कोलकाता

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कोलकाता
কলকাতা
महानगर
कोलकाता is located in पश्चिम बंगाल
कोलकाता
कोलकाता
पश्चिम बंगाल में स्थिति
कोलकाता is located in भारत
कोलकाता
कोलकाता
कोलकाता (भारत)
निर्देशांक: 22°34′N 88°22′E / 22.57°N 88.36°E / 22.57; 88.36निर्देशांक: 22°34′N 88°22′E / 22.57°N 88.36°E / 22.57; 88.36
देश भारत
प्रान्तपश्चिम बंगाल
ज़िलाकोलकाता ज़िला
क्षेत्रफल
 • कुल206.08 किमी2 (79.57 वर्गमील)
जनसंख्या (2011)
 • कुल44,96,694
 • घनत्व22,000 किमी2 (57,000 वर्गमील)
भाषाएँ
 • प्रचलितबंगाली
पिनकोड700 xxx
दूरभाष कोड+91-33
वाहन पंजीकरणWB-01 से WB-10
वेबसाइटkmcgov.in

कोलकाता (बांग्ला: কলকাতা, पूर्व नाम कलकत्ता) भारत के पश्चिम बंगाल राज्य की राजधानी है और भारत के प्रमुख महानगरों में से एक है। प्रशासनिक रूप से यह कोलकाता ज़िले में स्थित है। कोलकाता हुगली नदी के पूर्वी किनारे पर बांग्लादेश की सीमा से 80 किमी दूर बसा हुआ है। यह बंगाल की खाड़ी के शीर्ष तट से 180 किलोमीटर दूर स्थित है। कोलकाता भारत का दूसरा सबसे बड़ा महानगर तथा पाँचवा सबसे बड़ा बन्दरगाह है। इस शहर का इतिहास प्राचीन है। इसके आधुनिक स्वरूप का विकास अंग्रेजो एवं फ्रांस के उपनिवेशवाद के इतिहास से जुड़ा है। आज का कोलकाता आधुनिक भारत के इतिहास की कई गाथाएँ अपने आप में समेटे हुए है। यह नगर भारत के शैक्षिक एवं सांस्कृतिक परिवर्तनों के प्रारम्भिक केन्द्र था। महलों के इस शहर को 'आनन्द का शहर' भी कहा जाता है।[1][2] मुग़ल शासन ने विद्रोह को आसानी से दबा दिया, किन्तु उपनिवेशियों का ईंट व मिट्टी से बना सुरक्षात्मक ढाँचा वैसा ही बना रहा और 1700 में यह फ़ोर्ट विलियम कहलाया। 1698 में अंग्रेज़ों ने वे पत्र प्राप्त कर लिए, जिसने उन्हें तीन गाँवों के ज़मींदारी अधिकार कथा Archived 2023-01-20 at the वेबैक मशीन (राजस्व संग्रहण का अधिकार, Archived 2023-01-20 at the वेबैक मशीन वास्तविक स्वामित्व) ख़रीदने का विशेषाधिकार प्रदान कर दिया।

अपनी उत्तम अवस्थिति के कारण कोलकाता को 'पूर्वी भारत का प्रवेश द्वार' भी कहा जाता है। यह रेलमार्गों, वायुमार्गों तथा सड़क मार्गों द्वारा देश के विभिन्न भागों से जुड़ा हुआ है। यह प्रमुख यातायात का केन्द्र, विस्तृत बाजार वितरण केन्द्र, शिक्षा केन्द्र, औद्योगिक केन्द्र तथा व्यापार का केन्द्र है। अजायबघर, चिड़ियाखाना, बिरला तारमंडल, हावड़ा पुल, कालीघाट, फोर्ट विलियम, विक्टोरिया मेमोरियल, विज्ञान नगरी आदि मुख्य दर्शनीय स्थान हैं। कोलकाता के निकट हुगली नदी के दोनों किनारों पर भारतवर्ष के प्रायः अधिकांश जूट के कारखाने अवस्थित हैं। इसके अलावा मोटरगाड़ी तैयार करने का कारखाना, सूती-वस्त्र उद्योग, कागज-उद्योग, विभिन्न प्रकार के इंजीनियरिंग उद्योग, जूता तैयार करने का कारखाना, होजरी उद्योग एवं चाय विक्रय केन्द्र आदि अवस्थित हैं। पूर्वांचल एवं सम्पूर्ण भारतवर्ष का प्रमुख वाणिज्यिक केन्द्र के रूप में कोलकाता का महत्त्व अधिक है।

विकास और नामकरण[संपादित करें]

१९वीं सदी में कोलकाता

आधिकारिक रूप से इस शहर का नाम कोलकाता १ जनवरी, २००१ को रखा गया। इसका पूर्व नाम अंग्रेजी में "कैलकटा' था लेकिन बांग्ला भाषी इसे सदा कोलकाता या कोलिकाता के नाम से ही जानते है एवं हिन्दी भाषी समुदाय में यह कलकत्ता के नाम से जाना जाता रहा है। सम्राट अकबर के चुंगी दस्तावेजों और पंद्रहवी सदी के विप्रदास की कविताओं में इस नाम का बार-बार उल्लेख मिलता है। इसके नाम की उत्पत्ति के बारे में कई तरह की कहानियाँ मशहूर हैं। सबसे लोकप्रिय कहानी के अनुसार हिंदुओं की देवी काली के नाम से इस शहर के नाम की उत्पत्ति हुई है। इस शहर के अस्तित्व का उल्लेख व्यापारिक बंदरगाह के रूप में चीन के प्राचीन यात्रियों के यात्रा वृत्तांत और फारसी व्यापारियों के दस्तावेजों में मिलता है। महाभारत में भी बंगाल के कुछ राजाओं का नाम है जो कौरव सेना की तरफ से युद्ध में शामिल हुए थे। नाम की कहानी और विवाद चाहे जो भी हों इतना तो तय है कि यह आधुनिक भारत के शहरों में सबसे पहले बसने वाले शहरों में से एक है। १६९० में इस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारी "जाब चारनाक" ने अपने कंपनी के व्यापारियों के लिये एक बस्ती बसाई थी। १६९८ में इस्ट इंडिया कंपनी ने एक स्थानीय जमींदार परिवार सावर्ण रायचौधुरी से तीन गाँव (सूतानुटि, कोलिकाता और गोबिंदपुर) के इजारा लिये। अगले साल कंपनी ने इन तीन गाँवों का विकास प्रेसिडेंसी सिटी के रूप में करना शुरू किया। १७२७ में इंग्लैंड के राजा जार्ज द्वतीय के आदेशानुसार यहाँ एक नागरिक न्यायालय की स्थापना की गई। कोलकाता नगर निगम की स्थापना की गई और पहले मेयर का चुनाव हुआ। १७५६ में बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला ने कोलिकाता पर आक्रमण कर उसे जीत लिया। उसने इसका नाम "अलीनगर" रखा। लेकिन साल भर के अंदर ही सिराजुद्दौला की पकड़ यहाँ ढीली पड़ गयी और अंग्रेजों का इस पर पुन: अधिकार हो गया। १७७२ में वारेन हेस्टिंग्स ने इसे ब्रिटिश शासकों की भारतीय राजधानी बना दी। कुछ इतिहासकार इस शहर की एक बड़े शहर के रूप में स्थापना की शुरुआत १६९८ में फोर्ट विलियम की स्थापना से जोड़ कर देखते हैं। १९१२ तक कोलकाता भारत में अंग्रेजो की राजधानी बनी रही।

