcolor = "# cccccc" | कमान मुख्यालय Bgcolor = "# cccccc" |! जीओसी - इन - सी

- - | पुणे | | लेफ्टिनेंट जनरल नोबल Thamburaj - | कोलकाता | | लेफ्टिनेंट जनरल वीके सिंह - | लखनऊ | | लेफ्टिनेंट जनरल H.S. पनाग, पीवीएसएम, एवीएसएम *, एडीसी - | चंडीमंदिर (चंडीगढ़) | | लेफ्टिनेंट जनरल टी.के. सप्रू - | उधमपुर | | लेफ्टिनेंट जनरल पीसी भारद्वाज - | जयपुर | | लेफ्टिनेंट जनरल CKS साबू -

(कोर) कॉर्प[संपादित करें]

व्यूह - रचना (फील्ड गठन)[संपादित करें]

[[वाहिनी] सेना के एक क्षेत्र में एक कमान के भीतर एक क्षेत्र के लिए जिम्मेदार गठन है। स्ट्राइक होल्डिंग और मिश्रित: वहाँ भारतीय सेना वाहिनी के 3 प्रकार के होते हैं। कमान आम तौर पर 2 या अधिक कोर के होते हैं। अपने आदेश के तहत एक कोर सेना प्रभागों है। कोर मुख्यालय सेना में उच्चतम क्षेत्र गठन है।

-

Bgcolor = "# cccccc" | वाहिनी! Bgcolor = "# cccccc" |! मुख्यालय Bgcolor = "# cccccc" | कमान! Bgcolor = "# cccccc" |! जनरल आफिसर कमांडिंग (जीओसी) Bgcolor = "# cccccc" |! प्रभागों<ref> प्रभाग और जेन विश्व सेनाओं से ब्रिगेड स्रोत जानकारी, अंक 19, 2006, p.319 </ ref>

- - 1 कोर | | मथुरा, उत्तर प्रदेश | | मध्य कमान | | लेफ्टिनेंट जनरल पीसी कटोच | 4 | इन्फैंट्री डिवीजन (इलाहाबाद), 6 Mtn डिव (बरेली), 33 ARMD डिव ( हिसार) - | अम्बाला, हरियाणा | | पश्चिमी कमान | | लेफ्टिनेंट जनरल जेपी सिंह, एवीएसएम | | 1 ARMD डिव (अम्बाला), 14 त्वरित ([देहरादून [] ]), 22 इन्फैंट्री डिवीजन मेरठ) - 3 कोर | | Rangapahar (दीमापुर), नागालैंड | | पूर्वी कमान | | लेफ्टिनेंट जनरल राकेश कुमार Loomba | | 23 इन्फैंट्री डिवीजन रांची), 57 Mtn (डिव Leihmakong) - 4 कोर | | तेजपुर, असम | | पूर्वी कमान | | लेफ्टिनेंट जनरल आर के छाबड़ा | | 2 Mtn डिव (डिब्रूगढ़), 5 Mtn डिव (बोमडिला), 21 Mtn डिव (रंगिया) -

9 वाहिनी | | | योल, हिमाचल प्रदेश | | पश्चिमी कमान | | लेफ्टिनेंट जनरल पीके रामपाल | | 26 इन्फैंट्री डिवीजन ([[जम्मू छावनी | जम्मू]) 29, इन्फैंट्री डिवीजन(पठानकोट), 2,3,16 इंडस्ट्रीज़ ARMD Bdes

-

10 कोर | | | भटिंडा, पंजाब | | पश्चिमी कमान | | लेफ्टिनेंट जनरल | | 16 इन्फैंट्री डिवीजन (श्री गंगानगर), 18 त्वरित ( कोटा), 24 त्वरित (बीकानेर), 6 इंडस्ट्रीज़ ARMD BDE

- | जालंधर, पंजाब | | पश्चिमी कमान | | लेफ्टिनेंट जनरल श्रीधरन श्याम कुमार, एसएम, वीएसएम | 7 | इन्फैंट्री डिवीजन (फिरोजपुर), 9 इन्फैंट्री डिवीजन (मेरठ), 15 इन्फैंट्री डिवीजन (अमृतसर), 23 ARMD BDE, 55 Mech BDE -

कोर 12 | | | जोधपुर, राजस्थान | | दक्षिण पश्चिमी कमान | | | | 4 ARMD BDE, 340 Mech BDE, 11 इन्फैंट्री डिवीजन (अहमदाबाद), 12 Inf (प्रभाग जोधपुर)

