गौतम

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संस्कृत साहित्य में गौतम का नाम अनेक विद्याओं से संबंधित है। वास्तव में गौतम ऋषि के गोत्र में उत्पन्न किसी व्यक्ति को 'गौतम' कहा जा सकता है अत: यह व्यक्ति का नाम न होकर गोत्रनाम है। वेदों में गौतम मंत्रद्रष्टा ऋषि माने गए हैं। एक मेधातिथि गौतम, धर्मशास्त्र के आचार्य हो गए हैं। बुद्ध को भी 'गौतम' अथवा (पाली में 'गोतम') कहा गया है। न्यायसूत्रों के रचयिता भी गौतम माने जाते हैं। उपनिषदों में भी गौतम नामधारी अनेक व्यक्तियों का उल्लेख मिलता है। पुराणों, महाभारत तथा रामायण में भी गौतम की चर्चा है। यह कहना कठिन है कि ये सभी गौतम एक ही है।

रामायण में ऋषि गौतम तथा उनकी पत्नी अहल्या की कथा मिलती है। अहल्या के शाप का उद्धार राम ने मिथिला के रास्ते में किया था। अत: गौतम का निवास मिथिला में ही होना चाहिए और यह बात मिथिला में 'गौतमस्थान' तथा 'अहल्यास्थान' नाम से प्रसिद्ध स्थानों से भी पुष्ट होती है। चूँकि न्यायशास्त्र के लिये मिथिला विख्यात रही है अत: गौतम (नैयायिक) का मैथिल होना इसका मुख्य कारण हो सकता है।

लोग जिनके नाम में गौतम आता है[संपादित करें]

अन्य[संपादित करें]

  • अत्रि ऋषि के सन्तान जो नेपाल, दार्जीलिंग, तथा सिक्किम के नेपाली ब्राह्मणों का एक वंश जिन्हें गोतामे नाम से भी जाना जाता है।
  • गौतम राजपूतों की राजधानी बिंदकी फतेहपुर थी राज्य अर्लग स्टेट कहलाता था जिस मे अवध का कन्नौज रायबरेली बांदा बिंदकी फतेहपुर क्षेत्र आता था।
  • अर्गल स्टेड के प्रतापी राजाओ के नाम इस प्रकार है।
  • राजा पांण्डू
  • राजाअंगददेव
  • राजा बलिभद्रदेव
  • राजा श्रीमानदेव
  • राजा कलिंगदेव
  • राजा काशी प्रसाद
  • राजा धीरपुनीरदेव
  • राजा हरिवरण सिंह
  • राजा नचिकेत सिंह
  • राजा भैरोशाह