प्रक्षेपास्त्र

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भारत का अग्नि ३ प्रक्षेपास्त्र

प्रक्षेपित कर उपयोग में लाया जाने वाला अस्त्र। इसका प्रयोग दूर स्थित लक्ष्य को बेधने के लिए किया जाता है। इसकी सहायता से विस्फोटकों को हजारों किलोमीटर दूर के लक्ष्य तक पहुंचाया जा सकता है। इस प्रकार सुदूर स्थित दुश्मन के ठिकाने भी कुछ ही समय में नष्ट किए जा सकते हैं। प्रक्षेपास्त्र रासायनिक विस्फोटकों से लेकर परमाणु बम तक का वहन और प्रयोग कर सकता है।

वर्गीकरण[संपादित करें]

गति नियंत्रण प्रणाली के आधार पर[संपादित करें]

गति नियंत्रण के आधार पर प्रक्षेपास्त्र दो प्रकार का होता है।

  • 1 बैलेस्टिक प्रक्षेपास्त्र- ये प्रक्षेपास्त्र दागे जाने के बाद उड़ते-उड़ते पृथ्वि के गुरुत्वाकर्षण नियम के अधीन किसी खास लक्ष्य पर गिरता है।
  • 2 क्रूज प्रक्षेपास्त्र- ये प्रक्षेपाश्त्र गुरुत्वाकर्षण से नियंत्रित नहीं होता है बल्कि उनमें गति निर्धारित करने कि विशेष प्रणाली होती है।

मारक क्षमता के आधार पर[संपादित करें]

मारक क्षमता के आधार पर प्रक्षेपास्त्र चार प्रकार के होते हैं।

  • छोटी दूरी का प्रक्षेपास्त्र- इसकी मारक क्षमता कुछ सौ किलोमीटर से हजार किलोमीटर तक होती है।
  • मध्यम दूरी का प्रक्षेपास्त्र- इसकी मारक क्षमता एक हजार से तीन हजार किलोमीटरतक की होती है।
  • लंबी दूरी का प्रक्षेपास्त्र- इसकी क्षमता तीन से साढ़े पाँच हजार कीलोमीटर तक की होती है।
  • अंतर्महाद्वीपीय प्रक्षेपाश्त्र- इसकी क्षमता साढ़े पाँच हजार किलोमीटर से भी अधिक का होता है।

उपयोग की प्रकृति के आधार पर[संपादित करें]

एक लड़ाकू विमान हवा से हवा में प्रयोग लाए जाने वाले प्रक्षेपाश्त्र को छोडता हुआ

उपयोग पद्धति के आधार पर प्रक्षेपास्त्रों को निम्न वर्गों में बाँटा जाता है।

  • सतह से सतह का प्रक्षेपास्त्र
  • सतह से वायु का प्रक्षेपास्त्र
  • वायु से वायु का प्रक्षेपास्त्र
  • जल से जल का प्रक्षेपास्त्र

भारत के प्रक्षेपास्त्र[संपादित करें]