योगी आदित्यनाथ
योगी आदित्यनाथ गोरखपुर के प्रसिद्ध गोरखनाथ मंदिर के महन्त एवं सांसद हैं।
[संपादित करें] परिचय
देवाधिदेव भगवान महादेव की उपत्यंका में स्थित देव-भूमि उत्तराखण्ड में 5 जून सन् 1972 को जन्में एवं माता पिता द्वारा प्रदत्त अजय सिंह नाम वाले कल का युवक वस्तुतः आज के योगी आदित्यनाथ जी है। विज्ञान स्नातक योगी आदित्यनाथ जी महाराज के विश्व-विष्रुत कृतित्व एवं व्यक्तित्व से सारे भारत वर्ष के ही नही अपितु भारत के बाहर के देशों में भी जहाँ-जहाँ हिन्दू रहते है भलि-भाँति परिचित है। इनकी व्यवहार कुशलता, दृढ़ता, कर्मठता, हिन्दुत्वनिष्ठा असंदिग्ध है। योगी जी के युवा नेतृत्व में थोड़ी ही समय में सम्पूर्ण पूर्वी उत्तर प्रदेश में हिन्दू का जो तेजोमय पुनर्जागरण हुआ है वही युगान्तकारी है। नाथ योग सिद्धपीठ गोरक्षनाथ-मंदिर गोरखपुर के योग तपोमय पावन परिसर में शिव गोरक्ष महायोगी गोरखनाथ जी के अनुग्रह स्वरूप माघ शुक्ल 5 सम्वत् 2050 तदनुसार 15 फरवरी सन् 1994 शुभ तिथि पर गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ जी महाराज द्वारा मांगलिक वैदिक मंत्रोच्चारणपूर्वक अपने उत्तराधिकारी पट्ट शिष्य योगी आदित्यनाथ जी का दीक्षाभिषेक सम्पन्न हुआ। योगी जी जैसे तेजस्वी, उर्जामान तथा अन्नत संभावनाओं से भरे कृति युवा के करिश्माई व्यक्तित्व का आकलन बड़ा ही कठिन है। परम पूज्य गुरूदेव गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ जी महाराज एवं अपने दादा गुरू ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी को अपना आदर्श एवं प्रेरणाश्रोत माननेवाले योगी जी विलक्षण प्रतिभा के धनी है। अपने गुरू महाराज की हर कथनी को करनी में क्रियान्वित करने को निरन्तर तत्पर रहते है। योगी जी हठयोग एवं राजयोग साधना की सैद्धान्तिक, व्यवहारिक प्रक्रिया में पटु, भारतीय संस्कृति, विशेष रूप से हिन्दुत्व के प्रति पूर्णरूप से समर्पित है। गोरक्षपीठ से दीक्षित होने के साथ ही अपनी गुरू परम्परा के अनुसार उन्होंने पूर्वी उ.प्र. में व्यापक जनजागरण का अभियान चलाया। सहभोज के माध्यम से छुआछूत और अंस्पृश्यता की भेदभावकारी रूढ़ियों पर जहां जमकर प्रहार करके बृहद हिन्दू समाज को संगठित किया। संगठित राष्ट्रवादी ताकत के माध्यम से हजारों मतान्तरित हिन्दुओं की ससम्मान घर वापसी का कार्य किया। गोरक्षा के लिये आम जनमानस को जागरूक करके हजारों गोवंश को तस्करों के हाथो से बचाया तथा गोरखपुर समेत पूर्वी उ.प्र. में सक्रिय समाज विरोधी एवं राष्ट्रविरोधी गतिविधियों पर भी प्रभावी अंकुश लगाने में सफलता प्राप्त की।
योगी जी की भौतिक उपलब्धियों में सन् 1998 में भारतीय संसद में सबसे कम उम्र के सांसद के रूप मे चुना जाना, सन् 1997 में पंचम् विश्व हिन्दू महासंघ के आयोजन के कर्णधार एवं सूत्रधार, सन् 1999 में दुबारा सांसद के रूप मे चुना जाना, सन् 2003 में विश्व हिन्दू महासंघ के तत्वावधान में सप्तम विश्व हिन्दू महासंघ का दुर्लभ ऐतिहासिक आयोजन, सन् 2004 का लोक सभा चुनाव भारी बहुमत से जीतना, सन् 2006 में विश्व हिन्दू महासम्मेलन का ऐतिहासिक आयोजन गोरखपुर में करना, सन् 2009 में चौथी बार गोरखपुर संसदीय क्षेत्र में भारी बहुमत से चुनाव जीतना आदि। यशस्वी एवं तेजस्वी पुरूष अपने कृतित्व एवं पुरूषार्थ के लिए उम्र के मोहताज नही होते। योगी जी ने थोड़े समय में ही अपने स्वयं स्फूर्ति से भावना, परदुख कातरता, कर्मठता, सूझबूझ तथा भगीरथ प्रयत्नों द्वारा हीनताबोध से ग्रस्त मूर्च्छित-प्राय हिन्दू समाज में संजीवनी का कार्य किया है।
वस्तुतः हिन्दू युवा वाहिनी का गठन इसी सोच का परिणाम है। पूर्वांचल में विभिन्न स्थलों में हिन्दू संगमों का आयोजन भी इसी ष्रृंखला की कड़ी है। संप्रति विश्व हिन्दू महासंघ की भारत इकाई के अध्यक्ष, गोरखपुर के लोकप्रिय सांसद, हिन्दू युवा वाहिनी, गोरक्षनाथ पूर्वांचल विकास मंच, ष्रीराम शक्ति प्रकोष्ठ आदि के मुख्य संरक्षक, तीन दर्जन से अधिक शिक्षण-प्रशिक्षण, चिकित्सीय तथा सामाजिक सेवा प्रकल्पों से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े योगी जी स्वधर्म एवं स्वराष्ट्र के प्रति अत्यन्त संवेदनशील है। ओजस्वी वक्ता, योग एवं अध्यात्म के कुशल अध्येता योगी जी सिद्धहस्त लेखक भी है। इनकी लिखित पाँच पुस्तके हठयोग: स्वरूप एवं साधना, राजयोग: स्वरूप एवं साधना एवं हिन्दू राष्ट्र नेपाल - अतीत एवं वर्तमान आदि काफी लोकप्रिय रहीं है। गुरू महाराज द्वारा प्रदत्त नाम के अनुसार आचरण, तीक्ष्ण बुद्धि, दृढ़ इच्छा शक्ति, विचारों में सागरसी गहराई, दीन-दुखियों की मदद को सदैव तत्पर योगीजी को हिन्दू जनता अपने रक्षक के रूप मे देखती है।[[श्रेणी: