इलाहाबाद

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Allahabad
اللہآباد

इलाहाबाद
नया यमुना सेतु, इलाहाबाद
नया यमुना सेतु, इलाहाबाद
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
राज्य उत्तर प्रदेश
जिला इलाहाबाद
महापौर जितेन्द्र नाथ सिंह
जनसंख्या 12,15,348[1] (2008 के अनुसार )
क्षेत्रफल
ऊँचाई (AMSL)

• 98 मीटर (322 फी॰)

Erioll world.svgनिर्देशांक: 25°27′N 81°51′E / 25.45, 81.85 इलाहाबाद ( उर्दू: اللہآباد), जिसे प्रयाग (उर्दू: پریاگ) भी कहते हैं, उत्तर भारत के राज्य उत्तर प्रदेश के पूर्वी भाग में स्थित एक शहर एवं इलाहाबाद जिले का प्रशासनिक मुख्यालय है। शहर का प्राचीन नाम अग्ग्र (संस्कृत) है, अर्थात त्याग स्थल। हिन्दू मान्यता अनुसार, यहां सृष्टिकर्ता ब्रह्मा ने सृष्टि कार्य पूर्ण होने के बाद प्रथम बलिदान दिया था। यही सबसे बड़े हिन्दी सम्मेलन महाकुंभ की चार स्थलियों में से एक है, शेष तीन हरिद्वार, उज्जैन एवं नासिक हैं। हिन्दू धर्मग्रन्थों में वर्णित प्रयाग स्थल पवित्रतम नदी गंगा और यमुना के संगम पर स्थित है। यहीं सरस्वती नदी गुप्त रूप से संगम में मिलती है, अतः ये त्रिवेणी संगम कहलाता है, जहां प्रत्येक बारह वर्ष में कुंभ मेला लगता है।[2]

शहर में कई महत्त्वपूर्ण राज्य सरकार के कार्यालय स्थित हैं, जैसे इलाहाबाद उच्च न्यायालय, प्रधान महालेखाधिकारी (एजी ऑफ़िस), उत्तर प्रदेश राज्य लोक सेवा आयोग (पी.एस.सी), राज्य पुलिस मुख्यालय, उत्तर मध्य रेलवे मुख्यालय, केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का क्षेत्रीय कार्यालय एवं उत्तर प्रदेश राज्य हाईस्कूल एवं इंटरमीडियेट शिक्षा कार्यालय। इलाहाबाद भारत के १४ प्रधानमंत्रियों में से ७ से संबंधित रहा है: जवाहर लाल नेहरु, लालबहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, गुलजारी लाल नंदा, विश्वनाथ प्रताप सिंह एवं चंद्रशेखर; जो या तो यहां जन्में हैं, या इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पढ़े हैं या इलाहाबाद निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए हैं।[3]

भारत सरकार द्वारा इलाहाबाद को जवाहरलाल नेहरु अर्बन रिन्यूअल मिशन(JNNURM) के लिये मिशन शहर के रूप में चुना गया है, जिसके अन्तर्गत शहरी अवसंरचना में सुधार, दक्ष प्रशासन एवं शहरी नागरिकों हेतु आधारभूत सुविधाओं का प्रयोजन करना है। [4]

इन्हें भी देखें: इलाहाबाद/आलेख

अनुक्रम

[संपादित करें] नामकरण

शहर का वर्तमान नाम मुगल सम्राट अकबर द्वारा १५८३ में रखा गया था। हिन्दी नाम इलाहाबाद का अर्थ अरबी शब्द इलाह (अकबर द्वारा चलाये गए नये धर्म दीन-ए-इलाही के संदर्भ से, अल्लाह के लिये) एवं फारसी से आबाद (अर्थात बसाया हुआ) – यानि ईश्वर द्वारा बसाया गया, या ईश्वर का शहर है।

