आदिशक्ति

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आदिशक्ति को पुराणों मे देवी के रूप मे विद्यमान किया गया है । उन्हे ही आदिपराशक्ति की उपमा भी दी गयी है । उनसे ही अस्तित्व है और उन्ही से विनाश । जब कुछ नहीं था तब भी वो थी, आज सब कुछ है तब भी वो है, और जब कुछ भी नहीं होगा तब भी वही होगी । उनके अंदर समग्र ब्रह्मांड समाया हुआ है । और हर एक कण मे वे विद्यमान है। त्रिमूर्ति मे जो ऊर्जा है वो उन्ही से है। महादेव के साथ वे महाकाली के रूप मे है तो नारायण के साथ वे लक्ष्मी के रूप मे, ब्रह्मा के साथ वे सरस्वती के रूप मे विद्यमान है। वे समय से भी परे है। वेदों और पुराणों मे आदिशक्ति का बहुत महात्मय बताया गया है। प्राचीन काल मे भी देवी पुजा की प्रथा थी। महाकाली की भी पूजा का प्रचलन भी युगों से चला आ रहा है।