१७५७ के बाद से इस शहर पर पूरी तरह अंग्रेजों का प्रभुत्व स्थापित हो गया और १८५० के बाद से इस शहर का तेजी से औद्योगिक विकास होना शुरु हुआ खासकर कपड़ों के उद्योग का विकास नाटकीय रूप से यहाँ बढा हलाकि इस विकास का असर शहर को छोड़कर आसपास के इलाकों में कहीं परिलक्षित नहीं हुआ। ५ अक्टूबर १८६५ को समुद्री तूफान (जिसमे साठ हजार से ज्यादा लोग मारे गये) की वजह से कोलकाता में बुरी तरह तबाही होने के बावजूद कोलकात अधिकांशत: अनियोजित रूप से अगले डेढ सौ सालों में बढता रहा और आज इसकी आबादी लगभग १ करोड़ ४० लाख है। कोलकाता १९८० से पहले भारत की सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर था, लेकिन इसके बाद मुंबई ने इसकी जगह ली। भारत की आज़ादी के समय १९४७ में और १९७१ के भारत पाकिस्तान युद्ध के बाद "पूर्वी बंगाल" (अब बांग्लादेश) से यहाँ शरणार्थियों की बाढ आ गयी जिसने इस शहर की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह झकझोरा।

इतिहास[संपादित करें]

स्वाधीनता आंदोलन में भूमिका[संपादित करें]

ऐतिहासिक रूप से कोलकाता भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के हर चरण में केन्द्रीय भूमिका में रहा है। भारतीया राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ साथ कई राजनैतिक एवं सांस्कृतिक संस्थानों जैसे "हिन्दू Archived 2023-01-20 at the वेबैक मशीन मेला" और क्रांतिकारी संगठन "युगांतर", "अनुशीलन" इत्यादी की स्थापना का गौरव इस शहर को हासिल है। प्रांभिक राष्ट्रवादी व्यक्तित्वों में अरविंद घोष, इंदिरा देवी चौधरानी, बिपिनचंद्र पाल का नाम प्रमुख है। आरंभिक राष्ट्रवादियों के प्रेरणा के केन्द्र बिन्दू बने रामकृष्ण परमहंस के शिष्य स्वामी विवेकानंद। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पहले अध्यक्ष बने श्री व्योमेश चंद्र बैनर्जी और स्वराज की वकालत करने वाले पहले व्यक्ति श्री सुरेन्द्रनाथ बैनर्जी भी कोलकाता से ही थे। १९ वी सदी के उत्तरार्द्ध और २० वीं शताब्दी के प्रारंभ में बांग्ला साहित्यकार बंकिमचंद्र चटर्जी ने बंगाली राष्ट्रवादियों को बहुत प्रभावित किया। इन्हीं का लिखा आनंदमठ में लिखा गीत वन्दे मातरम् आज भारत का राष्ट्र गीत है। सुभाषचंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज का गठन कर अंग्रेजो को काफी साँसत में रखा। इसके अलावा रवींद्रनाथ टैगोर का जन गण मन आज भारत का राष्ट्र गान हैं। सैकड़ों स्वाधीनता के सिपाही विभिन्न रूपों में इस शहर में मौजूद रहे हैं।

बाबू संस्कृति और बंगाली पुनर्जागरण[संपादित करें]

१९४५ में कोलकाता में हुगली नदी का दृष्य

ब्रिटिश शासन के दौरान जब कोलकाता एकीकृत भारत की राजधानी थी, कोलकाता को लंदन के बाद ब्रिटिश साम्राज्य का दूसरा सबसे बड़ा शहर माना जाता था। इस शहर की पहचान महलों का शहर, पूरब का मोती इत्यादि के रूप में थी। इसी दौरान बंगाल और खासकर कोलकाता में बाबू संस्कृति का विकास हुआ जो ब्रिटिश उदारवाद और बंगाली समाज के आंतरिक उथल पुथल का नतीजा थी जिसमे बंगाली जमींदारी प्रथा हिंदू धर्म के सामाजिक, राजनैतिक और नैतिक मूल्यों में उठापटक चल रही थी। यह इन्हीं द्वंदों का नतीजा था कि अंग्रेजों के आधुनिक शैक्षणिक संस्थानों में पढे कुछ लोगों ने बंगाल के समाज में सुधारवादी बहस को जन्म दिया। मूल रूप से "बाबू" उन लोगों को कहा जाता था जो पश्चिमी ढंग की शिक्षा पाकर भारतीय मूल्यों को हिकारत की दृष्टि से देखते थे और खुद को ज्यादा से ज्याद पश्चिमी रंग ढंग में ढालने की कोशिश करते थे। लेकिन लाख कोशिशों के बावज़ूद जब अंग्रेजों के बीच जब उनकी अस्वीकार्यता बनी रही तो बाद में इसके सकारत्म परिणाम भी आये, इसी वर्ग के कुछ लोगो ने नयी बहसों की शुरुआत की जो बंगाल के पुनर्जागरण के नाम से जाना जाता है। इसके तहत बंगाल में सामाजिक, राजनैतिक और धार्मिक सुधार के बहुत से अभिनव प्रयास हुये और बांग्ला साहित्य ने नयी ऊँचाइयों को छुआ जिसको बहुत तेजी से अन्य भारतीय समुदायों ने भी अपनाया।

आधुनिक कोलकाता[संपादित करें]

कोलकाता भारत की आजादी और उसके कुछ समय बाद तक एक समृद्ध शहर के रूप में स्थापित रहा लेकिन बाद के वर्षों में जनसँख्या के दवाब और मूलभूत सुविधाओं के आभाव में इस शहर की सेहत बिगड़ने लगी। १९६० और १९७० के दशकों में नक्सलवाद का एक सशक्त आंदोलन यहाँ उठ खड़ा हुआ जो बाद में देश के दूसरे क्षेत्रों में भी फैल गया। १९७७ के बाद से यह वामपंथी आंदोलन के गढ के रूप में स्थापित हुआ और तब से इस राज्य में भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी का बोलबाला है।

अर्थ-व्यवस्था[संपादित करें]

क‘ओग्नीज़ैन्ट टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस, इमारत, सॉल्ट लेक सैक्टर ५, इलेक्ट्रॉनिक्स कॉम्प्लेक्स