[संपादित करें] इतिहास

कांग्रेस कार्य्कारिणी समिति की आनंद भवन, इलाहाबाद में बैठक में महात्मा गांधी, उनके बायीं ओर वल्लभभाई पटेल एवं विजयलक्ष्मी पंडित उनके दायीं ओर, जनवरी, १९४०

प्राचीन काल में शहर को प्रयाग (बहु-यज्ञ स्थल) के नाम से जाना जाता था। ऐसा इसलिये क्योंकि सृष्टि कार्य पूर्ण होने पर सृष्टिकर्ता ब्रह्मा ने प्रथम यज्ञ यहीं किया था, व उसके बाद यहां अनगिनत यज्ञ हुए। भारतवासियों के लिये प्रयाग एवं वर्तमान कौशाम्बी जिले के कुछ भाग यहां के महत्त्वपूर्ण क्षेत्र रहे हैं। यह क्षेत्र पूर्व से मौर एवं गुप्त साम्राज्य के अंश एवं पश्चिम से कुशान साम्राज्य का अंश रहा है। बाद में ये कन्नौज साम्राज्य में आया। १५२६ में मुगल साम्राज्य के भारत पर पुनराक्रमण के बाद से ये मुगलों के अधीन आया। मुगल साम्राज्य अकबर ने यहां संगम के घाट पर एक वृहत दुर्ग निर्माण करवाया था। शहर में मराठाओं के आक्रमण भी होते रहे थे, जब तक कि यहां ब्रिटिश राज नहीं आ गया। १७६५ में इलाहाबाद के किले में थल-सेना के गैरीसन दुर्ग की स्थापना की थी। १८५७ में शहर प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भी सक्रिय रहा।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन यहां दरभंगा किले के विशाल मैदान में १८८८ एवं पुनः १८९२ में हुआ था। [5][6]

१९३१ में इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद ने ब्रिटिश पुलिस से घिर जाने पर स्वयं को गॊली मार कर अपनी न पकड़े जाने की प्रतिज्ञा को सत्य किया। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दिनों में नेहरु परिवार के पारिवारिक आवास आनन्द भवन एवं स्वराज भवन यहां भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की राजनीतिक गतिविधियों के केन्द्र रहे थे। यहां से हजारों सत्याग्रहियों को जेल भेजा गया था। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु इलाहाबाद निवासी ही थे।

[संपादित करें] भूगोल

इलाहाबाद के निकटवर्ती क्षेत्र

इलाहाबाद की भौगोलिक स्थिति 25°27′N 81°50′E / 25.45, 81.84 उत्तर प्रदेश के दक्षिणी भाग में ९८ मीटर (३२२ फ़ीट) पर गंगा और यमुना नदियों के संगम पर स्थित है। यह क्षेत्र प्राचीन वत्स देश कहलाता था। इसके दक्षिण-पूर्व में बुंदेलखंड क्षेत्र है, उत्तर एवं उत्तर-पूर्व में अवध क्षेत्र एवं इसके पश्चिम में निचला दोआब क्षेत्र। इलाहाबाद भौगोलिक एवं संस्कृतिक दृष्टि, दोनों से ही महत्त्वपूर्ण रहा है। गंगा-जमुनी दोआब क्षेत्र के खास भाग में स्थित ये यमुना नदी का अंतिम पड़ाव है। दोनों नदियों के बीच की दोआब भूमि शेष दोआब क्षेत्र की भांति ही उपजाउ किंतु कम नमी वाली है, जो गेहूं की खेती के लिये उपयुक्त होती है। जिले के गैर-दोआबी क्षेत्र, जो दक्षिणी एवं पूर्वी ओर स्थित हैं, निकटवर्ती बुंदेलखंड एवं बघेलखंड के समान शुष्क एवं पथरीले हैं। भारत की नाभि जबलपुर से निकलने वाली भारतीय अक्षांश रेखा जबलपुर से 343 कि.मी. (213 मील) उत्तर में इलाहाबाद से निकलती है।

