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लेबनान

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लेबनान गणराज्य

الْجُمْهُورِيَّة الْلُّبْنَانِيَّة
लेबनान का ध्वज
राष्ट्रगान: "النشيد الوطني اللبناني"
("लेबनान का राष्ट्रगान")
लेबनान की अवस्थिति
राजधानी
एवं सबसे बड़ा शहर
बेरूत
राजभाषा(एँ)अरबी
बोली जाने वाली भाषआअरबी (लेबनानी भाषा), फ्रांसिसी, अंग्रेजी, आर्मेनियन
नृजातीय समूह
95% Arab2, 4% Armenian, 1% other
निवासीनामलेबनानी
सरकारकन्फेशनलिस्ट, लोकतांत्रिक, संसदीय गणराज्य
 राष्ट्रपति
मिशेल सुलेमान
 प्रधानमंत्री
साद हरीरी
 संसद के अध्यक्ष
नबी बेरी
स्वतंत्रता 
 घोषणा
२६ नवम्बर १९४१
 मान्यता
२२ नंवबर १९४३
क्षेत्रफल
 कुल
[convert: invalid number] १६६ वां)
 जल क्षेत्र (%)
१.६
जनसंख्या
 २००९ आकलन
४,२२४,००० (१२४ वां)
GDP (PPP)२००९ प्राक्कलन
 कुल
$५१.४७४ बिलियन (-)
 प्रति व्यक्ति
$१३,३७४ (-)
HDI (२०१३)Steady ०.७६५[1]
Error: Invalid HDI value · ६५वाँ
मुद्रालेबनानी पाउंड (LBP)
समय मंडलUTC+२ (EET)
 ग्रीष्मकालीन (DST)
UTC+३ (EEST)
दूरभाष कोड९६१
इंटरनेट TLD.lb
  1. ^ Article 11 of the Constitution of Lebanon states that "a law shall determine the cases in which the French language is to be used."[2]
  2. ^ Many Christian Lebanese do not identify as Arab, and prefer to be called Phoenician.[3]

लेबनान (अरबी: لُبْنَان),आधिकारिक रूप से लेबनान गणराज्य, पश्चिमी एशिया में भूमध्य सागर के पूर्वी तट पर स्थित एक देश है। इसके उत्तर और पूर्व में सीरिया और दक्षिण में इसराइल स्थित है।[4] भूमध्य बेसिन और अरब के भीतरी भाग के बीच में सेतु बने इस देश का इतिहास समृद्ध और मिश्रित है। यह भूमि फ़ीनिसियनों की अति-प्राचीन (2500 ईसापूर्व - 539 ईसापूर्व) संस्कृति का स्थल थी जहाँ से लेखन कला के विकास की कड़ी जुड़ी है। इसके बाद फ़ारसी, यूनानी, रोमन, अरब और उस्मानी तुर्कों के कब्जे में रहने के बाद यह फ्रांस के शासन में भी रहा। इसी ऐतिहासिक वजह से देश की धार्मिक और जातीय विविधता इसकी अनूठी सांस्कृतिक पहचान बनाती है।

यहाँ 60 प्रतिशत लोग मुस्लिम हैं जिनमें शिया और सुन्नी का लगभग समान हिस्सा है और लगभग 38 प्रतिशत ईसाई। 1943 में फ्रांस से स्वतंत्रता मिलने के बाद यहाँ एक गृहयुद्ध चला था और 2006 में इसराइल के साथ एक युद्ध। यहाँ एक विशेष प्राकर की गणतांत्रिक सरकार का शासन है जिसमें राष्ट्रपति एक ईसाई होता है, प्रधान मंत्री एक सुन्नी मुस्लिम, निव्राचित प्रतिनिधियों की सभा का अध्यक्ष एक शिया मुस्लिम और उप प्रधान मंत्री एक ग्रीक परंपरावादी धर्म का होता है। अरबी यहाँ की सबसे बोले जाने वाली और सांवैधानिक भाषा है।

शब्द-व्युत्पत्ति

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लेबनान पर्वत (Mount Lebanon) [5]का नाम फ़ोनीशियाई सामी मूल शब्द 'lbn' (𐤋𐤁𐤍) से उत्पन्न हुआ है, जिसका अर्थ है "सफेद"। माना जाता है कि यह नाम यहाँ की बर्फ से ढकी चोटियों के कारण पड़ा है।[6] इस नाम के प्रमाण कांस्य युग के उन ग्रंथों में मिलते हैं जो एबला (Ebla) के पुस्तकालय से प्राप्त हुए थे। इसके अतिरिक्त, प्रसिद्ध महाकाव्य 'गिल्गामेश' की बारह में से तीन पट्टिकाओं पर भी इस नाम का उल्लेख मिलता है।