कोलकाता पूर्वी भारत एवं पूर्वोत्तर राज्यों का प्रधान व्यापारिक, वाणिज्यिक एवं वित्तीय केन्द्र है। यहां कोलकाता स्टॉक एक्स्चेंज भी है, जो भारत का दूसरे नंबर का सबसे बड़ा स्टोक एक्स्चेंज है।[3] यहां प्रमुख वाणिज्यिक एवं सैन्य बंदरगाह भी है। इनके साथ ही इस क्षेत्र का एकमात्र अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा भी यहीं है। कभी भारत का मुख्य शहर रहे कोलकाता ने स्वतंत्रता पश्चात कुछ आरंभिक वर्षों में अन्वरत आर्थिक पतन को देखा। इसका मुख्य कारण राजनैतिक अस्थिरता एवं व्यापारिक यूनियनों का बढ़ना था।[4] १९६० के दशक से १९९० के मध्य दशक तक शहर की प्रगति गिरती ही गयी, जिसका कारण यहां बंद या यहां से स्थानांतरित होती फैक्ट्रियां और व्यापार थे।[4] इस वजह से पूंजी निवेश एवं संसाधनों की कमी उत्पन्न हुई, जो कि यहां की गिरती आर्थिक स्थिति के भरपूर सहायक कारक सिद्ध हुए।[5] भारतीय आर्थिक नीति के उदारीकरण की प्रक्रिया ने १९९० के दशक में शहर की भाग्यरेखा को नई दिशा दी। इसके बाद उत्पादन भी बढ़ा एवं बेकार श्रमिकों को भी काम मिला।[6] उदाहरणार्थ, यहां के सड़कों पर फेरीवाले लगभग ८७२२ करोड़ रुपये (२००५ के आंकड़ों के अनुसार) का व्यापार कर रहे थे।[7]

फ्लावर मार्किट में पुष्प विक्रेता

नगर की श्रमशक्ति में सरकारी एवं निजी कंपनियों के कर्मचारी एक बड़ा भाग बनाते हैं। यहां बड़ी संख्या में अकुशल एवं अर्ध-कुशल श्रमिक हैं, जिनके साथ अन्य कुशल कारीगर भी अच्छी संख्या में कार्यरत हैं। शहर की आर्थिक स्थिति के पुनरुत्थान में सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं का बड़ा हाथ रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र यहां प्रतिवर्ष लगभग ७०% की उन्नति कर रहा है, जो राष्ट्रीय औसत का दोगुना है। [8] हाल के वर्षों में यहां गृह-निर्माण एवं रियल एस्टेट क्षेत्र में भी निवेशक उमड़े हैं। इसका कारण एवं परिणाम शहर में कई नई परियोजनाओं का आरंभ होना है।[9] कोलकाता में कई बड़ी भारतीय निगमों की औद्योगिक इकाइयां स्थापित हैं, जिनके उत्पाद जूट से लेकर इलेक्ट्रॉनिक सामान तक हैं। कुछ उल्लेखनीय कंपनियां जिनके यहां मुख्यालय हैं, आईटीसी लिमिटेड, बाटा शूज़, बिरला कॉर्पोरेशन, कोल इंडिया लिमिटेड, दामोदर वैली कॉर्पोरेशन, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक और इलाहाबाद बैंक, आदि प्रमुख हैं। हाल ही में भारत सरकार की पूर्व-देखो (लुक ईस्ट) नीति, नाथू ला दर्रा के सिक्किम में खोले जाने एवं चीन तथा दक्षिण पूर्व एशियाई देशों से व्यापारिक संबंध बढ़ाने की नीतियों के कारण यहां कई देशों ने भरतीय बाजार में पदार्पण किया है। इसके चलते कोलकाता में निवेश होने से यहां की अर्थ-व्यवस्था को अप-थर्स्ट मिला है।[10][11]

जलवायु[संपादित करें]

कोलकाता
जलवायु सारणी (व्याख्या)
माजूजुसिदि
 
 
16.8
 
27
14
 
 
22.9
 
30
17
 
 
32.8
 
34
22
 
 
47.7
 
36
25
 
 
101.7
 
36
26
 
 
259.9
 
34
27
 
 
331.8
 
32
26
 
 
328.8
 
32
26
 
 
295.9
 
32
26
 
 
151.3
 
32
24
 
 
17.2
 
30
19
 
 
7.4
 
27
14
औसत अधिकतम एवं न्यूनतम तापमान (°से.)
कुल वर्षा (मि.मी)
स्रोत: IMD
कोलकाता में मानसून के बादल

कोलकाता में उष्णकटिबंधीय आर्द्र-शुष्क जलवायु रहती है। यह कोप्पेन जलवायु वर्गीकरण के अनुसार Aw श्रेणी में आती है। वार्षिक औसत तापमान २६.८ °से. (८० °फ़ै.); मासिक औसत तापमान १९ °से. से ३० °से. (67 °फ़ै. से ८६ °फ़ै.) रहता है।[12] ग्रीष्म ऋतु गर्म एवं आर्द्र रहती है, जिसमें न्यूनतम तापमान ३० डिग्री के दशक में रहता है तथा शुष्क कालों में यह ४० °से (104 °फ़ै) को भी पार कर जाता है। ऐसा मई और जून माह में होता है।[12] शीत ऋतु ढाई माह तक ही रहती हैं; जिसमें कई बार न्यूनतम तापमान १२ °से – १२ °से. (54 °फ़ै. – ५७ °फ़ै.) तक जाता है। ऐसा दिसम्बर से फरवरी के बीच होता है। उच्चतम अंकित तापमान ४९°से.  °से. (११३ °फ़ै.) एवं न्यूनतम ५ °से. (४१ °फ़ै.) किया गया है।[12] प्रायः ग्रीष्मकाल के आरंभ में धूल भरी आंधियां आती हैं, जिनके पीछे तड़ित सहित तेज वर्षाएं शहर को भिगोती हैं, एवं शहर को भीषण गर्मी से राहत दिलाती हैं। ये वर्षाएं काल बैसाखी (কালবৈশাখী) कहलाती हैं।[13]

दक्षिण-पश्चिम मानसून की बंगाल की खाड़ी वाली शाखा द्वारा लाई गई वर्षाएं[14] शहर को जून अंत से सितंबर के बीच यहां की अधिकतम वार्षिक वर्षा १५८२ मि.मी. (६२.३ इंच) दिलाती हैं। मानसून काल में अधिकतम वर्षाएं अगस्त में होती हैं जो (३०६ मि.मी.) तक जाती हैं। शहर में वार्षिक २,५२८ घंटे खुली धूप उपलब्ध रहती है, जिसमें अधिकतम दैनिक अंतराल मार्च के महीने में होता है।[15] कोलकाता की प्रधान समस्या प्रदूषण की है। यहां का सस्पेन्डेड पर्टिकुलेट मैटर स्तर भारत के अन्य प्रधान शहरों की अपेक्षा बहुत है,[16][17] जो गहरे स्मॉग और धुंध का कारण बनता है। शहर में भीषण प्रदूषण ने प्रदूषण-संबंधी श्वास रोगों जैसे फेफड़ों के कैंसर को बढावा दिया है।[18]

