तारणपंथ

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तारण पंथ, दिगंबर जैन धर्म का एक पंथ है।

विवरण[संपादित करें]

तारणपंथ की स्थापना १५०५ ईसा पूर्व जैनों ने की थी। जिस समय धर्म के नाम पर पाखंड का बोलबाला था तब 'तारण' नाम के व्यक्ति ने इस पंथ को जन्म दिया, जो आगे चलकर संत तारण के नाम से विख्यात हुए। यह पंथ मूर्तिपूजा के विरोध में उत्पन्न हुआ। संत तारण के द्वारा प्रतिरूप होने के कारण यहां पंथ तारणपंथ के नाम से ख्यात हुआ। संत तारण में १४ ग्रंथों की रचना की थी । इनकी टीका ब्र.शीतलप्रसाद ने किया। तारण पंथी १८ क्रियाओं का पालन करने वालों को कहते हैं। तारण पंथ का अर्थ है-मोक्ष मार्ग। उनके अनुयाई मूर्ति पूजा नहीं करते थे एवं वह अपने चैत्यालयों में [1] विराजमान शास्त्रों की पूजा करते हैं। इनके यहां संत तारण द्वारा रचित ग्रंथों के अतिरिक्त [2] दिगंबर जैनाचायों के ग्रंथों की भी मान्यता है। संत तारण का प्रभाव मध्य प्रांतों के ही कुछ क्षेत्रों तक सीमित रहा है।

आर्हताएं[संपादित करें]

जो सप्त व्यसन के त्याग कर अठारह क्रियाओं का पालन करता है वह तारण पंथी कहलाता है। ये अपनी पूजा को 'मंदिर विधि' कहते हैं। ये मंदिर को 'चैत्यालय' कहते हैं। ये अभिवादन के रूप में जय जिनेंद्र एवं जय तारण तरण कहते हैं।

विवरण

तारणपंथ के धाम[संपादित करें]

निसईजी मल्हारगढ़[संपादित करें]

अशोकनगर की मुगांवली तहसील से १४ व कुरवाई से २० किलोमीटर दूर निसईजी तारण पंथ का सर्वप्रमुखधाम हैं। यहाँ अति विशाल मंदिर-धर्मशाला है। यहाँ तारण स्वामी का समाधि स्थल है। यहां धर्मशाला में ३१५ कमरे हैं। यहाँ संत तारण को तीन बार नदी में डुबाया तीन टापू बन गए।

निसई जी सूखा[संपादित करें]

यह तारण पंथ का दूसरा प्रमुख धाम है।यहाँ संत तारण ने अपना प्रचार प्रसार केंद्र बनाया।यह तारण स्वामी की विहार स्थली है।यहाँ स्वर्ण जड़ित वेदी है।यहाँ कांच जड़ित मंदिर व सर्व सुविधा युक्त १०५ धर्मशाला है।यहाँ पानी की कमी थी वह संत तारण के प्रभाव से कम हो गई।

निसई जी सेमरखेड़ी[संपादित करें]

यह तारण स्वामी का तीसरा प्रमुख क्षेत्र है।यहां संत तारण ने अपनी साधना की।यह तारण स्वामी की दीक्षा भूमि है।यहाँ गुरुकुल संचालित है ।यहाँ विशाल मंदिर व२५० कमरों की धर्मशाला है।यहाँ तारण स्वामी को जहर पिलाया तो अमृत बन गया।

पुष्पावति बिल्हेरी[संपादित करें]

यह तारण पंथ का चौथा प्रमुख धाम है।यहाँ तारण स्वामी ने जन्म लिया व बाल्य काल बिताया।यहाँ विशाल मंदिर व १५० कमरों की धर्मशाला है।यहाँ जब पिता के कागज़ ज़ल गए तो तारण ने नए तैयार करके दिए।


अतिरिक्त तीर्थ क्षेत्र[संपादित करें]

  • ग्यारसपुर - पहला चातुर्मास किया।
  • गढ़ौला - दर्शन मात्र से मंत्र सिध्द हुआ।
  • मधुवन - २० तीर्थंकर मोक्ष गए।
  • चांद - प्रमुख शिष्य हिमांऊ पांडे की साधना भूमि है।

चैत्यालय[संपादित करें]

पूरी तारण समाज में १६८ चैत्यालय हैं।सर्वाधिक चैत्यालय गंजबासौदा में ५ हैं।इनकी प्रतिष्ठा का कार्यक्रम ३ दिवस तक चलता है।प्रथम दिवस जिनवाणीअस्थाप,ध्वजारोहण द्वितीय दिवस पालकी महोत्सव, कलशारोहण व तृतीय दिवस वेदीसूतन,तिलक महोत्सव होता है। इसमें निम्न पदवी मिलती हैं।

  • धर्मप्रेमी-:दो-चार परिवार द्वारा साथ मिलके भरवाने पर।
  • सेठ-: एक मेला भरवाने पर।
  • सवाई सेठ-:दो मेला भरवाने पर।
  • श्रीमंत-:तीन मेला भरवाने पर।
  • समाजरत्न-:चार मेला भरवाने पर।
  • समाजभूषण-:पांच मेला भरवाने पर।