प्राचीन मिस्र के अभिलेखों में इस नाम को 'rmnn' (𓂋𓏠𓈖𓈖𓈉) के रूप में दर्ज किया गया था (चूंकि प्राचीन मिस्र की लिपि में 'l' के संगत कोई अक्षर नहीं था)।[7] हिब्रू बाइबिल में भी 'लेबनान' शब्द का प्रयोग लगभग 70 बार 'Ləḇānon' (לְבָנוֹן) के रूप में हुआ है।

पहाड़ी श्रृंखला के बजाय एक प्रशासनिक इकाई के रूप में 'लेबनान' नाम का प्रयोग 1861 के ओटोमन सुधारों के साथ शुरू हुआ, जब 'माउंट लेबनान मुतसर्रिफ़त' (अरबी: متصرفية جبل لبنان) की स्थापना की गई। बाद में 1920 में इसका विस्तार 'ग्रेटर लेबनान' (अरबी: دولة لبنان الكبير) के रूप में हुआ। अंततः, 1943 में स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद इसे संप्रभु 'लेबनान गणराज्य' (अरबी: الجمهورية اللبنانية) का आधिकारिक नाम दिया गया।

लेबनॉन की भूमि का इतिहास ईसापूर्व 2500 इस्वी के आसपास की फ़ीनिक संस्कृति से शुरु होता है जो सामुद्रिक शक्ति थे। इन्होंने भूमध्य सागर में स्पेन और अफ़्रीक़ा के तटों पर अपने उपनिवेश बनाए थे जिसमें आधुनिक लीबिया का कार्थेज सबसे प्रसिद्ध है। इन जगहों पर फ़ीनिसियन अपने व्यापार के सिलसिले में बसते भी गए। इन्होंने एक 24 अक्षरों की वर्णमाला बनाई जो आधुनिक कई एशियाई और यूरोपीय वर्णमालाओं की पूर्वज मानी जाती है। इसमें रोमन, ग्रीक, अरबी, हिब्रू, आरामाईक और देवनागरी शामिल हैं। असीरिया तथा बेबीलोन के साम्राज्यों के ये सहायक भी रहे पर इनका रिश्ता उतना सामंजस्यपूर्ण नहीं था।

ईसा के 539 वर्ष पहले जब दक्षिणी ईरान के फ़ार्स प्रांत के एक साम्राज्य के राजकुमार कुरोश (सायसस) ने असीरिया के साम्रज्य को हराकर इस प्रदेश को जीतने के अभियान पर निकला तो फ़ीनिशिया को जीतने के बाद इसे एक क्षत्रप (राज्य) बना दिया गया। इसके बाद इस पर फ़ारसियों का शासन कोई 200 सालों तक रहा। पर पश्चिम में शक्तिशाली हो रहे मेसीडोन के सिकंदर ने 331 ईसापूर्व में इसे जीत लिया। उसके मरने के बाद यह सेल्युकस के प्रदेश का हिस्सा बना। रोमनों ने यूनानियों को सन् 24 ईसापूर्व में हरा दिया जिसके बाद यह रोमनों के शासन काल में आ गया और अगले 6 सदियों तक रहा। इसी दौरान यहाँ ईसाई धर्म का प्रसार हुआ।

मुस्लिम शासन

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अरबों ने इस प्रदेश के उपर सातवीं सदी के उत्तरार्ध में ध्यान दिया जब उमय्यदों की राजधानी पूर्व में दमिश्क़ में बनी। मध्य काल में लेबनॉन क्रूसेड युध्दो में लिप्त रहा। सलाउद्दीन अय्युबी ने इसको ईसाई क्रूसदारों से मुक्त करवाया। में मिस्र के मामलुक शासकों ने लेबनान पर कब्ज़ा कर लिया।उस्मानी तुर्कों ने जब सोलहवीं सदी में भूमध्यसागर के पूर्वी तट पर कब्जा किया तो लेबनान भी सिसली से लेकर कैस्पियन सागर तर फैले औटोमन उस्मानी साम्राज्य का अंग बना। प्रथम विश्वयुद्ध के बाद यह फ्रांस के शासन में आया। सन १९७५-९० तक यहाँ एक गृहयुद्ध चला जिसका मुख्य कारण - फिलिस्तीन से आए शरणार्थी, अरब-इसरायल युद्ध, ईरान की इस्लामिक क्रांति और धार्मिक टकराव थे।