- | लेह, लद्दाख | | उत्तरी कमान | | लेफ्टिनेंट जनरल जयंत कुमार मोहंती UYSM, एसएम, वीएसएम | 3 | इन्फैंट्री डिवीजन (लेह), 8 माउंटेन डिवीजन (Dras ),< ref> [[Globalsecurity.org] http://www.globalsecurity.org/military/world/india/northcom.htm, दिसंबर 2007 पहुँचा तोपखाना ब्रिगेड </ ref> - | श्रीनगर, जम्मू एवं कश्मीर | | उत्तरी कमान | | लेफ्टिनेंट जनरल मुकेश सभरवाल | | 19 इन्फैंट्री डिवीजन (बारामूला), 28 इन्फैंट्री डिवीजन गुरेज , Bandipora जिला), तोपखाना ब्रिगेड -

16 वाहिनी | | | नगरोटा, जम्मू एवं कश्मीर | | उत्तरी कमान | | लेफ्टिनेंट जनरल आर Karwal | | 10 Inf (डिव अखनूर ),< रेफरी> इन्हें भी देखें http://orbat.com/ site/cimh/divisions/10th%% 20Division 20orbat% 20Chaamb 201971.html% </ ref> 25 Inf डिव (Rajauri), 39 Inf डिव ( योल), तोपखाना ब्रिगेड, बख़्तरबंद ब्रिगेड?

- 21 कोर (पूर्व आईपीकेएफ) | | भोपाल, मध्य प्रदेश | | दक्षिणी कमान | | लेफ्टिनेंट जनरल | | 31 ARMD डिव (झांसी), 36 त्वरित (सागर), 54 Inf (डिव Sikandrabad), आर्टि, ई., eng bdes - 33 वाहिनी | | सिलीगुड़ी, पश्चिम बंगाल | | पूर्वी कमान | | लेफ्टिनेंट जनरल पीके रथ | | 17 माउंटेन डिवीजन (गंगटोक), 20 माउंटेन डिवीजन(बिनागुरी, जलपाईगुड़ी जिले), 27 माउंटेन डिवीजन (कलिमपॉन्ग), आर्टि BDE -


रेजिमेंट संगठन[संपादित करें]

(फील्ड कोर ऊपर उल्लेख किया है के साथ भ्रमित होने की नहीं) इस के अलावा रेजिमेंट या कोर या विभागों भारतीय सेना के हैं। कोर नीचे उल्लेख किया कार्यात्मक विशिष्ट अखिल सेना कार्यों के साथ सौंपा डिवीजनों हैं।

शैली = "फ़ॉन्ट - आकार: 100%;" | |शस्त्र

  1. भारतीय इन्फैन्ट्री रेजिमेंट
  2. आर्मड रेजिमेंट कोर - बख्तरबंद कोर स्कूल और सेंटर [अहमदनगर []]
  3. आर्टिलरी रेजिमेंट - आर्टिलरी स्कूल में देवलाली के निकट नासिक.
  4. [[भारतीय सेना के कोर इंजीनियर्स | कोर ऑफ इंजीनियर्स] - दपोदी पर सैन्य अभियांत्रिकी कालेज, पुणे. केंद्र इस प्रकार है - मद्रास इंजीनियर ग्रुप बंगलौर, बंगाल इंजीनियर ग्रुप रुड़की और बॉम्बे इंजीनियर ग्रुप Khadki में, पुणे के रूप में स्थित हैं .
  5. आर्मी एयर डिफेंस सेंटर कोर गोपालपुर उड़ीसा राज्य.
  6. मैकेनाइज्ड इंफेंट्री अहमदनगर - पर रेजिमेंटल केंद्र [[]].
  7. सिग्नल कोर
  8. सेना उड्डयन कोर

सेवा'

