फ़िलिस्तीनी राज्यक्षेत्र

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फ़िलिस्तीन का ध्वज

फ़िलिस्तीन (अरबी: فلسطين‎) दुनिया का एक राज्यक्षेत्र है। यह इस क्षेत्र का नाम है जो लेबनान और मिस्र के बीच था के अधिकांश हिस्से पर इसराइल के राज्य की स्थापना की गई है। १९४८ से पहले सभी क्षेत्र फ़िलिस्तीन कहलाता था। जो खिलाफ़त उस्मानिया में स्थापित रहा लेकिन बाद में अंग्रेजों और फ़्रांसीसियों ने इस पर कब्जा कर लिया। १९४८ में यहाँ के अधिकांश क्षेत्र पर इस्राइली राज्य की स्थापना की गई। इसका राजधानी बैतुल मुक़द्दस

Palestine-Mandate-Ensign-1927-1948.svg
PALESTINE FLAG
PALESTINE AND TRANSJORDAN UNDER BRITISH MANDATE
Dome In Jerusalem, The Capital City Of State Of Palestine
PALESTINE POUND
PALESTINE STAMP UNDER BRITISH MANDATE
PALESTINE STAMP UNDER BRITISH MANDATE
Mill (British Mandate for Palestine currency, 1927).jpg
British Mandate Palestinian passport.jpg
Palestine recognition only.svg
PALESTINE 1759
PALESTINE 1851
PALESTINE 1864
PALESTINE 1900
PALESTINE 1915
Palestine 1920
PALESTINE 1924
PALESTINE 1946
PALESTINE 1947

था पर १९६७ में इसराइल ने कब्जा कर लिया। बैतुल मुक़द्दस को इस्राइली येरुशलम कहते हैं और यह शहर यहूदियों, ईसाइयों और मुसलमानों तीनों के पास पवित्र है। मुसलमानों का क़िबला प्रथम यही है।

नाम और क्षेत्र[संपादित करें]

अगर आज के फिलस्तीन-इसरायल संघर्ष और विवाद को छोड़ दें तो मध्यपूर्व में भूमध्यसागर और जॉर्डन नदी के बीच की भूमि को फलीस्तीन कहा जाता था। बाइबल में फिलीस्तीन को कैन्नन कहा गया है और उससे पहले ग्रीक इसे फलस्तिया कहते थे। रोमन इस क्षेत्र को जुडया प्रांत के रूप में जानते थे।

इतिहास[संपादित करें]

तीसरी सहस्ताब्दि में यह प्रदेश बेबीलोन और मिस्र के बीच व्यापार के लिहाज से एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बनकर उभरा। फिलीस्तीन क्षेत्र पर दूसरी सहस्त्राब्दि में मिस्रियों तथा हिक्सोसों का राज्यथा। लगभग इसा पूर्व १२०० में हजरत मूसा ने यहूदियों को अपने नेतृत्व में लेकर मिस्र से फिलीस्तीन की तरफ़ कूच किया। हिब्रू (यहूदी) लोगों पर फिलिस्तीनियों का राज था। पर सन् १००० में इब्रानियों (हिब्रू, यहूदी) ने दो राज्यों की स्थापना की (अधिक जानकारी के लिए देखें - यहूदी इतिहास) - इसरायल और जुडाया। ईसापूर्व ७०० तक इनपर बेबीलोन क्षेत्र के राज्यों का अधिकार हो गया। इस दौरान यहूदियों को यहाँ से बाहर भेजा गया। ईसापूर्व ५५० के आसपास जब यहाँ फ़ारस के हख़ामनी शासकों का अधिकार हो गया तो उन्होंने यहूदियों को वापस अपने प्रदेशों में लौटने की इजाजत दे दी। इस दौरान यहूदी धर्म पर जरथुस्त धर्म का प्रभाव पड़ा।

सिकन्दर के आक्रमण (३३२ ईसापूर्व) तक तो स्थिति शांतिपूर्ण रही पर उसके बाद रोमनों के शासन में यहाँ दो विद्रोह हुए - सन् ६६ और सन् १३२ में। दोनों विद्रोहों को दबा दिया गया। अरबों का शासन सन् ६३६ में आया। इसके बाद यहाँ अरबों का प्रभुत्व बढ़ता गया। इस क्षेत्र में यहूदी, मुस्लिम और ईसाई तीनों आबादी रहती थी। १५१७ में तुर्कों का शासन

पार्सि शासन (५३८ ई.पू.)[संपादित करें]

पार्शिया साम्राराज्य कि स्थापना के बाद, यहुदियो (जयुस्) को अपनी धार्मिक पुस्तक के अनुसार अपने देश इस्रैल जाने कि अनुमति मिल गयी। इस ही समय यहूदियो ने अपना दूसरा मन्दिर जेरुशलम मे स्थापित किया।

सन्दर्भ[संपादित करें]