फ़्रांस से स्वतंत्रता

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यूरोप में द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद, फ़्रांसीसी शासनादेश को राष्ट्र संघ (League of Nations) या उसके उत्तराधिकारी संयुक्त राष्ट्र द्वारा किसी औपचारिक कार्रवाई के बिना ही समाप्त माना जा सकता था। शासनादेश की समाप्ति स्वयं अनिवार्य शक्तिऔर नए राज्यों द्वारा उनकी स्वतंत्रता की घोषणा के साथ हुई। इसके बाद अन्य वैश्विक शक्तियों द्वारा बिना किसी शर्त के उन्हें धीरे-धीरे मान्यता दी गई, जिसका समापन संयुक्त राष्ट्र में उनकी औपचारिक सदस्यता के साथ हुआ।

संयुक्त राष्ट्र चार्टर का अनुच्छेद 78 किसी भी सदस्य राज्य के लिए संरक्षण की स्थिति को समाप्त करता है: "न्यास पद्धति उन क्षेत्रों पर लागू नहीं होगी जो संयुक्त राष्ट्र के सदस्य बन गए हैं, जिनके बीच संबंध संप्रभु समानता के सिद्धांत के सम्मान पर आधारित होंगे।"[8]

अतः जब 24 अक्टूबर 1945 को संयुक्त राष्ट्र आधिकारिक रूप से अस्तित्व में आया, तो सीरिया और लेबनान दोनों इसके संस्थापक सदस्य राज्य थे। इस तिथि को दोनों के लिए फ़्रांसीसी शासनादेश कानूनी रूप से समाप्त हो गया और पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त हुई।[9] अंतिम फ़्रांसीसी सैनिकों को दिसंबर 1946 में लेबनान से वापस बुला लिया गया था।

राष्ट्रीय समझौता

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1943 के लेबनान के अलिखित राष्ट्रीय समझौते (National Pact) के अनुसार सत्ता के बँटवारे के लिए एक सांप्रदायिक ढांचा तैयार किया गया, जिसमें अनिवार्य था कि:

राष्ट्रपति: मारोनाइट ईसाई हो।

संसद अध्यक्ष: एक शिया मुस्लिम हो।

प्रधानमंत्री: एक सुन्नी मुस्लिम हो।

उप संसद अध्यक्ष और उप प्रधानमंत्री: ग्रीक रूढ़िवादी (Greek Orthodox) ईसाई हों।[10]

इन्हें भी देखें

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सन्दर्भ

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  1. "2014 Human Development Report Summary" (PDF). संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम. २०१४. pp. २१–२५. 29 जुलाई 2016 को मूल से पुरालेखित (PDF). अभिगमन तिथि: २७ जुलाई २०१४.
  2. उद्धरण त्रुटि: <ref> का गलत प्रयोग; constitution नाम के संदर्भ में जानकारी नहीं है।
  3. उद्धरण त्रुटि: <ref> का गलत प्रयोग; cia नाम के संदर्भ में जानकारी नहीं है।
  4. "लेबनान: इसराइली हवाई कार्रवाई के बाद, यूएन शान्तिरक्षा मिशन ने किया आगाह". यूएन समाचार. 5 December 2025. अभिगमन तिथि: 20 December 2025.
  5. "Map, Location, Heights, & Names". Encyclopedia Britannica. 20 July 1998. अभिगमन तिथि: 20 December 2025.
  6. Room, Adrian (2005). Placenames of the World. pp. 214–216.
  7. Ross, Kelley L. "The Pronunciation of Ancient Egyptian". Friesian School. {{cite web}}: Missing or empty |url= (help)
  8. Mandates, Dependencies and Trusteeship, by H. Duncan Hall, Carnegie Endowment, 1948, pages 265–266
  9. "History of the United Nations". United Nations.
  10. Harb, Imad. "Lebanon's Confessionalism: Problems and Prospects". United States Institute of Peace. मूल से से 9 जुलाई 2008 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 20 दिसंबर 2025.