शहरी संरचना[संपादित करें]

कोलकाता का विहंगम दृश्य

कोलकाता नगर निगम (के.एम.सी) के अनुरक्षन में कोलकाता शहर का क्षेत्रफल 185 कि॰मी2 (71 वर्ग मील) है।[19] हालांकि कोलकाता की शहरी बसावट काफ़ी बढ़ी है, जो २००६ में कोलकाता शहरी क्षेत्र 1,750 कि॰मी2 (676 वर्ग मील) में फैली है।[19] इसमें १५७ पिन क्षेत्र है।[20] यहां की शहरी बसावट के क्षेत्रों को औपचारिक रूप से ३८ स्थानीय नगर पालिकाओं के अधीन रखा गया है। इन क्षेत्रों में ७२ शहर, ५२७ कस्बे एवं ग्रामीण क्षेत्र हैं।[19] कोलकाता महानगरीय जिले के उपनगरीय क्षेत्रों में उत्तर २४ परगना, दक्षिण २४ परगना, हावड़ा एवं नदिया आते हैं।

मुख्य शहर की पूर्व-पश्चिम चौड़ाई काफ़ी कम है, जो पश्चिम में हुगली नदी से पूर्वी मेट्रोपॉलिटन बायपास तक मात्र 5 कि॰मी॰ (3.1 मील)–6 कि॰मी॰ (3.7 मील) होती है।[21] शहर के उत्तर-दक्षिणी विस्तार को मुख्यतः उत्तरी, मध्य एवं दक्षिणी भाग में बांटा जा सकता है। उत्तरी भाग सबसे पुराने भागों में से एक है, जिसमें १९वीं शताब्दी के स्थापत्य और संकरे गली कूचे दिखाई देते हैं। स्वतंत्रता उपरांत अधिकतम दक्षिणी भाग ने प्रगति की है और यहां कई पॉश एवं समृद्ध क्षेत्र हैं जैसे बॉलीगंज, भोवानीपुर, अलीपुर, न्यू अलीपुर, जोधपुर पार्क, आदि। शहर के उत्तर-पूर्वी ओर सॉल्ट लेक सिटी (बिधाननगर) क्षेत्र यहां का व्यवस्थित क्षेत्र है। वहीं निकट ही राजारहाट भी व्यवस्थित एवं योजनाबद्ध क्षेत्र विकसित हो रहा है, जिसे न्यू टाउन भी कहते हैं।

मध्य कोलकाता में बी.बी.डीबाग के पास सेंट्रल बिज़नेस जिला है। यहां बंगाल सरकार सचिवालय, प्रधान डाकघर, उच्च न्यायालय, लाल बाज़ार पुलिस मुख्यालय आदि कई सरकारी इमारतें तथा निजि कार्यालय स्थापित हैं। मैदान कोलकाता के हृदय क्षेत्र में विस्तृत खुला मैदान है, जहां बहुत सी क्रीड़ा और विशाल जन-सम्मेलन आदि आयोजित हुआ करते हैं। बहुत सी कंपनियों ने अपने कार्यालय पार्क स्ट्रीट के दक्षिणी क्षेत्र में बनाये हैं, जिसके कारण यह भी द्वितीयक सेंट्रल बिज़नेस जिला बनता जा रहा है।

भूगोल[संपादित करें]

हुगली नदी की पृष्ठभूमि में विद्यासागर सेतु

कोलकाता पूर्वी भारत में 22°34′22″N 88°21′50″E / 22.57278°N 88.36389°E / 22.57278; 88.36389 निर्देशांक पर गंगा डेल्टा क्षेत्र में 1.5 मी॰ (5 फीट) से 9 मी॰ (30 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है।[22] शहर हुगली नदी के किनारे उत्तर-दक्षिण रैखिक फैला हुआ है। शहर का बहुत सा भाग एक वृहत नम-भूमि क्षेत्र था, जिसे भराव कर शहर की बढ़ती आबादी को बसाया गया है।[23] शेष बची नम-भूमि जिसे अब ईस्ट कैल्कटा वेटलैंड्स कहते हैं, को रामसर सम्मेलन के अन्तर्गत अन्तर्राष्ट्रीय महत्त्व की नम-भूमि घोषित किया गया है।[24]

अन्य गांगेय क्षेत्रों की तरह यहां की मिट्टी भी उपजाऊ जलोढ़ (अल्यूवियल) ही है। मिट्टी की ऊपरी पर्त के नीचे चतुर्धात्विक अवसाद, मिट्टी, गाद, एवं रेत की विभिन्न श्रेणियां अतथा बजरी आदि है। ये कण मिट्टी की दो पर्तों के बीच बिछे हुए हैं। इनमें से निचली पर्त 250 मी॰ (820 फीट) तथा 650 मी॰ (2,133 फीट) और ऊपरी पर्त 10 मी॰ (33 फीट) तथा 40 मी॰ (131 फीट) की मोटाई की है।[25] भारतीय मानक ब्यूरो के अनुसार, शहर भूकंप प्रभावी क्षेत्र श्रेणी-तृतीय में आता है। यह श्रेणियां १-४ के बीच बढ़ते क्रम में होती हैं।[26] यूएनडीपी रिपोर्ट के अनुसार वायु और चक्रवात के लिए यह अत्योच्च क्षति जोखिम क्षेत्र में आता है।[26]

सेवाएं एवं मीडिया[संपादित करें]

टाटा कम्युनिकेशंस का वीएसएनएल टावर, शहर का एक प्रधान टेलीकॉम सेवा प्रदाता

के एम सी शहर की जलापूर्ति हुगली नदी से प्राप्त जल से करता है। जल को उत्तर २४ परगना के निकट पाल्टा जल पंपिंग स्टेशन में शोधित किया जाता है। शहर का दैनिक अवशिष्ट लगभग २५०० टन धापा के निकट शहर के पूर्वी क्षेत्र में डम्प किया जाता है। इस डंपिंग स्थल पर कृषि को बढ़ावा दिया जाता है, जिससे कि यह अवशिष्ट और शहर का मल (सीवर) प्राकृतिक तौर पर पुनर्चक्रित हो पाये।[27] शहर के कुछ भागों में सीवर द्वारा मल निकास का अभाव होने से अस्वास्थवर्धक मल निकास को बढ़ावा मिलता है।[15] शहर की विद्युत आपूर्ति कैल्कटा इलेक्ट्रिक सप्लाई कार्पोरेशन (सी.ई.एस.सी) द्वारा शहर क्षेत्र में, तथा पश्चिम बंगाल राज्य विद्युत बोर्ड द्वारा उपनगरीय क्षेत्रों में की जाती है। १९९० के दशक के मध्य तक विद्युत आपूर्ति में अत्यधिक व्यवधान एवं कटौती की समस्या थी; जो कि अब इसकी दशा में काफ़ी सुधार हुआ है, एवं अब कटौती बहुत ही कम की जाती है। शहर में २० अग्नि-शमन स्टेशन पश्चिम बंगाल अग्नि-शमन सेवा के अन्तर्गत वार्षिक औसत ७५०० अग्निकांडों को शमन करते हैं।[28]

