ऋषि

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ऋषि भारतीय परंपरा में श्रुति ग्रंथों को दर्शन करने (यानि यथावत समझ पाने) वाले जनों को कहा जाता है। आधुनिक बातचीत में मुनि, योगी, सन्त अथवा कवि इनके पर्याय नाम हैं। ऋषि शब्द की व्युत्पत्ति 'ऋष' है जिसका अर्थ देखना होता है। ऋषि के प्रकाशित कृतियों को आर्ष कहते हैं जो इसी मूल से बना है, इसके अतिरिक्त दृष्टि (नज़र) जैसे शब्द भी इसी मूल से हैं। सप्तर्षि आकाश में हैं और हमारे कपाल में भी।

ऋषि आकाश, अन्तरिक्ष और शरीर तीनों में होते हैं।

सप्तर्षयः[संपादित करें]

कश्यपोऽत्रिर्वसिष्ठश्च विश्वामित्रोऽथ गौतमः

जमदग्निर्भरद्वाज इति सप्तर्षयः स्मृताः ॥


कुछ विख्यात ऋषिः

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]