पराशर ऋषि

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ऋगवेद; जिसमें अनेक सूक्त पराशर ऋषि के नाम है
"पराश्रणाति पापातीति पराशर:" अर्थात जो दर्शन स्‍मरण करने मात्र से ही समस्‍त पाप-ताप को छिन्‍न-भिन्‍न कर देते हैं वे ही पराशर हैं। इस प्रकार पराशर नाम का स्‍मरण करने मात्र से ही व्‍यक्ति पवित्र हो जाता है।
प्रणाम्यहम् महर्षि पराशर
अन्य उपयोगों के लिए पराशर (बहुविकल्पी) देखें।

पराशर ऋषि महर्षि वसिष्ठ के पौत्र, गोत्रप्रवर्तक, वैदिक सूक्तों के द्रष्टा और ग्रंथकार। राक्षस द्वारा मारे गए वसिष्ठ के पुत्र-शक्ति से इनका जन्म हुआ। बड़े होने पर माता अदृश्यंती से पिता की मृत्यु की बात ज्ञात होने पर राक्षसों के नाश के निमित्त इन्होंने राक्षस सत्र नामक यज्ञ शुरू किया जिसमें अनेक निरपराध राक्षस मारे जाने लगे। यह देखकर पुलस्त्य आदि ऋषियों ने उपदेश देकर इनकी राक्षसों के विनाश से निवृत्त किया और पुराण प्रवक्ता होने का वर दिया।[1][2]

तीर्थयात्रा में यमुना के तट पर मल्लाह की सुंदर कन्या परंतु मत्स्यगंध से युक्त सत्यवती को देखकर उससे प्रेम करने लगे। संपर्क से तुम्हारा कन्याभाव नष्ट न होगा और तुम्हारे शरीर की दुर्गंध दूर होकर एक योजन तक सुंगध फैलेगी, यह वर पराशर ने सत्यवती को दिए। समीपस्थ ऋषि ने देखें, अत: कोहरे का आवरण उत्पन्न किया। बाद में सत्यवती से इनको प्रसिद्ध व्यास पुत्र हुआ।

ऋग्वेद के अनेक सूक्त इनके नाम पर हैं (1, 65-73-9, 97)। इनसे प्रवृत्त पराशर गोत्र में गौर, नील, कृष्ण, श्वेत, श्याम और धूम्र छह भेद हैं। गौर पराशर आदि के भी अनेक उपभेद मिलते हैं। उनके पराशर, वसिष्ठ और शक्ति तीन प्रवर हैं (मत्स्य., 201)।

भीष्माचार्य ने धर्मराज को पराशरोक्त गीता का उपदेश किया है (महाभारत, शांतिपर्व, 291-297)। इनके नाम से संबद्ध अनेक ग्रंथ ज्ञात होते हैं:

1. बृहत्पराशर होरा शास्त्र,

2. लघुपाराशरी (ज्यौतिष),

3. बृहत्पाराशरीय धर्मसंहिता,

4. पराशरीय धर्मसंहिता (स्मृति),

5. पराशर संहिता (वैद्यक),

6. पराशरीय पुराणम्‌ (माधवाचार्य ने उल्लेख किया है),

7. पराशरौदितं नीतिशास्त्रम्‌ (चाणक्य ने उल्लेख किया है),

8. पराशरोदितं, वास्तुशास्त्रम्‌ (विश्वकर्मा ने उल्लेख किया है)।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Rgveda 1.73.2 Translation by H.H.Wilson
  2. Wilson, H. H. The Vishnu Purana: A System of Hindu Mythology and Tradition.