जगद्धात्री

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रामकृष्ण मिशन, राँची में जगद्धात्री प्रतिमा

जगद्धात्री (= जगत् + धात्री = जगत की रक्षिका) दुर्गा का एक रूप हैं। यह सिंहवाहिनी चतुर्भुजा, त्रिनेत्रा एवं रक्तांबरा हैं। हिंदू धर्म में दुर्गा के रूप की पूजा का आरंभ अज्ञात है। शक्तिसंगमतंत्र, उत्तर कामाख्यातंत्र, भविष्यपुराण स्मृतिसंग्रह और दुर्गाकल्प आदि ग्रंथों में जगद्धात्री पूजा का उल्लेख मिलता है। केनोपनिषद में हेमवती का वर्णन जगद्धात्री के रूप में प्राप्त है। अतएव इन्हें अभिन्न मानते है। कार्तिक शुक्ल पक्ष नवमी को इनकी पूजा का विधान है। इनकी पूजा विशेष रूप से पश्चिम बंगाल और बिहार (मधुबनी)में होती है। वहाँ भी चन्दननगर और उसके आसपास के क्षेत्रों में जगद्धात्री पूजा बड़े धूमधाम से की जाती है।

बिहार राज्य के मधुबनी जिला के सनकोर्थ पंचायत में यह पूजा लगभग 25-30 वर्षों से हो रही है। इसे स्वर्गीय  श्री महानंद झा ने शुरू किया था।  वर्तमान में उनके वंशज और समस्त समाज मिलकर पूजा के संचालन में सहयोग कर रही है। वर्तमान संचालक श्री ललन जी झा ने पूजा को लोकप्रिय बनाकर एक विशिष्ट पहचान दिलाई है। आज दूर दराज के लोग आकर पूजा में सम्मिलित होते हैं।

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

जगद्धात्री पूजा समिति, रामपुर,मधुबनी, (बिहार)