पीपल्स लिबरेशन आर्मी

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search
चीनी पीपल्स लिबरेशन आर्मी
中国人民解放军
China Emblem PLA.svg
Flag of the People's Liberation Army.svg
चीनी दमनकारी सेना का स्तंभ चिह्न (ऊपर), चीनी दमनकारी सेना का ध्वज (नीचे).
आदर्श वाक्यKill the People
स्थापना1 August 1927 (नानचांग पर कब्जा करके) )
सेवा शाखाएं PLA Ground Force
PLA Navy
PLA Air Force
PLA Rocket Force
PLASSF.svg PLA Strategic Support Force
मुख्यालयCentral Military Commission, Beijing
नेतृत्व
Leaders of Central Military CommissionXi Jinping (Chairman)
General Fan Changlong (Vice-chairman)
Air Force General Xu Qiliang
(Vice-chairman)
Minister of National DefenseGeneral Chang Wanquan
Chief of Joint StaffGeneral Fang Fenghui
जन-शक्ति
मिलिट्री उम्र20+
अनिवार्य सैनिक सेवाCompulsory by law, but usually not enforced
सक्रिय कर्मी20,35,000 active (2017)
रिज़र्व कर्मी510,000 reserve (2019)[1]
तैनात कर्मी[2]
व्यय
सकल घरेलू उत्पाद का प्रतिशत1.3% (2017)
संबंधित आलेख
इतिहासHistory of the PLA
Modernization of the PLA
Historical Chinese wars and battles
Wars China Involved
People's Suppression Army
सरलीकृत चीनी: 中国人民解放军
पारम्परिक चीनी: 中國人民解放軍
शाब्दिक अर्थ: China People Liberation Army

