काली

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search
काली
Kali Devi.jpg
संबंध महाविद्या, देवी
निवासस्थान शमशान
अस्त्र खप्पर मुण्ड – scimitar = मुण्डमाला
जीवनसाथी शिव
सवारी शव

काली हिन्दू धर्म की एक प्रमुख देवी हैं। यह सुन्दरी रूप वाली भगवती दुर्गा का काला और भयप्रद रूप है, जिसकी उत्पत्ति राक्षसों को मारने के लिये हुई थी। उनको ख़ासतौर पर बंगाल और असम[{उतराखंड}] राजराजेशवरी, धारी देवी आदि नामों पूजा जाता है। काली की व्युत्पत्ति काल अथवा समय से हुई है जो सबको अपना ग्रास बना लेता है। माँ का यह रूप है जो नाश करने वाला है पर यह रूप सिर्फ उनके लिए हैं जो दानवीय प्रकृति के हैं जिनमे कोई दयाभाव नहीं है। यह रूप बुराई से अच्छाई को जीत दिलवाने वाला है अत: माँ काली अच्छे मनुष्यों की शुभेच्छु है और पूजनीय है।इनको महाकाली भी कहते हैं।

अन्य अर्थ[संपादित करें]

बांग्ला में काली का एक और अर्थ होता है - स्याही या रोशनाई

मुख्य मंत्र[संपादित करें]

सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्ति-समन्विते।

भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तुते।।(दुर्गा सप्तशती)

काली को शाक्त परम्परा की दस महाविद्याओं में से एक भी माना जाता है।

रणचंडी[संपादित करें]

हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार शुम्भ और निशुम्भ दो भाई थे जो महर्षि कश्यप और दनु के पुत्र तथा नमुचि के भाई थे। देवीमहात्म्य में इनकी कथा वर्णित है।

इंद्र ने एक बार नमुचि को मार डाला। रुष्ट होकर शुंभ-निशुंभ ने उनसे इंद्रासन छीन लिया और शासन करने लगे। इसी बीच दुर्गा ने महिषासुर को मारा और ये दोनों उनसे प्रतिशोध लेने को उद्यत हुए। इन्होंने दुर्गा के सामने शर्त रखी कि वे या तो इनमें किसी एक से विवाह करें या मरने को तैयार हो जाऐं। दुर्गा ने कहा कि युद्ध में मुझे जो भी परास्त कर देगा, उसी से मैं विवाह कर लूँगी। इस पर दोनों से युद्ध हुआ और दोनों मारे गए।

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]