कोरियाई युद्ध

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युद्ध के आरम्भिक दिनों में अधिकार-क्षेत्र बार-बार बदलते रहे। अन्ततः सीमा स्थिर हुई।
उत्तर कोरिया और चीनी सेनाएँ
दक्षिण कोरिया, अमेरिका, कॉमनवेल्थ तथा संयुक्त राष्ट्र की सेनायें

कोरियाई युद्ध शीत युद्ध काल मे लड़ा गया पहला महत्वपूर्ण युद्ध था। एक तरफ उत्तर कोरिया था जिसका समर्थन सोवियत संघ तथा साम्यवादी चीन कर रहे थे, दूसरी तरफ दक्षिण कोरिया था जिसकी रक्षा अमेरिका कर रहा था। युद्ध अन्त मे बिना निर्णय ही समाप्त हुआ किन्तु जन क्षति तथा तनाव बहुत बढ़ गया था।

कोरिया-विवाद सम्भवतः संयुक्त राष्ट्र संघ के शक्ति-सामर्थ्य का सबसे महत्वपूर्ण परीक्षण था। अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के विद्वान शूमा ने इसे “सामूहिक सुरक्षा परीक्षण” की संज्ञा दी है।

परिचय[संपादित करें]

द्वितीय विश्वयुद्ध के अंतिम दिनों में मित्र-राष्ट्रों में यह तय हुआ कि जापानी आत्म-समर्पण के बाद सोवियत सेना उत्तरी कोरिया के 38 वें अक्षांश तक तथा संयुक्त राष्ट्र संघ की सेना इस लाइन के दक्षिण भाग की निगरानी करेगी। दोनों शक्तियों ने “अन्तरिम कोरियाई प्रजातांत्रिक सरकार” की स्थापना के लिए संयुक्त आयोग की स्थापना की। किन्तु 25 जून, 1950 को उत्तरी कोरिया ने दक्षिण कोरिया पर आक्रमण कर दिया। इसी दिन सुरक्षा परिषद में सोवियत अनुपस्थिति का फायदा उठाते हुए अमरीका ने अन्य सदस्यों से उत्तरी कोरिया को आक्रमणकारी घोषित करवा दिया। सुरक्षा परिषद ने यह सिफारिश की संयुक्त राष्ट्र संघ के सदस्य कोरियाई गणराज्य को आवश्यक सहायता प्रदान करे जिससे वह सशस्त्र आक्रमण का मुकाबला कर सके तथा उस क्षेत्र में शांति और सुरक्षा स्थापित की जा सके। पहली बार 7 जुलाई, 1950 को अमरीकी जनरल मैकार्थर की कमान में संयुक्त राष्ट्र संघ के झण्डे के नीचे संयुक्त कमान का निर्माण किया गया।

लेकिन सोवियत संघ ने बाद में सुरक्षा परिषद् की कार्रवाई में भाग लेना आरंभ कर दिया और कोरिया में संयुक्त राष्ट्र संघ की कार्रवाई रोकने के लिए “वीटो” का प्रयोग कर दिया। इसके परिणामस्वरूप 3 नवम्बर, 1950 को महासभा ने “शांति के लिए एकता प्रस्ताव” पास कर अतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा का उत्तरदायित्व स्वयं ले लिया। फलस्वरूप अमरीकी और चीनी सेनाएँ कोरियाई मामले को लेकर उलझ पड़ी। अंततः भारत तथा कुछ अन्य शांतिप्रिय राष्ट्रों की पहल के कारण 27 जुलाई, 1953 में दोनों पक्षों के बीच युद्ध विराम-सन्धि हुई। इस प्रकार कोरिया युद्ध को संयुक्त राष्ट्र संघ रोकने में सफल हुआ। वैसे उत्तरी तथा दक्षिणी कोरिया में आपसी तनाव जारी रहा।

जनहानि[संपादित करें]

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के अनुसार वहाँ इस युद्ध के कारण 33,686 सैनिकों और 2,830 आम नागरिकों की मौत हो गई। 1 नवम्बर 1950 को चीन का सामना करने पर सैनिकों के मौत की संख्या 8,516 बढ़ गई।[1] दक्षिण कोरिया ने बताया कि इस लड़ाई से उसके 3,73,599 आम नागरिक और 1,37,899 सैनिक मारे गए। पश्चिम स्रोतो के अनुसार इससे चार लाख लोगों कि मौत और 4,86,000 लोग घायल हुए हैं। केपीए के अनुसार 2,15,000 लोगों की मौत और 3,03,000 लोग घायल हुए थे।[2]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Defense Casualty Analysis System search Korean War Extract Data File. Accessed 21 December 2014.
  2. Bethany Lacina and Nils Petter Gleditsch, Monitoring Trends in Global Combat: A New Dataset of Battle Deaths, European Journal of Population (2005) 21: 145–166. Also available here

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]