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इक्ष्वाकु वंश

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इक्ष्वाकु वंश प्राचीन वैदिक भारत के शासकों का एक वंश है। इसी वंश में भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था (इक्ष्वाकुवंशप्रभवो रामो नाम जनैः श्रुतः - वाल्मीकि रामायण) । इक्ष्वाकु वंश में रघु नामक एक अत्यन्त प्रतापी राजा हुए। इस कारण इस वंश को 'रघुवंश' भी कहते हैं। इसी वंश पर महाकवि कालिदास ने रघुवंशम् नामक महाकाव्य की रचना की है।

इक्ष्वाकु वंश की उत्पत्ति राजा इक्ष्वाकु से हुई थी। जैन लोग ऋषभदेव भगवान को ही राजा इक्ष्वाकु मानते हैं। बुद्धवंश के अनुसार शाक्यमुनि गौतम बुद्ध 'ओक्काक' के कुल में जन्मे थे जो संस्कृत के 'इक्ष्वाकु' का ही पालि रूप है।

शासकों की सूची

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ब्रह्मा जी के 10 मानस पुत्रों में से एक मरीचि जो की जैन मान्यता अनुसार आदिनाथ के प्रपौत्र और भरत के पुत्र हैं। इक्ष्वाकु को भगवान ऋषभदेव भी कहा जाता है। भगवान ऋषभदेव आदिनाथ के पुत्र भरत के नाम पर भारत का नाम पड़ा ये आदिनाथ के बाद इक्ष्वाकु वंश में प्रथम चक्रवर्ती भी माने जाते है।

यहाँ से सनातन सतयुग आरम्भ होता हैं। महाभारत के अनुसार दुष्यंत के पुत्र भरत के नाम पर भारत देश का नाम भारतवर्ष कहलाया।

1- ब्रह्मा जी के पुत्र मरीचि

2- मरीचि के पुत्र कश्यप

3- कश्यप के पुत्र विवस्वान या सूर्य

4- विवस्वान के पुत्र वैवस्वत मनु – जिनसे सूर्यवंश का आरम्भ हुआ।

5- वैवस्वत के पुत्र नाभाग

6- नाभाग

7- अम्बरीष

8- विरुप

9- पृषदश्व

10- रथीतर

11- इक्ष्वाकु कोलिय' – ये परम प्रतापी राजा थे, इनसे इस वंश का एक नाम इक्ष्वाकु कोलिय नागवंशी वंश' हुआ। (दूसरी जगह इनके पिता वैवस्वत मनु भी वताये जाते हैं )

यहाँ से त्रेतायुग आरम्भ होता हैं।

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यहाँ से द्वापर युग शुरु होता है।

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यहाँ से कलियुग आरम्भ होता हैं।

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  • 101- उरुक्रीय (या गुरुक्षेत्र)
  • 102- वत्सव्यूह
  • 103- प्रतियोविमा
  • 104- भानु
  • 105- दिवाकर (या दिवाक)
  • 106- वीर सहदेव
  • 107- बृहदश्व II
  • 108- भानुराठ (या भानुमान)
  • 109- प्रतिमाव
  • 110- सुप्रिक
  • 111- मरुदेव
  • 112- सूर्यक्षेत्र
  • 113- पुष्कर (या किन्नरा)
  • 114- अंतरीक्ष
  • 115- सुवर्णा (या सुताप)
  • 116- सुमित्रा (या अमितराजित)
  • 117- ब्रुहदराज (ओक्काका)
  • 118- बरही (ओक्कामुखा)
  • 119- कृतांजय (सिविसमंजया)
  • 120- रणजय्या (सिहसारा)
  • संजय (महाकोशल या जयसेना)
  • 121- शाक्य (सिहानू:शाक्य वंश के संस्थापक)
  • 122- शुद्धोधन
  • 123- सिद्धार्थ, गौतम बुद्ध
  • 124- राहुल शाक्य ही फिर मौर्य बन गये शाक्यों के नरसंघार के बाद
  • 125- प्रसेनजीत
  • 126- कुशद्रका (या कुंतल
  • 127- रानाक (या कुलका)
  • 128- सुरथ
  • 129- सुमित्र

राजा सुमित्र एक क्रूर राजा था अंतिम शासक सूर्यवंश थे, जिन्हें 362 ईसा पूर्व में मगध के शक्तिशाली सम्राट महापद्म नंद ने हराया था। महापद्मनंद ने राजपुतों कर संहार किया इसलिए इन्हे २ परशुराम कहा जाता है राजा सुमित्रा इसके पश्चात वह बिहार में स्थित रोहतास चले गये थे और आगे चलकर उन्होंने कुशवाहा वंश स्थापना की और कालांतर मे ये कुशवाहा कहलाये [1][2][3]

इन्हें भी देखें

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सन्दर्भ

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  1. The Valmiki Ramayana, Volume 3.
  2. Misra, V.S. (2007). Ancient Indian Dynasties, Mumbai: Bharatiya Vidya Bhavan, ISBN 81-7276-413-8, pp.283-8, 384
  3. History Of Ancient India ISBN 81-269-0616-2 vol II