आम आदमी पार्टी

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आम आदमी पार्टी
Aam Aadmi Party logo.svg
नेता अरविंद केजरीवाल
गठन २६ नवम्बर २०१२
मुख्यालय भूतल, ए-११९, कौशाम्बी (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (भारत)), ग़ाज़ियाबाद- २०१०१०
लोकसभा मे सीटों की संख्या
4 / 545
राज्यसभा मे सीटों की संख्या
0 / 245
राज्य विधानसभा में सीटों की संख्या
28 / 70
(दिल्ली विधानसभा)
विचारधारा स्वराज
जालस्थल aamaadmiparty.org
Election symbol
भारत की राजनीति
राजनैतिक दल
चुनाव

आम आदमी पार्टी, संक्षेप में आप, सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल एवं अन्ना हजारे के लोकपाल आंदोलन से जुड़े बहुत से सहयोगियों द्वारा गठित एक भारतीय राजनीतिक दल है। इसके गठन की आधिकारिक घोषणा २६ नवम्बर २०१२ को भारतीय संविधान अधिनियम की ६३ वीं वर्षगाँठ के अवसर पर जंतर मंतर, दिल्ली में की गयी थी।

सन् २०११ में इंडिया अगेंस्ट करपशन नामक संगठन ने अन्ना हजारे के नेतृत्व में हुए जन लोकपाल आंदोलन के दौरान भारतीय राजनीतिक दलों द्वारा जनहित की उपेक्षा के खिलाफ़ आवाज़ उठाई। अन्ना भ्रष्टाचार विरोधी जनलोकपाल आंदोलन को राजनीति से अलग रखना चाहते थे, जबकि अरविन्द केजरीवाल और उनके सहयोगियों की यह राय थी कि पार्टी बनाकर चुनाव लड़ा जाये। इसी उद्देश्य के तहत पार्टी पहली बार दिसम्बर २०१३ में दिल्ली विधानसभा चुनाव में झाड़ू चुनाव चिन्ह के साथ चुनावी मैदान में उतरी।

पार्टी ने चुनाव में २८ सीटों पर जीत दर्ज़ की और कांग्रेस के समर्थन से दिल्ली में सरकार बनायी। अरविन्द केजरीवाल ने २८ दिसम्बर २०१३ को दिल्ली के ७वें मुख्य मन्त्री पद की शपथ ली। ४९ दिनों के बाद १४ फरवरी २०१४ को विधान सभा द्वारा जन लोकपाल विधेयक प्रस्तुत करने के प्रस्ताव को समर्थन न मिल पाने के कारण अरविंद केजरीवाल की सरकार ने त्यागपत्र दे दिया।

इतिहास[संपादित करें]

आम आदमी पार्टी की उत्पत्ति सन् २०११ में इण्डिया अगेंस्ट करप्शन द्वारा अन्ना हजारे के नेतृत्व में चलाये गये जन लोकपाल आन्दोलन के समापन के दौरान हुई। जन लोकपाल बनाने के प्रति भारतीय राजनीतिक दलों द्वारा प्रदर्शित उपेक्षापूर्ण रवैये के कारण राजनीतिक विकल्प की तलाश की जाने लगी थी। अन्ना हजारे भ्रष्टाचार विरोधी जनलोकपाल आन्दोलन को राजनीति से अलग रखना चाहते थे जबकि अरविन्द केजरीवाल आन्दोलन का लक्ष्य प्राप्त करने के लिये एक अलग पार्टी बनाकर चुनाव में शामिल होने के पक्षधर थे। उनके विचार से वार्ता के जरिये जन लोकपाल विधेयक बनवाने की कोशिशें व्यर्थ जा रहीं थीं। इण्डिया अगेंस्ट करप्शन द्वारा सामाजिक जुड़ाव सेवाओं पर किये गये सर्वे में राजनीति में शामिल होने के विचार को व्यापक समर्थन मिला।