कोलकाता में सरकारी बी एस एन एल तथा निजी उपक्रम जैसे वोडाफ़ोन, एयरटेल, रिलायंस कम्युनिकेशंस, टाटा इंडिकॉम आदि दूरभाष एवं मोबाइल सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। शहर में जी एस एम और सी डी एम ए, दोनों ही प्रकार की सेलुलर सेवाएं उपलब्ध हैं। यहां बी एस एन एल, टाटा कम्युनिकेशंस, एयरटेल तथा रिलायंस कम्युनिकेशंस द्वारा ब्रॉडबैंड सेवा भी उपलब्ध है। इनके अलावा सिफ़ी और एलायंस भी यह सेवा उपलब्ध कराते हैं।

बहुत से बांग्ला समाचार-पत्र यहां प्रकाशित होते हैं, जिनमें आनंद बाजार पत्रिका, आजकल, बर्तमान, संगबाद प्रतिदिन, गणशक्ति तथा दैनिक स्टेट्स्मैन प्रमुख हैं। अंग्रेज़ी समाचार पत्रों में द टेलीग्राफ, द स्टेट्स्मैन, एशियन एज, हिन्दुस्तान टाइम्स एवं टाइम्स ऑफ इंडिया प्रमुख हैं। कुछ मुख्य सामयिक पत्रिकाओं में से देश, सनंद, उनिश कुरी, किंड्ल, आनंदलोक तथा आनंद मेला प्रमुख हैं। पूर्वी भारत में सबसे बड़े व्यापारिक केन्द्र होने से कई वित्तीय दैनिक जैसे इकॉनोमिक टाइम्स, फाइनेंशियल एक्स्प्रेस तथा बिज़नेस स्टैन्डर्ड आदि के पर्याप्त पाठक हैं।[29] यहां के अन्य भाषाओं के अल्पसंख्यकों के लिए हिन्दी, गुजराती, उड़िया, उर्दु, पंजाबी तथा चीनी पत्र भी प्रकाशित होते हैं।

यहां सरकारी रेडियो स्टेशन ऑल इंडिया रेडियो से कई ए एम रेडियो चैनल प्रसारित करता है। कोलकाता में ग्यारह एफ़ एम रेडियो स्टेशन प्रसारित होते हैं। इनमें से दो ऑल इंडिया रेडियो के हैं। सरकारी टीवी प्रसारणकर्ता दूरदर्शन से दो टेरेस्ट्रियल चैनल प्रसारित किये जाते हैं। चार बहु-प्रणाली ऑपरेटार (एम एस ओ) द्वारा बांग्ला, हिन्दी, अंग्रेज़ी व अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के चैनल केबल टीवी द्वारा दिखाए जाते हैं। बांग्ला उपग्रह चैनलों में एबीपी आनंद, २४ घंटा, कोलकाता टीवी, चैनल १० तथा तारा न्यूज़ प्रमुख हैं।

यातायात[संपादित करें]

वी.आई.पी मार्ग, शहर को हवाई अड्डे से जोड़ता एक व्यस्त मार्ग
भारत में एकमात्र कोलकाता शहर में ट्राम चलती हैं।
विद्यासागर सेतु कोलकाता को हावड़ा से जोड़ता है
कोलकाता शहर (रात में)

कोलकाता में जन यातायात कोलकाता उपनगरीय रेलवे, कोलकाता मेट्रो, ट्राम और बसों द्वारा उपलब्ध है। व्यापक उपनगरीय जाल सुदूर उपनगरीय क्षेत्रों तक फैला हुआ है। भारतीय रेल द्वारा संचालित कोलकाता मेट्रो भारत में सबसे पुरानी भूमिगत यातायात प्रणाली है।[30] ये शहर में उत्तर से दक्षिण दिशा में हुगली नदी के समानांतर शहर की लंबाई को १६.४५ कि.मी. में नापती है। यहां के अधिकांश लोगों द्वारा बसों को प्राथमिक तौर पर यातायात के लिए प्रयोग किया जाता है। यहां सरकारी एवं निजी ऑपरेटरों द्वारा बसें संचालित हैं। भारत में कोलकाता एकमात्र शहर है, जहाँ ट्राम सेवा उपलब्ध है। ट्राम सेवा कैल्कटा ट्रामवेज़ कंपनी द्वारा संचालित है।[31] ट्राम मंद-गति चालित यातायात है, व शहर के कुछ ही क्षेत्रों में सीमित है। मानसून के समय भारी वर्षा के चलते कई बार लोक-यातायात में व्यवधान पड़ता है।[32][33]

भाड़े पर उपलब्ध यांत्रिक यातायात में पीली मीटर-टैक्सी और ऑटो-रिक्शॉ हैं। कोलकाता में लगभग सभी पीली टैक्सियाँ एम्बेसैडर ही हैं। कोलकाता के अलावा अन्य शहरों में अधिकतर टाटा इंडिका या फिएट ही टैसी के रूप में चलती हैं। शहर के कुछ क्षेत्रों में साइकिल-रिक्शा और हाथ-चालित रिक्शा अभी भी स्थानीय छोटी दूरियों के लिए प्रचालन में हैं। अन्य शहरों की अपेक्षा यहां निजी वाहन काफ़ी कम हैं। ऐसा अनेक प्रकारों के लोक यातायात की अधिकता के कारण है।[34] हालांकि शहर ने निजी वाहनों के पंजीकरण में अच्छी बड़ोत्तरी देखी है। वर्ष २००२ के आंकड़ों के अनुसार पिछले सात वर्षों में वाहनों की संख्या में ४४% की बढ़त दिखी है।[35] शहर के जनसंख्या घनत्व की अपेक्षा सड़क भूमि मात्र ६% है, जहाँ दिल्ली में यह २३% और मुंबई में १७% है। यही यातायात जाम का मुख्य कारण है।[36] इस दिशा में कोलकाता मेट्रो रेलवे तथा बहुत से नये फ्लाई-ओवरों तथा नयी सड़कों के निर्मान ने शहर को काफ़ी राहत दी है।

कोलकाता में दो मुख्य लंबी दूरियों की गाड़ियों वाले रेलवे स्टेशन हैं- हावड़ा जंक्शन और सियालदह जंक्शनकोलकाता रेलवे स्टेशन नाम से एक नया स्टेशन २००६ में बनाया गया है।[37] कोलकाता शहर भारतीय रेलवे के दो मंडलों का मुख्यालय है – पूर्वी रेलवे और दक्षिण-पूर्व रेलवे[38]