[संपादित करें] इलाहाबाद का पुनर्संगठन

इलाहाबाद मंडल एवं जिले में वर्ष २००० में बड़े बदलाव हुए। इलाहाबाद मंडल के इटावा एवं फर्रुखाबाद जिले आगरा मंडल के अधीन कर दिये गए, जबकि कानपुर देहात को कानपुर जिले में से काटकर एक नया कानपुर मंडल सजित कर दिया गया। पश्चिमी इलाहाबाद के भागों को काटकर नया कौशांबी जिला बनाया गया। अब इलाहाबाद मंडल में इलाहाबाद, कौशांबी एवं प्रतापगढ़ एवं फतेहपुर जिले हैं।

[संपादित करें] जनसांख्यिकी

२००१ की जनगणना के अनुसार इलाहाबाद की वर्तमान जनसंख्या १,०४२,२२९ है। ये भारत में जनसंक्या के अनुसार ३२वें स्थाण पर आता है। [7] इलाहाबाद का क्षेत्रफल लगभग 70 कि.मी. (27 वर्ग मील)[8] है और ये [[समुद्र की सतह से ऊंचाई|सागर सतह से 98 मी. (320 फुट) ऊंचाई पर स्थित है।

हिन्दी-भाषी इलाहाबाद की बोली अवधी है, हालांकि अधिकांश शहरी क्षेत्र में खड़ी बोली ही बोली जाती है। जिले के पूर्वी गैर-दोआबी क्षेत्र में प्रायः बघेली बोली का चलन है।

इलाहाबाद में सभी प्रधान धर्म के लोग निवास करते हैं। यहां हिन्दू कुल जनसंख्या का ८५% और मुस्लिम ११% हैं। इनके अलावा सिख, ईसाई एवं बौद्ध लोगों की भी छोटी संख्या है।

[संपादित करें] जलवायु

इलाहाबाद
जलवायु सारणी (व्याख्या)
मा जू जु सि दि
 
 
19
 
24
9
 
 
16
 
27
11
 
 
9
 
34
17
 
 
6
 
39
23
 
 
10
 
42
27
 
 
85
 
40
29
 
 
300
 
34
26
 
 
308
 
33
26
 
 
190
 
33
25
 
 
40
 
33
21
 
 
12
 
30
14
 
 
3
 
25
9
औसत अधिकतम एवं न्यूनतम तापमान (°से.)
कुल वर्षा (मि.मी)
स्रोत: IMD

इलाहाबाद में तीन प्रमुख ऋतुएं आती हैं: गर्म शुष्क ग्रीष्म ऋतु, ठंडी शुष्क शित ऋतु एवं गर्म एवं नम मानसून वाली वर्षा ऋतु। ग्रीष्मकाल अप्रैल से जून तक चलता है, जिसमें अधिकतम तापमान ४०°से. (१०४ °फै.) से ४५ °से. (११३ °फै.) तक जाता है। मानसून काल आरंभिक जुलाई से सितंबर के अंत तक चलती है। इसके बाद शीतकाल दिसंबर से फरवरी तक रहता है। तापमान यदाकदा ही शून्य तक पहुंचता है। अधिकतम तापमान लगभग २२ °से. (७२ °फै.) एवं न्यूनतम तापमान १० °से. (५० °फै.) तक पहुंचता है। इलाहाबाद में जनवरी माह में घना कोहरा रहता है, जिसके कारण यातायात एवं यात्राओं में अत्यधिक विलंब भी हो जाते हैं। किंतु यहां हिमपात कभी नहीं होता है।

न्यूनतम अंकित तापमान, -२ °से. (२८.४ °फै.) एवं अधिकतम ४८ °से. (११८ °फै.) ४८ °से.[9] तक पहुंचा है।

