तरुणसागर

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search
तरुणसागर
Trainer, motivator, author & keynote speaker ujjwal patni becomes mahatma gandhi and for 1000 gandhi event at sabarmati, ahmedabad, india with blessings of Muni Shri Tarunsagar ji, Guinness record event, october 2012.jpg
जन्म दमोह
निधन नई दिल्ली

मुनि तरुण सागर  (26 जून 1967- 1 सितम्बर 2018) जैन दिगंबर साधु और लेखक जिनके ओजस्वी प्रवचनों , अहिंसा के प्रचार एवं प्रसिद्ध हुए। उनकी एक पुस्तक श्रृंखला शीर्षक कड़वे प्रवचन बहुत मशहुर हुई।

जीवनी[संपादित करें]

तरुण सागर  (26 जून 1967- 1 सितम्बर 2018) जैन दिगंबर साधु और लेखक जिनके ओजस्वी प्रवचनों , अहिंसा के प्रचार एवं प्रसिद्ध हुए। उनकी एक पुस्तक श्रृंखला शीर्षक कड़वे प्रवचन बहुत मशहुर हुई।[संपादित करें]

जैन मुनि तरुण सागर का जन्म 26 जून, 1967 को मध्य प्रदेश के दहोह जिले में हुआ था। जैन मुनि तरुण सागर का बचपन का नाम पवन जैन था। जैन धर्म की दीक्षा लेने के बाद 8 मार्च, 1981 को उन्होंने अपना घर छोड़ दिया था और एक मुनि का जीवन अपना लिया था। दिगम्बर जैन मुनि तरुण सागर अपने उपदेशों ‘कड़वे वचन’ के लिए काफी प्रसिद्ध हैं।

तरुण सागर महाराज का देहावसान पीलिया बीमारी के कारण दिनांक ०१ सितम्बर २०१८ को सुबह लगभग ०३:३० बजे दिल्ली के राधेपुरी में हुआ।

*तरुण सागर जी महाराज का परिचय!*

पूर्व नाम : श्री पवन कुमार जैन

जन्म तिथि : २६ जून, १९६७, ग्राम गुहजी

(जि.दमोह ) म. प्र.

माता-पिता : महिलारत्न श्रीमती शांतिबाई जैन एव

श्रेष्ठ श्रावक श्री प्रताप चन्द्र जी जैन

लौकिक शिक्षा : माध्यमिक शाला तक

गृह - त्याग : ८ मार्च , १९८१

शुल्लक दीक्षा : १८ जनवरी , १९८२, अकलतरा ( छत्तीसगढ़) में

मुनि- दीक्षा : २० जुलाई, १९८८, बागीदौरा (राज.)

दीक्षा - गुरु युगसंत आचार्य पुष्पदंत सागर जी मुनि

लेखन : हिन्दी

बहुचर्चित कृति : मृत्यु- बोध

मानद-उपाधि : 'प्रज्ञा-श्रमण आचार्यश्री पुष्पदंत सागरजी द्वारा प्रदत

प्रख्यायती : क्रांतिकारी संत

कीर्तिमान : आचार्य भगवंत कुन्दकुन्द के पश्चात गत दो हज़ार

वर्षो के इतिहास मैं मात्र १३ वर्ष की वय में जैन

सन्यास धारण करने वाले प्रथम योगी ।

: राष्ट्र के प्रथम मुनि जिन्होंने लाल किले (दिल्ली)

से संबोधन।

: जी.टी.वी. के माध्यम से भारत सहित १२२ देशों में

' महावीर - वाणी ' के विश्व -व्यापी प्रसारण की ऐतिहासिक सुरुआत करने का प्रथम श्रेय ।

मुख्य - पत्र : अहिंसा - महाकुम्भ (मासिक)

आन्दोलन : कत्लखानों और मांस -निर्यात के विरोध में निरंतर

अहिंसात्मक रास्ट्रीय आन्दोलन ।

सम्मान : ६ फरवरी ,२००२ को म.प्र. शासन द्वारा' राजकीय अतिथि ' का दर्जा ।

२ मार्च , २००३ को गुजरात सरकार द्वारा ' राजकीय अतिथि 'का सम्मान ।

साहित्य : तीन दर्जन से अधिक पुस्तके उपलब्ध और उनका हर वर्ष लगभग दो लाख

प्रतियों का प्रकाशन ।

राष्ट्रसंत : म. प्र. सरकार द्वारा २६ जनवरी , २००३ को दशहरा मैदान , इंदौर में।

संगठन : तरुण क्रांति

मंच .केन्द्रीय कार्यालय दिल्ली में देश भर में इकाईया

प्रणेता : तनाव मुक्ति का अभिनव प्रयोग ' आनंद- यात्रा ' कार्यक्रम के प्रणेता

पहचान : देश में सार्वाधिक सुने और पढ़े जाने वाले तथा दिल और दिमाग को झकझोर देने

वाले अद्भुत प्रवचन | अपनी नायाब प्रवचन शैली के लिए देशभर में विख्यात रहें।

जैन मुनि के रूप में पहचान |

मिशन : भगवान महावीर और उनके सन्देश " जियो और जीने दो " का विश्व व्यापी प्रचार -प्रसार एवम जीवन जीने की..