  1. आर्मी डेंटल कोर
  2. सेना शिक्षा कोर - सेंटर में पचमढ़ी.
  3. आर्मी मेडिकल कोर - सेंटर में [[लखनऊ].
  4. सेना आयुध कोर में केंद्र जबलपुर और सिकंदराबाद.
  5. सेना डाक सेवा कोर
  6. सेना सेवा कोर - बंगलौर पर केंद्र
  7. वाहिनी इलेक्ट्रिकल और भोपाल में मैकेनिकल इंजीनियर्स के केंद्र और सिकंदराबाद.
  8. वाहिनी सैन्य पुलिस के [2] - बंगलौर में केंद्र
  9. इंटेलीजेंस कोर - सेंटर में पुणे.
  10. जज एडवोकेट जनरल विभाग. सैन्य विधि संस्थान में कैम्पटी ,नागपुर.
  11. सैन्य फार्म सेवा
  12. मिलिट्री नर्सिंग सर्विस
  13. रिमाउंट और वेटेनरी कोर
  14. पायनियर कोर

साँचा:भारतीय सेना के शस्त्र और सेवाएँ

अन्य व्यूह सैन्य (अन्य फील्ड संरचनाओं)[संपादित करें]

भारतीय सेना के एक वर्ग एक सैन्य अभ्यास के दौरान आरोप लगते हैं।

* प्रभाग: सेना डिवीजन एक कोर और एक ब्रिगेड के बीच एक मध्यवर्ती है। यह सबसे बड़ी सेना में हड़ताली बल है। प्रत्येक प्रभाग [जनरल आफिसर कमांडिंग (जीओसी) द्वारा [[मेजर जनरल] रैंक में होता है। यह आमतौर पर +१५,००० मुकाबला सैनिकों और 8000 का समर्थन तत्वों के होते हैं। वर्तमान में, भारतीय सेना 4 रैपिड (पुनः संगठित सेना Plains इन्फैंट्री प्रभागों) सहित 34 प्रभागों लड़ाई प्रभागों, 18 इन्फैन्ट्री प्रभागों, 10 माउंटेन प्रभागों, 3 आर्मड प्रभागों और 2 आर्टिलरी प्रभागों. प्रत्येक डिवीजन के कई composes ब्रिगेड्स.
* ब्रिगेड: ब्रिगेड डिवीजन की तुलना में छोटे है और आम तौर पर विभिन्न लड़ाकू समर्थन और आर्म्स और सेवाएँ के तत्वों के साथ साथ 3 इन्फैन्ट्री बटालियन के होते हैं। यह की अध्यक्षता में है एक ब्रिगेडियर के बराबर ब्रिगेडियर जनरल भारतीय सेना भी 5 स्वतंत्र बख्तरबंद ब्रिगेड, 15 स्वतंत्र आर्टिलरी ब्रिगेड, 7 स्वतंत्र इन्फैंट्री ब्रिगेड, 1 स्वतंत्र पैराशूट ब्रिगेड, 3 स्वतंत्र वायु रक्षा ब्रिगेड, 2 स्वतंत्र वायु रक्षा समूह और 4 स्वतंत्र अभियंता ब्रिगेड है। ये स्वतंत्र ब्रिगेड कोर कमांडर (जीओसी कोर) के तहत सीधे काम.
* बटालियन: एक बटालियन की कमान में है एक कर्नल और इन्फैंट्री के मुख्य लड़ इकाई है। यह 900 से अधिक कर्मियों की होते हैं।
* [[कंपनी (सैन्य इकाई) | कंपनी] के नेतृत्व: मेजर, एक कंपनी के 120 सैनिकों को शामिल.
  • प्लाटून: एक कंपनी और धारा के बीच एक मध्यवर्ती, एक प्लाटून लेफ्टिनेंट या कमीशंड अधिकारियों की उपलब्धता पर निर्भर करता है, एक जूनियर कमीशंड अधिकारी [रैंक के साथ, [जूनियर कमीशन अफसर की अध्यक्षता में | सूबेदार ]] या नायब सूबेदार. यह बारे में 32 सैनिकों की कुल संख्या है।
* धारा: सबसे छोटा 10 कर्मियों के एक शक्ति के साथ सैन्य संगठन. रैंक के एक गैर कमीशन अधिकारी द्वारा कमान संभाली हवलदार या [सार्जेंट []].

रेजिमेंट[संपादित करें]

सिख लाइट इन्फैंट्री के सैनिकों .

