आदिशक्ति

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search

आदिशक्ति को सनातन धर्म में परब्रह्म की शक्ति अर्थात ब्रह्मांड की सबसे बढ़ी शक्ति के रूप में माना जाता है। यह शक्ति मूल निराकार है परंतु साकार सृष्टि की रचना के लिये सगुण रूप में परम देवी के रूप मे विद्यमान किया गया है । उन्हे ही आदिपराशक्ति की उपमा भी दी गयी है । उनसे ही अस्तित्व है और उन्ही से विनाश । जब कुछ नहीं था तब भी वो थी, आज सब कुछ है तब भी वो है, और जब कुछ भी नहीं होगा तब भी वही होगी । उनके अंदर समग्र ब्रह्मांड समाया हुआ है । और हर एक कण मे वे विद्यमान है। त्रिमूर्ति मे जो ऊर्जा है वो उन्ही से है। महादेव के साथ वे महाकाली के रूप मे है तो विष्णु के साथ वे लक्ष्मी के रूप मे, ब्रह्मा के साथ वे सरस्वती के रूप मे विद्यमान है। कभी वे शक्तिमान के साथ प्रकट होती है तो कभी स्वतंत्र रूप से। स्वतंत्र रूप से वो ही चंडिका, योगमाया और शाकम्भरी देवी है। वे समय से भी परे है। वेदों और पुराणों में आदिशक्ति का बहुत महात्मय बताया गया है। प्राचीन काल में भी देवी पूजा की प्रथा थी। महाकाली की भी पूजा का प्रचलन भी युगों से चला आ रहा है।