कोलकाता की अर्थ व्यवस्था

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कोलकाता पूर्वी भारत एवं पूर्वोत्तर राज्यों का प्रधान व्यापारिक, वाणिज्यिक एवं वित्तीय केन्द्र है। यहां कोलकाता स्टॉक एक्स्चेंज भी है, जो भारत का दूसरे नंबर का सबसे बड़ा स्टोक एक्स्चेंज है।[1] यहां प्रमुख वाणिज्यिक एवं सैन्य बंदरगाह भी है। इनके साथ ही इस क्षेत्र का एकमात्र अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा भी यहीं है। कभी भारत का मुख्य शहर रहे कोलकाता ने स्वतंत्रता पश्चात कुछ आरंभिक वर्षों में अन्वरत आर्थिक पतन को देखा। इसका मुख्य कारण राजनैतिक अस्थिरता एवं व्यापारिक यूनियनों का बढ़ना था।[2] १९६० के दशक से १९९० के मध्य दशक तक शहर की प्रगति गिरती ही गयी, जिसका कारण यहां बंद या यहां से स्थानांतरित होती फैक्ट्रियां और व्यापार थे।[2] इस वजह से पूंजी निवेश एवं संसाधनों की कमी उत्पन्न हुई, जो कि यहां की गिरती आर्थिक स्थिति के भरपूर सहायक कारक सिद्ध हुए।[3] भारतीय आर्थिक नीति के उदारीकरण की प्रक्रिया ने १९९० के दशक में शहर की भाग्यरेखा को नई दिशा दी। इसके बाद उत्पादन भी बढ़ा एवं बेकार श्रमिकों को भी काम मिला।[4] उदाहरणार्थ, यहां के सड़कों पर फेरीवाले लगभग ८७२२ करोड़ रुपये (२००५ के आंकड़ों के अनुसार) का व्यापार कर रहे थे।[5] नगर की श्रमशक्ति में सरकारी एवं निजी कंपनियों के कर्मचारी एक बड़ा भाग बनाते हैं। यहां बड़ी संख्या में अकुशल एवं अर्ध-कुशल श्रमिक हैं, जिनके साथ अन्य कुशल कारीगर भी अच्छी संख्या में कार्यरत हैं। शहर की आर्थिक स्थिति के पुनरुत्थान में सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं का बड़ा हाथ रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र यहां प्रतिवर्ष लगभग ७०% की उन्नति कर रहा है, जो राष्ट्रीय औसत का दोगुना है। [6] हाल के वर्षों में यहां गृह-निर्माण एवं रियल एस्टेट क्षेत्र में भी निवेशक उमड़े हैं। इसका कारण एवं परिणाम शहर में कई नई परियोजनाओं का आरंभ होना है।[7] कोलकाता में कई बड़ी भारतीय निगमों की औद्योगिक इकाइयां स्थापित हैं, जिनके उत्पाद जूट से लेकर इलेक्ट्रॉनिक सामान तक हैं। कुछ उल्लेखनीय कंपनियां जिनके यहां मुख्यालय हैं, आईटीसी लिमिटेड, बाटा शूज़, बिरला कॉर्पोरेशन, कोल इंडिया लिमिटेड, दामोदर वैली कॉर्पोरेशन, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक और इलाहाबाद बैंक, आदि प्रमुख हैं। हाल ही में भारत सरकार की पूर्व-देखो (लुक ईस्ट) नीति, नाथू ला दर्रा के सिक्किम में खोले जाने एवं चीन तथा दक्षिण पूर्व एशियाई देशों से व्यापारिक संबंध बढ़ाने की नीतियों के कारण यहां कई देशों ने भरतीय बाजार में पदार्पण किया है। इसके चलते कोलकाता में निवेश होने से यहां की अर्थ-व्यवस्था को अप-थर्स्ट मिला है।[8][9]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Genesis and Growth of the Calcutta Stock Exchange". Calcutta Stock Exchange Association Ltd. http://www.cse-india.com/cse_factbook.htm. अभिगमन तिथि: 2006-04-26. 
  2. "Kolkata". Microsoft Encarta Online Encyclopedia। (2007)। अभिगमन तिथि: 2007-10-13
  3. Follath E (2005-11-30). "The Indian Offensive: From Poorhouse ro Powerhouse". Spiegel Online. http://service.spiegel.de/cache/international/spiegel/0,1518,387701,00.html. अभिगमन तिथि: 2006-04-26. 
  4. Chakravorty S (2000). "From Colonial City to Global City? The Far-From-Complete Spatial Transformation of Calcutta" in (Marcuse & van Kempen 2000, pp. 56–77)
  5. Ganguly, Deepankar. "Hawkers stay as Rs. 265 crore talks". The Telegraph, 30 नवम्बर 2006. http://www.telegraphindia.com/1061130/asp/frontpage/story_7071031.asp. अभिगमन तिथि: 2008-02-16. 
  6. Datta T (2006-03-22). "Rising Kolkata's winners and losers". BBC Radio 4's Crossing Continents. http://news.bbc.co.uk/2/hi/programmes/crossing_continents/4830762.stm. अभिगमन तिथि: 2006-04-26. 
  7. मुखर्जी शंकर (2005-03-28). "डिमांड स्पर्स न्यू टाउन III- नेवर बिफोर रिस्पॉन्स टू राजारहाट सेल". द टेलीग्राफ- कोलकाता. http://www.telegraphindia.com/1050328/asp/calcutta/story_4541017.asp. अभिगमन तिथि: 2006-07-25. 
  8. संबित साहा (2003-09-09). "नाथू ला ट्रेड मे स्पर बिज़नेस इन एन-ई". रीडिफ.कॉम. http://www.rediff.com/money/2003/sep/09trading.htm. अभिगमन तिथि: 2007-09-18. 
  9. सी.राजा मोहन (2007-07-16). "ए फ‘ओरन पॉलिसी फॉर द ईस्ट". द हिन्दू. http://www.hindu.com/2004/07/16/stories/2004071601841000.htm. अभिगमन तिथि: 2007-09-18.