जैन ध्वज

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Jain Flag Photo
जैन ध्वज

जैन ध्वज पाँच रंगो से मिलकर बना एक ध्वज है। इसके पाँच रंग है: लाल, पीला, सफ़ेद, हरा और नीला/काला। [1]

रंग[संपादित करें]

महावीर जी मंदिर, राजस्थान के शिखर पर जैन ध्वज

जैन धर्म में पाँच पदों को सबसे सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इन्हें पंचपरमेष्ठी कहते है[2] ध्वज के पाँच रंग 'पंचपरमेष्ठी' के प्रतीक है:[1]

  • सफ़ेद -  अरिहन्त, शुद्ध आत्माएँ। जिन्होंने केवल ज्ञान प्राप्त कर लिया हो।
  • लाल - सिद्ध भगवान, मुक्त आत्माएँ। अरिहंतों के मार्गदर्शन में केवल ज्ञान प्राप्त होता है, जिससे अंत में सिद्ध पद प्राप्त होता है।
  • पीला - आचार्य,
  • हरा - उपाध्ययों के लिए, जो शास्त्रों का सम्पूर्ण ज्ञान रखते है।
  • काला - साधुओं के लिए, यह अपरिग्रह का भी प्रतीक है।

प्रतीक[संपादित करें]

जैन ध्वज

स्वस्तिक[संपादित करें]

ध्वज के मध्य में बना स्वस्तिक चार गतियों का प्रतीक है:

  1. मनुष्य
  2. देव
  3. तिर्यंच
  4. नारकी

रत्न[संपादित करें]

स्वस्तिक के ऊपर बने तीन बिंदु रतंत्रय के प्रतीक है:

  1. सम्यक् दर्शन
  2. सम्यक् ज्ञान
  3. सम्यक् चरित्र

इसका अर्थ है रतंत्रय धारण कर जीव चार गतियों में जनम मरण से मुक्ति पा सकता है।

सिद्धशिला जहाँ सिद्ध परमेष्ठी (मुक्त आत्माएँ) विराजती है

सिद्धशिला[संपादित करें]

इन बिंदुओं के ऊपर सिद्धशिला, जी लोक के अग्र भाग में है, उसकी आकृति बनी है।

इन्हें भी देखे[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "जैन ध्वज". http://www.vidyasagar.net/jain-dharm/jain-flag/. अभिगमन तिथि: 30 सितंबर 2015. 
  2. प्रमाणसागर २००८, पृ॰ १४८.

सन्दर्भ ग्रन्थ[संपादित करें]