जयसेन

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जयसेन बारहवीं सदी के दिगम्बर जैन आचार्य थे, जिन्होंने आचार्य कुन्दकुन्द स्वामी के प्रवचनसार पर एक टीका लिखी थी।[1]

सन्दर्भ[संपादित करें]