[संपादित करें] नागर प्रशासन

इलाहाबाद नगर निगम, राज्य के प्राचीनतम नगर निगमों में से एक है। निगम १८६४ में अस्तित्त्व में आया था[8], जब तत्कालीन भारत सरकार द्वारा लखनऊ म्युनिसिपल अधिनियम पास किया गया था। नगर के म्युनिसिपल क्षेत्र को कुल ८० वार्डों में विभाजित किया गया है व प्रत्येक वार्ड से एक सदस्य (कार्पोरेटर) चुनकर नगर परिषद का गठन किया जाता है। [10]. ये कॉर्पोरेटर शहर के महापौर को चुनते हैं। राज्य सरकार द्वारा चुने गए मुख्य कार्यपालक को इलाहाबाद का आयुक्त (कमिश्नर) नियुक्त किया जाटा है।

[संपादित करें] शहर

ऑल सेंट्स कैथेड्रल, इलाहाबाद, रात्रि दृश्य, अंतिम १९वीं शताब्दी का गिरजाघर भारत के श्रेष्ठतम कैथेड्रलों में से एक है।
आनंद भवन, नेहरु-गांधी परिवार का पैतृक निवास रहा है; अब सरकारी संपत्ति है व संग्राहालय बनाया गया है।

इलाहाबाद गंगा-यमुना नदियों के संगम पर स्थित है। ये एक भू-स्थित प्रायद्वीप रूप में देखा जा सकता है जिसे तीन ओर से नदियों ने घेर रखा है एवं मात्र एक ओर ही मुख्य भूमि से जुड़ा है। इस कारण ही शहर के भीतर व बाहर बढ़ते यातायात परिवहन हेतु अनेक सेतुओं द्वारा गंगा व यमुना नदियों के पार जाते हैं।

इलाहाबाद का शहरी क्षेत्र तीन भागों एं वर्गीकृत किया जा सकता है: पुराना शहर जो शहर का आर्थिक केन्द्र रहा है। यह शहर का सबसे घना क्षेत्र है, जहां भीड़-भाड़ वाली सड़कें यातायात व बाजारों का कां देती हैं। नया शहर जो सिविल लाइंस क्षेत्र के निकट स्थित है; ब्रिटिश काल में स्थापित किया गया था। यह भली-भांति सुनियोजित क्षेत्र ग्रिड-आयरन रोड पैटर्न पर बना है, जिसमें अतिरिक्त कर्णरेखीय सड़कें इसे दक्ष बनाती हैं। यह अपेक्षाकृत कम घनत्व वाला क्षेत्र हैजिसके मार्गों पर वृक्षों की कतारें हैं। यहां प्रधान शैक्षिक संस्थान, उच्च न्यायालय, उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग कार्यालय, अन्य कार्यालय, उद्यान एवं छावनी क्षेत्र हैं। यहां आधुनिक शॉपिंग मॉल एवं मल्टीप्लेक्स बने हैं, जिनमें अटलांटिस मॉल, सालासर मॉल एवं विनायक सिटी सेंटर मॉल नुख्य हैं। बाहरी क्षेत्र में शहर से गुजरने वाले मुख्य राजमार्गों पर स्थापित सैटेलाइट टाउन हैं। इनमें गंगा-पार (ट्रांस-गैन्जेस) एवं यमुना पार (ट्रांस-यमुना) क्षेत्र आते हैं। विभिन्न रियल-एस्टेट बिल्डर इलाहाबाद में निवेश कर रहे हैं, जिनमें ओमेक्स लि. प्रमुख हैं। नैनी सैटेलाइट टाउन में १५३५ एकड़ की हाई-टेक सिटी बन रही है।

[संपादित करें] मुख्य आकर्षण

यहां कई क्रीड़ा परिसर हैं, जिनका उपयोग व्यावसायिक एवं अव्यवसायी खिलाड़ी करते रहे हैं। इनमें मदन मोहन मालवीय क्रिकेट स्टेडियम, मेयो हॉल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स एवं बॉयज़ हाई स्कूल एवं कॉलिज जिम्नेज़ियम हैं। जॉर्जटाउन में एक अंतर्राष्ट्रीय स्तर का तरणताल परिसर भी है। झालवा (इलाहाबाद पश्चिम) में नेशनल स्पोर्ट्स एकैडमी है, जहां विश्व स्तर के जिमनास्ट अभ्यासरत रहते हैं। अकादमी को आगामी राष्ट्रमंडल खेलों के लिये भारतीय जिमनास्ट हेतु आधिकारिक ध्वजधारक चुना गया है।