कोलकाता मेट्रो रेल का मानचित्र

शहर के विमान संपर्क हेतु नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा दम दम में स्थित है। यह विमानक्षेत्र शहर के उत्तरी छोर पर है व यहां से दोनों, अन्तर्देशीय और अन्तर्राष्ट्रीय उड़ानें चलती हैं। यह नगर पूर्वी भारत का एक प्रधान बंदरगाह है। कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट ही कोलकाता पत्तन और हल्दिया पत्तन का प्रबंधन करता है।[39] यहां से अंडमान निकोबार द्वीपसमूह में पोर्ट ब्लेयर के लिये यात्री जहाज और भारत के अन्य बंदरगाहों तथा विदेशों के लिए भारतीय शिपिंग निगम के माल-जहाज चलते हैं। यहीं से कोलकाता के द्वि-शहर हावड़ा के लिए फेरी-सेवा भी चलती है। कोलकाता में दो बड़े रेलवे स्टेशन हैं जिनमे एक हावड़ा और दूसरा सियालदह में है, हावड़ा तुलनात्मक रूप से ज्यादा बड़ा स्टेशन है जबकि सियालदह से स्थानीय सेवाएँ ज्यादा हैं। शहर में उत्तर में दमदम में नेताजी सुभाषचंद्र बोस अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा जो शहर को देश विदेश से जोड़ता है। शहर से सीधे ढाका यांगून, बैंकाक लंदन पारो सहित मध्य पूर्व एशिया के कुछ शहर जुड़े हुये हैं। कोलकाता भारतीय उपमहाद्वीप का एकमात्र ऐसा शहर है जहाँ ट्राम यातायात का प्रचलन है। इसके अलावा यहाँ कोलकाता मेट्रो की भूमिगत रेल सेवा भी उपलब्ध है। गंगा की शाखा हुगली में कहीं कहीं स्टीमर यातायात की सुविधा भी उपलब्ध है। सड़कों पर नीजी बसों के साथ साथ पश्चिम बंगाल यातायात परिवहन निगम की भी काफी बसें चलती हैं। शहर की सड़कों पे काली-पीली टैक्सियाँ चलती हैं। धुंएँ, धूल और प्रदूषण से राहत शहर के किसी किसी इलाके में ही मिलती है।

शिक्षा[संपादित करें]

कोलकाता में कोलकाता विश्वविद्यालय समेत कई नामचीन शैक्षिक संस्थान एवं हमाविद्यालय हैं यहाँ चार मेडिकल कालेज भी हैं। अस्सी के दशकों के बाद कलकत्ता की शैक्षिक हैसियत में गिरावट हुई लेकिन कोलकाता अब भी शैक्षिक माहौल के लिये जाना जाता है। कोलकाता विश्वविद्यालय, जादवपुर विश्वविद्यालय, रवीन्द्र भारती विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल राष्ट्रीय न्यायिक विज्ञान विश्वविद्यालय, नेताजी सुभाष मुक्त विश्वविद्यालय, बंगाल अभियांत्रिकी एवं विज्ञान विश्वविद्यालय,पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल पशुपालन एवं मतस्य पालन विज्ञान विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल तकनीकी विश्वविद्यालय कोलकाता के विभिन्न भागों में स्थित हैं। इन विश्वविद्यालयों से सैकड़ो महाविद्यालय संबद्ध एवं अंगीभूत इकाई के रूप में काम करते हैं। एशियाटिक सोसायटी, भारतीय साँख्यिकी संस्थान, भारतीय प्रबंधन संस्थान, मेघनाथ साहा आण्विक भौतिकी संस्थान, सत्यजीत रे फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान राष्ट्रीय महत्व के संस्थान हैं। अन्य उल्लेखनीय संस्थानों मेंरामकृष्ण मिशन संस्कृति संस्थान, एंथ्रोपोलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, बोस संस्थान, बोटैनिकल सर्वे ऑफ इंडिया, जियोलाजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इनफार्मेशन टेक्नालजी, राष्ट्रीय होमियोपैथी संस्थान, श्रीरामपुर कालेज, प्रेसीडेंसी कालेज, स्काटिश चर्च कालेज प्रमुख हैं।

जनसांख्यिकी[संपादित करें]

कोलकाता निवासियों को कलकतिया कहा जाता है। वर्ष २००१ की जनगणनानुसार कोलकाता शहर की कुल जनसंख्या ४,५८०,५४४ है, जबकि यहां के सभी शहरी क्षेत्रों को मिलाकर १३,२१६,५४६ है। २००९ वर्ष की परियोजनाओं के वर्तमान अनुमान के अनुसार शहर की जनसंख्या ५,०८०,५१९ है।[41] यहां का लिंग अनुपात ९२८ स्त्रियां प्रति १०० पुरुष है।[42] – जो कि राष्ट्रीय औसत से कम है। इसका कारण ग्रामीण क्षेत्रों से काम के लिए आने वाले पुरुष हैं। शहर की साक्षरता दर ८१% है[43] जो राष्ट्रीय औसत ८०% से अधिक है।[44] कोलकाता नगर निगम के क्शेत्रों की पंजीकृत विकार दर ४.१% है, जो भारत के दस लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों में न्यूनतम है।[45]

बंगाली लोग ही कोलकाता की जनसंख्या का अधिकांश भाग बनाते हैं (५५%), जिनके अलावा मारवाड़ी और बिहारी लोग यहां अल्पसंख्यकों का बड़ा भाग (२०%) हैं।[46] कोलकाता में अल्पसंख्यक समुदायों में चीनी, तमिल, नेपाली, तेलुगु, असमी, गुजराती, आंग्ल-भारतीय, उड़िया और भोजपुरी समुदाय आते हैं।

जनगणना के अनुसार कोलकाता की जनसंख्या का ८०% भाग हिन्दू हैं। शेष १८% मुस्लिम, १% ईसाई और १% जैन लोग हैं। अन्य अल्पसंख्यक समुदायों में सिख, बौद्ध, यहूदी और पारसी समुदाय आते हैं।[47] नगर की जनसंख्या का एक-तिहाई भाग यानि १५ लाख लोग २,०११ पंजीकृत क्षेत्रों और कालोनियों तथा ३,५०० अनाधिकृत क्षेत्रों और झुग्गियों में वास करते हैं।[48]

सन २००४ में भारत के ३५ महानगरों और बड़े शहरों में हुए कुल विशिष्ट और स्थानीय विधि अपराधों का ६७.६% रिपोर्ट हुए थे।[49] कोलकाता जिला पुलिस ने वर्ष २००४ में आई.पी.सी के अंतर्गत १०,५७५ मामले दर्ज किए थे, जो देश में दसवें स्थान पर सबसे अधिक थे।[50] २००६ में शहर की अपराध दर ७१ प्रति १ लाख रही, जो राष्ट्रीय अपराध दर १६७.७ से बहुत कम है और सभी बड़े शहरों से न्यूनतम है।[51] कोलकाता का सोनागाची क्षेत्र १०,००० वेश्याओं सहित,[52] एशिया का सबसे बड़ा रेड-लाइट क्षेत्र है।