तारण तरण श्री संघ[संपादित करें]

तारण पंथ में जो ब्रम्हचारी होते हैं उन्हें श्री संघ कहते हैं।वर्तमान में श्री संघ के प्रमुख ब्र. आत्मानंदब्र. बसंत हैं। श्री संघ में लगभग १०० साधक साध्वी हैं।।तारण स्वामी ने अपने तिलक में लिखा है - "श्री संघम् उवन्नं जयं - जयं"।

  • साधक
  • युवारत्न बाल ब्र.आत्मानंद जी
  • ब्र.परमानंद जी
  • ब्र.मुक्तानंद जी
  • अध्यात्म रत्न बाल ब्र.बसंत जी
  • ब्र.चिदानंद जी
  • ब्र.शांतानंद जी
  • ब्र.प्रज्ञानंद जी
  • ब्र.सदानंद जी
  • ब्र.राकेश जी
  • ब्र.विजयबहादुर जी
  • ब्र.राजेंद्र कुमार जी
  • ब्र.शिखरचंद्र जी
  • ब्र.अरबिंद जी
  • ब्र.आलोक जी
  • ब्र.राकेश जी
  • ब्र.बाबूलाल जी बाबा
  • ब्र.बाबूलाल जी
  • ब्र.ज्ञानाचंद्र जी
  • ब्र.सुनील जी
  • ब्र.प्रवीण जी
  • ब्र.पंकज जी
  • ब्र.राजमल जी
  • ब्र.भागचंद्र जी
  • ब्र.ओमकार जी
  • ब्र.वैराग्य जी
  • ब्र.विमलचंद्र जी
  • ब्र.घनश्याम जी
  • ब्र.अभिनय जी
  • ब्र.राजेश जी
  • ब्र.आलोक जी
  • ब्र.संजय जी
  • साध्वी
  • ब्र.अभयश्री बहिन जी
  • ब्र.जिनयश्री बहिन जी
  • ब्र.पुष्पा बहिन जी
  • ब्र.समयश्री बहिन जी
  • ब्र.ममलश्री बहिन जी
  • ब्र.सहजश्री बहिन जी
  • ब्र.ऊषा बहिन जी
  • ब्र.गुड्डी बहिन जी
  • ब्र.सुषमा बहिन जी
  • ब्र.जलशाबाई बहिन जी
  • ब्र.मुन्नी बहिन जी
  • ब्र.किरण बहिन जी
  • ब्र.सरला बहिन जी
  • ब्र.चंदाबाई बहिन जी
  • ब्र.कांतिबाई बहिन जी
  • ब्र.कमलश्री बहिन जी
  • ब्र.मालतिबाई बहिन जी
  • ब्र.विद्याबाई बहिन जी
  • ब्र.रचना बहिन जी
  • ब्र.वंदना बहिन जी
  • ब्र.अर्चना बहिन जी
  • ब्र.अंजना बहिन जी
  • ब्र.विभूति(वंदना)बहिन जी
  • ब्र.सरिता बहिन जी
  • ब्र.अनीता बहिन जी
  • ब्र.विजयाबाई बहिन जी
  • ब्र.अभिलाषा बहिन जी
  • ब्र.गौमतीबाई बहिन जी
  • ब्र.शीलाबाई बहिन जी
  • ब्र.रेखा बहिन जी
  • ब्र.जागृति बहिन जी
  • ब्र.सुलोचना बहिन जी
  • ब्र.जयंती बहिन जी
  • ब्र.बहिन जी
  • ब्र.बुआ जी
  • ब्र.प्रभारानी बहिन जी
  • ब्र.संख्या बहिन जी
  • ब्र.शशिबाई बहिन जी

समुदाय[संपादित करें]

तारण पंथ में छः समुदाय हैं।

  • समैया
  • असाटी
  • चरनागरे
  • गोलालारे
  • दोसके
  • अजुध्यावासी

जनसंख्या[संपादित करें]

तारण समाज भारत के १४ राज्यों के ८४ ज़िलों के ४५० स्थानों पर वसती है।कुछ तारण पंथी अमेरिका लंदन आदि में भी रहते हैं।ये हिंदी,बुंदेली, भारतीय अंग्रेजी,मराठी व अन्य क्षेत्रीय बोलियां बोलते हैं।जिल स्तरीय तारण समाज दमोह संभाग स्तरीय भोपाल/सागर,नगर स्तरीय बासोदा व ग्राम स्तरीय फुटेरा में सर्वाधिक वसती है।इनकी आबादी १ लाख है।

त्योहार[संपादित करें]

  • वीर शासन जयंती
  • पर्युषण पर्व
  • दीपावली
  • तारण जयंती
  • महावीर जयंती
  • श्रुत पंचमी
  • बसंत पंचमी
  • गुरुपर्वी

सन्दर्भ[संपादित करें]

इन्हें भी देखिए[संपादित करें]