१९ सितम्बर २०१२ को अन्ना और अरविन्द इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि उनके राजनीति में शामिल होने सम्बन्धी मतभेदों का दूर होना मुश्किल है। इसलिये उन्होंने समान लक्ष्यों के बावजूद अपना रास्ता अलग करने का निश्चय किया। जन लोकपाल आन्दोलन से जुड़े मनीष सिसोदिया, प्रशांत भूषणयोगेन्द्र यादव आदि ने अरविन्द केजरीवाल का साथ दिया, जबकि किरण वेदीसन्तोष हेगड़े आदि कुछ अन्य लोगों ने हजारे से सहमति प्रकट की। केजरीवाल ने २ अक्टूबर २०१२ को राजनीतिक दल बनाने की घोषणा की। इस प्रकार भारतीय संविधान की वर्षगांठ के दिन २६ नवम्वर (२०१२) को औपचारिक रूप से आम आदमी पार्टी का गठन हुआ।[1] [2]

संरचना और नीतियाँ[संपादित करें]

आम आदमी पार्टी ने भारत के अन्य राजनीतिक दलों से अपनी संरचना एवं बुनियादी नीतियाँ कई तरह से अलग रखी हैं।[3]

  • कोई केन्द्रीय आलाकमान नहीं होगा। परिषद के सदस्य ही कार्यकारिणी का चुनाव करेंगे। परिषद को उन्हें वापस बुलाने की शक्ति भी होगी।
  • पार्टी के विधायक या सांसद अपने वाहनों पर लाल बत्ती या किसी अन्य चिन्ह का प्रयोग नहीं करेंगें।
  • पार्टी के विधायक या सांसद कोई विशेष सुरक्षाबल का प्रयोग नहीं करेंगे।
  • पार्टी के विधायक या सांसद किसी भी आलीशान सरकारी बंगले में नहीं रहेंगें।
  • पार्टी के सांसद और विधायक ज्यादा वेतन नही लेंगे।
  • अपराधियों और गुंडों को या पहले से एफआइआर दर्ज लोगों को चुनाव में उम्मीदवार नहीं बनाया जायेगा। इसके साथ ही जाँच के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जायेगा कि जिन व्यक्तियों का आपराधिक रिकॉर्ड है या जिनके ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप सिद्ध हो चुके हैं उन्हें पार्टी से चुनाव न लड़ने दिया जाये।
  • पार्टी पूर्ण वित्तीय पारदर्शिता के साथ कार्य करेगी। चन्दे तथा चुनावी व्यय का पूरा व्यौरा पार्टी के अन्तर्जाल पृष्ठ पर रखा जायेगा।
  • पार्टी एक ही परिवार के दो सदस्यों को चुनाव में टिकट नहीं देगी। एक ही परिवार के दो व्यक्ति कार्यकारिणी के सदस्य भी नहीं बन सकते।
  • पार्टी सत्ता में आने पर खारिज करने का अधिकार (राइट टू रिजेक्ट ) कानून बनायेगी।
  • पार्टी सत्ता में आने के बाद एक महीने के अन्दर केन्द्र में अन्ना वाला जनलोकपाल बिल और राज्यों में लोकायुक्त कानून बनायेगी। इसके दायरे में प्रधानमन्त्री से लेकर चपरासी ग्रेड तक के लोग रहेंगे।
  • पार्टी संगठन के सभी स्तरों पर समाज के दलित और अन्य अल्पसंख्यक वर्गों से सहयोजन करेगी।

पार्टी एजेण्डा[संपादित करें]

  • जन लोकपाल विधेयक लागू करना
  • राइट टू रिकॉल: चुने हुए जन-प्रतिनिधियों को वापस बुलाने का अधिकार
  • राइट टू रिजेक्ट: नकारने का अधिकार
  • राजनीतिक विकेन्द्रीकरण
  • मुफ्त शिक्षा और मुफ्त स्वास्थ्य

विचारधारा[संपादित करें]