संगम


संगम के निकट स्थित इस किले को मुगल सम्राट अकबर ने 1583 ई. में बनवाया था। वर्तमान में इस किले का कुछ ही भाग पर्यटकों के लिए खुला रहता है। बाकी हिस्से का प्रयोग भारतीय सेना करती है।

इस स्थान पर गंगा, यमुना और सरस्वती नदी का मिलन होता है। संगम सिविल लाइन्स से 7 किमी. की दूरी पर है। साधु सन्तों को यहां हमेशा पूजा पाठ करते हुए देखा जा सकता है। 12 साल में लगने वाले कुंभ मेले के अवसर पर संगम विभिन्न गतिविधियों का केन्द्र बन जाता है। यहां से सूर्योदय और सूर्यास्त का नजारा बेहद मनमोहक लगता है।

इस ऐतिहासिक इमारत का निर्माण मोतीलाल नेहरू ने करवाया था। 1930 में उन्होंने इसे राष्ट्र को समर्पित कर दिया था।

एक जमाने में आनंद भवन भारतीय राजनीति में अहम स्थान रखने वाले नेहरू परिवार का निवास स्थान था। आज इसे संग्रहालय का रूप दे दिया गया है। यहां पर गांधी नेहरू परिवार की पुरानी निशानियों को देखा जा सकता है।

संगम के निकट स्थित यह मंदिर उत्तर भारत के मंदिरों में अद्वितीय है।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय भारत का ही नही एशिया का सबसे बड़ा उच्च न्यायालय है, यहॉं पर 95 न्यायाधीशो की क्षमता है।

इस विशाल बाग में खुसरौ, उसकी बहन और उसकी राजपूत मां का मकबरा स्थित है।

चन्द्रशेखर आजाद पार्क के अंदर स्थित यह लाइब्रेरी शहर की सबसे प्राचीन लाइब्रेरी है।

गंगा नदी के किनार स्थित शिवकुटी भगवान शिव को समर्पित है।

सफेद पत्थर के इस मैमोरियल पार्क में सरस्वती घाट के निकट सबसे ऊंचे शिखर पर चार सिंहों के निशान हैं।

चन्द्र शेखर आजाद पार्क के निकट स्थित है।

आनंद भवन के बगल में स्थित इस प्लेनेटेरियम में खगोलीय और वैज्ञानिक जानकारी हासिल करने के लिए जाया जा सकता है।

यह पार्क महान स्वतंत्रता सैनानी चन्द्रशेखर आजाद को समर्पित है।

यह आश्रम संत भारद्वाज से संबंधित है।

[संपादित करें] शिक्षा

इलाहाबाद प्राचीन काल से ही शैक्षणिक नगर के रुप मे प्रसिद्ध है। इलाहाबाद केवल गंगा और यमुना जैसी दो पवित्र नदियो का ही संगम नही, अपितु आध्यात्म के साथ शिक्षा का भी संगम है, जैहा भारत के सभी राज्यो से विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने आते है। इलाहाबाद विश्व्विद्यालय इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है, जँहा से अनेकानेक विद्वान ने शिक्षा ग्रहण कर देश व समाज के अनेक भागो मे अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दिया । इलाहाबाद विश्वविद्यालय को पूर्व का आक्सफोर्ड ("Oxford of the East") भी कहा जाता है । इलाहाबाद मे कई विश्व्विद्यालय, शिक्षा परिषद, इन्जीनिरिंग कालेज, मेडिकल कालेज तथा मुक्त विश्व्विद्यालय शिक्षा के क्षेत्र मे उल्लेखनीय भूमिका निभा रहे है।

