जिनसेन

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जिनसेन आचार्य दिगम्बर परम्परा के एक प्रमुख आचार्य थे। वह महापुराण के रचयता है। उन्होंने धवला टीका पूरी की थी। जैन ग्रंथ हरिवंश-पुराण के रचियता अन्य जिनसेन थे यह नहीं। [1]

जीवनी[संपादित करें]

जिनसेन आचार्य, आचार्य वीरसेन के शिष्य थे। उन्होंने अपने गुरु द्वारा लिखी गयी कषायप्रभ्रिता की प्रख्यात टीका "धवला" को पूरा किया था। महापुराण के दो भाग उत्तरपुराण और आदिपुराण है। उनके शिष्य गुणभद्र ने उनके इस कार्य को पूरा किया था।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Jinasena, Acharya; Jain (Sahityacharya), Dr. Pannalal (2008) [783 AD]. Harivamsapurana. Bhartiya Jnanpith (18, Institutional Area, Lodhi Road, New Delhi - 110003). आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-81-263-1548-2. https://books.google.co.in/books?id=t_sFcJNt1sUC&printsec=frontcover&source=gbs_ge_summary_r&cad=0#v=onepage&q&f=false.