सोवियत संघ

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सोवियत समाजवादी गणतंत्रों का संघ
Союз Советских Социалистических Республик
सोयूज़ सोवेत्स्किख़ सोत्सियालिस्तिचेस्किख़ रेस्पुब्लिक
रूसी सो.सं.स.ग.|
 
पार-कॉकस सो.सं.स.ग.|
 
यूक्रेनी सो.स.ग.|
 
बेलारूसी सो.स.ग.|
१९२२–१९९१
सोवियत संघ का ध्वज|Flag सोवियत संघ का|राजचिह्न
आदर्श वाक्य
Пролетарии всех стран, соединяйтесь!
प्रोलेतारी व्सेख़ स्त्रान, सोएदिन्याइतेस​!
हिंदी: दुनिया के मज़दूरों, एक हो जाओ!
राष्ट्रीय गान
"इन्तरनासियोनाल"
(१९२२–१९४४)

"सोवियत संघ का राष्ट्रगान"
(१९४४–१९९१)
द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद सोवियत संघ
राजधानी मोस्को
भाषाएँ रूसी, बहुत सी अन्य
धर्म नास्तिकता
शासन संघ,
मार्क्सवाद-लेनिनवाद, साम्यवाद
महासचिव
 -  १९२२–१९५२ जोसेफ़ स्टालिन (पहला)
 -  १९९१ व्लादिमीर इवाशको (अंतिम)
राष्ट्राध्यक्ष
 -  १९२२–१९३८ मिख़ाइल कालिनिन (पहला)
 -  १९८८–१९९१ मिख़ाइल गोरबाचोफ़​ (अंतिम)
सरकारी अध्यक्ष
 -  १९२२–१९२४ व्लादिमीर लेनिन (पहला)
 -  १९९१ इवान सिलायेव (अंतिम)
विधानमंडल सर्वोच्च सोवियत
 -  उच्च सदन संघीय सोवियत
 -  निम्न सदन राष्ट्रीयताओं का सोवियत
ऐतिहासिक युग प्रथम विश्वयुद्ध के अंत से शीत युद्ध
 -  स्थापना संधि ३० दिसम्बर १९२२
 -  संघ का खंडन २६ दिसम्बर १९९१
क्षेत्रफल
 -  १९९१ 2,24,02,200 किमी ² (86,49,538 वर्ग मील)
जनसंख्या
 -  १९९१ est. 29,30,47,571 
     


घनत्व

13.1 /किमी ²  (33.9 /वर्ग मील)
मुद्रा सोवियत रूबल (руб) (SUR)
इंटरनेट टीएलडी .su
दूरभाष कूट +7
पूर्ववर्ती
अनुगामी
रूसी सो.सं.स.ग.
पार-कॉकस सो.सं.स.ग.
यूक्रेनी सो.स.ग.
बेलारूसी सो.स.ग.
रूस
जॉर्जिया
युक्रेन
मोल्दोवा
बेलारूस
आर्मीनिया
अज़रबैजान
काज़ाख़स्तान
उज़बेकिस्तान
तुर्कमेनिस्तान
किरगिज़स्तान
ताजिकिस्तान
एस्टोनिया
लातविया
लिथुआनिया
२१ दिसम्बर १९९१ में ग्यारह गणतंत्रों ने अल्मा-अता में मिलकर घोषित किया कि स्वतन्त्र राज्यों का राष्ट्रमंडल बनने से सोवियत संघ अब अस्तित्व में नहीं रहा। बारहवाँ गणतंत्र जॉर्जिया भी प्रेक्षक के रूप में मौजूद था।

Assigned on 19 सितंबर 1990, existing onwards.
एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया की सरकारें मानती है कि वे कभी सोवियत संघ का वैध भाग ही नहीं थे।
रूस इन तीनों को सोवियत संघ का वैध अंश मानता है और इन सरकारों के कथन को अवैध मानता है।
संयुक्त राज्य अमेरिका और बहुत सी अन्य पश्चिमी सरकारों ने इन तीनों का द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद सोवियत संघ में विलय कभी नहीं स्वीकारा, इसलिए उन्हें सोवियत संघ का वैध अंश नहीं मानते।