इलाहाबाद मे स्थापित विश्व्विद्यालय के नाम इस प्रकार निम्नलिखित है-

  1. इलाहाबाद विश्वविद्यालय
  2. मोतीलाल नेहरु नेशनल इन्स्टीट्यूट आफ् टेक्नोलोजी
  3. उत्तर प्रदेश राज‍षिँ टण्डन मुक्त विश्व्विद्यालय
  4. इलाहाबाद एग्रीकल्चर संस्थान (मानित विश्व्विद्यालय)-(AAI-DU)
  5. नेहरू ग्राम भारती विश्वविद्यालय, जमुनीपुर कोटवा

इलाहाबाद मे कई इन्जीनिरिंग कालेज, मेडिकल कालेज, एवं हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग संगीत समिति आदि अनेक विख्यात कला संस्थान है।

[संपादित करें] उद्योग

इलाहाबाद में शीशा और तार कारखाने काफी हैं। यहां केमुख्य औद्योगिक क्षेत्र हैं नैनी और फूलपुर, जहां कई सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियों की इकाइयां, कार्यालय और निर्माणियां स्थापित हैं। इनमें अरेवा टी एण्ड डी इण्डिया (बहुराष्ट्रीय अरेवा समूह का एक प्रभाग), भारत पंप्स एण्ड कंप्रेसर्स लि. यानी बीपीसीएल) जिसे जल्दी ही मिनिरत्न घोषित किया जाने वाला है, इंडियन टेलीफोन इंडस्ट्रीज (आई.टी.आई), रिलायंस इंडस्ट्रीज़-इलाहाबाद निर्माण प्रखंड, हिन्दुस्तान केबल्स, त्रिवेणी स्ट्रक्चरल्स लि. (टी.एस.एल. भारत यंत्र निगम की एक गौण इकाई), शीशा कारखाना, इत्यादि। बैद्यनाथ की नैनी में एक निर्माणी स्थापित है, जिनमें कई कुटीर उद्योग जैसे रसायन, पॉलीयेस्टर, ऊनी वस्त्र, नल, पाईप्स, टॉर्च, कागज, घी, माचिस, साबुन, चीनी, साइकिल एवं पर्फ़्यूम आदि निर्माण होते हैं। इंडीयन फार्मर्स फर्टिलाइजर्स को-ऑपरेटिव इफको फूलपुर क्षेत्र में स्थापित है। यहाम इफको की दो इकाइयां हैं, जिनमें विश्व का सबसे बड़ा नैफ्था आधारित खाद निर्माण परिसर स्थापित है। इलाहाबाद में पॉल्ट्री और कांच उद्योग भी बढ़ता हुआ है। राहत इंडस्ट्रीज़ का नूरानी तेल, काफी अच्छा और पुराना दर्दनिवारक तैल है, जिसकी निर्माणी नैनी में स्थापित है। तीन विद्युत परियोजनाएं मेजा, बारा और कर्चना तहसीलों में जेपी समूह एवं नेशनल थर्मल पावर कार्पोरेशन द्वारा तैयार की जा रही हैं।

[संपादित करें] क्रीड़ा

इलाहाबाद का भारतीय जिम्नास्टिक्स में प्रमुख स्थान है। यहां की टीम सार्क और एशियाई देशों में अग्रणी रही है। झालवा में खेलगांव पब्लिक स्कूल जिम्नास्टिक्स का प्रशिक्षण उपलब्ध कराटा है। यहां के जिम्नास्ट्स को ३३वें ट्यूलिट पीटर स्मारक कप-२००७, हंगरी में २ स्वर्ण पदक मिले हैं। हॉकी के प्रसिद्ध खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद का जन्म भी इलाहाबाद में ही २९ अगस्त, १९०६ को हुआ था। उन्होंने तीन लगातार ऑलंपिक खेलों में एम्स्टर्डैम (१९२८), लॉस एंजिलिस (१९३२) और बर्लिन (१९३६) में तीन स्वर्ण पदक प्राप्त किये थे। मोहम्मद कैफ, भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी यहीं के हैं। अभिन्न श्याम गुप्ता भी एक उभरते हुए बैडमिंटन खिलाड़ी हैं, जिन्होंने २००२ में राष्ट्रीय पदक प्राप्त किया था।