संस्कृति[संपादित करें]

दक्षिणेश्वर काली मंदिर, कोलकाता
टीपू सुल्तान मस्जिद
कोलकाता पूर्वी-भारत की संस्कृति का केन्द्र है। यहां का राष्ट्रीय पुस्तकालय, कोलकाता

कोलकाता को लंबे समय से अपने साहित्यिक, क्रांतिकारी और कलात्मक धरोहरों के लिए जाना जाता है। भारत की पूर्व राजधानी रहने से यह स्थान आधुनिक भारत की साहित्यिक और कलात्मक सोच का जन्मस्थान बना। कोलकातावासियों के मानस पटल पर सदा से ही कला और साहित्य के लिए विशेष स्थान रहा है। यहां नई प्रतिभाको सदा प्रोत्साहन देने की क्षमता ने इस शहर को अत्यधिक सृजनात्मक ऊर्जा का शहर (सिटी ऑफ फ़्यूरियस क्रियेटिव एनर्जी) बना दिया है।[53] इन कारणों से ही कोलकाता को कभी कभी भारत की सांस्कृतिक राजधानी भी कह दिया जाता है, जो अतिश्योक्ति न होगी।

कोलकाता का एक खास अंग है पारा, यानि पास-पड़ोस के क्षेत्र। इनमें समुदाय की सशाक्त भावना होती है। प्रत्येक पारा में एक सामुदायिक केन्द्र, क्रीड़ा स्थल आदि होते हैं। लोगों में यहां फुर्सत के समय अड्डा (यानि आराम से बातें करना) में बैठक करने, चर्चाएं आदि में सामयिक मुद्दों पर बात करने की आदत हैं। ये आदत एक मुक्त-शैली बुद्धिगत वार्तालाप को उत्साहित करती है।[54]

कोलकाता में बहुत सी इमारतें गोथिक, बरोक, रोमन और इंडो-इस्लामिक स्थापत्य शैली की हैं। ब्रिटिश काल की कई इमारतें अच्छी तरह से संरक्षित हैं व अब धरोहर घोषित हैं, जबकि बहुत सी इमारतें ध्वंस के कगार पर भी हैं। १८१४ में बना भारतीय संग्रहालय एशिया का प्राचीनतम संग्रहालय है। यहां भारतीय इतिहास, प्राकृतिक इतिहास और भारतीय कला का विशाल और अद्भुत संग्रह है।[55] विक्टोरिया मेमोरियल कोलकाता का प्रमुख दर्शनीय स्थल है। यहां के संग्रहालय में शहर का इतिहास अभिलेखित है। यहां का भारतीय राष्ट्रीय पुस्तकालय भारत का एक मुख्य और बड़ा पुस्तकालय है। फाइन आर्ट्स अकादमी और कई अन्य कला दीर्घाएं नियमित कला-प्रदर्शनियां आयोजित करती रहती हैं।

शहर में नाटकों आदि की परंपरा जात्रा, थियेटर और सामूहिक थियेटर के रूप में जीवित है। यहां हिन्दी चलचित्र भी उतना ही लोकप्रिय है, जितना कि [[बांग्ला चलचित्र, जिसे टॉलीवुड नाम दिया गया है। यहां का फिल्म उद्योग टॉलीगंज में स्थित है। यहां के लंबे फिल्म-निर्माण की देन है प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक जैसे सत्यजीत राय, मृणाल सेन, तपन सिन्हा और ऋत्विक घटक। इनके समकालीन क्षेत्रीय निर्देशक हैं, अपर्णा सेन और रितुपर्णो घोष

कोलकाता के खानपान के मुख्य घटक हैं चावल और माछेर झोल,[56] और संग में रॉसोगुल्ला और मिष्टि दोइ डेज़र्ट के रूप में। बंगाली लोगों के प्रमुख मछली आधारित व्यंजनों में हिल्सा व्यंजन पसंदीदा हैं। अल्पाहार में बेगुनी (बैंगन भाजा), काठी रोल, फुचका और चाइना टाउन के चीनी व्यंजन शहर के पूर्वी भाग में अधिक लोकप्रिय हैं।[57][58]

बंगाली महिलायें सामान्यतया साड़ी ही पहनती हैं। इनकी घरेलू तौर पर साड़ी पहनने की एक विशेष शैली होती है, जो खास बंगाली पहचान है। साड़ियों में यहां की बंगाली सूती और रेशमी विश्व-साड़ियां प्रसिद्ध हैं, जिन्हें तांत नाम दिया गया है। पुरुषों में प्रायः पश्चिमी पेन्ट-शर्ट ही चलते हैं, किंतु त्यौहारों, मेल-मिलाप आदि के अवसरों पर सूती और रेशमी तांत के कुर्ते धोती के साथ पहने जाते हैं। यहां पुरुषों में भी धोती का छोर हाथ में पकड़ कर चलने का चलन रहा है, जो एक खास बंगाली पहचान देता है। धोती अधिकांशातः श्वेत वर्ण की ही होती है।

दुर्गा पूजा कोलकाता का सबसे महत्त्वपूर्ण और चकाचौंध वाला उत्सव है।[59] यह त्यौहार प्रायः अक्टूबर के माह में आता है, पर हर चौथे वर्ष सितंबर में भी आ सकता है। अन्य उल्लेखनीय त्यौहारों में जगद्धात्री पूजा, पोइला बैसाख, सरस्वती पूजा, रथ यात्रा, पौष पॉर्बो, दीवाली, होली, क्रिस्मस, ईद, आदि आते हैं। सांस्कृतिक उत्सवों में कोलकाता पुस्तक मेला, कोलकाता फिल्मोत्सव, डोवर लेन संगीत उत्सव और नेशनल थियेटर फेस्टिवल आते हैं।

नगर में भारतीय शास्त्रीय संगीत और बंगाली लोक संगीत को भी सराहा जाता रहा है। उन्नीसवीं और बीसवीं शताब्दी से ही बंगाली साहित्य का आधुनिकिकरण हो चुका है। यह आधुनिक साहित्यकारों की रचनाओं में झलकता है, जैसे बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय, माइकल मधुसूदन दत्त, रविंद्रनाथ ठाकुर, काजी नज़रुल इस्लाम और शरतचंद्र चट्टोपाध्याय, आदि। इन साहित्यकारों द्वारा तय की गयी उच्च श्रेणी की साहित्य परंपरा को जीबनानंद दास, बिभूतिभूषण बंधोपाध्याय, ताराशंकर बंधोपाध्याय, माणिक बंदोपाध्याय, आशापूर्णा देवी, शिशिरेन्दु मुखोपाध्याय, बुद्धदेव गुहा, महाश्वेता देवी, समरेश मजूमदार, संजीव चट्टोपाध्याय और सुनील गंगोपाध्याय ने आगे बढ़ाया है।