पार्टी कहती है कि वह किसी विशेष विचारधारा द्वारा निर्देशित नहीं हैं। उन्होंने व्यवस्था को बदलने के लिये राजनीति में प्रवेश किया है। अरविन्द केजरीवाल के शब्दों में - "हम आम आदमी हैं। अगर वामपंथी विचारधारा में हमारे समाधान मिल जायें तो हम वहाँ से विचार उधार ले लेंगे और अगर दक्षिणपंथी विचारधारा में हमारे समाधान मिल जायें तो हम वहाँ से भी विचार उधार लेने में खुश हैं।

आलोचना[संपादित करें]

2014 में प्रशान्त भूषण ने कश्मीर की आन्तरिक सुरक्षा और सेना की मौजूदगी के मामले में कश्मीर के लोगों में जनमत संग्रह कराने की बात कही, जिसके विरोध में हिन्दू रक्षा दल के कुछ लोगों ने कौशाम्बी स्थित पार्टी मुख्यालय में आम आदमी पार्टी के खिलाफ नारेबाजी और तोड़-फोड़ की।[4]

चुनावी भागीदारी[संपादित करें]

दिल्ली विधानसभा चुनाव (२०१३)[संपादित करें]

४ दिसम्बर २०१३ को हुए दिल्ली राज्य विधानसभा चुनाव में पार्टी ने पहला चुनाव लड़ा। उसने पूरी दिल्ली के लिये चुनावी घोषणापत्र तैयार करने के साथ ही प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र के लिये अलग-अलग घोषणापत्र तैयार किया।[5]

दिल्ली चुनाव के पहले पार्टी को कई विवादों का सामना करना पड़ा। भारत सरकार के गृहमन्त्री, सुशील कुमार शिंदे ने पार्टी के विदेशी दान की जाँच कराने की बात कही। पार्टी ने दान राशि का सम्पूर्ण ब्यौरा पार्टी वेवसाइट पर पहले से ही सार्वजनिक होने की बात कही, और अन्य राजनीतिक दलों को भी अपने चन्दे को सार्वजनिक करने की चुनौती दी।

दिल्ली विधान सभा चुनाव के कुछ पहले एक मीडिया पोर्टल द्वारा आम आदमी के विधायक पद के उम्मीदवारों का स्टिंग ऑपरेशन सामने आया जिसमें उन पर ग़ैर-इमानदार होने के आरोप लगाये गये। आम आदमी पार्टी ने एक प्रेस कांफ्रेंस कर स्टिंग वीडियो में कई महत्वपूर्ण भागों को काट-छाँट कर प्रस्तुत करने का आरोप लगाया और मीडिया पोर्टल के खिलाफ मानहानि की याचिका दायर की।

६ दिसम्बर को घोषित हुए परिणाम में ७० सदस्यीय दिल्ली विधानसभा में पार्टी २८ सीटों पर विजयी रही। ३२ विधान सभा क्षेत्रों की विजेता भारतीय जनता पार्टी के बाद यह दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। अरविन्द केजरीवाल ने सत्तारूढ़ी कांग्रेस पार्टी की निवर्तमान मुख्यमन्त्री शीला दीक्षित (कांग्रेस) को लगभग 25,000 वोटों से पराजित किया।[6] और कांग्रेस केवल ८ सीटों पर सिमट गयी।[7][8][9]

दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग ने भाजपा द्वारा सरकार बनाने से मना करने के बाद आम आदमी पार्टी विधायक दल के नेता अरविन्द केजरीवाल को सरकार बनाने के लिये आमन्त्रित किया। २८ दिसम्बर को कांग्रेस के समर्थन से पार्टी ने दिल्ली में अपनी सरकार बनायी। अरविन्द केजरीवाल सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री बने।[10]

लोकसभा चुनाव २०१४[संपादित करें]

पार्टी ने कहा था कि 2014 भारतीय आम चुनाव में 300 सीटों पर चुनाव लड़ने का इरादा रखती है। 432 सीटों पर अपने उम्मीदवारों का एलान कर चुकी पार्टी[11] की नज़र मुख्यतः हरियाणा, गुजरात, उत्तर प्रदेश सहित शहरी क्षेत्रों में थी, जहाँ पार्टी का समर्थन मुख्य रूप से आधारित है[12]