पैदल सेना रेजिमेंट (इन्फैन्ट्री रेजिमेंट)[संपादित करें]

वहाँ कई बटालियनों या इकाइयों के एक रेजिमेंट में वही गठन के अंतर्गत हैं। गोरखा रेजिमेंट, उदाहरण के लिए, कई बटालियनों है। एक रेजिमेंट के तहत सभी संरचनाओं के एक ही हथियार या कोर (यानी, इन्फैंट्री या इंजीनियर्स) की बटालियनों हैं। रेजिमेंट बिल्कुल क्षेत्र संरचनाओं नहीं कर रहे हैं, वे ज्यादातर एक गठन नहीं कर सकता हूँ. गोरखा उदाहरण के लिए सभी रेजिमेंट के एक साथ एक गठन के रूप में लड़ना नहीं है, लेकिन विभिन्न ब्रिगेड या कोर या भी आदेश पर फैलाया जा सकता है है।

आर्टिलरी प्रतीक चिन्ह

तोपखाना रेजिमेंट (आर्टिलरी रेजिमेंट)[संपादित करें]

तोपखाना सेना के विध्वंसक शक्ति का मुख्य अंग है | भारत सभी प्राचीन ग्रंथों सभी तोपखाने का वर्णन मिलता है | तोप को संस्कृत सभी शतघ्नी कहा जाता है | मध्य कालीन इतिहास सभी तोप का प्रयोग सर्वप्रथम बाबर ने पानीपत के प्रथम युद्ध सभी 1526 सन 0 ई सभी किया था | कुछ नवीन प्रमाणों से यहाँ प्रतीत होता है के तोप का प्रयोग बहमनी राजाओं 1368 ने सभी अदोनी के युद्ध सभी तथा गुजरात के शासक मोहमद शाह ने 15 वीं शताब्दी सभी किया था | भरत मे तोप खाना के दोउ है केन्द्र ह्य्द्रबद और नसिक रोअद

थलसेना का कार्यबल[संपादित करें]

क्षमता[संपादित करें]

विदेशी राष्ट्राध्यक्ष की राजकीय यात्रा सभी घुडसवार राष्ट्रपति अंगरक्षक .

भारतीय थल सेना सम्बंधित आंकड़े - कार्यरत सैनिक

१३,००,००० |

- आरक्षित सैनिक

1,200,000 |

- [[प्रादेशिक सेना]

200.000 ** |

- मुख्य युद्धक टैंक

4500 |

- तोपखाना

12,800 |

- [[] प्रक्षेपास्त्र]

100 (अग्नि -1, अग्नि -2) |

- [[क्रूज प्रक्षेपास्त्र] ब्रह्मोस - वायुयान 10 स्क्वाड्रन हेलिकॉप्टर - [[सतह से वायु] प्रक्षेपास्त्र]

90000 |

<nowiki> * 300.000 प्रथम पंक्ति 500.000 ओर द्वितीय पंक्ति के योद्धा सम्मिलित हैं </ nowiki> </ छोटे>

<nowiki> ** ४०,००० प्रथम पंक्ति 160.000 ओर द्वितीय पंक्ति के योद्धा सम्मिलित हैं </ nowiki> </ छोटे>

आंकड़े[संपादित करें]

एक प्रशिक्षण मिशन के दौरान भारतीय सेना की 4 राजपूत इन्फैंट्री बटालियन से सैनिकों

  • 4 त्वरित (Reorganised सेना Plains इन्फैंट्री प्रभागों)
  • 18 इन्फैंट्री प्रभागों
  • 10 माउंटेन प्रभागों
  • 3 आर्मड प्रभागों
  • 2 आर्टिलरी प्रभागों
  • 13 एयर डिफेंस + ब्रिगेड्स 2 भूतल एयर मिसाइल समूह
  • 5 स्वतंत्र बख्तरबंद ब्रिगेड
  • 15 स्वतंत्र आर्टिलरी ब्रिगेड
  • 7 स्वतंत्र इन्फैंट्री ब्रिगेड
  • 1 पैराशूट ब्रिगेड
  • 4 अभियंता ब्रिगेड
  • 14 सेना उड्डयन हेलीकाप्टर इकाइयों

उप - इकाइयाँ[संपादित करें]

  • 63 टैंक रेजिमेंट
  • 7 एयरबोर्न बटालियन
  • 200 आर्टिलरी रेजिमेंट
  • 360 इन्फैंट्री बटालियन + 5 पैरा बटालियन (एस एफ)
  • 40 मैकेनाइज्ड इंफेंट्री बटालियन
  • लड़ाकू हेलीकाप्टर इकाइयों 20
  • 52 एयर डिफेंस रेजिमेंट