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सोवियत संघ (रूसी भाषा: Сове́тский Сою́з, सोवेत्स्की सोयूज़; अंग्रेज़ी: Soviet Union), जिसका औपचारिक नाम सोवियत समाजवादी गणतंत्रों का संघ (Сою́з Сове́тских Социалисти́ческих Респу́блик, Union of Soviet Socialist Republics) था, यूरेशिया के बड़े भूभाग पर विस्तृत एक देश था जो १९२२ से १९९१ तक अस्तित्व में रहा। यह अपनी स्थापना से १९९० तक साम्यवादी पार्टी (कोम्युनिस्ट पार्टी) द्वारा शासित रहा। संवैधानिक रूप से सोवियत संघ १५ स्वशासित गणतंत्रों का संघ था लेकिन वास्तव में पूरे देश के प्रशासन और अर्थव्यवस्था पर केन्द्रीय सरकार का कड़ा नियंत्रण रहा। रूसी सोवियत संघीय समाजवादी गणतंत्र ( Russian Soviet Federative Socialist Republic) इस देश का सबसे बड़ा गणतंत्र और राजनैतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक केंद्र था, इसलिए पूरे देश का गहरा रूसीकरण हुआ। यही कारण रहा कि विदेश में भी सोवियत संघ को अक्सर ग़लती से 'रूस' बुला दिया जाता था।

इतिहास[संपादित करें]

स्थापना[संपादित करें]

सोवियत संघ की स्थापना की प्रक्रिया 1917 की रूसी क्रान्ति के साथ शुरू हुई जिसमें रूसी साम्राज्य के ज़ार (सम्राट) को सत्ता से हटा दिया गया। व्लादिमीर लेनिन के नेतृत्व में बोल्शेविक पार्टी ने सत्ता पर क़ब्ज़ा कर लिया लेकिन फ़ौरन ही वह बोल्शेविक-विरोधी श्वेत मोर्चे (White movement) के साथ गृह युद्ध में फँस गई। बोल्शेविकों की लाल सेना ने गृह युद्ध के दौरान ऐसे भी कई राज्यों पर क़ब्ज़ा कर लिया जिन्होनें त्सार के पतन का फ़ायदा उठाकर रूस से स्वतंत्रता घोषित कर दी थी। दिसम्बर 1922 में बोल्शेविकों की पूर्ण जीत हुई और उन्होंने रूस, युक्रेन, बेलारूस और कॉकस क्षेत्र को मिलकर सोवियत संघ की स्थापना का ऐलान कर दिया।[1]

स्टालिन और द्वितीय विश्वयुद्ध[संपादित करें]

1924 लेनिन की मृत्यु हुई और जोसेफ़ स्टालिन सत्ता में आया। उसने सोवियत संघ में ज़बरदस्त औद्योगीकरण करवाया और केंद्रीय आर्थिक व्यवस्था बनाई। कृषि और अन्य व्यवसायों का सामूहिकीकरण किया गया, यानि खेत किसानों की निजी संपत्ति न होकर राष्ट्र की संपत्ति हो गए और उनपर किसानों के गुट सरकारी निर्देशों पर काम करने लगे। इसी केंद्रीकृत अर्थव्यवस्था को द्वितीय विश्वयुद्ध में जंग लड़ने के लिए प्रयोग किया गया जिस से सोवियत संघ की जीत हुई। स्टालिन ने अपने शासनकाल में साम्यवादी पार्टी के बहुत से सदस्यों और नेताओं को अलग करके मरवाया और सोवियत संघ के कई समुदायों पर भी अत्याचार किया।

द्वितीय विश्वयुद्ध में शुरू में तो जर्मनी और सोवियत संघ में एक संधि थी जिसके अंतर्गत उन्होंने पोलैंड को आपस में बाँट लिया था और क्रॅसि इलाक़ा सोवियत संघ को मिल गया। लेकिन 1941 में जर्मनी ने पलट कर सोवियत संघ पर हमला कर दिया। इस से सोवियत संघ मित्रपक्ष शक्तियों (ऐलाइड शक्तियों) के गुट में संयुक्त राज्य अमेरिका और ब्रिटेन का साथ हो गया और जर्मनी के विरुद्ध लड़ा। जर्मनी-सोवियत युद्ध बहुत ही भयंकर था और इसमें 2.1 करोड़ सोवियत लोगों की मृत्यु हुई। लेकिन अंत में सोवियत संघ विजयी हुआ और पूर्वी यूरोप के बहुत से देश (जैसे कि पोलैंड, हंगरी, चेकोस्लोवेकिया, रोमानिया, बुल्गारिया और पूर्वी जर्मनी) पर उसका नियंत्रण हो गया।