आशा के विपरीत पार्टी का प्रदर्शन फीका रहा तथा पार्टी के सभी प्रमुख नेता चुनाव हार गए। लेकिन एक सुखद आश्चर्य के रूप में पार्टी ने पंजाब में चार सीटों- पटियाला, संगरूर, फरीदकोट तथा फतेहगढ़ साहिब में विजय प्राप्त की।[13][14]

दिल्ली सरकार[संपादित करें]

दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग के आमंत्रण पर दिल्ली के मतदाताओं से राय लेकर २८ दिसंबर २०१३ को अरविंद केजरीवाल ने ७ मंत्रियों के साथ दिल्ली के रामलीला मैदान में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। वे सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री बने।[15] विश्वास मत प्रस्ताव पर कांग्रेस ने इस सरकार का समर्थन किया। सरकार बनाते ही पार्टी ने अपने घोषणा-पत्र के वादे पूरे करने शुरु किए। विशेष सुरक्षा और लाल बत्ती वाली गाड़ी लेने से मना किया। ३१ दिसंबर को बिजली की कीमतों में अप्रैल तक आधे की छूट देने की घोषणा की। बिजली कंपनियों का सीएजी ऑडिट कराने की व्यवस्था की। बीस किलोलीटर पानी मुप्त देने की घोषणा की। इस सरकार को केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से अनेक मामलों पर अवरोध का सामना करना पड़ा। बलात्कार एवं अन्य अपराध की घटनाओं पर पुलिस के कुछ अधिकारियों का तबादला करने के प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने गृह मंत्रालय जाकर धरना देने की कोशिश की। इसमें अड़चने डालने पर रेल भवन के पास सड़क से ही केजरीवाल सरकार धरने पर बैठ गई। बाद में उपराज्यपाल के द्वारा पुलिस अधिकारियों को छुट्टी पर भेजने के बाद सरकार वापस काम पर लौटी। खिड़की एक्सटेंसन में कानून मंत्री सोमनाथ भारती की भूमिका भी विवादित रही। फरवरी में अरविन्द केजरीवाल ने अपने निगरानी विभाग को प्राकृतिक गैस का दाम अनियमित रूप से बढ़ाने के लिए मुकेश अंबानी और एम॰ वीरप्पा मोइली सहित कई प्रभावी लोगों के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दिया।[16] केजरीवाल सरकार ने १३ फरवरी से विधान सभा सत्र बुलाकर जनलोकपाल और स्वराज्य विधेयक पारित करने की घोषणा की। जन लोकपाल विधेयक प्रस्तुत करने को लेकर उनका गृह मंत्रालय और उपराज्यपाल से टकराव की स्थिति पैदा हो गई। लेफ्टिनेंट राज्यपाल नजीब जंग इसके लिए केंद्र सरकार की मंजूरी को जरूरी बताते रहे जबकि केजरीवाल सरकार विधान सभा के विधेयक पास करने के संवैधानिक अधिकार पर डटी रही। १३ जनवरी के हंगामेदार सत्र के बाद १४ फरवरी के सत्र में राज्यपाल ने विधेयक को असंवैधानिक बताने का संदेश विधानसभा अध्यक्ष को भेजा और विधेयक पेश करने से पहले िस संदेश को सूचित करने को लिखा। इस संदेश के बाद कांग्रेस औ्र भाजपा विधायकों ने विधेयक प्रस्तुत करने का मिलकर विरोध किया। जन लोकपाल पास करना तो दूर उसे प्रस्तुत भी न हो पाने के बाद अरविन्द केजरीवाल ने १४ फरवरी को अपनी सरकार से इस्तिफा दे दिया। इस कारण दिल्ली में पहली बार राष्ट्रपति शासन लगा।[17]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. 'आम आदमी पार्टी' के राष्ट्रीय संयोजक बने केजरीवाल, नवभारत टाइम्स, २६ नवम्बर २०१२, http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/17365222.cms, अभिगमन तिथि: ११ दिसम्बर २०१३ 
