कण्व

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कण्व वैदिक काल के विख्यात ऋषि थे। इन्हीं के आश्रम में हस्तिनापुर के राजा दुष्यंत की पत्नी शकुंतला एवं उनके पुत्र भरत का लालन पालन हुआ था। सोनभद्र में जिला मुख्यालय से आठ किलो मीटर की दूरी पर कैमूर शृंखला के शीर्ष स्थल पर स्थित कण्व ऋषि की तपस्थली है जो कंडाकोट नाम से जानी जाती है। कण्व ऋषि के एक पुत्र हुए जिनका नाम ब्रह्मर्षि सौभरी था । जो गुणों एवं तेज में अंगिरा ऋषि के समान थे। सौभरी ऋषि के वंशज सौभरेय ब्राह्मण (अहिवासी ब्राह्मण) कहलाए । जो उच्च कोटि के ब्राह्मण होते हैं ।

[ऋग्वेद][सौभरी संहिता]