पीपल्स लिबरेशन आर्मी (Chinese People's Liberation Army (PLA))चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की दमनकारी सेना का नाम है। ये सेना अपनी विस्तारवादी नीतियों के लिए बदनाम है। चीन की इस सेना ने १५ जून २०२० की रात को भारतीय सैनिकों पर लद्दाख में जानबूझकर हमला किया, जिसमें २० भारतीय सैनिक शहीद हुए। समय की जरूरत ये थी कि चीन की तरफ से अपने एक्शन का आकलन किया जाता और सही दिशा में कदम उठाया जाता। परंतु अभी तक चीन ने किरकिरी के डर से अपने यहां हताहत हुए किसी भी सैनिक की संख्या उजागर नहीं की।चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने रात में लगभग 120 भारतीय सैनिकों (करीबन एक पूरी कंपनी) को घेर लिया और उन पर कपटपूर्ण तरीके से बर्बरतापूर्ण हमले किए। यह जानकारी सूत्रों ने दी। सूत्रों ने खुलासा किया है कि चीनी सैनिकों ने भारतीय जवानों के सामने हथियार तानते हुए कई जवानों पर बर्बर तरीके से हमले किए और जब तक उन्होंने प्राण नहीं त्याग दिए, तब तक उन्हें शारीरिक तौर पर प्रताड़ित किया गया।चीन के दक्षिणपूर्वी हिस्से में एक सुंदर सा प्रांत है- कियेंग्सी. यहां गान नाम की एक नदी बहती है. इसी नदी के किनारे बसी है कियेंग्सी प्रांत की राजधानी नानचांग. ये वही शहर है, जहां आज से 93 साल पहले चाइनीज़ सिविल वॉर का पहला बड़ा अंक खेला गया. ये बात है 1927 की. अगस्त महीने की पहली तारीख़ थी. क्यूमिनतांग सेना के नौ विद्रोही कमांडरों ने अपनी-अपनी टुकड़ी के साथ अलग-अलग दिशाओं से नानचांग पर हमला कर दिया. चार घंटे बीतते-बीतते नानचांग शहर पर विद्रोहियों का कब्ज़ा हो गया. कुछ दिनों बाद भले उनके हाथ से जीत निकल गई हो, मगर कम्यूनिस्ट विद्रोहियों को जो लॉन्चपैड चाहिए था, वो उन्हें मिल गया था.सशस्त्र आंदोलन के इसी इतिहास से अतीत जुड़ा है चीन की कम्यूनिस्ट सेना का अस्तित्व. वो भी 1 अगस्त 1927 के उस ग़दर को ही अपनी पैदाइश का दिन मानती है. उस वक़्त इस सेना का नाम रखा गया था- चाइनीज़ वर्कर्स ऐंड पीजेन्ट्स रेड आर्मी. यानी, चीन के कामगारों और किसानों की लाल सेना. लोग शॉर्ट में इसे रेड आर्मी बुलाते थे. 1927 से शुरू हुआ चाइना सिविल वॉर ख़त्म हुआ 22 साल बाद सन् 1949 में. जब कम्यूनिस्टों ने राष्ट्रवादी क्यूमिनतांग पार्टी और उसके मुखिया चियांग काई शेक को चीन से भागने पर मज़बूर कर दिया. इस जीत के बाद 1 अक्टूबर, 1949 को जब माओ ने कम्यूनिस्ट चीन की नींव रखी, तो देश का नया नाम पड़ा- पीपल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना. सब कुछ नया-नया हो रहा था, तो रेड आर्मी को भी नया नाम मिला- पीपल्स लिबरेशन आर्मी. शॉर्ट में, PLA.PLA की एक चीज बड़ी यूनिक है. ये चीज, उसे दुनिया के ज़्यादातर देशों की सेनाओं से अलग बनाती है. क्या है ये चीज? आप PLA के नाम पर ग़ौर कीजिए- पीपल्स लिबरेशन आर्मी. इंडियन आर्मी, ब्रिटिश आर्मी की तरह इसके साथ चीन का नाम नहीं जुड़ा. ये अंतर PLA के करेक्टर से जुड़े एक अहम पॉइंट से लिंक्ड है. बाकी देशों की सेनाएं जहां राष्ट्र की हैं, वहीं PLA सिविल वॉर के दौर की तरह आज भी कम्यूनिस्ट पार्टी का ही सशस्त्र विंग बना हुआ है. उसकी निष्ठा, उसकी जवाबदेही चीन के प्रति नहीं, चीन की जनता के प्रति नहीं, बल्कि कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के प्रति है. इसका मुख्य कर्तव्य है कम्यूनिस्ट पार्टी की सत्ता को बनाए रखना. उसका शासन, उसका असर बना रहे, ये सुनिश्चित करना. ये बात माओ के समय से आज तक नहीं बदली. मसलन, दिसंबर 2004 में तत्कालीन राष्ट्रपति हू जिंताओ ने एक भाषण दिया. इसका विषय था- नई सदी के नए स्टेज पर आर्म्ड फोर्सेज़ की भूमिका. अपने भाषण में हू जिंताओ ने PLA के चार मुख्य टास्क बताए. इन चारों को हू जिंताओ द्वारा बताए गए क्रम में सुनिए-कम्यूनिस्ट पार्टी की सत्ता को मज़बूत करना. 2. राष्ट्रीय विकास के लिए चीन की संप्रभुता, उसके इलाकों की सुरक्षा और घरेलू सिक्यॉरिटी को सुनिश्चित करना. 3. चीन के तेज़ी से बढ़ते राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा करना. 4. वैश्विक शांति बनाए रखने में मदद करना.

