मोतीलाल नेहरू
मोतीलाल नेहरू ( 6 मई, 1861 – 6 फरवरी, 1931) इलाहाबाद के एक मशहूर वकील थे। वे पंडित जवाहरलाल नेहरू के पिता थे। वे भारत के स्वतंत्रता संग्राम के आरम्भिक कार्यकर्ताओं में से थे।
जीवनी [संपादित करें]
मोतीलाल नेहरू का जन्म एक काश्मीरी पण्डित परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम gangadhar था। वह पश्मिमी ढ़ंग की शिक्षा पाने वाले प्रथम पीढ़ी के गिने-चुने भारतीयों में से थे। वह इलाहानाद के मीर सेन्ट्रल कॉलेज में शिक्षित हुए किन्तु बीए की अन्तिम परीक्षा नहीं दे पाये। बाद में वे कैम्ब्रिज में "बार ऐट लॉ" के लिये पात्र घोषित हुए और अंग्रेजी न्यायालयों में वकील के रूप में कार्य प्रारम्भ किया।
मोतीलाल नेहरू की पत्नी का नाम स्वरूप रानी था। पंडित जवाहरलाल नेहरू उनके एकमात्र पुत्र थे। उन्हे दो कन्या भी थीं। उनकी बडी बेटी का नाम विजयालक्षमी था, जो आगे चलकर विजयालक्ष्मी पंडित नाम से मशहूर हुई। उनकी छोटी बेटी का नाम कृष्णा था।
लेकिन आगे चलकर उन्होने अपनी वकालत छोडकर भारत के स्वतंत्रता संग्राम में कार्य किया था। १९२२ में उन्होने देशबंधू चित्तरंजन दास और लाला लाजपत राय के साथ कॉंग्रेस पार्टी के अंतर्गत स्वराज पार्टी की स्थापना की। १९२८ में कोलकाता में हुए कॉंग्रेस अधिवेशन के वे अध्यक्ष थे| १९२८ में कॉंग्रेसने भारत का भावी संविधान बनाने के लिए स्थापित आयोग के वे अध्यक्ष थे। इस आयोगने नेहरू रिपोर्ट पेश किया।
मोतीलाल नेहरूने इलाहाबाद में एक अलिशान मकान लिया था। उस घर का नाम आनंद भवन रखा था। बाद में उन्होने यह घर कॉंग्रेस पार्टी को दे दिया|
मोतीलाल नेहरू का १९३१ साल में इलाहाबाद में निधन हुआ।
rahul sahu
बाहरी कड़ियाँ [संपादित करें]
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