तरुण सागर महाराज का देहावसान पीलिया बीमारी के कारण दिनांक ०१ सितम्बर २०१८ को सुबह लगभग ०३:३० बजे दिल्ली के राधेपुरी में हुआ।[संपादित करें]

काम करता है[संपादित करें]

मुनि Tarunsagar का गठन किया है एक राष्ट्रीय पुरस्कार - तरुण क्रांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, जो करने के लिए बाबा रामदेव, विजय दरदा और JITO द्वारा 2012 में तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदीहै। [1] उन्होंने अपने प्रकाशित discources में एक पुस्तक श्रृंखला शीर्षक Kadve प्रवचन (कड़वे प्रवचन) में 2003 में अहमदाबाद.[2][14][3] अपने साहित्य प्रसारित और देखा में 100 से अधिक देशों द्वारा जैन समुदाय.[4] ज्योति Amgeहै, जो कम से कम 25 इंच लंबा, जारी Tarunsagar के Kadve प्रवचन (कड़वा बयान), एक किताब को मापने के 30 फुट, 24 फीट और वजन 2,000 किलोग्राम, पर 18 अगस्त 2013 में जयपुर.[5]

अखबारों में लेख[संपादित करें]

  • ईर्ष्या fetches आप कुछ भी नहीं[6]
  • नहीं किया जा अहंकारी अपने पैसे का![7]
  • धर्म आवश्यक लगता है?[8]
  • मैं विरोधी नहीं हूँ पंडित लेकिन एंटी-पंडित-पाखंड[9]
  • जहां कारण है, वहाँ नरक है[10]

दर्शन[संपादित करें]

अंतर्राष्ट्रीय ट्रेनर, लेखक और प्रेरक लेखक, Dr Ujjwal Patni के समक्ष रखी के रूप में महात्मा गांधी और उनकी पत्नी के रूप में पेश कस्तूरबा गांधी पर अहमदाबाद पर 2 अक्टूबर 2012. '1000 गांधी' कार्यक्रम आयोजित किया गया था के लिए गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के आशीर्वाद के साथ मुनि श्री Tarunsagar जी महाराज. गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में इस बात की पुष्टि की है के रूप में एक विश्व रिकॉर्ड के लिए सबसे अधिक लोगों के रूप में कपड़े पहने गांधी एक जगह में: 891

मुनि Tarunsagar ने कहा कि लव जिहाद एक साजिश है परिवर्तित करने के लिए हिंदू लड़कियों में मुस्लिम। [11][12]

  • देखभाल की मौत और भगवान[13]
  • नहीं के जाल में गिर 100[14]
  • मोहन भागवत के लिए चला गया के आशीर्वाद सेंट[15]
  • जैन मुनि बताया कि कई महत्वपूर्ण चीजों में कड़वा तरीके से[16]
  • जैन मुनि बताया छोड़ने के लिए मादक पेय और गैर-शाकाहारी[17]

नोट[संपादित करें]

  1. "CM presents 'Tarun-Kranti Puraskar' to Baba Ramdev, Vijay Darda and JITO", narendramodi.in, 29 July 2012 
  2. "Muni Tarunsagar's 'Kadve Pravachan' burrows through hearts", Daily News and Analysis, 10 August 2012 
  3. "आचार्य श्री के कड़वे-प्रवचन के कुछ अंश" Archived 2016-10-22 at the Wayback Machine, jainreligion.in 
  4. "Shivraj Singh Chauhan fit for PM, Jain muni says at RSS function" Archived 2016-06-23 at the Wayback Machine, The Times of India, 14 October 2013 
  5. "Indian media: Interest in 'militant' arrest" Archived 2018-11-04 at the Wayback Machine, BBC, 19 August 2013 
  6. "ईर्ष्या से कुछ नहीं मिलता" Archived 2016-05-29 at the Wayback Machine, navbharattimes.indiatimes.com 
  7. "कडवे प्रवचन : धन का अहंकार न करें!" Archived 2016-08-19 at the Wayback Machine, hindi.webdunia.com 
  8. "धर्म जरूरी लगता है?" Archived 2016-03-25 at the Wayback Machine, satsanglive.com 
  9. "मैं पंडितों का नहीं उनके पाखंड का विरोधी हूं : मुनि तरुणसागर" Archived 2016-09-10 at the Wayback Machine, satsanglive.com 
  10. "जहां तर्क है, वहां नर्क है : मुनि तरुणसागर" Archived 2016-03-04 at the Wayback Machine, satsanglive.com 
  11. "तरुण सागर के लव-जिहाद संबंधी बयान पर गरमाई सियासत" Archived 2016-08-31 at the Wayback Machine, jagran.com 
  12. "'हिंदू लड़कियों को मुस्लिम बनाने की साजिश है लव जिहाद'" Archived 2016-01-31 at the Wayback Machine, Amar Ujala, 11 May 2015 
  13. "'मौत और भगवान का ध्यान रखो'" Archived 2016-03-25 at the Wayback Machine. jagran.com. 
  14. "सौ के फेर में नहीं पड़ें" Archived 2016-12-12 at the Wayback Machine. jagran.com. 
  15. "संत की शरण में भागवत" Archived 2016-03-25 at the Wayback Machine. jagran.com. 
  16. "जैन मुनि ने कड़वे ढंग से बताई कई अहम बातें" Archived 2016-03-04 at the Wayback Machine, amarujala.com 
  17. "जैन मुनि ने शराब और मांस त्यागने को कहा" Archived 2016-03-04 at the Wayback Machine, amarujala.com 

सन्दर्भ[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]