पदानुक्रम संरचना[संपादित करें]

[[चित्र: भारतीय सेना के गोरखा rifles.jpg | अंगूठे | [[1 की 1 बटालियन गोरखा राइफल्स] भारतीय सेना का] एक नकली मुकाबला शहर के बाहर एक प्रशिक्षण अभ्यास के दौरान स्थान ले]]

भारतीय सेना के विभिन्न रैंक से नीचे के अवरोही क्रम में सूचीबद्ध हैं: कमीशन प्राप्त अधिकारी

कनिष्ठ कमीशन प्राप्त अधिकारी (जेसीओ)

गैर कमीशन प्राप्त अधिकारी (NCOs)

नोट:
• 1. केवल दो अधिकारियों को फील्ड मार्शल किया गया है अब तक बना है: फील्ड के.एम. करियप्पा  – पहले भारतीय कमांडर - इन - चीफ (एक के बाद के बाद समाप्त कर दिया है)  – और फील्ड मार्शल SHFJ मानेकशॉ मार्शल , 1971 के युद्ध पाकिस्तान के साथ.
में सेना के दौरान थल सेनाध्यक्ष • 2. यह अब बंद कर दिया गया है। हवलदार के रैंक में गैर कमीशंड अधिकारी मानद जूनियर कमीशन अफसर रैंकों के लिए elible हैं
• 3. बकाया है जूनियर कमीशन अफसर श्रेष्टता श्रेणी को देखते हुए और एक लेफ्टिनेंट के भुगतान, भूमिका एक जूनियर कमीशन अफसर का होना जारी है
</ छोटे>.

युद्ध सिद्धान्त[संपादित करें]

भारतीय सेना के वर्तमान सिद्धांत का मुकाबला प्रभावी ढंग से पकड़े संरचनाओं और हड़ताल संरचनाओं के उपयोग पर आधारित है। एक हमले के मामले में पकड़े संरचनाओं दुश्मन होते हैं और हड़ताल संरचनाओं दुश्मन ताकतों को बेअसर पलटवार होगा. एक भारतीय हमले के मामले में पकड़े संरचनाओं दुश्मन ताकतों नीचे पिन भारतीय को चुनने के एक बिंदु पर whilst हड़ताल संरचनाओं हमले. भारतीय सेना काफी बड़ी हड़ताल भूमिका के लिए कई कोर समर्पित है। वर्तमान में, सेना अपने विशेष बलों क्षमताओं को बढ़ाने में भी देख रहा है।

उपस्कर एवं उपकरण[संपादित करें]

एमबीटी अर्जुन . [[चित्र: भारतीय सेना टी 90.jpg | अंगूठे | भीष्म टी 90] एमबीटी [[चित्र: भारतीय सेना T-72 image1.jpg | अंगूठे | सही | [[टी 72] अजेय]] नाग मिसाइल और NAMICA (नाग मिसाइल वाहक)

सेना के उपकरणों के अधिकांश आयातित है, लेकिन प्रयासों के लिए स्वदेशी उपकरणों के निर्माण किए जा रहे हैं। सभी भारतीय सैन्य आग्नेयास्त्रों बंदूकें आयुध निर्माणी बोर्ड की छतरी के प्रशासन के तहत निर्मित कर रहे हैं, ईशापुर में प्रिंसिपल बन्दूक विनिर्माण सुविधाओं के साथ, काशीपुर, कानपुर, जबलपुर और तिरूचिरापल्ली. भारतीय राष्ट्रीय लघु शस्त्र प्रणाली (INSAS) राइफल है, जो सफलतापूर्वक 1997 के बाद से भारतीय सेना द्वारा शामिल Ordanance निर्माणी बोर्ड, ईशापुर के एक उत्पाद है। जबकि गोला बारूद किरकी (अब Khadki) में निर्मित है और संभवतः बोलंगीर पर.


इन्हें भी देखें[संपादित करें]

  1. http://www. globalsecurity.org सैन्य ///विश्व युद्ध /
  2. Http://www.time.com/time/asia का एक उदाहरण के रूप में उद्धृत है सियाचिन पर संघर्ष के बावजूद एक मजबूत क्षेत्र में सैनिक उपस्थिति को बनाए रखने के लिए जारी है / covers/501050711/story.html
  3. http://edition.cnn.com/2002/WORLD/asiapcf/south/05/20/. siachen.kashmir /
  4. . html