शीत युद्ध[संपादित करें]

पूर्वी यूरोप में अपने नियंत्रण के अधीन देशों के साथ सोवियत संघ ने एक साम्यवादी सैन्य मित्रपक्ष बनाया, जिसे वारसॉ संधि गुट (Warsaw Pact) के नाम से जाना जाता है। इसके विपक्ष अमेरिका के नेतृत्व में पश्चिमी देशों का गुट था। दोनों विपक्षियों के बीच शीत युद्ध जारी रहा जिसमें दोनों में सीधी लड़ाई तो कभी नहीं हुई, लेकिन दोनों परमाणु हथियारों और मिसाइलों से लैस हमेशा विध्वंसकारी परमाणु युद्ध छिड़ जाने की संभावना के साये में रहे।

स्टालिन की मृत्यु के बाद विभिन्न साम्यवादी नेताओं में सर्वोच्च नेता बनने की खींचातानी हुई और निकिता ख़्रुश्चेव​ सत्ता में आये। उन्होंने स्टालिन की सबसे सख़्त​ तानाशाही नीतियों को पलट दिया। सोवियत संघ अंतरिक्ष अनुसंधान में सबसे आगे निकल गया। 1957 में उसने विश्व का सबसे पहला कृत्रिम उपग्रह स्पुतनिक पृथ्वी के इर्द-गिर्द कक्षा में पहुँचाया। 1961 में सोवियत वायु-सैनिक यूरी गगारिन पृथ्वी से ऊपर अंतरिक्ष में पहुँचने वाला सबसे पहला मानव बना। 1962 में क्यूबाई मिसाइल संकट में अमेरिका और सोवियत संघ के बीच बहुत गंभीर तनाव बना और वे परमाणु प्रलय की दहलीज़ पर पहुँच गए, लेकिन किसी तरह यह संकट टल गया। 1970 के दशक में सोवियत-अमेरिकी संबंधों में तनाव कम हुआ लेकिन 1979 में जब सोवियत संघ ने अफ़्ग़ानिस्तान में हस्तक्षेप करते हुए वहाँ अपनी फ़ौज भेजी तो सम्बन्ध बहुत बिगड़ गए।

सोवियत संघ का अंत === अफ़्ग़ानिस्तान में सोवियत नियंत्रण के खिलाफ़ उपद्रव और गृह युद्ध लगातार जारी रहे और आख़िरकर 1989 में सोवियत फौजें वहाँ से बिना अपना ध्येय पूरा किये लौट आई। देश में आर्थिक कठिनाइयाँ बनी रहीं और विदेशी संबधों में भी पेचीदगियाँ रहीं। अंतिम सोवियत नेता मिख़ाइल गोरबाचोफ़​ ने देश में ग्लास्नोस्त (glasnost) नामक राजनैतिक खुलेपन की नई नीति और पेरेस्त्रोइका (perestroika) नामक आर्थिक ढाँचे को बदलने की नीति के अंतर्गत सुधार करने की कोशिश की लेकिन विफल रहे। दिसम्बर 1991 में उनकी विचारधारा के विरुद्ध राज्यविप्लव (coup d'état) की कोशिश हुई लेकिन वह कुचली गई। इस घटना के बाद सोवियत संघ टूट गया और उसके 15गणतंत्र सभी स्वतन्त्र देशों के रूप में उभरे। अंतर्राष्ट्रीय संधियों में रूस को सोवियत संघ के वारिस देश की मान्यता दी गई।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. World and Its Peoples: Europe, pp. 1362, Marshall Cavendish, 2009, ISBN 978-0-7614-7900-0, ... Resistance grew into civil war in which several different movements participated, but the Red Army and the anti-Soviet voluntary White Army were the main combatants ... The declaration of the creation of the Union of Soviet Socialist Republics (USSR, or Soviet Union) was signed on December 30, 1922 ...