[संपादित करें] परिवहन

रज्जु-आधारित चार-लेन का सेतु इलाहाबाद में यमुना नदी पर भारत के सबसे बड़े निर्माणों में से एक हैं।

[संपादित करें] वायु

इलाहाबाद में बमरौली वायु-सेना बेस (IXD) के निकट इलाहाबाद विमानक्षेत्र है। ये दिल्ली एवं कोलकाता से जेटलाइट एवं एअर इंडिया-क्षेत्रीय द्वारा जुड़ा हुआ है। अन्य निकटवर्ती ब्ड़े विमानक्षेत्रों में वाराणसी विमानक्षेत्र 142 कि.मी. (88 मील)) एवं लखनऊ (अमौसी अंतर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र 210 कि.मी. (130 मील) हैं।

[संपादित करें] सड़क

स्वर्ण चतुर्भुज के मार्गों में से एक, राष्ट्रीय राजमार्ग २ शहर के मध्य से गुजरता है। इलाहाबाद दिल्ली-कोलकाता मार्ग के बीच स्थित है। राष्ट्रीय राजमार्ग ९६ राष्ट्रीय राजमार्ग २८ से फैजाबाद से जोड़ता है। राष्ट्रीय राजमार्ग २७ 93 कि.मी. (58 मील) लंबा है और इसे मध्य प्रदेश में मंगवान में राष्ट्रीय राजमार्ग ७ से जोड़ता है। विश्व बैंक द्वारा वित्त-पोषित ८४.७ कि.मी. लंबा बायपास मार्ग लगभग पूर्ण होने को है। [11] इसके द्वारा न केवल राजमार्गों का यातायात ही सुलभ होगा, बल्कि शहर के हृदय से गुजरने वाला यातायात भी हल्का होगा। अन्य कई राज्य-राजमार्ग शहर को देश के अन्य भागों से जोड़ते हैं। इलाहाबाद में दो बस-अड्डे हैं – लीडर रोड एवं सिविल लाइंस पर जो विभिन्न मार्गों पर बस-सेवा सुलभ कराते हैं। दोनों नदियों पर बड़ी संख्या में बने सेतु श्सहर को अपने उपनगरों जैसे नैनी, झूसी आदि से जोड़ते हैं। नया आठ-लेन नियंत्रित एक्स्प्रेसवे- गंगा एक्स्प्रेसवे इलाहाबाद से गुजरना प्रस्तावित है।[12] इलाहाबाद जिले में एक नयी ८-लेन मुद्रिका मार्ग सड़क भी प्रतावित है। स्थानीय यातायात हेतु नगर बस सेवा, ऑटोरिक्शा, रिक्शॉ एवं टेम्पो उपलब्ध हैं। इनमें से सबसे सुविधाजनक साधन साइकिल रिक्शा है।

[संपादित करें] ट्रेन

भारतीय रेल द्वारा जुड़ा हुआ, इलाहाबाद जंक्शन उत्तर मध्य रेलवे का मुख्यालय है। ये अन्य प्रधान शहरों जैसे कोलकाता, दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, इंदौर, लखनऊ, छपरा, पटना, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, बंगलुरु एवं जयपुर से भली भांति जुड़ा हुआ है। शहर में आठ रेलवे-स्टेशन हैं:

[संपादित करें] इलाहाबाद के उल्लेखनीय लोग

mr.ram bahadur srivastava==चित्र दीर्घा==

[संपादित करें] संदर्भ

[संपादित करें] बाहरी कड़ियाँ

वैयक्तिक औज़ार
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