प्रमाणसागर

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मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज
Muni Shri Pramansagar Ji.jpg
धर्म जैन धर्म
उपसंप्रदाय दिगम्बर
व्यक्तिगत विशिष्ठियाँ
जन्म नवीन कुमार जैन
झारखण्ड

मुनि प्रमाणसागर एक दिगम्बर साधु है। इन्होंने जैन दर्शन पर कई पुस्तकों का लेखन किया है।

जीवन[संपादित करें]

प्रमाणसागर का जन्म 27 जून 1967 में हजारीबाग, झारखण्ड में हुआ था। [1] उनके माता-पिता सुरेन्द्र कुमार जैन और सोहनी देवी जैन के पास बंगाली दुर्गा मंडप रहते थे। [2] इनकी क्षुल्लक दीक्षा 4 मार्च 1984 में क्षुल्लक श्री प्रमाण सागर के रूप में हुई। चार वर्ष के कठोर तप और अनुशासन के पश्चात् उन्की मुनि दीक्षा आचार्य विद्यासागर द्वारा 31 मार्च, 1988 को सोनागिर जी में हुअी।[3] सल्लेखना के मुद्दे पर, उन्होंने 'धर्मबचाओ आंदोलन' के लिए प्रेणा दी थी।[4][5] एक बड़े पैमाने पर सभा के 1 करोड़ समुदाय के सदस्यों का जश्न मनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट आदेश रहने पर प्रतिबंध जप से 1 करोड़ भजन है। [6] गुणायतन का निर्माण धार्मिक पहल है। उनके प्रवचन और शंका समाधान कार्यक्रम टी वी चैनल प्रसारित हो रहे है। [7]

मुनि प्रमाणसागर का जून 2016 में कुचामन, राजस्थान में प्रवेश हुआ था। [8]

इनका वर्ष २०१६ का चातुर्मास वैशाली नगर, अजमेर, राजस्थान में था।[9]

लेखन[संपादित करें]

मुनि प्रमाणसागर ने जैन धर्म और जैन दर्शन पर कई किताबें लिखी हैं :-

  • जैन तत्त्व विद्या[10]
  • तीर्थंकर, जैन धर्म और दर्शन,
  • दिव्या जीवन के द्वार और ज्योतिमय जीवन है। [11]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]