दत्तात्रेय

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
भगवान दत्तात्रेय

भगवान शंकर का साक्षात रूप महाराज दत्तात्रेय में मिलता है और तीनो ईश्वरीय शक्तियों से समाहित महाराज दत्तात्रेय की आराधना बहुत ही सफ़ल और जल्दी से फ़ल देने वाली है, महाराज दत्तात्रेय आजन्म ब्रह्मचारी, अवधूत और दिगम्बर रहे थे, वे सर्वव्यापी है और किसी प्रकार के संकट में बहुत जल्दी से भक्त की सुध लेने वाले है, अगर मानसिक, या कर्म से या वाणी से महाराज दत्तात्रेय की उपासना की जाये तो भक्त किसी भी कठिनाई से बहुत जल्दी दूर हो जाते है।

दत्तात्रेय के अवतार[संपादित करें]

(1)भगवान श्रीपाद श्री वल्लभ (2)श्री स्वामी नरसिंह सरस्वती जी (3)श्री स्वामी समर्थ (अक्कलकोट) (4)माणिक प्रभु जी (5)सांई बाबा (शिर्डी) (6)श्री गजानन महाराज (शेँगाव) (7)श्री शंकर महाराज (धानकवाडी,पूना) (8)श्री भालचंद्र महाराज (सिंधुदुर्ग) (9)श्री धूनी वाले बाबूजी (खंण्डवा) भगवान दत्तात्रेय के पवित्र ग्रंथो में भगवान दत्त की अवतार लीला का वर्णन मिलता हैं श्री गुरु चरित्र में भगवान दत्त के दो अवतार श्रीपाद श्रीवल्लभ और गुरु स्वामी नरसिंह सरस्वती के अवतार और उनकी लीला का वर्णन है, इसके अलावा श्रीपाद वल्लभ चरित्रामृत नामक ग्रंथ में नरसिंह सरस्वती,स्वामी समर्थ अक्कलकोट,माणिक प्रभु,साँई बाबा,गजानन महाराज शेँगाव , आदि संतो के दत्तावतार होने के प्रमाण हैँ, इसके अलावा नाथ संप्रदाय और दत्त संप्रदाय में इन सभी सिद्ध संतो को भगवान दत्तात्रेय का अवतार माना जाता हैं सिद्ध नव नारायण नवनाथ भी गुरु दत्तात्रेय के ही अंश हैं ऐसा श्री दत्तात्रेय ग्रंथो में वर्णन मिलता हैं

क्षेत्र[संपादित करें]

दत्तसंप्रदाय प्रभाव महाराष्ट्र कर्नाटक में प्रभावशाली है।