  2. बीबीसी हिंदी - केजरीवाल ने लांच की आम आदमी पार्टी
  3. आम आदमी पार्टी का संविधान (हिन्दी में) अभिगमन तिथि: ८ जनवरी २०१४
  4. "कौशाम्बी में आम आदमी पार्टी के दफ्तर पर हुआ हमला". लाइव हिन्दुस्तान. 8 जनवरी 2014. http://www.livehindustan.com/news/desh/national/article1-Aam-Aadmi-Party-office-Ghaziabad-Kaushambhi-stones-AAP-office-attack-Prashant-Bhushan-Kashmir-remarks-39-39-391185.html. "आप के प्रवक्ता दिलीप पांडे ने कहा कि कुछ युवा जो हिन्दू रक्षा दल के बताये जाते है, पार्टी कार्यालय के बाहर जमा हो गये और आप के खिलाफ नारे लगाने लगे। उन्होने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने पार्टी कार्यालय के बाहर रखे गमले भी तोड़ डाले।" 
  5. "आम आदमी पार्टी 71 घोषणापत्र बनाएगी". जागरण. 22 सितम्बर 2013. http://www.jagran.com/delhi/new-delhi-city-10743276.html. 
  6. [1]
  7. "'आप' की नहीं, आम आदमी की जीत". ज़ी न्यूज़. ८ दिसम्बर २०१३. http://zeenews.india.com/hindi/blog/this-is-not-aap-victory-but-common-mans-victory_112.html. 
  8. Delhi polls | BJP ahead, AAP inches to second
  9. http://eciresults.nic.in/PartyWiseResult.htm
  10. "Arvind Kejriwal, as Delhi Chief Minister, to head 'youngest-ever' Cabinet; check them out [दिल्ली के मुख्य मन्त्री अरविन्द केजरीवाल ने अब तक के सबसे युवा मन्त्रिमण्डल का नेतृत्व सम्हालेंगे]". 25 दिसम्बर 2013. http://www.financialexpress.com/news/arvind-kejriwal-as-delhi-chief-minister-to-head-youngestever-cabinet-check-them-out/1211515. अभिगमन तिथि: 8 जनवरी 2014. 
  11. "प्रत्याशी उतारने में सबसे आगे आप". 10 Apr 2014. http://loksabha-elections2014.jagran.com/loksabha-election2014/election-news-first-of-all-aap-select-candidate-EL11223441. 
  12. "300 सीटों पर चुनाव लड़ेगी आप, हरियाणा पर गड़ाई नजरें". 31 दिसंबर 2013. http://www.jagran.com/news/national-aap-fight-in-300-loksabha-seats-10973150.html. 
  13. http://eciresults.nic.in/statewiseS19.htm?st=S19
  14. http://hindi.economictimes.indiatimes.com/lok-sabha-elections-2014/lok-sabha-2014/election-results-2014/election2014articleshow/35250235.cms
  15. "Arvind Kejriwal, as Delhi Chief Minister, to head 'youngest-ever' Cabinet; check them out [दिल्ली के मुख्य मन्त्री अरविन्द केजरीवाल ने अब तक के सबसे युवा मन्त्रिमण्डल का नेतृत्व सम्हालेंगे]". 25 दिसम्बर 2013. http://www.financialexpress.com/news/arvind-kejriwal-as-delhi-chief-minister-to-head-youngestever-cabinet-check-them-out/1211515. अभिगमन तिथि: 8 जनवरी 2014. 
  16. मुहम्मद अली, विशाल कान्त, अशोक स्वोमिया (2014-02-15). "Arvind Kejriwal quits over Jan Lokpal". द हिन्दू. http://www.thehindu.com/news/cities/Delhi/arvind-kejriwal-quits-over-jan-lokpal/article5688528.ece. 
  17. "दिल्ली में राष्ट्रपति शासन". बीबीसी हिन्दी. 14 फरवरी 2014. http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/02/140215_delhi_president_rule_aa.shtml. 

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