कौन होता है PLA का बॉस? वैश्विक शांति! ये चौथा पॉइंट पढ़ते हुए मुझे बहुत ज़ोर से हंसी आई. ख़ैर, ये तो हुई निष्ठा की बात. अब चलते हैं PLA के स्ट्रक्चर पर. ये PLA पांच शाखाओं में बंटा है. तीन हिस्से तो पारंपरिक हैं- स्थल सेना, नौसेना और वायुसेना. बाकी के दो हिस्से हैं- रॉकेट फोर्स और स्ट्रैटेजिक सपोर्ट फोर्स. इन सारे विंग्स की अल्टीमेट कमान होती है सेंट्रल मिलिटरी कमीशन के पास. कम्यूनिस्ट पार्टी के इतिहास में ज़्यादातर मौकों पर कम्यूनिस्ट पार्टी का मुखिया और देश का राष्ट्रपति ही इस कमीशन का भी सर्वेसर्वा रहा. इन दिनों ये पावर है शी चिनफिंग के पास. बल्कि 2013 में राष्ट्रपति बनने के एक साल पहले ही वो सेंट्रल मिलिटरी कमीशन और कम्यूनिस्ट पार्टी के प्रमुख बन गए थे.अगर आप PLA के अतीत को दो हिस्सों में बांटें, तो एक दौर होगा बिफ़ोर 1990. और दूसरा दौर होगा, आफ़्टर 1990. ये बंटवारा क्यों? क्योंकि 90 के दशक से पहले वाला PLA उतना कॉम्पिटेंट नहीं था. उसके हथियार आउटडेटेड थे. उसके सैन्यकर्मी अच्छी तरह प्रशिक्षित नहीं थे. ऊपर से भ्रष्टाचार भी एक बड़ी दिक्कत थी PLA की. भ्रष्टाचार की एक मिसाल देता हूं आपको. ये बात है 1978 की. तब देंग ज़ियाओपिंग राष्ट्रपति बने चीन के. उनका फ़ोकस था आर्थिक सुधार. इस आर्थिक सुधार के क्रम में उन्होंने PLA को बिज़नस में घुसा दिया. उस दौर में PLA की बिज़नस ऐक्टिविटी इतनी बढ़ गई कि वो ज़मीन और घर बेचने लगा. नाइटक्लब चलाने लगा. दवा कारोबार में घुस गया. PLA सेना न रहकर एक बिज़नस अंपायर में तब्दील हो गया. ये बिफ़ोर 1990 वाले दौर की कहानी है.जैसे-जैसे चीन की ताकत बढ़ रही थी. जैसे-जैसे उसकी आर्मी मज़बूत हो रही थी, उसी अनुपात में चीन भी आक्रामक हो रहा था. मसलन, 2010 का एशियान समिट. यहां बाकी सदस्य देशों ने चीन की आक्रामकता पर शिकायत की. इस शिकायत पर चीन के तत्कालीन विदेश मंत्री यांग जियेची का जवाब था-चीन बहुत बड़ा देश हैं. बाकी देश छोटे-छोटे हैं. हमसे कहीं छोटे. यही फैक्ट है और सबको ये मान लेना चाहिए.चीन की आक्रामकता और महत्वाकांक्षाएं तब और बढ़ गईं, जब 2013 में शी चिनफिंग राष्ट्रपति बने. उन्होंने कहा कि वो 2050 तक PLA को दुनिया की सबसे ताकतवर फोर्स बना देंगे. ऐसी फोर्स, जो एयरक्राफ़्ट, मिसाइल, सबमरीन हर मामले में बाकियों पर भारी होगी. चिनफिंग इस महत्वाकांक्षा को ‘चाइनीज़ ड्रीम’ कहते हैं. उनका ये सपना कहता है कि न केवल 2050 तक PLA वर्ल्ड-क्लास फोर्स बन जाएगी, बल्कि पूरे एशिया-प्रशांत इलाके पर भी उसी का दबदबा होगा. चिनफिंग के इस ‘चाइनीज़ ड्रीम’ का एक अहम कॉम्पोनेंट ये भी है कि 2049 तक चीन ऐसी स्थिति में आ जाएगा, जहां वो ग्लोबल युद्ध लड़ सके और उन्हें जीत सके. मतलब ये टारगेट बाहरी ताकतों से चीन की रक्षा करना नहीं है. बल्कि इसका मकसद है अपने हितों, अपने विस्तार के लिए दुनियाभर में युद्ध लड़ना.

source-https://www.thelallantop.com/bherant/peoples-liberation-army-strengths-and-weaknesses-of-chinas-pla/

सन्दर्भ[संपादित करें]