साठ के दशक में भुखी पीढी (हंगरी जेनरेशन) नामके एक साहित्यिक अंदोलनकारीयों का आगमन हुया जिसके सदस्यों ने पुरे कोलकाता शहर को अपने करतुतों और लेखन के जरिये हिला दिया था। उसके चर्चे विदेशों तक जा पंहुचा था। उस अंदोलन के सदस्यों में प्रधान थे मलय रायचौधुरी, सुबिमल बसाकदेबी राय, समीर रायचौधुरी, फालगुनि राय, अनिल करनजय, बासुदेब दाशगुप्ता, त्रिदिब मित्रा, शक्ति चट्टोपध्याय प्रमुख हस्तियां।

१९९० के आरंभिक दशक से ही भारत में जैज़ और रॉक संगीत का उद्भव हुआ था। इस शाइली से जुड़े कई बांग्ला बैण्ड हैं, जिसे जीबोनमुखी गान कहा जाता है। इन बैंडों में चंद्रबिंदु, कैक्टस, इन्सोम्निया, फॉसिल्स और लक्खीचरा आदि कुछ हैं। इनसे जुड़े कलाकारों में कबीर सुमन, नचिकेता, अंजना दत्त, आदि हैं।

स्मारक एवं दर्शनीय स्थल[संपादित करें]

मैदान और फोर्ट विलियम, हुगली नदी के समीप भारत के सबसे बड़े पार्कों में से एक है। यह 3 वर्ग कि॰मी॰ के क्षेत्र में फैला है। मैदान के पश्चिम में फोर्ट विलियम है। चूंकि फोर्ट विलियम को अब भारतीय सेना के लिए उपयोग में लाया जाता है यहां प्रवेश करने के लिए विशेष अनुमति लेनी पड़ती है। ईडन गार्डन्स मेंएक छोटे से तालाब में बर्मा का पेगोडा स्थापित किया गया है, जो इस गार्डन का विशेष आकर्षण है। यह स्थान स्थानीय जनता में भी लोकप्रिय है। विक्टोरिया मेमोरियल, १906-2१ के बीच निर्मित यह स्मारक रानी विक्टोरिया को समर्पित है। इस स्मारक में शिल्पकला का सुंदर मिश्रण है। इसके मुगल शैली के गुंबदों में सारसेनिक और पुनर्जागरण काल की शैलियां दिखाई पड़ती हैं। मेमोरियल में एक शानदार संग्रहालय है, जहां रानी के पियानो और स्टडी-डेस्क सहित 3000 से अधिक वस्तुएं प्रदर्शित की गई हैं। यह रोजाना प्रात: १0.00 बजे से सायं 4.30 बजे तक खुलता है, सोमवार को यह बंद रहता है। सेंट पॉल कैथेड्रल चर्च शिल्पकला का अनूठा उदाहरण है, इसकी रंगीन कांच की खिड़कियां, भित्तिचित्र, ग्रांड-ऑल्टर, एक गॉथिक टावर दर्शनीय हैं। यह रोजाना प्रात: 9.00 बजे से दोपहर तक और सायं 3.00 बजे से 6.00 बजे तक खुलता है। नाखोदा मस्जिद लाल पत्थर से बनी इस विशाल मस्जिद का निर्माण १926 में हुआ था, यहां १0,000 लोग आ सकते हैं। मार्बल पैलेस, एम जी रोड पर स्थित आप इस पैलेस की समृद्धता देख सकते हैं। १800 ई. में यह पैलेस एक अमीर बंगाली जमींदार का आवास था। यहां कुछ महत्वपूर्ण प्रतिमाएं और पेंटिंग हैं। सुंदर झूमर, यूरोपियन एंटीक, वेनेटियन ग्लास, पुराने पियानो और चीन के बने नीले गुलदान आपको उस समय के अमीरों की जीवनशैली की झलक देंगे। पारसनाथ जैन मंदिर, १867 में बना यह मंदिर वेनेटियन ग्लास मोजेक, पेरिस के झूमरों और ब्रूसेल्स, सोने का मुलम्मा चढ़ा गुंबद, रंगीन शीशों वाली खिड़कियां और दर्पण लगे खंबों से सजा है। यह रोजाना प्रात: 6.00 बजे से दोपहर तक और सायं 3.00 बजे से 7.00 बजे तक खुलता है। बेलूर मठ, बेलूर मठ रामकृष्ण मिशन का मुख्यालय है, इसकी स्थापना १899 में स्वामी विवेकानंद ने की थी, जो रामकृष्ण के शिष्य थे। यहां १938 में बना मंदिर हिंदु, मुस्लिम और इसाईशैलियों का मिश्रण है। यह अक्टूबर से मार्च केदौरान प्रात: 6.30 बजे से ११.30 बजे तक और सायं 3.30 बजे से 6.00 बजे तक तथा अप्रैल से सितंबर तक प्रात: 6.30 बजे से ११.30 बजे तक और सायं 4.00 बजे से 7.00 बजे तक खुलता है। दक्षिणेश्वर काली मंदिर

दक्षिणेश्वर काली मंदिर.

हुगली नदी के पूर्वी तट पर स्थित यह मां काली का मंदिर है, जहां श्री रामकृष्ण परमहंस एक पुजारी थे और जहां उन्हें सभी धर्मों में एकता लाने की अनुभूति हुई। काली मंदिर सडर स्ट्रीट से 6 कि॰मी॰ दक्षिण में यह शानदार मंदिर कोलकाता की संरक्षक देवी काली को समर्पित है। काली का अर्थ है "काला"। काली की मूर्ति की जिह्वा खून से सनी है और यह नरमुंडों की माला पहने हुए है। काली, भगवान शिव की अर्धांगिनी, पार्वती का ही विनाशक रूप है। पुराने मंदिर के स्थान पर ही वर्तमान मंदिर १809 में बना था। यह प्रात: 3.00 बजे से रात्रि 8.00 बजे तक खुलता है। मदर टेरेसा होम्स इस स्थान की यात्रा आपकी कोलकाता यात्रा को एक नया आयाम देगी। काली मंदिर के निकट स्थित यह स्थान सैंकड़ों बेघरों और "गरीबों में से भी गरीब लोगों" का घर है - जो मदर टेरेसा को उद्धृत करता है। आप अपने अंशदान से जरुरतमंदों की मदद कर सकते हैं। बॉटनिकल गार्डन्स कई एकड़ में फैली हरियाली, पौधों की दुर्लभ प्रजातियां, सुंदर खिले फूल, शांत वातावरण...यहां प्रकृ ति के साथ शाम गुजारने का एक सही मौका है। नदी के पश्चिमी ओर स्थित इस गार्डन में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा बरगद का पेड़ है, जो १0,000 वर्ग मीटर में फैला है, इसकी लगभग 420 शाखाएं हैं।

भगिनी देश और उनका शहर[संपादित करें]

भगिनी शहर देश
लॉन्ग बीच साँचा:Country data संयुक्त राज्य
डैलास
ओडेसा  यूक्रेन
नैपल्स  इटली

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

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